अकार्बनिक यौगिकों के चार वर्ग
ऑक्साइड किसी तत्व और ऑक्सीजन का यौगिक है, जैसे CaO या CO₂। धातुओं के ऑक्साइड आमतौर पर क्षारीय होते हैं, अधातुओं के अम्लीय। कुछ, जैसे Al₂O₃ और ZnO, उभयधर्मी (amphoteric) हैं – ये अम्ल और क्षारक दोनों से अभिक्रिया करते हैं।
अम्ल पानी में H⁺ आयन देते हैं (HCl, H₂SO₄, HNO₃)। क्षारक OH⁻ देते हैं या H⁺ लेते हैं (NaOH, Ca(OH)₂, NH₃)। पानी में घुलने वाला क्षारक क्षार (alkali) कहलाता है। लवण में धातु आयन (या NH₄⁺) और अम्ल का बचा हुआ आयन होता है (NaCl, CuSO₄)।
अम्ल-क्षारक की तीन परिभाषाएँ
- आरेनियस: अम्ल पानी में H⁺ देता है; क्षारक OH⁻ देता है।
- ब्रॉन्स्टेड–लॉरी: अम्ल प्रोटॉन देता है; क्षारक प्रोटॉन लेता है।
- लुईस: अम्ल इलेक्ट्रॉन युग्म लेता है; क्षारक इलेक्ट्रॉन युग्म देता है।
अम्ल, क्षारक और लवण का नामकरण
- द्विअंगी अम्ल: hydro- + मूल + -ic: HCl हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।
- ऑक्सी-अम्ल: ज़्यादा ऑक्सीजन = -ic, कम = -ous: H₂SO₄ सल्फ्यूरिक, H₂SO₃ सल्फ्यूरस; HNO₃ नाइट्रिक, HNO₂ नाइट्रस।
- क्षारक: धातु + हाइड्रॉक्साइड: NaOH सोडियम हाइड्रॉक्साइड, Fe(OH)₃ आयरन(III) हाइड्रॉक्साइड।
- लवण: पहले धातु, फिर अम्ल का अंत बदलता है: -ic → -ate, -ous → -ite, hydro-…-ic → -ide। जैसे सल्फेट, सल्फाइट, क्लोराइड।
- अम्लीय लवण में H बचा रहता है: NaHCO₃ सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट। क्षारीय लवण में OH: Mg(OH)Cl।
वर्गों के बीच आनुवंशिक संबंध
एक तत्व को सभी वर्गों में परिवार की तरह आगे बढ़ते देख सकते हैं:
धातु: Ca → CaO → Ca(OH)₂ → CaCO₃
अधातु: S → SO₂ → H₂SO₃ → Na₂SO₃
दोनों रेखाएँ लवण पर मिलती हैं। लवण कई तरह से बनते हैं: अम्ल + क्षारक, अम्ल + धातु, अम्ल + क्षारीय ऑक्साइड, क्षारक + अम्लीय ऑक्साइड, अम्ल + कार्बोनेट।
अनुमापन का परिचय
अनुमापन में अज्ञात सांद्रता वाले घोल को ज्ञात सांद्रता वाले घोल (मानक विलयन) से अभिक्रिया करवाकर उसकी सांद्रता निकालते हैं।
- पिपेट से ठीक 25.0 mL अज्ञात अम्ल शंक्वाकार फ्लास्क में डालिए, 2–3 बूंद सूचक मिलाइए।
- ब्यूरेट में मानक क्षारक भरिए। आँख के स्तर पर मेनिस्कस के निचले हिस्से से शुरुआती पाठ्यांक लीजिए।
- फ्लास्क घुमाते हुए क्षारक डालिए; अंत के पास बूंद-बूंद।
- रंग स्थायी रूप से बदलते ही रुकिए: यह अंत बिंदु है। दो पाठ्यांक 0.10 mL के भीतर मिलने तक दोहराइए।
तुल्यता बिंदु = समीकरण के अनुसार अम्ल और क्षारक के मोल बराबर। अंत बिंदु = सूचक का रंग बदलना।
अनुमापन वक्र और सूचक का चुनाव
डाले गए क्षारक के आयतन के सामने pH का ग्राफ S-आकार का अनुमापन वक्र बनता है।
