शुद्ध पदार्थ और मिश्रण
शुद्ध पदार्थ में सिर्फ़ एक तरह के कण होते हैं, जैसे पानी, नमक, सोना। मिश्रण में दो या ज़्यादा पदार्थ किसी भी मात्रा में मिले होते हैं। हर हिस्सा अपने गुण रखता है। पानी में पड़ी रेत रेत ही रहती है।
शुद्ध पदार्थ दो तरह के हैं: तत्व (एक ही तरह के परमाणु, जैसे लोहा, ऑक्सीजन) और यौगिक (अलग-अलग तत्वों के परमाणु तय अनुपात में जुड़े, जैसे पानी H₂O)।
| मिश्रण | यौगिक |
|---|---|
| कोई भी अनुपात | द्रव्यमान का तय अनुपात |
| हिस्से अपने गुण रखते हैं | नए गुण |
| आसान भौतिक विधि से अलग | सिर्फ़ रासायनिक अभिक्रिया से अलग |
| लोहे का बुरादा + गंधक (चुंबक लोहा खींच लेता है) | आयरन सल्फाइड (चुंबक लोहा नहीं खींच पाता) |
समांगी और विषमांगी मिश्रण
समांगी यानी "पूरे में एक जैसा"। चीनी-पानी, नमक-पानी, हवा और पीतल समांगी हैं। अलग हिस्से दिखते नहीं, आवर्धक लेंस से भी नहीं।
विषमांगी यानी "पूरे में एक जैसा नहीं"। रेत-पानी, तेल-पानी, फलों का सलाद और मिट्टी विषमांगी हैं। हिस्से दिखते हैं या नीचे बैठ जाते हैं।
याद रखो: समांगी मिश्रण को विलयन कहते हैं। विलयन ठोस (पीतल जैसी मिश्रधातु), द्रव (शिकंजी) या गैस (हवा) हो सकता है।
विलयन, कोलॉइड और निलंबन
विलयन में विलेय (जो घुलता है, जैसे नमक) और विलायक (जिसमें घुलता है, जैसे पानी) होते हैं। कण 1 nm से छोटे होते हैं। वे फ़िल्टर पेपर से निकल जाते हैं, नीचे नहीं बैठते और प्रकाश नहीं फैलाते।
निलंबन में 1000 nm से बड़े ठोस कण द्रव में तैरते हैं, जैसे चॉक-पानी या गंदा पानी। कण दिखते हैं, रखे रहने पर नीचे बैठ जाते हैं और फ़िल्टर पेपर उन्हें रोक लेता है। यह विषमांगी है।
कोलॉइड बीच का है (1–1000 nm)। दूध, कोहरा, धुआँ, जेली और शेविंग क्रीम कोलॉइड हैं। कण नीचे नहीं बैठते और फ़िल्टर पेपर से निकल जाते हैं, पर प्रकाश फैलाने लायक बड़े होते हैं। कोलॉइड एक जैसा दिखता है पर असल में विषमांगी है।
टिंडल प्रभाव
जब प्रकाश की किरण कोलॉइड या निलंबन से गुज़रती है, तो कण प्रकाश को फैलाते हैं और किरण का रास्ता दिखने लगता है। सच्चे विलयन में रास्ता नहीं दिखता। इसे टिंडल प्रभाव कहते हैं।
कोलॉइड के भाग
कण परिक्षिप्त प्रावस्था हैं; जिसमें वे फैले हैं वह परिक्षेपण माध्यम है। एरोसोल (कोहरा: गैस में द्रव), इमल्शन (दूध: द्रव में द्रव), फ़ोम (शेविंग क्रीम: द्रव में गैस), जेल (जेली: ठोस में द्रव), सॉल (पेंट: द्रव में ठोस)।
विलयन की सांद्रता
सांद्रता बताती है कि विलयन की दी गई मात्रा में कितना विलेय है। ज़्यादा विलेय = सांद्र; कम = तनु।
- द्रव्यमान प्रतिशत = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
- द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत = (विलेय g में ÷ विलयन mL में) × 100
- आयतन प्रतिशत = (विलेय का आयतन ÷ विलयन का आयतन) × 100
याद रखो: विलयन = विलेय + विलायक। हमेशा पूरे विलयन से भाग दो, सिर्फ़ विलायक से नहीं।
संतृप्त विलयन उस तापमान पर और विलेय नहीं घोल सकता। 100 g पानी में जितना विलेय घुलकर संतृप्त विलयन बनाता है, वह उसकी विलेयता है। गरम पानी आमतौर पर ज़्यादा ठोस घोलता है।
पृथक्करण की विधियाँ
हर विधि मिश्रण के हिस्सों के किसी अंतर का फ़ायदा उठाती है।
- वाष्पीकरण: घोल को गरम करो जब तक द्रव उड़ न जाए (स्याही से रंग, समुद्री पानी से नमक)।
- क्रिस्टलीकरण: घोल को गरम करके गाढ़ा करो, फिर ठंडा करो। शुद्ध क्रिस्टल बनते हैं, अशुद्धियाँ घोल में रह जाती हैं। यह वाष्पीकरण से ज़्यादा शुद्ध ठोस देता है (फिटकरी, कॉपर सल्फेट, चीनी)।
- आसवन: दो घुलनशील द्रव जिनके क्वथनांक में 25 °C से ज़्यादा अंतर हो (एसीटोन और पानी)। कम क्वथनांक वाला पहले उबलता है, उसकी भाप संघनित्र में ठंडी होकर टपकती है। अंतर कम हो तो प्रभाजी आसवन (पेट्रोलियम, हवा की गैसें)।
