Romania Clasa a XI-a Chemistry (real profile)
अध्याय: 3
1. Classes of organic compounds
Compounds with monovalent groups · Compounds with di- and trivalent groups · Compounds with mixed groups · Optical isomerism
- क्रियात्मक समूह: हैलोजन, हाइड्रॉक्सिल और एमीन यौगिक – क्रियात्मक समूह वह परमाणु या परमाणुओं का छोटा समूह है जो कार्बन श्रृंखला के एक हाइड्रोजन की जगह लेता है और यौगिक का व्यवहार तय करता है। हैलोजन यौगिकों (R–X) में C–X बंध ध्रुवीय होता है। हाइड्रॉक्सिल यौगिक (R–OH) हाइड्रोजन बंध बनाते हैं, इसलिए ऊँचे ताप पर उबलते हैं; फ़ीनॉल दुर्बल अम्लीय है। एमीन (R–NH2) में नाइट्रोजन पर एकाकी युग्म होता है, इसलिए ये क्षार हैं।
- ऐल्डिहाइड और कीटोन: संरचना, बनाना और अभिक्रियाएँ – ऐल्डिहाइड और कीटोन दोनों में कार्बोनिल समूह C=O होता है। ऐल्डिहाइड में C=O वाले कार्बन पर कम से कम एक H होता है (−CHO)। कीटोन में उस कार्बन पर दो कार्बन समूह होते हैं (−CO−)। C=O बंध ध्रुवीय है: C थोड़ा धनात्मक, O थोड़ा ऋणात्मक। इसलिए इलेक्ट्रॉन से भरे कण (नाभिकस्नेही) कार्बन पर हमला करते हैं। यही एक बात ज़्यादातर अभिक्रियाएँ समझा देती है: HCN, NaHSO₃, ऐल्कोहॉल और अमोनिया व्युत्पन्नों का योग। ऐल्डिहाइड आसानी से ऑक्सीकृत होते हैं (टॉलेन्स, फेलिंग परीक्षण), कीटोन नहीं। C=O के बगल वाले कार्बन का H (α-H) थोड़ा अम्लीय होता है, इसी से ऐल्डोल संघनन होता है। जिन ऐल्डिहाइड में α-H नहीं, वे कैनिज़ारो अभिक्रिया देते हैं।
- प्रोटीन और एंज़ाइम: ऐमीनो अम्ल, पेप्टाइड बंध, संरचना और विकृतीकरण – प्रोटीन ऐमीनो अम्लों की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर ऐमीनो अम्ल के एक कार्बन पर ऐमीनो समूह (–NH₂), अम्ल समूह (–COOH), एक हाइड्रोजन और एक पार्श्व समूह R होता है। एक का –COOH अगले के –NH₂ से पानी निकालकर जुड़ता है: यह पेप्टाइड बंध (–CO–NH–) है। ऐमीनो अम्लों का क्रम प्राथमिक संरचना; कुंडली और परत द्वितीयक; पूरा 3D मोड़ तृतीयक; कई शृंखलाएँ साथ में चतुर्धातुक संरचना। गर्मी, अम्ल या ऐल्कोहॉल मोड़ खोल देते हैं (विकृतीकरण)। एंज़ाइम ज़्यादातर प्रोटीन हैं जो शरीर की अभिक्रियाएँ तेज़ करते हैं।
- उपसहसंयोजन यौगिकों में समावयवता – समावयवी (isomers) का सूत्र एक होता है पर परमाणुओं की व्यवस्था अलग। संरचनात्मक समावयवियों में बंध ही अलग होते हैं: आयनन, बंधनी, उपसहसंयोजन और विलायकयोजन। त्रिविम समावयवियों में बंध वही रहते हैं, बस अंतरिक्ष में जगह बदलती है: ज्यामितीय (सिस-ट्रांस, fac-mer) और ध्रुवण (ऐसे दर्पण प्रतिबिंब जो एक-दूसरे पर नहीं बैठते)।
2. Reactions of organic compounds
Substitution · Addition · Elimination and rearrangement · Alkylation, polymerisation and condensation · Hydrolysis and esterification · Yield and conversion
- कार्बनिक अभिक्रिया क्रियाविधि की मूल बातें – अभिक्रिया क्रियाविधि एक-एक चरण की कहानी है: कौन-से आबंध टूटते हैं, कौन-से बनते हैं और इलेक्ट्रॉन कहाँ जाते हैं। सहसंयोजी आबंध दो तरह से टूटता है। समांश विखंडन में हर परमाणु एक इलेक्ट्रॉन लेता है और मुक्त मूलक बनते हैं। विषमांश विखंडन में एक परमाणु दोनों इलेक्ट्रॉन ले लेता है, जिससे कार्बधनायन (C पर + आवेश) और कार्बऋणायन या ऋणायन बनते हैं। इलेक्ट्रॉन की कमी वाले, इलेक्ट्रॉन ढूँढने वाले कण इलेक्ट्रॉनस्नेही हैं; इलेक्ट्रॉन देने वाले कण नाभिकस्नेही हैं। अणु के अंदर इलेक्ट्रॉनों की चाल चार प्रभाव तय करते हैं: प्रेरणिक प्रभाव (σ आबंधों पर खिंचाव), अनुनाद प्रभाव (π इलेक्ट्रॉनों का फैलना), इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव (अभिकर्मक के हमले पर अस्थायी पूरा खिसकना) और अतिसंयुग्मन (C–H के σ इलेक्ट्रॉनों का पास के खाली p कक्षक या π आबंध में फैलना)।
