अंतरिक्ष यान को क्या चाहिए?
रॉकेट बहुत अलग जगहों से गुज़रता है: गर्म प्रक्षेपण, हवा का तेज़ घर्षण, अंतरिक्ष का ठंडा निर्वात और लौटते समय की गर्मी। इंजीनियर पहले ज़रूरतें लिखते हैं, फिर ऐसे पदार्थ और ऊर्जा स्रोत चुनते हैं जो उन्हें पूरा करें:
- ऊष्मा-रोधी हिस्से (नोक, पंखों के किनारे, इंजन की नोज़ल)।
- हल्का और मज़बूत ढाँचा ताकि वज़न उठाने में कम ईंधन ख़र्च हो।
- ऊर्जा-भरपूर ईंधन जो हर किलोग्राम से अधिक धक्का दे।
- कंप्यूटर और रेडियो के लिए अंतरिक्ष में बिजली।
ऊष्मा-रोधी पदार्थ
हवा में लौटते समय यान हवा को इतनी ज़ोर से दबाता और रगड़ता है कि उसकी नोक हज़ार डिग्री से भी ज़्यादा गर्म हो सकती है। पदार्थ का गलनांक ऊँचा होना चाहिए और गर्म होने पर भी मज़बूत रहना चाहिए।
ऐल्युमिनियम लगभग 660 °C पर पिघलता है, इसलिए वह वहीं लगता है जहाँ कम गर्मी हो। इस्पात लगभग 1400 °C पर पिघलता है। गर्म हिस्सों के लिए टाइटेनियम मिश्रधातु (लगभग 1670 °C) और सिरेमिक (कुछ 2000 °C से ऊपर) लगते हैं। कुछ ऊष्मा-कवच अपक्षयी (ablative) होते हैं: वे धीरे-धीरे जलकर झड़ते हैं और गर्मी अपने साथ ले जाते हैं। कुछ यानों के सिरेमिक टाइल ऊष्मा के कुचालक होते हैं, इसलिए अंदर ठंडक रहती है।
संख्याएँ गोल किए हुए उदाहरण हैं। हमेशा किसी भरोसेमंद स्रोत में जाँच लो।
हल्के और मज़बूत पदार्थ
रॉकेट में द्रव्यमान महँगा है, क्योंकि प्रक्षेपण के द्रव्यमान का ज़्यादातर हिस्सा ईंधन होता है। इसलिए इंजीनियर चाहते हैं कि द्रव्यमान के हिसाब से मज़बूती ज़्यादा हो।
- ऐल्युमिनियम मिश्रधातु: घनत्व लगभग 2.7 g/cm³, आसानी से ढलती है। रॉकेट के ढाँचे में खूब लगती है।
- टाइटेनियम मिश्रधातु: लगभग 4.5 g/cm³, बहुत मज़बूत और गर्मी सहने वाली, पर महँगी।
- कार्बन-रेशा मिश्रित पदार्थ: प्लास्टिक में जमे पतले कार्बन रेशे, लगभग 1.6 g/cm³, वज़न के हिसाब से बहुत मज़बूत। ढाँचे के हिस्सों और ईंधन टंकियों में लगते हैं।
- इस्पात: लगभग 7.8 g/cm³, मज़बूत और सस्ता पर भारी।
द्रव्यमान = घनत्व × आयतन। 5 cm³ टाइटेनियम का द्रव्यमान = 4.5 × 5 = 22.5 g।
रॉकेट ईंधन
अंतरिक्ष में हवा नहीं है, इसलिए रॉकेट ईंधन को ऑक्सीकारक (ऑक्सीजन देने वाले) के साथ जलाता है। गर्म गैस नोज़ल से तेज़ी से निकलती है और रॉकेट को आगे धकेलती है।
- केरोसिन + द्रव ऑक्सीजन: हर किग्रा केरोसिन से लगभग 43 MJ ऊर्जा। जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनते हैं।
- द्रव हाइड्रोजन + द्रव ऑक्सीजन: हर किग्रा हाइड्रोजन से लगभग 120 MJ, यानी आम ईंधनों में प्रति किग्रा सबसे अधिक ऊर्जा। जलने पर केवल जल (भाप) बनता है। पर हाइड्रोजन को लगभग −253 °C पर रखना पड़ता है और बहुत बड़ी टंकियाँ चाहिए।
- ठोस ईंधन: पहले से मिला ठोस मिश्रण, सरल और ज़ोरदार, बूस्टरों में प्रयुक्त।
ऊर्जा = प्रति किग्रा ऊर्जा × द्रव्यमान। 5 kg हाइड्रोजन: 120 × 5 = 600 MJ।
सूरज से शक्ति
हवा के ऊपर धूप हर वर्ग मीटर से लगभग 1360 वाट ऊर्जा लाती है। सौर सेल (सिलिकॉन या दूसरे अर्धचालकों के बने) उसका कुछ हिस्सा बिजली में बदलते हैं। शक्ति = धूप × क्षेत्रफल × दक्षता × झुकाव कोण का cos (पैनल के सीधे सामने की दिशा और सूर्य की किरणों के बीच का कोण)।
उपग्रह अपने पैनल सूर्य की ओर घुमाए रखते हैं और पृथ्वी की छाया में बिताए समय के लिए बैटरी में ऊर्जा जमा करते हैं। सूर्य से बहुत दूर जाने वाले यान छोटा परमाणु ऊर्जा स्रोत भी ले सकते हैं।
शोध करना और प्रस्तुति देना
- प्रश्न चुनो, जैसे: उपग्रह के ऊष्मा-कवच के लिए कौन-सा पदार्थ सबसे अच्छा है?