- क्रोमैटोग्राफी: एक ही विलायक में घुलने वाले रंग (स्याही के रंग, पत्ती के वर्णक, खून की जाँच में दवाएँ)। जो रंग ज़्यादा घुलता है वह कागज़ पर तेज़ चढ़ता है।
- ऊर्ध्वपातन: जो ठोस सीधे गैस बने (अमोनियम क्लोराइड, कपूर, नैफ़्थलीन, आयोडीन) उसे न बनने वाले (नमक) से अलग करना।
- अपकेंद्रण: तेज़ घुमाओ; भारी कण नीचे जाते हैं (दूध से क्रीम, खून की जाँच, वॉशिंग मशीन का ड्रायर)।
- स्कंदन: गंदे पानी में फिटकरी डालो; बारीक कण चिपककर बड़े होकर नीचे बैठते हैं। फिर निथारो और छानो।
- और: न मिलने वाले द्रवों (तेल-पानी) के लिए पृथक्कारी कीप, लोहे के लिए चुंबक, न घुलने वाले ठोस के लिए छानना।
घर पर करके देखो
- टॉर्च टेस्ट: तीन साफ़ गिलास में नमक-पानी, कुछ बूँद दूध वाला पानी और चॉक-पानी लो। अँधेरे कमरे में मोबाइल टॉर्च बगल से चमकाओ। किस गिलास में किरण दिखती है?
- रसोई क्रोमैटोग्राफी: फ़िल्टर पेपर या सफ़ेद टिश्यू की पट्टी पर नीचे से 2 cm ऊपर काले स्केच पेन से बिंदु बनाओ। सिरा (बिंदु नहीं) पानी में डुबाओ। 10 मिनट बाद रंग गिनो।
- पहले अंदाज़ा, फिर 3D में जाँचो: चरण 4 में स्लाइडर 10 g पर रखो। देखने से पहले द्रव्यमान % का अंदाज़ा लगाओ। (उत्तर: 10 ÷ 100 × 100 = 10%)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- द्रव्यमान % = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
- द्रव्यमान-आयतन % = (विलेय g में ÷ विलयन mL में) × 100
- आयतन % = (विलेय का आयतन ÷ विलयन का आयतन) × 100
- विलयन का द्रव्यमान = विलेय + विलायक
- विलयन < 1 nm · कोलॉइड 1–1000 nm · निलंबन > 1000 nm
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण करो: हवा, मिट्टी, पीतल, दूध, रेत-पानी, चीनी-पानी।
समांगी: हवा, पीतल, चीनी-पानी। विषमांगी: मिट्टी, रेत-पानी। दूध कोलॉइड है, जो एक जैसा दिखता है पर असल में विषमांगी है।
2. 180 g पानी में 20 g नमक घोला। द्रव्यमान प्रतिशत निकालो।
विलयन = 20 + 180 = 200 g। द्रव्यमान % = 20 ÷ 200 × 100 = 10%।
3. 250 mL विलयन में 5 g चीनी है। द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत निकालो।
5 ÷ 250 × 100 = 2%।
4. 30 mL अल्कोहल को पानी में मिलाकर 150 mL विलयन बनाया। आयतन प्रतिशत निकालो।
30 ÷ 150 × 100 = 20%।
5. 250 g का 12% (द्रव्यमान) चीनी का घोल बनाने के लिए कितनी चीनी और कितना पानी चाहिए?
चीनी = 0.12 × 250 = 30 g। पानी = 250 − 30 = 220 g।
6. नमक, रेत और अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण को कैसे अलग करोगे?
1: सूखे मिश्रण को उलटी कीप के नीचे गरम करो; अमोनियम क्लोराइड ऊर्ध्वपातित होकर कीप पर जमता है। 2: बचे हिस्से में पानी डालो; नमक घुलता है, रेत नहीं। 3: छानकर रेत अलग करो। 4: छनित को वाष्पित (या क्रिस्टलीकृत) करके नमक पाओ।
7. हवा की गैसें साधारण आसवन से क्यों अलग नहीं होतीं? क्या करते हैं?
नाइट्रोजन (−196 °C) और आर्गन (−186 °C) के क्वथनांक में सिर्फ़ 10 °C का अंतर है। हवा को ठंडा और दबाकर द्रव बनाते हैं, फिर प्रभाजी स्तंभ में धीरे-धीरे गरम करते हैं। हर गैस अपनी ऊँचाई पर निकलती है। यह प्रभाजी आसवन है।
आम गलतियाँ
- विलयन की जगह विलायक से भाग देना। 20 g नमक + 180 g पानी में 200 g लो, 180 g नहीं।
- दूध को विलयन कहना। दूध कोलॉइड है, यह टिंडल प्रभाव दिखाता है।
- मिश्रण का अनुपात तय मानना। तय अनुपात सिर्फ़ यौगिक में होता है।
- शुद्ध क्रिस्टल चाहिए तब वाष्पीकरण करना। वाष्पीकरण में अशुद्धियाँ ठोस में रह जाती हैं; क्रिस्टलीकरण ज़्यादा शुद्ध देता है।