कार्बनिक अभिक्रियाओं के प्रकार
- प्रतिस्थापन: कोई परमाणु या समूह बदल जाता है। CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl
- योगात्मक: C=C या C=O पर परमाणु जुड़ते हैं; दो अणु एक बनते हैं। CH₂=CH₂ + HCl → CH₃CH₂Cl
- विलोपन: छोटा अणु (H₂O, HCl) निकलता है और द्वि-बंध बनता है। CH₃CH₂OH → CH₂=CH₂ + H₂O (गरम सांद्र अम्ल)
- संघनन: दो अणु जुड़ते और छोटा अणु, अक्सर पानी, निकलता है। अम्ल + ऐल्कोहॉल → एस्टर + पानी।
- जल-अपघटन: पानी बंध तोड़ता है; संघनन का उल्टा।
- बहुलकीकरण: बहुत-से छोटे एकलक जुड़कर लंबी शृंखला बनाते हैं (योगात्मक बहुलक जैसे पॉलिथीन; संघनन बहुलक जैसे नायलॉन, प्रोटीन)।
बंध कैसे टूटते हैं और कौन-से कण अभिक्रिया करते हैं
क्रियाविधि अभिक्रिया का कदम-दर-कदम रास्ता है: कौन-से बंध टूटे, कौन-से बने और इलेक्ट्रॉन कैसे चले। मुड़ा तीर इलेक्ट्रॉन जोड़ी की चाल दिखाता है (बंध या एकाकी युग्म से परमाणु की ओर)।
बंध विखंडन
- समांश: हर परमाणु एक इलेक्ट्रॉन लेता है → दो मुक्त मूलक (बिंदु के साथ, जैसे Cl•)। UV प्रकाश या गर्मी चाहिए।
- विषमांश: एक परमाणु दोनों इलेक्ट्रॉन ले लेता है → धनायन और ऋणायन। ध्रुवीय बंधों में होता है।
हमलावर
- नाभिकस्नेही: इलेक्ट्रॉन-युग्म दाता, एकाकी युग्म या ऋण आवेश वाला: OH⁻, H₂O, NH₃, CN⁻, ऐल्कोहॉल का O।
- इलेक्ट्रॉनस्नेही: इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही, धन या δ+: H⁺, NO₂⁺, C=O का C, ध्रुवित Br₂ का Br।
- मुक्त मूलक: एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन वाला; बहुत क्रियाशील।
मध्यवर्ती: कार्बधनायन (C⁺), कार्बऋणायन (C⁻) और मुक्त मूलक (C•)।
तीन प्रसिद्ध क्रियाविधियाँ
1. मुक्त मूलक प्रतिस्थापन: मीथेन का क्लोरीनीकरण
- आरंभन: Cl₂ → 2Cl• (UV प्रकाश)
- संचरण: Cl• + CH₄ → HCl + •CH₃; •CH₃ + Cl₂ → CH₃Cl + Cl•
- समापन: दो मूलक जुड़ते हैं, जैसे Cl• + •CH₃ → CH₃Cl
यही मूलक शृंखला प्रकाश में H₂ + Cl₂ → 2HCl भी समझाती है। आगे प्रतिस्थापन से CH₂Cl₂, CHCl₃, CCl₄ बन सकते हैं।
2. इलेक्ट्रॉनस्नेही योग: एथीन पर HCl
C=C इलेक्ट्रॉन-धनी है। H–Cl का H (δ+) इलेक्ट्रॉनस्नेही है। π इलेक्ट्रॉन H⁺ पर हमला करते हैं, कार्बधनायन CH₃–CH₂⁺ और Cl⁻ बनते हैं; फिर Cl⁻ (नाभिकस्नेही) C⁺ से जुड़ता है → क्लोरोएथेन।
3. इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन: बेंज़ीन का क्लोरीनीकरण
