रोज़मर्रा के कार्बनिक उत्पाद
तेल, गैस और पौधों से बनी ज़्यादातर चीज़ें कार्बनिक यौगिक हैं। तीन परिवार सबसे ज़रूरी हैं:
- बहुलक: बहुत लंबे अणु, जो कई छोटे एकलकों को जोड़कर बनते हैं। उदाहरण: पॉलिथीन (थैलियाँ), PVC (पाइप, क्लोरोएथीन से) और टेफ़लॉन (नॉन-स्टिक तवा, टेट्राफ़्लोरोएथीन से)।
- संघनन उत्पाद: वे बहुलक जिनमें हर जोड़ पर एक छोटा अणु, आमतौर पर पानी, निकलता है। नायलॉन (कपड़े, रस्सी) और पॉलिएस्टर (PET बोतलें) ऐसे बनते हैं।
- हैलोजन व्युत्पन्न: Cl, F, Br या I वाले कार्बन यौगिक। उपयोग: डाइक्लोरोमेथेन जैसे विलायक, प्रशीतक, नॉन-स्टिक परत और कुछ कीटनाशक।
अच्छी बात: ये सस्ते, हल्के और मज़बूत हैं। बुरी बात: कई सड़ते नहीं, और कुछ पर्यावरण को नुक़सान पहुँचाते हैं। हमें इन्हें समझदारी से इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनर्चक्रित करना चाहिए।
फ्रीऑन और ओज़ोन क्षरण
फ्रीऑन क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC) हैं, जैसे CCl2F2। ये जलते नहीं, छूने में ज़हरीले नहीं और आसानी से द्रव बन जाते हैं, इसलिए फ़्रिज, एयर-कंडीशनर, स्प्रे कैन और फ़ोम में इस्तेमाल होते थे।
पर नीचे ये बहुत स्थिर हैं, इसलिए धीरे-धीरे समताप मंडल (15 से 50 किमी ऊपर) में पहुँच जाते हैं, जहाँ ओज़ोन परत (O3) सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणें सोखती है। वहाँ UV एक C–Cl बंध तोड़ देता है:
CCl2F2 → CClF2• + Cl•
मुक्त क्लोरीन परमाणु शृंखला अभिक्रिया में ओज़ोन पर हमला करता है:
Cl• + O3 → ClO• + O2
ClO• + O → Cl• + O2
क्लोरीन वापस मिल जाती है और फिर शुरू करती है। यह उत्प्रेरक की तरह काम करती है, इसलिए एक Cl परमाणु लगभग 1,00,000 ओज़ोन अणु नष्ट कर सकता है। कम ओज़ोन का मतलब पृथ्वी पर ज़्यादा UV: धूप से जलन, त्वचा कैंसर, आँखों को नुक़सान और पौधों व प्लवकों को हानि।
1987 में दुनिया ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर सहमति दी, जिसने CFC का उत्पादन रोक दिया। सुरक्षित गैसें उनकी जगह आईं, और ओज़ोन परत धीरे-धीरे सुधर रही है।
मानव शरीर में जल-अपघटन और ऑक्सीकरण
जल-अपघटन का मतलब है पानी से अणु को तोड़ना (जल = पानी, अपघटन = टूटना)। पाचन जल-अपघटन है, जिसमें एंज़ाइम मदद करते हैं:
- स्टार्च + पानी → ग्लूकोज़ (लार का एंज़ाइम एमाइलेज़)
- वसा + पानी → ग्लिसरॉल + वसा अम्ल (लाइपेज़)
- प्रोटीन + पानी → अमीनो अम्ल (प्रोटिएज़)
छोटे टुकड़े रक्त में घुलकर हर कोशिका तक पहुँचते हैं।
कोशिकाओं में ऑक्सीकरण ऊर्जा छोड़ता है। मुख्य ईंधन ग्लूकोज़ है:
C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा
ग्लूकोज़ के हर मोल (180 g) से लगभग 2,800 kJ ऊर्जा मिलती है। शरीर यह धीरे-धीरे कई छोटे चरणों में करता है, इसलिए ऊर्जा काम आती है और एक बड़ी लपट बनकर बर्बाद नहीं होती।
