रसायन दूसरे विज्ञानों के साथ क्यों काम करता है
रसायन विज्ञान पदार्थ और उसके बदलावों का विज्ञान है। आज लगभग हर बड़ी समस्या में रसायन के साथ कोई दूसरा विषय भी चाहिए।
- रसायन + जीव विज्ञान: शरीर के निशाने पर ठीक बैठने वाली दवाएँ बनाना।
- रसायन + भौतिकी: सौर सेल और बैटरी जो आवेश को चलाते हैं।
- रसायन + इंजीनियरिंग: लैब की अभिक्रिया को बड़े टैंक में चलाना।
- रसायन + कंप्यूटर: कंप्यूटर बताता है कि कौन सा नया अणु काम करेगा।
विषयों के इस मेल को अंतर्विषयक कार्य कहते हैं।
नए अणु बनाना: संश्लेषण और उत्प्रेरण
संश्लेषण का मतलब है सरल अणुओं से मनचाहा अणु बनाना। रसायनज्ञ ऐसे चरण चुनते हैं जिनमें उत्पाद अच्छा मिले और कचरा कम हो।
ज़्यादातर अभिक्रियाओं को शुरू होने के लिए ऊर्जा का धक्का चाहिए। इसे सक्रियण ऊर्जा कहते हैं। उत्प्रेरक अभिक्रिया को आसान रास्ता देता है, यानी पहाड़ी नीची कर देता है। उत्प्रेरक खर्च नहीं होता और अंतिम उत्पाद वही रहते हैं। उदाहरण: अमोनिया बनाने में लोहा, शरीर में एंज़ाइम, और कार के एग्ज़ॉस्ट में प्लैटिनम समूह की धातुएँ।
उत्प्रेरक अभिक्रिया को तेज़ करता है। अंत में कितना उत्पाद बन सकता है, यह नहीं बदलता।
नए पदार्थ और ऊर्जा रसायन
रसायनज्ञ परमाणु और उनके जुड़ने का ढंग चुनकर पदार्थ डिज़ाइन करते हैं: हल्के मज़बूत प्लास्टिक, पतली स्क्रीन, और ऊर्जा जमा करने वाले पदार्थ।
रिचार्ज होने वाली लिथियम-आयन बैटरी में लिथियम आयन (Li⁺) एक द्रव में होकर दो इलेक्ट्रोडों के बीच चलते हैं। चार्जिंग में आयन एक इलेक्ट्रोड में धकेले जाते हैं। बैटरी इस्तेमाल करने पर वे वापस जाते हैं, और इलेक्ट्रॉन तार से होकर आपका उपकरण चलाते हैं।
दूसरे उदाहरण: ईंधन सेल (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली, उत्पाद पानी) और सौर पदार्थ।
प्रक्रिया अभियांत्रिकी: फ्लास्क से संयंत्र तक
रासायनिक अभियांत्रिकी लैब की अभिक्रिया को सुरक्षित, सस्ती और बड़ी प्रक्रिया बनाती है। संयंत्र में रिएक्टर (जहाँ अभिक्रिया होती है), विभाजक (जो उत्पाद को बचे माल से अलग करता है) और पाइप होते हैं जो बचा माल वापस ले जा सकते हैं। इसे अनअभिकृत माल का पुनःचक्रण कहते हैं।
मान लीजिए एक बार में 40 % माल बदलता है। रीसायकल न हो तो 60 % बेकार जाता है। पूरा बचा माल लौटाने पर लगभग सारा माल अंत में उत्पाद बन जाता है।
इंजीनियर ताप, सुरक्षा, लागत और कचरे का भी ध्यान रखते हैं। कम कचरे का लक्ष्य हरित रसायन कहलाता है।
करके देखिए
दो कपों में थोड़ा हाइड्रोजन परॉक्साइड (बड़ों से पूछकर, 3 % वाला दवाई की दुकान का) डालिए। एक में चुटकी भर सूखा यीस्ट डालिए। बुलबुले देखिए: यीस्ट में एंज़ाइम हैं, जो प्राकृतिक उत्प्रेरक हैं। पहले अनुमान लगाइए, फिर जाँचिए। सुरक्षा चश्मा ज़रूर पहनिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सक्रियण ऊर्जा = पहाड़ी की चोटी की ऊर्जा − अभिक्रियकों की ऊर्जा
- उत्प्रेरक: सक्रियण ऊर्जा घटाता है; खर्च नहीं होता; उत्पाद वही
- पूरे रीसायकल के साथ कुल रूपांतरण ≈ 100 % (सिद्धांत में)
- प्रति बार रूपांतरण % = (बदला हुआ माल ÷ डाला हुआ माल) × 100
हल किए गए उदाहरण
1. एक अभिक्रिया को शुरू होने के लिए 80 kJ चाहिए। उत्प्रेरक पहाड़ी को 50 kJ तक घटा देता है। पहाड़ी कितनी घटी?
80 − 50 = 30 kJ। उत्प्रेरक ने आसान रास्ता दिया; उत्पाद वही रहे।
2. एक रिएक्टर एक बार में 40 % माल बदलता है। 100 kg डालें तो कितना बदला और कितना बचा?
बदला = 0.40 × 100 = 40 kg। बचा = 60 kg। विभाजक और रीसायकल से यह 60 kg वापस जाता है।
3. अभिक्रियक, उत्पाद और उत्प्रेरक में से कौन खर्च नहीं होता?
उत्प्रेरक। अभिक्रियक खर्च होते हैं और उत्पाद बनते हैं; उत्प्रेरक वैसा ही बाहर आता है।
आम गलतियाँ
- उत्प्रेरक को ऐसा अभिक्रियक समझना जो खर्च हो जाता है। वह वैसा ही बाहर आता है।
- यह सोचना कि उत्प्रेरक उत्पाद की अंतिम मात्रा बदलता है। वह केवल गति बदलता है।
- रीसायकल का मतलब उत्पाद दोबारा इस्तेमाल करना समझना। इसका मतलब बचा हुआ कच्चा माल लौटाना है।
- यह मानना कि रसायन सिर्फ़ लैब में होता है। बैटरी, दवाएँ और संयंत्र सब रसायन हैं।