हैबर प्रक्रम: कच्चा माल और समीकरण
हैबर प्रक्रम अमोनिया (NH3) बनाता है।
- नाइट्रोजन हवा से ली जाती है (हवा में 78% नाइट्रोजन है)।
- हाइड्रोजन ज़्यादातर प्राकृतिक गैस (मीथेन) और भाप की अभिक्रिया से बनती है।
गैसों को शुद्ध करके 1 N2 : 3 H2 के अनुपात में मिलाते हैं।
नाइट्रोजन + हाइड्रोजन ⇌ अमोनिया
N2(g) + 3H2(g) ⇌ 2NH3(g)
⇌ का मतलब अभिक्रिया उत्क्रमणीय (reversible) है: अमोनिया वापस नाइट्रोजन और हाइड्रोजन में टूट सकती है। अग्र अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (exothermic) है, यानी गर्मी देती है।
शर्तें चुनना: एक समझौता
दाब: लगभग 200 वायुमंडल
बाईं ओर गैस के 4 अणु हैं, दाईं ओर सिर्फ़ 2। ज़्यादा दाब साम्य को कम गैस अणुओं वाली ओर धकेलता है, इसलिए अमोनिया की उपज बढ़ती है। ज़्यादा दाब पर कण ज़्यादा टकराते हैं, तो दर भी बढ़ती है। पर बहुत ज़्यादा दाब के लिए मोटे, महँगे पाइप और ज़्यादा ऊर्जा चाहिए, और ख़तरा भी बढ़ता है। इसलिए लगभग 200 atm।
तापमान: लगभग 450 °C
अग्र अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है। कम तापमान पर उपज ज़्यादा, पर अभिक्रिया बहुत धीमी। ज़्यादा तापमान पर तेज़, पर उपज कम। 450 °C एक समझौता है: जल्दी से ठीक-ठाक उपज।
उत्प्रेरक: लोहा
लोहे का उत्प्रेरक आगे और पीछे दोनों अभिक्रियाएँ तेज़ करता है। यह उपज नहीं बदलता, बस साम्य जल्दी आता है।
अमोनिया को अलग करना और गैसों का पुनःचक्रण
एक बार में सिर्फ़ 15–30% गैस अमोनिया बनती है। रिएक्टर से निकला गर्म मिश्रण ठंडा किया जाता है। अमोनिया का क्वथनांक नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से बहुत ऊँचा है, इसलिए वह द्रव बनकर अलग हो जाती है। बची नाइट्रोजन और हाइड्रोजन वापस रिएक्टर में भेजी जाती हैं (पुनःचक्रण)। आख़िर में लगभग 97% गैस अमोनिया बन जाती है।
NPK उर्वरकों का उत्पादन और उपयोग
पौधों को अच्छी बढ़त के लिए तीन मुख्य तत्व चाहिए: N नाइट्रोजन (पत्तियाँ और बढ़त), P फ़ॉस्फ़ोरस (जड़ें) और K पोटैशियम (फूल, फल और सेहत)। NPK उर्वरक लवणों का ऐसा मिश्रण है जो ये तत्व सही मात्रा में देता है। इससे फ़सल की पैदावार बढ़ती है।
- नाइट्रोजन: अमोनिया को अम्लों से मिलाते हैं। अमोनिया + नाइट्रिक अम्ल → अमोनियम नाइट्रेट। अमोनिया + सल्फ़्यूरिक अम्ल → अमोनियम सल्फ़ेट। (नाइट्रिक अम्ल भी अमोनिया से ही बनता है।)
- फ़ॉस्फ़ोरस: फ़ॉस्फ़ेट चट्टान खोदी जाती है। यह घुलती नहीं, इसलिए अम्ल से मिलाते हैं। नाइट्रिक अम्ल से फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल और कैल्शियम नाइट्रेट; सल्फ़्यूरिक अम्ल से सिंगल सुपरफ़ॉस्फ़ेट; फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल से ट्रिपल सुपरफ़ॉस्फ़ेट। फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल + अमोनिया → अमोनियम फ़ॉस्फ़ेट।
- पोटैशियम: पोटैशियम क्लोराइड और पोटैशियम सल्फ़ेट खदानों से निकलते हैं और सीधे इस्तेमाल होते हैं।
उद्योग में यह बड़े, लगातार चलने वाले संयंत्रों में होता है। स्कूल की प्रयोगशाला में अमोनिया विलयन और सल्फ़्यूरिक अम्ल के अनुमापन और फिर क्रिस्टलीकरण से अमोनियम सल्फ़ेट बना सकते हैं।
खुद आज़माइए: खाद का थैला पढ़िए
किसी खाद के पैकेट (नर्सरी या किसान का थैला) पर तीन संख्याएँ ढूँढिए, जैसे 19:19:19 या 10:26:26। ये N, P और K के प्रतिशत हैं। कौन-सा पोषक सबसे ज़्यादा है? यह किस फ़सल या बढ़त की किस अवस्था के लिए हो सकता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ (अग्र अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी)
- शर्तें: ~200 atm, ~450 °C, लोहा उत्प्रेरक
- NH₃ + HNO₃ → NH₄NO₃ (अमोनियम नाइट्रेट)
- 2NH₃ + H₂SO₄ → (NH₄)₂SO₄ (अमोनियम सल्फ़ेट)
- NPK = नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटैशियम
हल किए गए उदाहरण
1. ज़्यादा दाब पर अमोनिया की उपज क्यों बढ़ती है?
बाईं ओर गैस के 4 अणु (1 N₂ + 3 H₂) और दाईं ओर 2 (2 NH₃) हैं। दाब बढ़ाने पर साम्य कम अणुओं वाली ओर, यानी अमोनिया की ओर, खिसकता है।
2. 10 mol अमोनिया बनाने के लिए कितनी हाइड्रोजन चाहिए?
N₂ + 3H₂ → 2NH₃ से 3 mol H₂ से 2 mol NH₃। तो 10 mol NH₃ के लिए 10 × 3/2 = 15 mol H₂।
3. किसी फ़सल की जड़ें कमज़ोर हैं। किस पोषक की कमी है और कौन-सा यौगिक देगा?
फ़ॉस्फ़ोरस (P)। अमोनियम फ़ॉस्फ़ेट या सुपरफ़ॉस्फ़ेट (फ़ॉस्फ़ेट चट्टान + अम्ल) देगा।
4. 450 °C को समझौते का तापमान क्यों कहते हैं?
अग्र अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है, तो कम तापमान पर उपज ज़्यादा पर दर बहुत धीमी। ज़्यादा तापमान पर तेज़ पर उपज कम। 450 °C पर ठीक-ठाक उपज ठीक-ठाक रफ़्तार से मिलती है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि उत्प्रेरक उपज बढ़ाता है। वह सिर्फ़ साम्य जल्दी लाता है; उपज वही रहती है।
- सोचना कि ज़्यादा तापमान से उपज बढ़ेगी। इस ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में उपज घटती है।
- ⇌ भूल जाना: अभिक्रिया उत्क्रमणीय है, इसलिए एक बार में सारी गैस अमोनिया नहीं बनती।
- स्रोत उलझाना: नाइट्रोजन हवा से, हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस से (हवा की नमी से नहीं)।