चूना और गारा: चूना-चक्र
चूना-पत्थर कैल्शियम कार्बोनेट, CaCO3 है। लगभग 900 °C पर गरम करने से कार्बन डाइऑक्साइड निकल जाती है और बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड, CaO) बचता है।
यह चूना पानी से मिलकर बहुत गरम होता है और बुझा चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)2) बनता है। रेत और पानी के साथ यह चूने का गारा है, जो ईंटों को जोड़ता है।
धीरे-धीरे बुझा चूना हवा से CO2 लेकर फिर कैल्शियम कार्बोनेट बन जाता है। इसलिए गारा सख़्त होता है। चक्र है: पत्थर, गरमी, पानी, हवा, पत्थर।
बुझे चूने से सफ़ेदी भी होती है और खेत की अम्लीय मिट्टी भी ठीक की जाती है।
सीमेंट और कंक्रीट, और स्टील क्यों लगाते हैं
सीमेंट चूना-पत्थर और चिकनी मिट्टी को लगभग 1450 °C पर पकाकर, थोड़े जिप्सम के साथ पीसकर बनता है। यह पानी से अभिक्रिया करके सख़्त होता है। पूरी कहानी सीमेंट पाठ में है।
कंक्रीट यानी सीमेंट + रेत + गिट्टी + पानी। यह दबाव (संपीडन) सहने में बहुत अच्छा है, पर खिंचाव (तनाव) में कमज़ोर है।
बीम में ऊपर का हिस्सा दबता है और नीचे का खिंचता है। इसलिए नीचे की तरफ़ स्टील की सरिया लगाते हैं। स्टील खिंचाव सह लेता है। स्टील वाला कंक्रीट प्रबलित कंक्रीट (RCC) कहलाता है। गरम होने पर स्टील और कंक्रीट लगभग बराबर फैलते हैं, इसलिए अलग नहीं होते।
काँच और दूसरी निर्माण सामग्री
खिड़की का आम काँच सोडा-चूना काँच है। यह रेत (सिलिका, SiO2), सोडा ऐश (सोडियम कार्बोनेट) और चूना-पत्थर को लगभग 1500 °C पर पिघलाकर बनता है। जल्दी ठंडा होने पर परमाणु किसी क्रम में नहीं जम पाते, इसलिए यह साफ़, कड़ा और भंगुर ठोस बनता है।
और सामग्री: ईंट (भट्ठे में पकी मिट्टी), स्टील (लोहा और थोड़ा कार्बन), प्लास्टर ऑफ़ पेरिस (गरम किया जिप्सम), और पेंट। हर एक को ताकत, वज़न, दाम और टिकाऊपन देखकर चुनते हैं।
पौधों का भोजन: N, P, K उर्वरक
पौधे पानी और हवा से CO2 लेते हैं, पर उन्हें मिट्टी से खनिज भी चाहिए। फ़सल ये खनिज खत्म कर देती है, इसलिए किसान उर्वरक (खाद) डालते हैं।
- N, नाइट्रोजन: पत्तियाँ हरी और तना बड़ा करती है। स्रोत: यूरिया (लगभग 46% N), अमोनियम नाइट्रेट, अमोनियम सल्फ़ेट।
- P, फ़ॉस्फ़ोरस: जड़ें और फूल बढ़ाता है। स्रोत: सुपरफ़ॉस्फ़ेट, DAP।
- K, पोटैशियम: तना मज़बूत करता है और रोग से बचाता है। स्रोत: पोटाश (पोटैशियम क्लोराइड)।
बोरी पर NPK 10:26:26 लिखा हो तो उसमें 10% N, 26% P2O5 और 26% K2O (द्रव्यमान से) है। नाइट्रोजन खाद के लिए अमोनिया हेबर विधि से बनती है (देखें हेबर विधि)।
खाद का समझदारी से उपयोग और मिट्टी का pH
खाद बढ़ाने से फ़सल बढ़ती है, पर एक सीमा तक। उसके बाद फ़ालतू खाद से कोई फ़ायदा नहीं होता। वह बारिश में बहकर तालाबों और नदियों में चली जाती है। इससे शैवाल (काई) बहुत बढ़ती है और पानी की ऑक्सीजन खत्म कर देती है। इसे सुपोषण (यूट्रोफ़िकेशन) कहते हैं, और मछलियाँ मर जाती हैं।
