Netherlands HAVO 5 (eindexamenjaar) Chemistry
अध्याय: 5
1. Chemical processes and cycles (part 2)
Energy calculations · Reaction kinetics · Conservation laws and cycles
- एन्थैल्पी, कैलोरीमिति और हेस का नियम – एन्थैल्पी H = U + pV। स्थिर दाब पर ली या दी गई ऊष्मा ΔH के बराबर होती है; स्थिर आयतन पर ΔU के बराबर। ΔU को बंद बम कैलोरीमीटर में और ΔH को खुले कप कैलोरीमीटर में मापते हैं: q = CΔT या q = mcΔT। गैसों के लिए ΔH = ΔU + Δn_g RT। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ΔrH ऋणात्मक, ऊष्माशोषी में धनात्मक; ΔrH° = ΣΔfH°(उत्पाद) − ΣΔfH°(अभिकारक)। हेस का नियम: अभिक्रिया एक चरण में हो या कई में, कुल एन्थैल्पी परिवर्तन एक ही रहता है, इसलिए ऊष्मारासायनिक समीकरणों को बीजगणित की तरह जोड़ सकते हैं।
- रासायनिक अभिक्रिया का वेग – अभिक्रिया वेग बताता है कि प्रति इकाई समय में अभिकारक कितना ख़र्च होता है या उत्पाद कितना बनता है। वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt (इकाई mol L⁻¹ s⁻¹)। वेग नियम, वेग = k[A]^x[B]^y, प्रयोग से मिलता है; x + y कोटि है। आण्विकता = एक प्राथमिक चरण में टकराने वाले कणों की संख्या।
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम – रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है, न नष्ट होता है। अभिक्रिया से पहले पदार्थों का कुल द्रव्यमान, बाद के पदार्थों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है। कारण: परमाणु सिर्फ़ नए ढंग से जुड़ते हैं; वही परमाणु, उतनी ही संख्या में, पहले भी होते हैं और बाद में भी। अगर कोई गैस बाहर निकल जाए या हवा से आकर जुड़ जाए, तो तराज़ू का पाठ बदलता दिखता है, पर हर पदार्थ गिनें तो कुल द्रव्यमान वही रहता है। इससे जुड़ा नियम, स्थिर अनुपात का नियम, कहता है कि शुद्ध यौगिक में तत्व हमेशा एक ही द्रव्यमान अनुपात में होते हैं (पानी में हमेशा 1 g हाइड्रोजन : 8 g ऑक्सीजन)।
2. Design and experiments (part 2)
Chemical process design · Molecular modelling
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
- आणविक मॉडलिंग: अणुओं को 3D में देखना – आणविक मॉडल अणु की एक छोटी नकल है जिसे हम देख और घुमा सकते हैं। बॉल-स्टिक मॉडल आबंध और कोण दिखाता है, स्पेस-फ़िलिंग मॉडल आकार दिखाता है, और कंप्यूटर मॉडल यह भी दिखा सकते हैं कि अभिक्रिया कदम-दर-कदम कैसे होती है। मॉडल से हम अणु का आकार और अभिक्रिया की क्रियाविधि समझ सकते हैं।
3. Innovation in chemistry
Features of innovative processes · Sustainability · Innovative processes
- संरचना से पदार्थ के गुण कैसे तय होते हैं – कण आपस में कैसे जुड़े हैं, यही तय करता है कि पदार्थ कैसा व्यवहार करेगा। आयनिक और विशाल सहसंयोजी पदार्थों में पूरे ढाँचे में मज़बूत बंध होते हैं, इसलिए वे बहुत ऊँचे ताप पर पिघलते हैं। छोटे अणुओं के बीच बल कमज़ोर होता है, इसलिए वे जल्दी पिघलते और उबलते हैं। धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वे बिजली चलाती हैं।
- पदार्थ की संरचना और गुण – पदार्थ क्या करता है (उसका गुण), यह इस पर निर्भर है कि उसके अंदर क्या है (उसकी संरचना)। धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वे बिजली चलाती हैं। ठोस नमक के आयन जमे होते हैं, इसलिए वह नहीं चलाता, पर पिघला या घुला नमक चलाता है क्योंकि आयन चल सकते हैं। चीनी घुलती है पर उसके अणु उदासीन हैं, इसलिए वह नहीं चलाती। प्लास्टिक की लंबी लड़ियाँ मज़बूत होती हैं; कमज़ोर जोड़ वाली लड़ी को बैक्टीरिया काट देते हैं, यानी वह जैव-अपघटनीय है। OH समूह वाली लड़ियाँ पानी खींचती हैं और जेल की तरह फूलती हैं। गुण का अनुमान लगाने के लिए पूछो: कण कौन-से हैं, क्या उन पर आवेश है, क्या वे चल सकते हैं, और वे आपस में या पानी से कितना खिंचते हैं?
