National Year 11 Chemistry
अध्याय: 5
1. 4.6 The rate and extent of chemical change
4.6.1 Rate of reaction · 4.6.2 Reversible reactions and dynamic equilibrium
- अभिक्रिया की दर – अभिक्रिया की दर बताती है कि अभिकारक कितनी जल्दी ख़र्च होते हैं या उत्पाद कितनी जल्दी बनते हैं। दर = मात्रा में परिवर्तन ÷ समय। कण तभी अभिक्रिया करते हैं जब वे कम से कम सक्रियण ऊर्जा से टकराएँ। ज़्यादा बार और ज़्यादा ऊर्जा वाली टक्करें = तेज़ दर। सांद्रता (या गैस का दाब), ताप, पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ाने या उत्प्रेरक डालने से अभिक्रिया तेज़ होती है। उत्प्रेरक कम सक्रियण ऊर्जा वाला रास्ता देता है और ख़ुद ख़र्च नहीं होता।
- रासायनिक साम्य: Kc, Kp, Q और गिब्स ऊर्जा – बंद बर्तन में उत्क्रमणीय अभिक्रिया दोनों ओर चलती है। कुछ देर बाद अग्र और पश्च अभिक्रिया का वेग बराबर हो जाता है। मात्राएँ बदलना बंद हो जाती हैं, पर अभिक्रिया रुकती नहीं। इसे गतिक साम्य कहते हैं। साम्य पर उत्पादों और अभिकारकों का अनुपात (हर एक अपने गुणांक की घात में) एक निश्चित संख्या होता है, जिसे साम्य स्थिरांक K कहते हैं। Kc सांद्रता से, Kp आंशिक दाब से, और Kp = Kc(RT)^Δn। शुद्ध ठोस और द्रव K में नहीं लिखे जाते। Q < K हो तो अभिक्रिया आगे, Q > K हो तो पीछे जाती है। ΔG° = −RT ln K।
2. 4.7 Organic chemistry
4.7.1 Carbon compounds as fuels and feedstock · 4.7.2 Reactions of alkenes and alcohols (Chemistry only) · 4.7.3 Synthetic and naturally occurring polymers (Chemistry only)
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
- कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण, एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल – कार्बन यौगिक ऑक्सीजन में जलकर CO₂, पानी, ऊष्मा और प्रकाश देते हैं (दहन); ऑक्सीकारक ऐल्कोहॉल को अम्ल बना देते हैं (ऑक्सीकरण); असंतृप्त यौगिक निकेल की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़ते हैं (संकलन); संतृप्त यौगिक धूप में H की जगह Cl लेते हैं (प्रतिस्थापन)। एथेनॉल सोडियम से हाइड्रोजन देता है; एथेनॉइक अम्ल दुर्बल अम्ल है जो ऐल्कोहॉल से एस्टर और कार्बोनेट से CO₂ देता है।
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
3. 4.8 Chemical analysis
4.8.1 Purity, formulations and chromatography · 4.8.2 Identification of common gases · 4.8.3 Identification of ions by chemical and spectroscopic means (Chemistry only)
- मिश्रण और उनका पृथक्करण – मिश्रण में दो या ज़्यादा पदार्थ किसी भी अनुपात में मिले होते हैं और हर पदार्थ अपने गुण बनाए रखता है। समांगी मिश्रण (विलयन) हर जगह एक जैसा दिखता है, विषमांगी नहीं। कण के आकार से: विलयन (< 1 nm), कोलॉइड (1–1000 nm), निलंबन (> 1000 nm)। कोलॉइड प्रकाश फैलाता है (टिंडल प्रभाव)। सांद्रता बताती है कि विलयन में कितना विलेय है। मिश्रण को उसके हिस्सों के अंतर से अलग करते हैं: वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, ऊर्ध्वपातन, अपकेंद्रण और स्कंदन।
- गैसों की पहचान: हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, क्लोरीन और अमोनिया का परीक्षण – ज़्यादातर गैसें रंगहीन होती हैं, इसलिए उन्हें देखकर नहीं पहचान सकते। हर गैस की एक आसान जाँच है जो साफ़ निशान देती है। हाइड्रोजन: जलती तीली से "पॉप"। ऑक्सीजन: सुलगती तीली फिर जल उठती है। कार्बन डाइऑक्साइड: चूने का पानी दूधिया। क्लोरीन: गीला नीला लिटमस लाल, फिर सफ़ेद (विरंजित)। अमोनिया: गीला लाल लिटमस नीला। जलवाष्प: सफ़ेद निर्जल कॉपर सल्फेट नीला। सल्फर डाइऑक्साइड: अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट बैंगनी से रंगहीन।
- आयनों की पहचान: ज्वाला परीक्षण, हाइड्रॉक्साइड अवक्षेप, ऋणायन जाँच और ज्वाला उत्सर्जन स्पेक्ट्रोस्कोपी – आयनिक यौगिक में एक धनायन (धातु आयन) और एक ऋणायन होता है। दोनों की अलग जाँच होती है। ज्वाला परीक्षण में रंग से धातु पहचानते हैं: लिथियम गहरा लाल, सोडियम पीला, पोटैशियम हल्का बैंगनी, कैल्शियम नारंगी-लाल, कॉपर हरा। सोडियम हाइड्रॉक्साइड से रंगीन अवक्षेप: Cu²⁺ नीला, Fe²⁺ हरा, Fe³⁺ भूरा, Al³⁺, Ca²⁺, Mg²⁺ सफ़ेद (सिर्फ़ Al(OH)₃ अधिक NaOH में घुलता है)। कार्बोनेट अम्ल से बुलबुले देता है और गैस चूने के पानी को दूधिया करती है। हैलाइड + अम्लीय सिल्वर नाइट्रेट: क्लोराइड सफ़ेद, ब्रोमाइड क्रीम, आयोडाइड पीला। सल्फेट + अम्लीय बेरियम क्लोराइड: सफ़ेद अवक्षेप। मशीनें (ज्वाला उत्सर्जन स्पेक्ट्रोस्कोपी) तेज़, संवेदनशील हैं और मात्रा भी बताती हैं।
