जीवन-चक्र आकलन क्या है?
जीवन-चक्र आकलन (Life Cycle Assessment, LCA) यह मापने का तरीका है कि कोई वस्तु अपने पूरे जीवन में पर्यावरण को कितना नुकसान पहुँचाती है। हम सिर्फ़ कारखाना नहीं देखते, चार चरण देखते हैं:
- कच्चा माल: अयस्क खोदना, कच्चा तेल निकालना, पेड़ काटना, कपास उगाना।
- निर्माण और पैकिंग: कच्चे माल से वस्तु बनाना। इसमें ऊर्जा, पानी और रसायन लगते हैं।
- उपयोग: कार के लिए ईंधन, फ़ोन के लिए बिजली, कपड़े धोने के लिए पानी और साबुन।
- निपटान: कचरा-भराव (landfill), जलाना, या दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण।
हर चरण में पूछो: कितनी ऊर्जा, पानी और कच्चा माल लगा? कितना प्रदूषण और कचरा (जैसे CO₂) बना? चरणों के बीच ढुलाई (transport) भी गिनी जाती है।
LCA क्यों उपयोगी है, और इसकी सीमाएँ
LCA से कंपनियाँ और सरकारें सबसे कम कुल असर वाली वस्तु चुन सकती हैं। यह भी पता चलता है कि कौन-सा चरण सबसे बुरा है, ताकि वहीं सुधार हो।
LCA की सीमाएँ
- ऊर्जा, पानी और CO₂ काफ़ी ठीक मापे जा सकते हैं।
- कुछ असर को अंक देना मुश्किल है, जैसे बदबू कितनी बुरी है या कचरे का ढेर कितना भद्दा दिखता है। इसमें व्यक्तिगत राय (value judgement) लगती है, इसलिए दो LCA अलग जवाब दे सकते हैं।
- कोई कंपनी विज्ञापन के लिए चुनिंदा (selective) LCA बना सकती है जिसमें सिर्फ़ अच्छी बातें हों। हमेशा पूछो कि LCA किसने करवाया।
वस्तुओं की तुलना: प्लास्टिक बनाम कागज़ का थैला
| चरण | प्लास्टिक (पॉलीएथीन) थैला | कागज़ का थैला |
|---|---|---|
| कच्चा माल | कच्चा तेल, जो सीमित (finite) है | पेड़, जो नवीकरणीय हैं, पर ज़मीन चाहिए |
| निर्माण | प्रभाजी आसवन, भंजन (cracking), फिर बहुलकीकरण; प्रति थैला कम ऊर्जा | लकड़ी की लुगदी बनाने में बहुत ऊर्जा और पानी |
| उपयोग | मज़बूत, कई बार चल सकता है | कमज़ोर, अक्सर एक बार |
| निपटान | जैव-निम्नीकरणीय नहीं; सैकड़ों साल टिकता है; पुनर्चक्रण या जलाया जा सकता है | जैव-निम्नीकरणीय और आसानी से पुनर्चक्रित |
इसलिए कोई सीधा विजेता नहीं है। जवाब इस पर निर्भर है कि थैला कितनी बार चलता है। इसीलिए हम प्रति उपयोग असर देखते हैं: कुल असर ÷ उपयोग की संख्या।
संसाधनों का उपयोग घटाने के तरीके
कई कच्चे माल सीमित हैं (खत्म हो जाएँगे): धातु अयस्क, कच्चा तेल, काँच के लिए रेत। इन्हें निकालने में ऊर्जा लगती है और ज़मीन खराब होती है। इसे 3R से घटाया जा सकता है: कम करो (reduce), दोबारा उपयोग (reuse), पुनर्चक्रण (recycle)।
- दोबारा उपयोग: काँच की दूध या पेय की बोतलें धोकर फिर भरी जाती हैं। सिर्फ़ सफ़ाई चाहिए।
- काँच का पुनर्चक्रण: तोड़ो, पिघलाओ, नया आकार दो। पुराना काँच पिघलाने में रेत से नया काँच बनाने से कम ऊर्जा लगती है।
