उत्प्रेरक क्या है?
उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया की चाल बदल देता है (प्रायः तेज़ करता है) पर ख़ुद ख़र्च नहीं होता।
- शुरू और अंत में उसका द्रव्यमान वही रहता है।
- अंत में उसका रासायनिक स्वभाव वही रहता है (रूप थोड़ा बदल सकता है, जैसे चूर्ण और महीन हो जाए)।
- थोड़ी मात्रा काफ़ी है, क्योंकि यह बार-बार काम आता है।
- यह नहीं बदलता कि कौन-सा उत्पाद बनेगा या कुल कितना बनेगा; बस जल्दी बनवा देता है।
उत्प्रेरक से अभिक्रिया तेज़ करने को उत्प्रेरण (catalysis) कहते हैं।
प्रयोगशाला में ऑक्सीजन बनाना
अपघटन अभिक्रिया में एक पदार्थ टूटकर दो या ज़्यादा सरल पदार्थ बनाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड से
2H₂O₂ → 2H₂O + O₂ (उत्प्रेरक: MnO₂)
MnO₂ के बिना बुलबुले बहुत धीरे बनते हैं। चुटकी भर MnO₂ से कमरे के ताप पर ही ऑक्सीजन तेज़ी से निकलती है। गर्म करने की ज़रूरत नहीं।
पोटैशियम परमैंगनेट से
2KMnO₄ → K₂MnO₄ + MnO₂ + O₂ (गर्म करना पड़ता है)
यहाँ ऊष्मा ठोस को तोड़ती है। नली के मुँह पर रुई का फाहा रखते हैं ताकि चूर्ण निकास नली में न जाए।
गैस इकट्ठा करना
- पानी के ऊपर (पानी का अधोमुखी विस्थापन): ऑक्सीजन पानी में बहुत कम घुलती है, इसलिए उलटे जार से पानी को बाहर धकेल देती है। गैस काफ़ी शुद्ध मिलती है।
- हवा का ऊर्ध्वमुखी विस्थापन: ऑक्सीजन हवा से थोड़ी भारी है, इसलिए सीधे रखे जार में नीचे से भरती है।
ऑक्सीजन की पहचान: सुलगती तीली इसमें फिर से जल उठती है।
उत्प्रेरक कैसे काम करता है?
अभिक्रिया के लिए कणों को काफ़ी ऊर्जा से टकराना पड़ता है। इस न्यूनतम ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा कहते हैं, जैसे चढ़ने के लिए एक पहाड़ी।
उत्प्रेरक अभिक्रिया को नीची पहाड़ी वाला दूसरा रास्ता देता है। उसी ताप पर अब कहीं ज़्यादा टक्करों में पर्याप्त ऊर्जा होती है, इसलिए अभिक्रिया तेज़ होती है।
उत्प्रेरक बनाम गर्म करना
गर्म करने से भी अभिक्रिया तेज़ होती है, पर दूसरे ढंग से: कणों को ज़्यादा ऊर्जा मिलती है और ज़्यादा कण उसी पहाड़ी पर चढ़ पाते हैं। उत्प्रेरक पहाड़ी ही नीची कर देता है। दोनों साथ हों तो सबसे तेज़।
सतह वाले उत्प्रेरक
बहुत से ठोस उत्प्रेरक अपनी सतह पर तीन चरणों में काम करते हैं: (1) अभिकारक अणु सतह पर चिपकते हैं (अधिशोषण), (2) उनके बंधन ढीले होकर नए बंधन बनते हैं, (3) उत्पाद सतह छोड़ देते हैं, और सतह अगले अणुओं के लिए खाली हो जाती है। इसीलिए चूर्ण डले से बेहतर है: ज़्यादा सतह।
जब उत्प्रेरक अभिकारकों से अलग अवस्था में हो (ठोस उत्प्रेरक, गैस या द्रव अभिकारक) तो इसे विषमांगी उत्प्रेरण कहते हैं। एक ही अवस्था में हो (सब घुले हुए) तो समांगी।
कुछ पदार्थ अभिक्रिया धीमी करते हैं; इन्हें निरोधक (ऋणात्मक उत्प्रेरक) कहते हैं, जैसे भोजन के परिरक्षक।
जीवों और उद्योग में उत्प्रेरक