- स्रोत ढूँढो: अंतरिक्ष एजेंसियों की वेबसाइटें, पाठ्यपुस्तकें और विज्ञान पत्रिकाएँ। लेखक और तारीख़ लिखो।
- तथ्यों की तालिका बनाओ: नाम, गलनांक, घनत्व, मज़बूती, क़ीमत, उपयोग।
- ज़रूरत से तुलना करो और निर्णय लो। कारण बताओ।
- प्रस्तुति: 5 स्लाइड या एक पोस्टर: प्रश्न, ज़रूरत, तालिका, निर्णय, स्रोत। एक बड़ा चित्र और कम शब्द। 3 मिनट के भाषण का अभ्यास करो।
हमेशा दावा, उसका समर्थन करने वाला आँकड़ा और आँकड़े का स्रोत लिखो। अगर स्रोत असहमत हों तो यह भी बताओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- द्रव्यमान = घनत्व × आयतन
- ईंधन से ऊर्जा = प्रति किग्रा ऊर्जा × ईंधन का द्रव्यमान
- सौर शक्ति = धूप × क्षेत्रफल × दक्षता × cos(झुकाव कोण)
- अच्छा ऊष्मा-कवच: गलनांक अधिकतम तापमान से ऊँचा
- हाइड्रोजन + ऑक्सीजन → जल (केवल भाप)
हल किए गए उदाहरण
1. नोक को 1500 °C झेलना है। ऐल्युमिनियम (660 °C), इस्पात (1400 °C), टाइटेनियम (1670 °C), सिरेमिक (2700 °C) में कौन लग सकते हैं?
गलनांक 1500 °C से ऊँचा होना चाहिए। केवल टाइटेनियम (1670 °C) और सिरेमिक (2700 °C) योग्य हैं। ऐल्युमिनियम और इस्पात पिघल जाएँगे।
2. 5 cm³ टाइटेनियम (घनत्व 4.5 g/cm³) और 5 cm³ कार्बन-रेशे (1.6 g/cm³) का द्रव्यमान निकालो।
टाइटेनियम: 4.5 × 5 = 22.5 g। कार्बन-रेशा: 1.6 × 5 = 8 g। बराबर आयतन में कार्बन-रेशा लगभग तीन गुना हल्का है।
3. 120 MJ/kg पर 5 kg हाइड्रोजन कितनी ऊर्जा देता है? और 43 MJ/kg पर 5 kg केरोसिन कितनी?
हाइड्रोजन: 120 × 5 = 600 MJ। केरोसिन: 43 × 5 = 215 MJ। हाइड्रोजन प्रति किग्रा लगभग 2.8 गुना देता है।
4. एक उपग्रह का 2 m² सौर पैनल सूर्य के सामने है और दक्षता 25 % है। धूप 1360 W/m² है। शक्ति निकालो।
शक्ति = 1360 × 2 × 0.25 = 680 W।
5. वही पैनल 60° झुका दिया जाए तो नई शक्ति निकालो। (cos 60° = 0.5)
शक्ति = 680 × cos 60° = 680 × 0.5 = 340 W। 60° झुकाने पर शक्ति आधी हो जाती है।
6. एक डिज़ाइनर को ऐसा रॉकेट ढाँचा चाहिए जो मज़बूत, हल्का और आसानी से ढलने वाला हो, और लागत कम हो। ऐल्युमिनियम मिश्रधातु और कार्बन-रेशे की तुलना करके एक चुनो। कारण दो।
कार्बन-रेशा हल्का और बहुत मज़बूत है, पर महँगा और बनाने में कठिन है। ऐल्युमिनियम मिश्रधातु थोड़ी भारी है पर सस्ती और आसानी से ढलती है। कम लागत के ढाँचे के लिए ऐल्युमिनियम मिश्रधातु चुनो; अगर हर किलोग्राम बचाना लागत से ज़्यादा ज़रूरी हो तो कार्बन-रेशा। अच्छे उत्तर में पहले ज़रूरत लिखी जाती है, फिर चुनाव।
आम गलतियाँ
- केवल एक तथ्य देखकर पदार्थ चुन लेना। गर्मी, द्रव्यमान, मज़बूती और क़ीमत सब साथ देखो।
- हाइड्रोजन को सबसे बढ़िया ईंधन कह देना। उसमें प्रति किग्रा ऊर्जा अधिक है पर बहुत ठंडी और बड़ी टंकियाँ चाहिए।
- ऑक्सीकारक भूल जाना। अंतरिक्ष में हवा नहीं है, इसलिए रॉकेट अपनी ऑक्सीजन साथ ले जाते हैं।
- किसी भी वेबसाइट को स्रोत मान लेना। अंतरिक्ष एजेंसियों, पाठ्यपुस्तकों और नाम वाले लेखकों को चुनो और लिख लो।