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- पदार्थों का नवाचार: प्रयोगशाला के विचार से नए उत्पाद तक – रासायनिक नवाचार विचार को चरणों में उत्पाद बनाता है: विचार, प्रयोगशाला जाँच, पायलट, कारख़ाना, बाज़ार। नए पदार्थ (मिश्रधातु, जैव-प्लास्टिक, स्मार्ट पदार्थ) और भोजन की नई प्रक्रियाएँ संरचना से डिज़ाइन होती हैं और प्रदर्शन, लागत और सुरक्षा पर परखी जाती हैं। ग्राम से टन तक स्केल-अप और बाज़ार तय करते हैं कि कौन-सा विचार सफल होगा।
4. Chemical industry
Industrial processes and green chemistry · Energy conversions · Process technology and sustainability · Risk and safety · Quality and health
- हरित रसायन (Green Chemistry) – हरित रसायन का अर्थ है ऐसे रासायनिक उत्पाद और प्रक्रियाएँ बनाना जो कम अपशिष्ट दें, सुरक्षित पदार्थ लें, ऊर्जा बचाएँ और नवीकरणीय कच्चा माल इस्तेमाल करें। मुख्य उपाय: ऊँची परमाणु अर्थव्यवस्था, उत्प्रेरक, पानी जैसे सुरक्षित विलायक, नवीकरणीय कच्चा माल, और सुरक्षित रूप से टूटने वाले उत्पाद। जीवन-चक्र मूल्यांकन कच्चे माल से निपटान तक उत्पाद का असर जाँचता है।
- ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy) – ऊर्जा को न बनाया जा सकता है, न नष्ट किया जा सकता है। वह केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है या एक वस्तु से दूसरी में जाती है। बंद तंत्र की कुल ऊर्जा हमेशा उतनी ही रहती है। घर्षण न हो तो यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज + गतिज) स्थिर रहती है: mgh + ½mv² = स्थिर। घर्षण हो तो कुछ यांत्रिक ऊर्जा ऊष्मा बन जाती है, पर कुल ऊर्जा फिर भी वही रहती है। दक्षता = उपयोगी ऊर्जा ÷ कुल दी गई ऊर्जा × 100%।
- औद्योगिक रसायन: रासायनिक संयंत्र कैसे काम करता है – रासायनिक संयंत्र सस्ते कच्चे माल को उपयोगी उत्पाद में बदलता है। पहले कच्चा माल तैयार होता है, फिर चुनी हुई परिस्थितियों में रिएक्टर में अभिक्रिया होती है, उत्पाद अलग किया जाता है और बचा पदार्थ वापस भेजा जाता है (पुनःचक्रण)। इंजीनियर गति, लब्धि, ख़र्च, सुरक्षा और पर्यावरण में संतुलन बनाते हैं।
- औद्योगिक सुरक्षा: रासायनिक उत्पादन में जोखिम और सुरक्षा – ख़तरा (hazard) वह है जो नुकसान कर सकता है। जोखिम (risk) बताता है कि नुकसान कितना संभव है और कितना गंभीर होगा। रासायनिक कारख़ाने अपने जोखिम (आग, ज़हर, दाब, गर्मी) पहचानते हैं, चिह्न लगाते हैं और कई परतों में सुरक्षा रखते हैं: अच्छा डिज़ाइन, अलार्म, राहत वाल्व और प्रशिक्षण। जोखिम = संभावना × असर; परतें जोड़कर इसे कम रखा जाता है।
5. Society and chemical technology
Chemistry of life · Environmental standards · Sustainable chemical technology · Green chemistry at scale · Life-cycle analysis
- जैव-रसायन: जीवन का रसायन – पौधे प्रकाश संश्लेषण से ग्लूकोज़ बनाते हैं: 6 CO2 + 6 H2O + प्रकाश से C6H12O6 + 6 O2। बड़े अणुओं के चार परिवार (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, न्यूक्लिक अम्ल) छोटी इकाइयों से बनते हैं। कोशिकाएँ पोषक तत्वों को तोड़कर ऊर्जा लेती हैं और हर चरण में एंज़ाइम मदद करते हैं। प्रोटीन DNA पढ़कर, mRNA बनाकर और राइबोसोम पर अमीनो अम्ल जोड़कर बनता है।
- पर्यावरण रसायन – पर्यावरण रसायन हवा, पानी और मिट्टी में मौजूद रसायनों का अध्ययन है: वे कहाँ से आते हैं और क्या असर करते हैं। सूखी हवा में लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन, 0.9% आर्गन और 0.04% कार्बन डाइऑक्साइड है। ईंधन जलने से SO₂, NOₓ, CO और कण जैसे प्रदूषक बनते हैं। SO₂ और NO₂ बारिश में अम्ल बनाते हैं (pH 5.6 से कम)। हम अनुमापन जैसी मात्रात्मक जाँच से प्रदूषण नापते हैं, मानकों से तुलना करते हैं और क़ानून व साफ़ तकनीक से नुक़सान घटाते हैं।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- हरित रसायन (Green Chemistry) – हरित रसायन का अर्थ है ऐसे रासायनिक उत्पाद और प्रक्रियाएँ बनाना जो कम अपशिष्ट दें, सुरक्षित पदार्थ लें, ऊर्जा बचाएँ और नवीकरणीय कच्चा माल इस्तेमाल करें। मुख्य उपाय: ऊँची परमाणु अर्थव्यवस्था, उत्प्रेरक, पानी जैसे सुरक्षित विलायक, नवीकरणीय कच्चा माल, और सुरक्षित रूप से टूटने वाले उत्पाद। जीवन-चक्र मूल्यांकन कच्चे माल से निपटान तक उत्पाद का असर जाँचता है।
- जीवन-चक्र आकलन और पुनर्चक्रण – जीवन-चक्र आकलन (LCA) किसी वस्तु के पूरे जीवन में पर्यावरण पर होने वाले असर को जोड़ता है: कच्चा माल निकालना, वस्तु बनाना, उसका उपयोग और अंत में निपटान। इससे दो वस्तुओं की सही तुलना होती है। धातु, काँच और प्लास्टिक को दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण करने से कच्चा माल, ऊर्जा और कचरा तीनों घटते हैं।