हम आणविक मॉडल क्यों बनाते हैं
परमाणु इतने छोटे हैं कि दिखते नहीं। मॉडल एक सरल नकल है जिसमें ज़रूरी बातें रखी जाती हैं और बाकी छोड़ दी जाती हैं। मॉडल से हम पूछ सकते हैं: कौन-से परमाणु जुड़े हैं? आबंधों के बीच कोण कितना है? क्या दो अणु आपस में फिट होंगे?
किसी काम में मॉडल इस्तेमाल करने के तीन कदम: (1) सूत्र लिखिए और लुईस संरचना बनाइए, (2) मॉडल बनाइए या खोलिए, (3) मॉडल से आकार, कोण और आकार-माप पढ़िए।
बॉल-स्टिक और स्पेस-फ़िलिंग मॉडल
बॉल-स्टिक: गेंदें परमाणु हैं, छड़ें आबंध। द्विआबंध में दो छड़ें लगती हैं। इसमें आबंध की लंबाई और कोण साफ़ दिखते हैं, पर गेंदें असली परमाणु से छोटी बनाई जाती हैं।
स्पेस-फ़िलिंग: गेंदें परमाणु जितनी बड़ी होती हैं और एक-दूसरे को छूती हैं। इसमें अणु की बाहरी सतह और घेरी हुई जगह दिखती है, पर आबंध साफ़ नहीं दिखते।
कंप्यूटर मॉडल दोनों दिखा सकते हैं, आराम से घुमा सकते हैं, सतह को आवेश के हिसाब से रंग सकते हैं और कोण-दूरी नाप सकते हैं। रंग तय हैं: C काला/धूसर, H सफ़ेद, O लाल, N नीला।
मॉडल से आकार का अनुमान
केंद्रीय परमाणु के चारों ओर इलेक्ट्रॉन जोड़े एक-दूसरे को धकेलते हैं, इसलिए जितना हो सके दूर फैलते हैं। जोड़े गिनिए (आबंध जोड़े + अकेले जोड़े):
- 2 जोड़े: सीधी रेखा, 180° (CO₂)।
- 3 जोड़े: समतल त्रिभुज, 120°।
- 4 जोड़े, अकेला जोड़ा नहीं: चतुष्फलक, 109.5° (CH₄)।
- 4 जोड़े, 1 अकेला जोड़ा: पिरामिड, लगभग 107° (NH₃)।
- 4 जोड़े, 2 अकेले जोड़े: मुड़ा हुआ, लगभग 104.5° (H₂O)।
अकेले जोड़े आबंध जोड़ों से ज़्यादा ज़ोर से धकेलते हैं, इसलिए कोण थोड़ा घट जाता है। आकार का नाम सिर्फ़ परमाणुओं की स्थिति से रखा जाता है।
अभिक्रिया की क्रियाविधि का मॉडल
क्रियाविधि बताती है कि अभिक्रिया कदम-दर-कदम कैसे होती है: कौन-से आबंध टूटते हैं, कौन-से बनते हैं और किस क्रम में। मुड़े तीर बताते हैं कि इलेक्ट्रॉन जोड़ा कहाँ जाता है।
उदाहरण, SN2: OH⁻, CH₃Br के कार्बन पर Br की उलटी दिशा से हमला करता है। एक ही कदम में C–O आबंध बनता है और C–Br टूटता है। बीच में कार्बन दोनों से आधा जुड़ा होता है और तीनों H एक समतल में आ जाते हैं। अंत में तीनों H तेज़ हवा में छाते की तरह पलट जाते हैं। इसे प्रतिलोमन (inversion) कहते हैं।
जब अभिक्रिया में कई कदम हों, तो सबसे धीमा कदम दर-निर्धारक कदम कहलाता है। हर कदम का मॉडल देखकर पता चलता है कि कौन-सा सबसे धीमा है।
क्रियाविधि में उत्प्रेरक