- प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक: pH लगभग 3 से 11 तक तेज़ी से उछलता है, तुल्यता pH 7 पर। फिनॉल्फ्थेलिन या मेथिल ऑरेंज दोनों ठीक।
- दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक: तुल्यता 7 से ऊपर (लगभग 8.7)। फिनॉल्फ्थेलिन लीजिए। आधी तुल्यता पर pH = pKa।
- प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक: तुल्यता 7 से नीचे (लगभग 5)। मेथिल ऑरेंज लीजिए।
- दुर्बल + दुर्बल: तेज़ उछाल नहीं, pH मीटर का प्रयोग करें।
नियम: ऐसा सूचक चुनिए जिसका रंग-परिवर्तन परास वक्र के खड़े हिस्से में हो।
अनुमापन की गणनाएँ
मोल = सांद्रता (mol/L) × आयतन (L)। संतुलित समीकरण का अनुपात लगाइए।
HCl + NaOH (1 : 1): CaVa = CbVb।
H₂SO₄ + 2NaOH: 2CaVa = CbVb।
तुल्यता से पहले: [H⁺] = बचे अम्ल के मोल ÷ कुल आयतन। बाद में: [OH⁻] = अतिरिक्त क्षारक ÷ कुल आयतन, फिर pH = 14 − pOH (25 °C)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n = C × V (V लीटर में)
- 1 : 1 अभिक्रिया: C₁V₁ = C₂V₂
- a·CₐVₐ = b·C_bV_b
- pH = −log[H⁺]; pH + pOH = 14 (25 °C)
- दुर्बल अम्ल, आधी तुल्यता पर: pH = pKa
हल किए गए उदाहरण
1. नाम लिखिए: (a) HNO₂ (b) K₂SO₄ (c) Fe(OH)₂ (d) NaHCO₃
(a) नाइट्रस अम्ल। (b) पोटैशियम सल्फेट। (c) आयरन(II) हाइड्रॉक्साइड। (d) सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट, एक अम्लीय लवण।
2. मैग्नीशियम से मैग्नीशियम क्लोराइड तक आनुवंशिक श्रृंखला लिखिए।
2Mg + O₂ → 2MgO; MgO + H₂O → Mg(OH)₂; Mg(OH)₂ + 2HCl → MgCl₂ + 2H₂O।
3. 25.0 mL HCl को 0.100 M NaOH के 20.0 mL चाहिए। [HCl] ज्ञात कीजिए।
n(NaOH) = 0.100 × 0.0200 = 0.00200 mol = n(HCl)। C = 0.00200 ÷ 0.0250 = 0.0800 M।
4. 20.0 mL H₂SO₄ को 0.250 M NaOH के 32.0 mL उदासीन करते हैं। [H₂SO₄]?
n(NaOH) = 0.00800 mol। अनुपात 1 : 2, तो n(H₂SO₄) = 0.00400 mol। C = 0.00400 ÷ 0.0200 = 0.200 M।
5. 25.0 mL 0.100 M HCl में 0.100 M NaOH के 20.0 mL डालने पर pH?
अम्ल 0.00250 mol, क्षारक 0.00200 mol। बचा H⁺ = 0.000500 mol, कुल 45.0 mL में। [H⁺] = 0.0111 M, pH = 1.95।
6. उसी फ्लास्क में 30.0 mL NaOH के बाद pH?
अतिरिक्त OH⁻ = 0.000500 mol, 55.0 mL में। [OH⁻] = 0.00909 M, pOH = 2.04, pH = 11.96। सिर्फ 10 mL में pH 2 से 12 हो गया – यही वक्र का खड़ा हिस्सा है।
आम गलतियाँ
- मोल निकालने से पहले mL को L में न बदलना।
- H₂SO₄ + NaOH में भी C₁V₁ = C₂V₂ लगाना; 1 : 2 अनुपात ज़रूरी है।
- सोचना कि तुल्यता बिंदु हमेशा pH 7 पर होता है। सिर्फ प्रबल + प्रबल में 7 होता है।
- ब्यूरेट को ऊपर या नीचे से पढ़ना (लंबन त्रुटि), या ब्यूरेट को पहले क्षारक से न धोना।