अनुमापन क्या है?
अनुमापन से पता करते हैं कि कोई विलयन कितना सांद्र (तेज़) है। इसके लिए उसे ऐसे विलयन से मिलाते हैं जिसकी सांद्रता हमें पहले से पता है।
- अनुमापक (titrant): ज्ञात सांद्रता वाला विलयन, ब्यूरेट में।
- अनुमेय (analyte): अनजान सांद्रता वाला विलयन, पिपेट से शंक्वाकार फ्लास्क में नापकर।
- सूचक (indicator): एक रंजक जो अभिक्रिया पूरी होने पर रंग बदलता है।
अंत बिंदु (end point) वह पल है जब हमें रंग बदलता दिखे और हम रुक जाएँ। तुल्यता बिंदु (equivalence point) वह पल है जब ठीक उतना अनुमापक डल गया जितना सारे अनुमेय से अभिक्रिया के लिए चाहिए। सही सूचक अंत बिंदु को तुल्यता बिंदु के लगभग ऊपर ले आता है।
अनुमापन करने की विधि (क़दम दर क़दम)
- ब्यूरेट को अनुमापक से और पिपेट को अनुमेय से खँगालो (पानी से नहीं, वरना विलयन पतला हो जाएगा)।
- ब्यूरेट भरो, नोक के बुलबुले निकालो, और शुरुआती पाठ्यांक आँख के स्तर पर, वक्र सतह (मेनिस्कस) के निचले हिस्से से पढ़ो।
- पिपेट से तय आयतन (जैसे 25.0 mL) अनुमेय फ्लास्क में डालो और 2–3 बूँद सूचक मिलाओ।
- फ्लास्क घुमाते हुए अनुमापक डालो। आख़िर में बूँद-बूँद डालो।
- पहला टिकाऊ रंग बदलते ही रुको और अंतिम पाठ्यांक पढ़ो। अंतर ही टाइटर (titre) है।
- तब तक दोहराओ जब तक दो टाइटर 0.10 mL के अंदर न मिल जाएँ (संगत पाठ्यांक), फिर उनका औसत लो।
हिसाब: मोल, अनुपात और C₁V₁ = C₂V₂
तीन क़दम:
- इस्तेमाल हुए अनुमापक के मोल: n = C × V (V लीटर में)।
- संतुलित समीकरण से अनुमेय के मोल निकालो (मोल अनुपात)।
- अनुमेय की सांद्रता: C = n ÷ V।
HCl + NaOH → NaCl + H₂O जैसी 1 : 1 अभिक्रिया में यह C₁V₁ = C₂V₂ बन जाता है। H₂SO₄ + 2NaOH में अम्ल को दोगुने मोल क्षार चाहिए, तो n(अम्ल) = n(क्षार) ÷ 2।
pH वक्र और तुल्यता बिंदु
हर बार डालने के बाद pH मीटर से pH नापें तो pH वक्र बनता है।
- प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार: pH लगभग 1 से शुरू, लगभग 3 से 11 तक बहुत तेज़ छलाँग, तुल्यता pH 7 पर।
- दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार: शुरुआत ऊँची (लगभग pH 3), फिर हल्का सपाट भाग, जिसे बफ़र भाग कहते हैं। तुल्यता 7 से ऊपर (लगभग 8.7), क्योंकि बना लवण थोड़ा क्षारीय है।
- प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार: तुल्यता 7 से नीचे।
बफ़र भाग में हेंडरसन–हैसलबाख समीकरण लगता है: pH = pKa + log([A⁻]/[HA])। तुल्यता के आधे रास्ते पर [A⁻] = [HA], इसलिए pH = pKa। इसी से pKa नापा जाता है।
सूचक चुनना: सूचक के रंग बदलने की सीमा तेज़ छलाँग के अंदर होनी चाहिए। फ़ीनॉल्फ़्थेलिन (8.2–10) दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार के लिए; मेथिल ऑरेंज (3.1–4.4) प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार के लिए; प्रबल + प्रबल में दोनों चलते हैं।
अनुमापन के दूसरे प्रकार