अच्छा तरीका: मिट्टी की जाँच करो, जो कम है वही डालो, खुराक बाँटकर दो, और कम्पोस्ट व दलहन के साथ फ़सल-चक्र अपनाओ (दलहन नाइट्रोजन देती है)। मिट्टी बहुत अम्लीय हो तो चूना (CaO या Ca(OH)2) डालकर pH बढ़ाते हैं।
कीटनाशक कीड़े मारते हैं, पर लाभदायक कीटों को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं और भोजन में रह सकते हैं, इसलिए कम और सुरक्षित मात्रा में ही उपयोग करें।
करके देखो
3D में खाद का स्लाइडर 0 से 100 तक चलाओ। पहले अनुमान लगाओ: क्या 100 पर फ़सल 50 से दुगुनी होगी? फ़सल का प्रतिशत और लाल पट्टी देखकर जाँचो। घर पर खाद या पौधों के भोजन के लेबल पर तीन संख्याएँ ढूँढो। किसी बड़े की मदद से छोटे पत्थर पर चूने का पानी लगाकर देखो कि सूखते-सूखते वह CO2 लेकर सफ़ेद हो जाता है (चूना त्वचा जला सकता है)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बिना बुझा चूना: CaCO3 → CaO + CO2 (लगभग 900 °C)
- बुझाना: CaO + H2O → Ca(OH)2
- सख़्त होना: Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O
- सोडा-चूना काँच: रेत + सोडा ऐश + चूना-पत्थर, लगभग 1500 °C
- पोषक की मात्रा = बोरी का द्रव्यमान × (प्रतिशत ÷ 100)
- यूरिया CO(NH2)2 में लगभग 46% नाइट्रोजन
हल किए गए उदाहरण
1. चूना-चक्र के तीन चरण बताओ।
चूना-पत्थर गरम करने पर बिना बुझा चूना बनता है। उसमें पानी मिलाने पर बुझा चूना बनता है। बुझा चूना हवा से CO2 लेकर फिर चूना-पत्थर बन जाता है।
2. यूरिया की 50 kg की बोरी में 46% नाइट्रोजन है। उसमें कितनी नाइट्रोजन है?
50 × 46 ÷ 100 = 23 kg नाइट्रोजन।
3. कंक्रीट के बीम में स्टील ऊपर नहीं, नीचे क्यों लगाते हैं?
भार पड़ने पर बीम का नीचे का हिस्सा खिंचता है और ऊपर का दबता है। कंक्रीट खिंचाव में कमज़ोर है, इसलिए जहाँ खिंचाव है, यानी नीचे, वहाँ स्टील लगाते हैं।
4. बोरी पर NPK 10:26:26 लिखा है। इस खाद के 20 kg में P2O5 कितना है?
20 × 26 ÷ 100 = 5.2 kg P2O5।
5. 100 kg शुद्ध चूना-पत्थर पूरा गरम करके बिना बुझा चूना बनाया गया। मोलर द्रव्यमान: CaCO3 100, CaO 56। कितना चूना बना?
100 g CaCO3 से 56 g CaO बनता है, तो 100 kg से 56 kg चूना बनेगा। बाकी 44 kg CO2 गैस बनकर निकल जाता है।
6. एक खेत को प्रति हेक्टेयर 69 kg नाइट्रोजन चाहिए। 2 हेक्टेयर के लिए कितना यूरिया (46% N) डालें?
1 हेक्टेयर के लिए: 69 ÷ 0.46 = 150 kg यूरिया। 2 हेक्टेयर के लिए: 300 kg यूरिया।
आम गलतियाँ
- बिना बुझे और बुझे चूने को एक समझना। बिना बुझा चूना CaO है; बुझा चूना Ca(OH)2 है, जो पानी मिलाने से बनता है।
- सोचना कि चूने का गारा सिर्फ़ सूखने से जमता है। वह हवा की CO2 से अभिक्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट भी बनता है।
- स्टील को बीम के दबने वाले हिस्से में रखना। स्टील वहाँ रखो जहाँ बीम खिंचता है।
- मानना कि जितनी ज़्यादा खाद उतनी ज़्यादा फ़सल। एक सीमा के बाद फ़ालतू खाद बेकार जाती है और पानी गंदा करती है।