नाइट्रोजन तत्व
नाइट्रोजन आवर्त सारणी के समूह 15 (पुराना नाम VA) का तत्व है, परमाणु क्रमांक 7। इसके बाहरी कोश में 5 इलेक्ट्रॉन हैं। दो परमाणु तीन जोड़ी इलेक्ट्रॉन साझा करके N₂ अणु बनाते हैं, जिसमें तिहरा बंधन (N≡N) होता है।
- रंगहीन, गंधहीन गैस; हवा का 78% (आयतन से)।
- सामान्य ताप पर बहुत कम क्रियाशील, क्योंकि तिहरा बंधन तोड़ने में बहुत ऊर्जा लगती है।
- चिप्स के पैकेट भरने में (खाना ख़राब नहीं होता), द्रव नाइट्रोजन (−196 °C) से जमाने में और अमोनिया बनाने में काम आती है।
फ़ॉस्फ़ोरस इसी समूह में नाइट्रोजन के ठीक नीचे है। यह ठोस है और बहुत क्रियाशील है (सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस हवा में जल उठता है, इसलिए पानी में रखते हैं)। यह भी पौधों का ज़रूरी पोषक है (फ़ॉस्फ़ेट खाद, हड्डियाँ, DNA)।
नाइट्रोजन स्थिरीकरण और हेबर प्रक्रम
नाइट्रोजन स्थिरीकरण का मतलब है N₂ गैस को ऐसे यौगिकों में बदलना जिन्हें पौधे इस्तेमाल कर सकें, जैसे अमोनिया (NH₃) या नाइट्रेट (NO₃⁻)। यह तीन तरह से होता है:
- जैविक: मटर-कुल के पौधों की जड़ की गाँठों में राइज़ोबियम जीवाणु, और कुछ स्वतंत्र जीवाणु व नील-हरित शैवाल।
- बिजली: इसकी गर्मी N₂ और O₂ को नाइट्रोजन ऑक्साइड में बदलती है, जिन्हें बारिश मिट्टी तक ले जाती है।
- औद्योगिक (हेबर प्रक्रम): N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃, लगभग 450 °C, लगभग 200 atm दाब और लोहे के उत्प्रेरक के साथ।
ये परिस्थितियाँ क्यों?
अभिक्रिया उत्क्रमणीय है और ऊष्मा देती है। चार गैस अणु दो बनते हैं, इसलिए ऊँचा दाब अमोनिया की ओर धकेलता है। कम ताप पर अमोनिया ज़्यादा बनती, पर बहुत धीरे; इसलिए 450 °C एक बीच का रास्ता है। लोहे का उत्प्रेरक गति बढ़ाता है। बची N₂ और H₂ को फिर से घुमाकर भेजा जाता है।
नाइट्रोजन के यौगिक: अम्ल, नाइट्राइड और उर्वरक
- अमोनिया, NH₃: तीखी गंध वाली गैस, पानी में बहुत घुलती है, दुर्बल क्षार बनाती है (लाल लिटमस को नीला करती है)। अम्लों के साथ अमोनियम लवण बनाती है।
- नाइट्रिक अम्ल, HNO₃: अमोनिया से बनता है (ओस्टवाल्ड प्रक्रम: प्लैटिनम उत्प्रेरक पर NH₃ को जलाकर NO, फिर NO₂, फिर पानी में घोलना)। प्रबल अम्ल और प्रबल ऑक्सीकारक; खाद, रंग और विस्फोटक बनाने में।
- नाइट्रस अम्ल, HNO₂: दुर्बल और अस्थायी अम्ल; इसके लवण (नाइट्राइट) मांस को सुरक्षित रखने में काम आते हैं।
- नाइट्राइड: धातु और नाइट्रोजन का यौगिक, जैसे हवा में जलते मैग्नीशियम से 3Mg + N₂ → Mg₃N₂। यह पानी से मिलकर अमोनिया देता है।
- उर्वरक: यूरिया CO(NH₂)₂ (46% N), अमोनियम नाइट्रेट NH₄NO₃, अमोनियम सल्फ़ेट, और NPK मिश्रण।
ज़्यादा खाद का नुकसान
बचा हुआ नाइट्रेट बहकर नदियों और झीलों में जाता है। शैवाल बहुत तेज़ी से उगते हैं, मरकर सड़ते हैं, और पानी की ऑक्सीजन कम हो जाती है (सुपोषण)। मछलियाँ मरती हैं। सही मात्रा, सही समय पर खाद डालने से पैसा भी बचता है और जल-जीवन भी।