बेंज़ीन का वलय बहुत स्थायी है, इसलिए वह योग की जगह प्रतिस्थापन करता है। उत्प्रेरक (FeCl₃ या AlCl₃) Cl⁺ बनाता है: Cl₂ + FeCl₃ → Cl⁺ + FeCl₄⁻। Cl⁺ वलय पर हमला करता है, फिर H⁺ निकलता है ताकि वलय ऐरोमैटिक बना रहे: C₆H₆ + Cl₂ → C₆H₅Cl + HCl।
एस्टर: संघनन, जल-अपघटन और उत्क्रमणीयता
एस्टरीकरण: कार्बोक्सिलिक अम्ल + ऐल्कोहॉल ⇌ एस्टर + पानी, थोड़े सांद्र H₂SO₄ उत्प्रेरक और गरम करके। CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O (एथिल एथेनोएट)।
आसान कदमों में क्रियाविधि
- H⁺, C=O के ऑक्सीजन से जुड़ता है, कार्बन ज़्यादा δ+ (बेहतर इलेक्ट्रॉनस्नेही) बनता है।
- ऐल्कोहॉल का O (नाभिकस्नेही) उस कार्बन पर हमला करता है।
- एक प्रोटॉन खिसकता है और पानी निकल जाता है।
- H⁺ फिर निकलता है: उत्प्रेरक वापस मिल जाता है।
उत्क्रमणीयता
हर कदम उल्टा भी चल सकता है, इसलिए साम्य बनता है। पानी हटाने या ज़्यादा ऐल्कोहॉल लेने से ज़्यादा एस्टर बनता है (ला-शातेलिए)।
जल-अपघटन
- अम्लीय जल-अपघटन: एस्टर + पानी ⇌ अम्ल + ऐल्कोहॉल (उत्क्रमणीय)।
- क्षारीय जल-अपघटन: एस्टर + OH⁻ → कार्बोक्सिलेट + ऐल्कोहॉल। OH⁻, C=O के कार्बन पर हमला करता है। यह पूरा होता है क्योंकि अम्ल लवण बन जाता है। वसा के साथ इसे साबुनीकरण कहते हैं।
गुण और उपयोग
छोटे एस्टर फलों जैसी ख़ुशबू वाले, वाष्पशील, समान आकार के अम्लों से कम क्वथनांक वाले (एस्टर अणुओं में O–H हाइड्रोजन बंध नहीं) और पानी में कम घुलनशील होते हैं। उपयोग: स्वाद, इत्र, विलायक (नेल-पॉलिश रिमूवर), प्लास्टिक (पॉलिएस्टर)। ऐस्पिरिन सैलिसिलिक अम्ल के –OH के एस्टरीकरण (एथेनॉइक ऐनहाइड्राइड से) से बनती है; नमी या शरीर में धीरे-धीरे जल-अपघटित होती है। सेलुलोज़ का एस्टरीकरण सेलुलोज़ ऐसीटेट (फ़िल्म, रेशे) देता है।
सजीवों में संघनन और जल-अपघटन
- पेप्टाइड बंध: एक अमीनो अम्ल का –COOH + दूसरे का –NH₂ → –CO–NH– + H₂O। प्रोटीन संघनन से बनी शृंखलाएँ हैं।
- शर्कराएँ: ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ (C₆H₁₂O₆) संघनन से सुक्रोज़ + H₂O बनाते हैं। पानी में ग्लूकोज़ वलय बनाता है: कार्बन 5 का –OH (नाभिकस्नेही) C=O के कार्बन (इलेक्ट्रॉनस्नेही) से जुड़ता है, यह नाभिकस्नेही योग है।
- कीटो-ईनॉल चलावयवता: C–H के पास वाला C=O एक H खिसकाकर C=C–OH (ईनॉल) बना सकता है और वापस भी। इसी से क्षार में ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ एक-दूसरे में बदल सकते हैं।
- पाचन में एंज़ाइमी जल-अपघटन: एमाइलेज़ स्टार्च को माल्टोज़ में तोड़ता है; प्रोटिएज़ प्रोटीन को अमीनो अम्लों में; लाइपेज़ वसा को वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में। एंज़ाइम शरीर के तापमान पर उत्प्रेरक हैं।