उत्प्रेरक अभिक्रिया को नया रास्ता देता है जिसमें ऊर्जा की बाधा कम होती है। क्रियाविधि में वह एक कदम में भाग लेता है और बाद के कदम में वापस मिल जाता है, इसलिए खर्च नहीं होता। मॉडल में दिखता है कि उत्प्रेरक की सतह या अणु अभिकारकों को सही स्थिति में पकड़ता है, ताकि वे सही दिशा में मिलें।
खुद करके देखिए
किट नहीं है? 5 अंगूर या टॉफ़ी को परमाणु और टूथपिक को आबंध बनाइए। एक बीच की गेंद पर 4 टूथपिक लगाकर CH₄ बनाइए। कोशिश कीजिए कि चारों एक ही समतल में हों। क्या यह स्वाभाविक लगता है? उन्हें फैलाइए तो चतुष्फलक अपने-आप बन जाएगा। ऊपर के 3D में अणु चुनिए, आकार का अनुमान लगाइए, फिर जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- इलेक्ट्रॉन जोड़े = आबंध जोड़े + केंद्रीय परमाणु पर अकेले जोड़े
- 2 जोड़े: 180°; 3 जोड़े: 120°; 4 जोड़े: 109.5° (अकेले जोड़े होने पर कम)
- एल्केन CnH(2n+2) में छड़ें: 3n + 1
- SN2: Nu⁻ + R–X → R–Nu + X⁻ (एक कदम, प्रतिलोमन)
- रंग: C काला, H सफ़ेद, O लाल, N नीला
हल किए गए उदाहरण
1. CO₂ का आकार बताइए और कारण दीजिए।
कार्बन पर 2 द्विआबंध हैं और अकेला जोड़ा नहीं, यानी 2 इलेक्ट्रॉन क्षेत्र। वे 180° पर फैलते हैं। CO₂ रैखिक है।
2. NH₃ पिरामिड क्यों है, समतल क्यों नहीं?
नाइट्रोजन पर 3 आबंध जोड़े और 1 अकेला जोड़ा है, कुल 4 जोड़े। ये चतुष्फलक बनाते हैं और 3 H उसका आधार बनाते हैं। अकेला जोड़ा H को नीचे धकेलता है, कोण लगभग 107°।
3. ईथेन (C₂H₆) का बॉल-स्टिक मॉडल बनाना है। कितनी गेंदें और छड़ें चाहिए?
गेंदें: 2 C + 6 H = 8। छड़ें: 1 C–C + 6 C–H = 7।
4. CH₃Br + OH⁻ (SN2) में OH⁻, Br की उलटी दिशा से क्यों हमला करता है?
Br बड़ा परमाणु है और आंशिक ऋणावेश रखता है, OH⁻ भी ऋणात्मक है। उलटी दिशा से आने पर दोनों दूर रहते हैं और C–O बनते समय C–Br टूट सकता है। इससे तीनों H पलट जाते हैं।
5. कोई अणु छोटी जेब में फिट होगा या नहीं, यह देखने के लिए कौन-सा मॉडल लेंगे और क्यों?
स्पेस-फ़िलिंग मॉडल। उसकी गेंदें असली आकार दिखाती हैं, इसलिए फिट का पता चलता है।
आम गलतियाँ
- यह मान लेना कि बॉल-स्टिक में गेंदें असली परमाणु जितनी हैं। छड़ें दिखें, इसलिए गेंदें छोटी रखी जाती हैं।
- द्विआबंध को एक छड़ गिनना। छड़ें दो खींचिए, पर आकार निकालते समय उसे एक इलेक्ट्रॉन क्षेत्र मानिए।
- अकेले जोड़े भूल जाना। पानी में 4 जोड़े हैं, इसलिए तीन ही परमाणु होने पर भी वह सीधा नहीं, मुड़ा है।
- मॉडल को असली अणु समझ लेना। मॉडल सरल तस्वीर है; असली अणु काँपते हैं और उनके कठोर किनारे नहीं होते।