नाइट्रोजन चक्र कदम-दर-कदम
- स्थिरीकरण: N₂ → अमोनिया/अमोनियम (NH₄⁺)।
- नाइट्रीकरण: नाइट्रीकारी जीवाणु NH₄⁺ → नाइट्राइट (NO₂⁻) → नाइट्रेट (NO₃⁻) बनाते हैं।
- स्वांगीकरण: जड़ें नाइट्रेट सोखती हैं और प्रोटीन, DNA, क्लोरोफ़िल बनाती हैं।
- खाद्य शृंखला: जानवर पौधे खाते हैं; नाइट्रोजन जंतु प्रोटीन में जाती है; यूरिया जैसा अपशिष्ट बाहर निकलता है।
- अमोनीकरण (सड़न): जीवाणु और कवक मृत शरीर व मल को अमोनिया में तोड़ते हैं।
- विनाइट्रीकरण: गीली, कम ऑक्सीजन वाली मिट्टी में विनाइट्रीकारी जीवाणु नाइट्रेट को फिर N₂ गैस बनाते हैं।
इंसान बहुत सारी खाद बनाकर और ईंधन जलाकर (जिससे नाइट्रोजन ऑक्साइड निकलते हैं, अम्ल वर्षा और स्मॉग होता है) इस चक्र को बदल रहे हैं।
खुद करके देखो: चने की जड़ों की खोज
चना, मटर या मूँग का एक पौधा सावधानी से उखाड़ो (या गमले में चने उगाओ और दो हफ़्ते रुको)। जड़ें धो लो। छोटी गुलाबी-भूरी गाँठें गिनो: यहीं जीवाणु नाइट्रोजन स्थिर करते हैं। एक गाँठ काटो: अंदर गुलाबी रंग हो तो जीवाणु सक्रिय हैं। फिर 3D के आख़िरी चरण में "स्थिरीकरण" चुनो और देखो तुम्हारी गाँठें चक्र में कहाँ आती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ (हेबर: 450 °C, 200 atm, लोहा उत्प्रेरक)
- 4NH₃ + 5O₂ → 4NO + 6H₂O (नाइट्रिक अम्ल का पहला कदम)
- 3Mg + N₂ → Mg₃N₂ (नाइट्राइड)
- NH₃ + HNO₃ → NH₄NO₃ (अमोनियम नाइट्रेट खाद)
- NH₄⁺ → NO₂⁻ → NO₃⁻ (नाइट्रीकरण)
- NO₃⁻ → N₂ (विनाइट्रीकरण)
हल किए गए उदाहरण
1. 5 अणु N₂ और भरपूर H₂ से कितने अमोनिया अणु बन सकते हैं?
N₂ + 3H₂ → 2NH₃, यानी हर N₂ से 2 NH₃। 5 × 2 = 10 अणु अमोनिया (और 15 H₂ खर्च)।
2. अमोनियम नाइट्रेट NH₄NO₃ में नाइट्रोजन का प्रतिशत निकालो (N = 14, H = 1, O = 16)।
मोलर द्रव्यमान = 14 + 4 + 14 + 48 = 80। नाइट्रोजन = 2 × 14 = 28। % N = 28 ÷ 80 × 100 = 35%।
3. हेबर प्रक्रम में बहुत ऊँचा दाब क्यों रखते हैं?
बाईं ओर 1 + 3 = 4 गैस अणु हैं, दाईं ओर केवल 2। ऊँचा दाब कम अणुओं वाली ओर ले जाता है, इसलिए अमोनिया ज़्यादा बनती है।
4. यूरिया CO(NH₂)₂ में लगभग 46% नाइट्रोजन है, दिखाओ (C = 12, O = 16, N = 14, H = 1)।
मोलर द्रव्यमान = 12 + 16 + 2 × (14 + 2) = 60। N = 28। 28 ÷ 60 × 100 ≈ 46.7%।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पौधे हवा से सीधे नाइट्रोजन लेते हैं। यह काम केवल स्थिर करने वाले जीवाणु करते हैं; पौधे मिट्टी से नाइट्रेट या अमोनियम लेते हैं।
- नाइट्रीकरण (अमोनियम → नाइट्रेट) और विनाइट्रीकरण (नाइट्रेट → N₂ गैस) को आपस में मिला देना।
- यह कहना कि हेबर अभिक्रिया पूरी हो जाती है। यह उत्क्रमणीय है; हर बार लगभग 15% ही अमोनिया बनती है, इसलिए गैसें फिर घुमाई जाती हैं।
- समीकरण में नाइट्रोजन गैस को N लिखना। नाइट्रोजन गैस हमेशा N₂ है।