- धातुओं का पुनर्चक्रण: छाँटो, पिघलाओ, ढालो। एल्युमिनियम के पुनर्चक्रण में नया एल्युमिनियम विद्युत-अपघटन से निकालने की लगभग 5% ऊर्जा ही लगती है।
- प्लास्टिक का पुनर्चक्रण: प्रकार के अनुसार छाँटो, पिघलाओ, फिर ढालो।
पुनर्चक्रण में भी कुछ ऊर्जा लगती है (इकट्ठा करना, छाँटना, पिघलाना), इसलिए दोबारा उपयोग अक्सर और बेहतर है। भारत में कबाड़ीवाला घर-घर से कागज़, धातु और प्लास्टिक पुनर्चक्रण के लिए ले जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कुल असर (LCA): कुल = कच्चा माल + निर्माण + उपयोग + निपटान (+ ढुलाई)
- प्रति उपयोग असर: प्रति उपयोग असर = कुल असर ÷ उपयोग की संख्या
- पुनर्चक्रण से बचत: % बचत = (नए की ऊर्जा − पुनर्चक्रित की ऊर्जा) ÷ नए की ऊर्जा × 100
हल किए गए उदाहरण
1. किसी वस्तु में कच्चे माल के लिए 30 MJ, निर्माण में 50 MJ, उपयोग में 10 MJ और निपटान में 5 MJ ऊर्जा लगती है। कुल ऊर्जा?
कुल = 30 + 50 + 10 + 5 = 95 MJ।
2. सूती थैले को पूरे जीवन में 130 MJ लगते हैं, प्लास्टिक थैले को 2 MJ। सूती थैला कितनी बार चले कि एक-बार वाले प्लास्टिक थैलों से बेहतर हो?
सूती प्रति उपयोग = 130 ÷ n। यह 2 से कम हो: 130 ÷ n < 2, तो n > 65। कम से कम 66 बार।
3. 1 kg नया एल्युमिनियम बनाने में 200 MJ, पुनर्चक्रण में 10 MJ। कितने प्रतिशत ऊर्जा बची?
बचत = 200 − 10 = 190 MJ। % = 190 ÷ 200 × 100 = 95%।
4. कार A: निर्माण 60 GJ, उपयोग 180 GJ, निपटान 5 GJ। कार B: निर्माण 90 GJ, उपयोग 120 GJ, निपटान 8 GJ। किसका कुल कम है और कौन-सा चरण सबसे अहम है?
A = 245 GJ, B = 218 GJ, तो B कम है। दोनों में उपयोग (ईंधन) सबसे बड़ा हिस्सा है।
5. काँच की बोतल का दोबारा उपयोग उसके पुनर्चक्रण से बेहतर क्यों है?
दोबारा उपयोग में बस धुलाई और ढुलाई लगती है। पुनर्चक्रण में तोड़ना और बहुत ऊँचे ताप पर पिघलाना पड़ता है, जिसमें कहीं ज़्यादा ऊर्जा लगती है।
6. किसी कंपनी के कैन के LCA में खनन का चरण छोड़ दिया गया। इसमें क्या दिक्कत है?
बॉक्साइट खनन में बहुत ऊर्जा लगती है और ज़मीन खराब होती है। उसे छोड़ने से कैन ज़्यादा 'हरा' दिखता है। यह चुनिंदा LCA है।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ कारखाना देखना। LCA में कच्चे माल से निपटान तक चारों चरण आते हैं।
- मान लेना कि कागज़ का थैला हमेशा बेहतर है। उसे बनाने में ज़्यादा ऊर्जा लगती है; जवाब दोबारा उपयोग पर निर्भर है।
- सोचना कि पुनर्चक्रण मुफ़्त है। इकट्ठा करना, छाँटना और पिघलाना भी ऊर्जा लेते हैं, बस नया बनाने से कम।
- सोचना कि LCA का हर हिस्सा बिल्कुल सटीक है। प्रदूषण के असर में राय लगती है, इसलिए LCA पक्षपाती हो सकता है।