औद्योगिक रसायन क्या है?
औद्योगिक रसायन यानी रसायनों को बहुत बड़ी मात्रा में, सुरक्षित और कम ख़र्च में बनाना। कच्चा माल वह है जिससे शुरू करते हैं (जैसे हवा, प्राकृतिक गैस, नमक, कच्चा तेल)। तैयार उत्पाद वह है जो बेचा जाता है। सहायक पदार्थ (auxiliaries) मदद करते हैं पर उत्पाद में नहीं जाते: उत्प्रेरक, ठंडा करने का पानी, भाप, विलायक।
संयंत्र को ब्लॉक आरेख से दिखाते हैं। हर ब्लॉक एक चरण है। तीर पदार्थ की धाराएँ हैं। पंप और वाल्व सहित विस्तृत चित्र को प्रक्रम प्रवाह आरेख (process flow diagram) कहते हैं।
कच्चा माल और उसकी तैयारी
अकार्बनिक कच्चा माल: अयस्क (उपयोगी धातु यौगिक वाली चट्टान), हवा (नाइट्रोजन और ऑक्सीजन), पानी, नमक, चूना पत्थर। कार्बनिक कच्चा माल: कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, लकड़ी और जैव-भार (पौधों का कचरा)। जीवाश्म वाले ख़त्म होते हैं; जैव-भार फिर उगता है।
- नमूना लेना: ढेर की कई जगहों से छोटा, सही नमूना लेकर प्रयोगशाला में जाँचते हैं।
- प्लवन: पिसे अयस्क को पानी और बुलबुलों में हिलाते हैं; उपयोगी खनिज बुलबुलों से चिपककर तैरता है, चट्टान डूब जाती है।
- जल उपचार: बैठाना, छानना, मृदु करना और कीटाणुरहित करना, ताकि बॉयलर ख़राब न हों।
- शुष्क आसवन: कोयले या लकड़ी को बिना हवा गरम करने से कोक, तारकोल और गैस मिलते हैं।
इकाई संक्रियाएँ, मापन और द्रव्यमान संतुलन
इकाई संक्रिया एक भौतिक चरण है जो कई संयंत्रों में आता है।
- यांत्रिक: तोड़ना, पीसना, छलनी से छानना, मिलाना (क्रशर, मिल, छलनी, मिक्सर)।
- द्रवगतिक (तरल को चलाना): पंप करना, बैठाना, छानना, अपकेंद्रण (पंप, पाइप, अवसादन टंकी, फ़िल्टर प्रेस, सेंट्रीफ़्यूज)।
- अन्य: गरम-ठंडा करना (ऊष्मा विनिमयक), आसवन, सुखाना।
संयंत्र मापते हैं: ताप (थर्मामीटर/थर्मोकपल, °C या K), दाब (मैनोमीटर, Pa या bar), प्रवाह दर (फ़्लो मीटर, kg/s) और स्तर।
द्रव्यमान संतुलन: पदार्थ न बनता है न खोता है, इसलिए अंदर गया द्रव्यमान = बाहर आया द्रव्यमान। 1000 kg/h अंदर और 820 kg/h उत्पाद निकले, तो 180 kg/h किसी और धारा से निकलेगा।
अभिक्रिया की परिस्थितियाँ: गति, लब्धि और समझौता
संयंत्र चाहता है उत्पाद जल्दी (गति) और ज़्यादा (लब्धि)। ऊँचा ताप, ऊँची सांद्रता या दाब, बारीक चूर्ण और उत्प्रेरक गति बढ़ाते हैं। पर N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ जैसी उत्क्रमणीय ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ऊँचा ताप लब्धि घटाता है। इसलिए समझौता: लगभग 400–450 °C, 150–250 atm और लोहे का उत्प्रेरक। बहुत ऊँचा दाब ज़्यादा लब्धि देगा पर महँगे और ख़तरनाक उपकरण चाहिए।
पृथक्करण, पुनःचक्रण धाराएँ और गणनाएँ
रिएक्टर के बाद मिश्रण पृथक्कारी में जाता है (ठंडा करके द्रवित करना, आसवन, छानना)। बचे अभिकारक वापस भेजे जाते हैं: पुनःचक्रण धारा। एक छोटी पर्ज धारा जमा होने वाली निष्क्रिय गैसें बाहर निकालती है।
