आज हवा में क्या है?
वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर गैसों की परत है। पिछले लगभग 20 करोड़ वर्षों से इसका संघटन लगभग एक जैसा है।
- नाइट्रोजन (N2): लगभग 78% (करीब चार-पाँचवाँ)।
- ऑक्सीजन (O2): लगभग 21% (करीब पाँचवाँ हिस्सा)।
- आर्गन: लगभग 0.9%।
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO2): लगभग 0.04%।
- नियॉन, हीलियम, मीथेन आदि बहुत थोड़ी मात्रा में। जल वाष्प जगह-जगह बदलती है।
ये आँकड़े सूखी हवा के हैं। जाँचिए: नाइट्रोजन + ऑक्सीजन ≈ 99%।
पृथ्वी का शुरुआती वायुमंडल
पृथ्वी लगभग 4.6 अरब वर्ष पुरानी है। पहले एक अरब वर्षों में बहुत ज्वालामुखी फटे और गैसें निकलीं। वैज्ञानिक मानते हैं कि तब हवा में ज़्यादातर कार्बन डाइऑक्साइड, साथ में जल वाष्प, कुछ नाइट्रोजन और थोड़ी मीथेन व अमोनिया थी। ऑक्सीजन लगभग नहीं थी।
यह कुछ-कुछ आज के मंगल और शुक्र की हवा जैसा है, जो ज़्यादातर CO2 है।
हम पक्का क्यों नहीं कह सकते?
तब कोई नापने वाला नहीं था और सबूत (पुरानी चट्टानें, जीवाश्म) कम हैं। इसलिए अलग-अलग सिद्धांत हैं। विज्ञान सबूत के हिसाब से अपने विचार बदलता है।
ऑक्सीजन कैसे बढ़ी
पृथ्वी ठंडी हुई तो जल वाष्प संघनित होकर (तरल बनकर) बारिश के रूप में गिरी और महासागर बने।
लगभग 2.7 अरब वर्ष पहले समुद्र में छोटे हरे जीव, शैवाल (algae), प्रकाश-संश्लेषण करने लगे:
कार्बन डाइऑक्साइड + पानी → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन
6CO2 + 6H2O → C6H12O6 + 6O2
फिर पौधे भी आए। ऑक्सीजन धीरे-धीरे इतनी बढ़ी कि जानवर जी सकें।
कार्बन डाइऑक्साइड कैसे घटी
CO2 तीन मुख्य तरीकों से घटी:
- महासागरों में घुलना: CO2 पानी में घुलकर कार्बोनेट बनाती है।
- प्रकाश-संश्लेषण: शैवाल और पौधों ने CO2 से भोजन बनाया।
- चट्टानों में कार्बन बंद होना: समुद्री जीवों ने कार्बोनेट से सीपियाँ और कंकाल बनाए। ये जमा होकर अवसादी चट्टानें जैसे चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट) बने। दबे पौधे कोयला और छोटे समुद्री जीव कच्चा तेल व प्राकृतिक गैस बने।
जीवाश्म ईंधन मानो "पुरानी जमा CO2" हैं। इन्हें जलाने से वह कार्बन फिर हवा में लौटता है।
खुद आज़माइए: 100 दानों से हवा का मॉडल
100 मोती, बटन या राजमा के दाने लीजिए। 78 एक रंग के (नाइट्रोजन), 21 दूसरे रंग के (ऑक्सीजन) और 1 तीसरे रंग का (आर्गन आदि)। इन्हें एक डिब्बे में रखिए। दूसरे डिब्बे में शुरुआती पृथ्वी बनाइए: ज़्यादातर "CO2" दाने। एक-एक दाना बदलिए और बोलिए कि किस प्रक्रिया ने उसे बदला (घुलना, प्रकाश-संश्लेषण, चट्टान में बंद होना)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आज की सूखी हवा ≈ 78% N₂, 21% O₂, 0.9% Ar, 0.04% CO₂
- प्रकाश-संश्लेषण: 6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
- चूना पत्थर = कैल्शियम कार्बोनेट, CaCO₃
- जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) = पुरानी हवा से लिया गया कार्बन
हल किए गए उदाहरण
1. एक कक्षा में 200 m³ हवा है। लगभग कितनी ऑक्सीजन है?
ऑक्सीजन लगभग 21% है। 0.21 × 200 = 42 m³।
2. शुरुआती वायुमंडल में ऑक्सीजन कम क्यों थी?
आज की ऑक्सीजन प्रकाश-संश्लेषण से बनी है। शैवाल और पौधों से पहले कोई इसे बड़ी मात्रा में नहीं बनाता था, और ज्वालामुखी CO₂ और जल वाष्प देते हैं, ऑक्सीजन नहीं।
3. शुरुआती हवा से CO₂ हटने के दो तरीके बताइए और कार्बन कहाँ गया?
1) वह महासागरों में घुली, कार्बोनेट बनी, जीवों ने सीपियाँ बनाईं जो चूना पत्थर बनीं। 2) पौधों ने प्रकाश-संश्लेषण में ली; दबे पौधे कोयला बने। यानी कार्बन अवसादी चट्टानों और जीवाश्म ईंधनों में गया।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि हवा ज़्यादातर ऑक्सीजन है। ज़्यादातर नाइट्रोजन (78%) है; ऑक्सीजन लगभग 21% है।
- सोचना कि आज हवा में CO₂ बहुत है। यह सिर्फ़ लगभग 0.04% है।
- कहना कि ऑक्सीजन ज्वालामुखी से आई। ज्वालामुखी ने CO₂ और जल वाष्प दी; ऑक्सीजन प्रकाश-संश्लेषण से आई।
- महासागरों को भूल जाना: जल वाष्प का संघनन और CO₂ का पानी में घुलना ज़रूरी कदम हैं।