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
- कार्बनिक अभिक्रियाओं के प्रकार और उनकी क्रियाविधि – कार्बनिक अभिक्रियाओं को इस आधार पर बाँटते हैं कि अणु के साथ क्या होता है: प्रतिस्थापन (एक परमाणु की जगह दूसरा), योगात्मक (द्वि-बंध पर परमाणु जुड़ते हैं), विलोपन (छोटा अणु निकलता और द्वि-बंध बनता है), संघनन (दो अणु जुड़ते और पानी निकलता है) और जल-अपघटन (पानी अणु को तोड़ता है)। क्रियाविधि बताती है कि इलेक्ट्रॉन कैसे चलते हैं: बंध समांश (मुक्त मूलक) या विषमांश (आयन) टूटते हैं, और नाभिकस्नेही (इलेक्ट्रॉन-धनी) इलेक्ट्रॉनस्नेही (इलेक्ट्रॉन-कमी) पर हमला करते हैं। एस्टर अम्ल और ऐल्कोहॉल से उत्क्रमणीय, अम्ल-उत्प्रेरित संघनन में बनते और जल-अपघटन से टूटते हैं।
- रससमीकरणमिति, सीमांत अभिकर्मक और सांद्रता के पद – रससमीकरणमिति का मतलब है अभिक्रिया में पदार्थों की मात्रा मापना। संतुलित समीकरण एक नुस्खे जैसा है: उसकी संख्याएँ अभिकारकों और उत्पादों का मोल अनुपात बताती हैं। इससे किसी भी द्रव्यमान को मोल में बदलकर, अनुपात लगाकर, किसी दूसरे पदार्थ का द्रव्यमान निकाल सकते हैं। जो अभिकारक पहले खत्म हो वह सीमांत अभिकर्मक है; वही तय करता है कितना उत्पाद बनेगा। विलयन की सांद्रता द्रव्यमान %, मोल अंश, मोलरता या मोललता से बताते हैं।
3. Biologically important compounds; biochemistry
Nucleic acids · Importance of organic products
- विटामिन, न्यूक्लिक अम्ल और हॉर्मोन: प्रकार, कार्य, DNA और RNA – विटामिन छोटे कार्बनिक यौगिक हैं जो भोजन से बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिए; A, D, E, K वसा में और B, C पानी में घुलते हैं, और हर एक की कमी से एक खास रोग होता है। न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) न्यूक्लियोटाइड की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर न्यूक्लियोटाइड = पेंटोज़ शर्करा + फॉस्फेट + नाइट्रोजनी क्षार। DNA में डीऑक्सीराइबोज़, क्षार A, G, C, T और द्विकुंडली में दो लड़ियाँ, जहाँ A–T और G–C जोड़े बनते हैं। RNA में राइबोज़, T की जगह U, और प्रायः एक लड़ी। हॉर्मोन ग्रंथियों के बनाए रासायनिक संदेशवाहक हैं: स्टेरॉयड, प्रोटीन/पेप्टाइड या ऐमीनो अम्ल व्युत्पन्न।
- उद्योग, पर्यावरण और शरीर में कार्बनिक उत्पाद – कार्बनिक यौगिकों से प्लास्टिक, रेशे, ईंधन, दवाएँ और विलायक बनते हैं। फ्रीऑन (CFC) जैसे कुछ हैलोजन उत्पाद समताप मंडल पहुँचकर ओज़ोन नष्ट करते हैं, क्योंकि एक क्लोरीन परमाणु हज़ारों ओज़ोन अणु तोड़ सकता है। शरीर में जल-अपघटन बड़े भोजन-अणुओं को काटता है और ग्लूकोज़ का ऑक्सीकरण ऊर्जा देता है। प्रोटीन प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक संरचना में मुड़ते हैं, और यही आकार एंज़ाइमों को अभिक्रिया तेज़ करने और हॉर्मोनों को संदेश ले जाने देता है।