प्रति चक्कर रूपांतरण = अभिक्रिया हुई मात्रा ÷ रिएक्टर में भेजी मात्रा। पुनःचक्रण से कुल रूपांतरण लगभग 100% तक हो सकता है, भले एक चक्कर में 15% ही बने।
गणना: द्रव्यमान → मोल → मोल अनुपात → मोल → द्रव्यमान, फिर % लब्धि = वास्तविक ÷ सैद्धांतिक × 100।
सुरक्षा, स्थिरता और रासायनिक कंपनी
सुरक्षा: दाब राहत वाल्व, ताप और रिसाव सेंसर, अपने-आप बंद होने की व्यवस्था, सुरक्षा कपड़े, ख़तरनाक रसायनों को अलग रखना। स्थिरता: ऊष्मा विनिमयक से ऊष्मा दोबारा लेना, ऊँची परमाणु अर्थव्यवस्था वाला रास्ता, पानी-विलायक का पुनःचक्रण, उप-उत्पाद बेचना, नवीकरणीय कच्चा माल।
कंपनी को परखते हैं: कच्चा माल, ऊर्जा, परिवहन, रोज़गार, उत्पाद की कीमत, और आस-पास के लोगों व धरती पर असर (CO₂ उत्सर्जन, पानी का उपयोग)। उर्वरक, दवाएँ और प्लास्टिक जीवन बेहतर बनाते हैं, पर तभी जब स्वास्थ्य और प्रकृति की कीमत कम रखी जाए।
करके देखिए
घर पर छोटा संयंत्र बनाइए: रेत और नमक मिलाइए (कच्चा माल), पानी डालकर घोलिए, कपड़े से छानिए (पृथक्कारी), और साफ़ घोल को धूप में सुखाइए (उत्पाद)। पहले और बाद में तौलिए: क्या अंदर = बाहर है? फिर 3D में पुनःचक्रण 0% और 90% रखकर कुल रूपांतरण लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- द्रव्यमान संतुलन: अंदर गया कुल द्रव्यमान = बाहर आया कुल द्रव्यमान
- % लब्धि = वास्तविक लब्धि ÷ सैद्धांतिक लब्धि × 100
- प्रति चक्कर रूपांतरण = अभिक्रिया हुई मात्रा ÷ रिएक्टर में भेजी मात्रा
- पुनःचक्रण r के साथ कुल रूपांतरण: c ÷ (c + (1 − c)(1 − r))
- परमाणु अर्थव्यवस्था = चाहे गए उत्पाद का द्रव्यमान ÷ अभिकारकों का कुल द्रव्यमान × 100
हल किए गए उदाहरण
1. रिएक्टर में 500 kg/h जाता है। उत्पाद 430 kg/h निकलता है। दूसरी धारा कितनी है?
अंदर = बाहर, 500 = 430 + x, x = 70 kg/h।
2. 28 kg N₂ से सिद्धांत में 34 kg NH₃ बन सकती है। एक चक्कर में 5.1 kg बनी। प्रति चक्कर रूपांतरण %?
5.1 ÷ 34 × 100 = 15%।
3. प्रति चक्कर 15% और बची गैस का 90% पुनःचक्रित। कुल रूपांतरण?
0.15 ÷ (0.15 + 0.85 × 0.10) = 0.15 ÷ 0.235 = 0.638, यानी लगभग 64%।
4. 14 t N₂ से कितनी NH₃ बनेगी? (N = 14, H = 1)
N₂ + 3H₂ → 2NH₃। 28 t N₂ से 34 t NH₃, तो 14 t से 17 t।
5. 250 °C पर लब्धि ज़्यादा है, फिर भी अमोनिया 450 °C पर क्यों बनाते हैं?
250 °C पर अभिक्रिया बहुत धीमी है। 450 °C और उत्प्रेरक से अच्छी गति और ठीक-ठाक लब्धि मिलती है: समझौता।
6. इकाई संक्रिया बताइए: (क) कपड़े से रेत-पानी अलग करना, (ख) चूना पत्थर तोड़ना, (ग) पानी पाइप से ऊपर चढ़ाना।
(क) निस्पंदन, (ख) तोड़ना/क्रशिंग, (ग) पंप करना।
आम गलतियाँ
- उत्प्रेरक से लब्धि बढ़ती है, यह मानना। वह केवल साम्य जल्दी लाता है; साम्य पर लब्धि वही रहती है।
- पूरे संयंत्र का द्रव्यमान संतुलन करते समय पुनःचक्रण धारा भूल जाना।
- प्रति चक्कर रूपांतरण और कुल रूपांतरण को एक समझना।
- हमेशा सबसे ऊँचा ताप सबसे अच्छा मानना। ऊष्माक्षेपी उत्क्रमणीय अभिक्रिया में बहुत ऊँचा ताप लब्धि घटाता है।