4. 4.9 Chemistry of the atmosphere
4.9.1 The composition and evolution of the Earth's atmosphere · 4.9.2 Carbon dioxide and methane as greenhouse gases · 4.9.3 Common atmospheric pollutants and their sources
- पृथ्वी के वायुमंडल का संघटन और विकास – आज सूखी हवा में लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन, करीब 1% आर्गन और बहुत थोड़ी (लगभग 0.04%) कार्बन डाइऑक्साइड है। शुरुआती वायुमंडल ज्वालामुखियों से बना: ज़्यादातर CO2 और जल वाष्प, ऑक्सीजन लगभग नहीं। पृथ्वी ठंडी हुई तो जल वाष्प से महासागर बने और कुछ CO2 उनमें घुल गई। शैवाल और फिर पौधों ने प्रकाश-संश्लेषण से ऑक्सीजन बनाई। कार्बन चूना पत्थर जैसी अवसादी चट्टानों और जीवाश्म ईंधनों में बंद हो गया, इसलिए CO2 घटी।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
- प्रदूषण: वायु, जल, भूमि और ध्वनि – प्रदूषण यानी हवा, पानी या ज़मीन में हानिकारक पदार्थ या ऊर्जा इतनी तेज़ी से डालना कि प्रकृति उसे हटा न सके। मुख्य वायु प्रदूषक हैं कण (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ़र डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओज़ोन; इनसे अम्लीय वर्षा और स्मॉग बनते हैं। पोषक तत्व, सीवेज और ज़हरीले रसायन पानी में सुपोषण और जैव आवर्धन करते हैं। स्रोत पर उत्सर्जन घटाकर, कचरा छोड़ने से पहले साफ़ करके और 3R से प्रदूषण घटता है।
5. 4.10 Using resources
4.10.1 Using the Earth's resources and obtaining potable water · 4.10.2 Life cycle assessment and recycling · 4.10.3 Using materials (Chemistry only) · 4.10.4 The Haber process and the use of NPK fertilisers (Chemistry only)
- जल शोधन: गंदे पानी से पीने योग्य पानी तक – पीने योग्य (potable) पानी वह है जो पीने के लिए सुरक्षित हो। यह पूरी तरह शुद्ध नहीं होता: इसमें थोड़े घुले लवण रहते हैं, पर हानिकारक कीटाणु नहीं। इसे बनाने के लिए अच्छा स्रोत चुनते हैं, ठोस कणों को बैठने देते हैं, छानते हैं और क्लोरीन, ओज़ोन या UV से कीटाणु मारते हैं। जहाँ मीठा पानी कम हो, वहाँ समुद्री पानी से आसवन या रिवर्स ऑस्मोसिस द्वारा नमक हटाते हैं। घरों और खेतों का गंदा पानी नदी में छोड़ने से पहले साफ़ किया जाता है। कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण घुले होते हैं; उबालकर या आयन-विनिमय से इसे मृदु बनाया जाता है।
- जीवन-चक्र आकलन और पुनर्चक्रण – जीवन-चक्र आकलन (LCA) किसी वस्तु के पूरे जीवन में पर्यावरण पर होने वाले असर को जोड़ता है: कच्चा माल निकालना, वस्तु बनाना, उसका उपयोग और अंत में निपटान। इससे दो वस्तुओं की सही तुलना होती है। धातु, काँच और प्लास्टिक को दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण करने से कच्चा माल, ऊर्जा और कचरा तीनों घटते हैं।
- संक्षारण, उसका बचाव और मिश्रातु – संक्षारण धातु का हवा, नमी या रसायनों से धीरे-धीरे खराब होना है। लोहे पर जंग तभी लगती है जब हवा (ऑक्सीजन) और पानी दोनों हों; जंग जलयुक्त आयरन ऑक्साइड है। इसे पेंट, तेल, यशदलेपन, क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्रातु बनाकर रोका जाता है। मिश्रातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ समांगी मिश्रण है; यह शुद्ध धातु से प्रायः अधिक कठोर, मज़बूत और संक्षारण-रोधी होता है।
- हैबर प्रक्रम और NPK उर्वरक – हैबर प्रक्रम हवा की नाइट्रोजन और (ज़्यादातर प्राकृतिक गैस से बनी) हाइड्रोजन से अमोनिया बनाता है: N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃। अग्र अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी और उत्क्रमणीय है। लगभग 200 atm दाब, लगभग 450 °C और लोहे का उत्प्रेरक, यह समझौता अच्छी दर पर ठीक-ठाक उपज देता है। अमोनिया को ठंडा करके द्रव बनाया और अलग किया जाता है; बची गैसें वापस भेजी जाती हैं। अमोनिया से अमोनियम नाइट्रेट जैसे नाइट्रोजन उर्वरक बनते हैं। NPK उर्वरक फ़सलों को नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस और पोटैशियम देते हैं।