- एंज़ाइम कोशिकाओं के प्रोटीन उत्प्रेरक हैं। लार का एमाइलेज़ स्टार्च को शर्करा में तोड़ता है; यकृत का कैटालेज़ हाइड्रोजन परॉक्साइड तोड़ता है। हर एंज़ाइम एक ख़ास ताप और pH पर सबसे अच्छा काम करता है।
- अमोनिया (खाद के लिए) नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से लोहे के उत्प्रेरक की मदद से बनती है।
- कैटेलिटिक कन्वर्टर प्लैटिनम, पैलेडियम और रोडियम से कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड को कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन में बदलते हैं।
- वनस्पति तेल से वनस्पति घी (हाइड्रोजनीकरण) निकेल उत्प्रेरक से बनता है।
उत्प्रेरक ऊर्जा और पैसा बचाते हैं क्योंकि अभिक्रियाएँ कम ताप पर ही तेज़ चलती हैं।
करके देखो: कैटालेज़ का सुरक्षित प्रयोग
किसी बड़े के साथ, कच्चे आलू का टुकड़ा थोड़े से 3% हाइड्रोजन परॉक्साइड (हल्का एंटीसेप्टिक) में डालो। बुलबुले देखो। अब उबले आलू का टुकड़ा डालो। कम बुलबुले? उबालने से एंज़ाइम कैटालेज़ नष्ट हो जाता है। फिर 3D का आख़िरी चरण खोलकर "उत्प्रेरक हाँ" और "नहीं" की तुलना करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 2H₂O₂ → 2H₂O + O₂ (MnO₂ उत्प्रेरक)
- 2KMnO₄ → K₂MnO₄ + MnO₂ + O₂ (गर्म करके)
- उत्प्रेरक: पहले और बाद में वही द्रव्यमान और वही रासायनिक स्वभाव
- उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा घटाता है; गर्म करना कणों को ज़्यादा ऊर्जा देता है
- हर 10 °C बढ़ने पर दर लगभग दोगुनी (अंगूठा-नियम)
हल किए गए उदाहरण
1. हाइड्रोजन परॉक्साइड में 0.5 g MnO₂ डाला गया। अभिक्रिया के बाद छानकर, धोकर, सुखाया गया। कितना MnO₂ मिलेगा और क्यों?
0.5 g। उत्प्रेरक अभिक्रिया में ख़र्च नहीं होता।
2. उतने ही द्रव्यमान के डले से चूर्ण वाला उत्प्रेरक बेहतर क्यों है?
चूर्ण की सतह कहीं ज़्यादा होती है। अभिक्रिया सतह पर होती है, इसलिए एक साथ ज़्यादा अणु चिपककर अभिक्रिया कर पाते हैं।
3. क्या MnO₂ डालने से 50 mL हाइड्रोजन परॉक्साइड से ज़्यादा ऑक्सीजन मिलेगी?
नहीं। कुल ऑक्सीजन उतनी ही बनेगी, बस जल्दी। उत्प्रेरक उत्पाद की मात्रा नहीं बदलता।
4. एक अभिक्रिया 25 °C पर प्रति मिनट 10 mL गैस देती है। अंगूठा-नियम से बिना उत्प्रेरक 45 °C पर दर का अनुमान लगाओ।
45 − 25 = 20 °C, यानी 10 °C के दो कदम। दर दो बार दोगुनी: 10 × 2 × 2 = 40 mL प्रति मिनट।
5. ऑक्सीजन को पानी के ऊपर क्यों इकट्ठा कर सकते हैं?
ऑक्सीजन पानी में बहुत कम घुलती है, इसलिए जार से पानी बाहर धकेलकर गैस के रूप में जमा हो जाती है।
आम गलतियाँ
- कहना कि उत्प्रेरक "भाग नहीं लेता"। वह बीच के चरणों में भाग लेता है, पर अंत में बिना बदले वापस मिल जाता है।
- सोचना कि उत्प्रेरक ज़्यादा उत्पाद देता है। वह बस वही उत्पाद जल्दी बनाता है।
- उत्प्रेरक और गर्म करने को एक समझना। गर्म करना ऊर्जा देता है; उत्प्रेरक ज़रूरी ऊर्जा घटाता है।
- समीकरण में MnO₂ को अभिकारक लिखना। इसे तीर के ऊपर लिखो।