घर पर करके देखो
कुछ फल सूँघो: केला, अनानास, संतरा। हर ख़ुशबू ज़्यादातर एक अलग एस्टर है। फिर सिरके (एथेनॉइक अम्ल) की कुछ बूँदें खाने के सोडे में डालो: यह अम्ल की अभिक्रिया है, एस्टरीकरण नहीं। घर पर एस्टर बनाना सुरक्षित क्यों नहीं? (इसमें प्रबल अम्ल उत्प्रेरक और गर्मी चाहिए।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिस्थापन: CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl (UV प्रकाश)
- योगात्मक: CH₂=CH₂ + HCl → CH₃CH₂Cl
- विलोपन: CH₃CH₂OH → CH₂=CH₂ + H₂O (सांद्र H₂SO₄, गर्मी)
- एस्टरीकरण: RCOOH + R′OH ⇌ RCOOR′ + H₂O (H⁺ उत्प्रेरक)
- क्षारीय जल-अपघटन: RCOOR′ + NaOH → RCOONa + R′OH
- पेप्टाइड बंध: –COOH + H₂N– → –CO–NH– + H₂O
- समांश: A–B → A• + B•; विषमांश: A–B → A⁺ + B⁻
हल किए गए उदाहरण
1. अभिक्रिया का प्रकार बताओ: (a) C₂H₄ + Br₂ → C₂H₄Br₂ (b) C₂H₅Br + OH⁻ → C₂H₅OH + Br⁻ (c) C₂H₅OH → C₂H₄ + H₂O।
(a) योगात्मक, (b) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन, (c) विलोपन (निर्जलीकरण)।
2. मेथेनॉइक अम्ल और एथेनॉल से बने एस्टर का समीकरण और नाम लिखो।
HCOOH + C₂H₅OH ⇌ HCOOC₂H₅ + H₂O। एस्टर एथिल मेथेनोएट है (पहले ऐल्कोहॉल वाला भाग, फिर अम्ल भाग + '-ओएट')।
3. मीथेन क्लोरीनीकरण की तीन अवस्थाएँ लिखो।
आरंभन: Cl₂ → 2Cl•। संचरण: Cl• + CH₄ → HCl + •CH₃ और •CH₃ + Cl₂ → CH₃Cl + Cl•। समापन: जैसे 2Cl• → Cl₂ या Cl• + •CH₃ → CH₃Cl।
4. एथिल एथेनोएट को NaOH(aq) के साथ उबाला। उत्पाद बताओ और अभिक्रिया पूरी क्यों होती है?
CH₃COOC₂H₅ + NaOH → CH₃COONa + C₂H₅OH। अम्ल अपने लवण (एथेनोएट आयन) में बदल जाता है, जो ऐल्कोहॉल से अभिक्रिया नहीं करता, इसलिए उल्टी अभिक्रिया नहीं हो सकती।
5. समझाओ कि H₂O नाभिकस्नेही क्यों है पर H⁺ इलेक्ट्रॉनस्नेही।
पानी के O पर एकाकी युग्म हैं जो वह दे सकता है (इलेक्ट्रॉन-युग्म दाता)। H⁺ के पास कोई इलेक्ट्रॉन नहीं, उसे जोड़ी चाहिए (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही)।
आम गलतियाँ
- मुड़ा तीर इलेक्ट्रॉन लेने वाले परमाणु से शुरू करना। तीर हमेशा इलेक्ट्रॉनों (बंध या एकाकी युग्म) से शुरू होता है।
- सोचना कि बेंज़ीन एथीन की तरह योग करता है। बेंज़ीन आमतौर पर स्थायी वलय बचाने के लिए प्रतिस्थापन करता है।
- भूल जाना कि अम्ल-उत्प्रेरित एस्टरीकरण उत्क्रमणीय है और साम्य पर रुकता है।
- एस्टर का नाम उल्टा लिखना: CH₃COOC₂H₅ एथिल एथेनोएट है (पहले ऐल्कोहॉल भाग 'एथिल')।