- रेडॉक्स अनुमापन: ऑक्सीकारक और अपचायक की अभिक्रिया। बैंगनी पोटैशियम परमैंगनेट (MnO₄⁻) Fe²⁺ से अभिक्रिया करके रंगहीन होता है, इसलिए यह ख़ुद ही सूचक है। विलयन का विभव (नर्न्स्ट समीकरण) तुल्यता पर उछलता है, जिसे इलेक्ट्रोड से देखा जा सकता है।
- चालकतामितीय अनुमापन: रंग की जगह चालकता मीटर। हर आयन चालकता में अपना तय हिस्सा देता है (कोलराउश का नियम)। HCl + NaOH में तेज़ H⁺ की जगह धीमे Na⁺ आते हैं, तो चालकता घटती है; तुल्यता के बाद अतिरिक्त OH⁻ से फिर बढ़ती है। सबसे निचला बिंदु तुल्यता बिंदु है। रंगीन विलयनों में भी काम करता है।
- अवक्षेपण अनुमापन: सिल्वर नाइट्रेट क्लोराइड से ठोस AgCl बनाता है, क्योंकि AgCl बहुत ही कम घुलता है (छोटा विलेयता गुणनफल)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n = C × V (V लीटर में)
- C₁V₁ = C₂V₂ (1 : 1 अभिक्रिया)
- n(अनुमेय) = n(अनुमापक) × (समीकरण का अनुपात)
- pH = pKa + log([A⁻]/[HA]) (हेंडरसन–हैसलबाख)
- आधी तुल्यता पर: pH = pKa
हल किए गए उदाहरण
1. 25.0 mL HCl के लिए 0.100 M NaOH का 20.0 mL लगा। HCl की सांद्रता निकालो।
n(NaOH) = 0.100 × 0.0200 = 0.00200 mol। अनुपात 1 : 1, तो n(HCl) = 0.00200 mol। C = 0.00200 ÷ 0.0250 = 0.0800 M।
2. टाइटर 24.60, 24.20, 24.25 mL आए। कौन-सा टाइटर लें?
24.60 पहला मोटा (rough) प्रयास है। 24.20 और 24.25 आपस में 0.10 mL के अंदर हैं, तो औसत = (24.20 + 24.25) ÷ 2 = 24.23 mL।
3. 20.0 mL H₂SO₄ को 0.150 M NaOH का 32.0 mL उदासीन करता है। C(H₂SO₄) निकालो।
n(NaOH) = 0.150 × 0.0320 = 0.00480 mol। H₂SO₄ + 2NaOH, तो n(अम्ल) = 0.00480 ÷ 2 = 0.00240 mol। C = 0.00240 ÷ 0.0200 = 0.120 M।
4. सिरके के 10.0 mL नमूने के लिए 0.500 M NaOH का 16.0 mL लगा। एथेनोइक अम्ल की सांद्रता g/L में बताओ (M = 60 g/mol)।
n(NaOH) = 0.500 × 0.0160 = 0.00800 mol = n(अम्ल)। C = 0.00800 ÷ 0.0100 = 0.800 M। द्रव्यमान सांद्रता = 0.800 × 60 = 48 g/L।
5. दुर्बल अम्ल HA को NaOH से अनुमापित किया। आधे तुल्यता आयतन पर pH 4.8 है। Ka निकालो।
आधी तुल्यता पर pH = pKa, तो pKa = 4.8 और Ka = 10⁻⁴·⁸ ≈ 1.6 × 10⁻⁵।
6. 25.0 mL Fe²⁺ के लिए 0.0200 M KMnO₄ का 18.0 mL लगा। MnO₄⁻ + 5Fe²⁺ + 8H⁺ → Mn²⁺ + 5Fe³⁺ + 4H₂O। C(Fe²⁺) निकालो।
n(MnO₄⁻) = 0.0200 × 0.0180 = 3.60 × 10⁻⁴ mol। अनुपात 1 : 5, तो n(Fe²⁺) = 1.80 × 10⁻³ mol। C = 1.80 × 10⁻³ ÷ 0.0250 = 0.0720 M।
आम गलतियाँ
- n = C × V में mL लगा देना। mL को लीटर में बदलो (1000 से भाग), या C₁V₁ = C₂V₂ में दोनों तरफ़ mL रखो।
- मोल अनुपात भूल जाना। C₁V₁ = C₂V₂ सिर्फ़ 1 : 1 अभिक्रिया (जैसे HCl + NaOH) के लिए है।
- अंत बिंदु और तुल्यता बिंदु को हमेशा एक मानना। अंत बिंदु वह है जो दिखता है; ग़लत सूचक से यह असली तुल्यता से अलग हो जाता है।
- तुल्यता बिंदु को हमेशा pH 7 मानना। यह सिर्फ़ प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार में 7 होता है।