प्रोटीन: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक संरचना
प्रोटीन अमीनो अम्लों की लंबी श्रृंखला है, जो पेप्टाइड बंधों से जुड़े हैं (एक संघनन उत्पाद, हर बंध पर पानी निकला)। लगभग 20 सामान्य अमीनो अम्ल होते हैं।
- प्राथमिक संरचना: श्रृंखला पर अमीनो अम्लों का क्रम, जैसे शब्द में अक्षरों का क्रम।
- द्वितीयक संरचना: स्थानीय मुड़ाव, α-हेलिक्स (कुंडली) या β-शीट (मुड़ी पट्टी), पास के हिस्सों के बीच हाइड्रोजन बंधों से टिकी।
- तृतीयक संरचना: पूरी श्रृंखला एक 3D आकार में मुड़ जाती है, पार्श्व शृंखलाओं के बंधों से टिकी (हाइड्रोजन बंध, आयनिक बंध, सल्फ़र सेतु, तैलीय हिस्से भीतर छिपे)।
कई श्रृंखलाएँ साथ मिलकर चतुर्थक संरचना देती हैं (हीमोग्लोबिन में चार हैं)। गर्मी, अम्ल या ऐल्कोहॉल कमज़ोर बंध तोड़ देते हैं और प्रोटीन खुल जाता है। यह विकृतीकरण है: अंडा उबालने पर सफ़ेदी ठोस हो जाती है और वापस नहीं लौटती।
एंज़ाइम और हॉर्मोन
एंज़ाइम ऐसे प्रोटीन हैं जो जैव उत्प्रेरक का काम करते हैं। क्रियाधार सक्रिय स्थल नाम की जेब में ताले में चाबी की तरह बैठता है, इसलिए हर एंज़ाइम एक ही तरह के क्रियाधार पर काम करता है। ये अभिक्रियाओं को लाखों गुना तेज़ करते हैं और ख़र्च नहीं होते। ये एक विशेष ताप (मानव शरीर में लगभग 37 °C) और pH पर सबसे अच्छे चलते हैं। बहुत गर्म हुआ तो आकार खो जाता है।
हॉर्मोन ग्रंथियों में बने रासायनिक संदेशवाहक हैं जिन्हें रक्त लक्ष्य कोशिकाओं तक ले जाता है। ये वृद्धि, मनोदशा, शर्करा स्तर आदि को नियंत्रित करते हैं। इंसुलिन (51 अमीनो अम्लों का छोटा प्रोटीन) रक्त ग्लूकोज़ घटाता है; एड्रेनलिन (एक छोटा एमीन) शरीर को काम के लिए तैयार करता है; थायरॉक्सिन शरीर की रासायनिक गति नियंत्रित करता है। हॉर्मोन ज़्यादा या कम होने से बीमारी होती है, जैसे इंसुलिन की कमी से मधुमेह।
समझदारी से इस्तेमाल: सुरक्षा और पर्यावरण
कार्बनिक उत्पाद हमारी मदद करते हैं, पर उन्हें संभालना भी ज़रूरी है: प्लास्टिक पुनर्चक्रित करें, PVC को खुले में कभी न जलाएँ (ज़हरीली गैस निकलती है), पुराने फ़्रिज लौटाएँ ताकि CFC गैस इकट्ठा हो, और कीटनाशक पानी से दूर रखें। काम के लिए सही यौगिक चुनना रसायन है; उसे सावधानी से इस्तेमाल करना ज़िम्मेदारी है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- CCl2F2 → CClF2• + Cl• (UV, समताप मंडल में)
- Cl• + O3 → ClO• + O2 और ClO• + O → Cl• + O2 (उत्प्रेरक चक्र)
- C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा (लगभग 2,800 kJ प्रति मोल)
- स्टार्च / वसा / प्रोटीन + पानी → ग्लूकोज़ / ग्लिसरॉल + वसा अम्ल / अमीनो अम्ल (जल-अपघटन)
- प्रोटीन के स्तर: प्राथमिक (क्रम) → द्वितीयक (हेलिक्स, शीट) → तृतीयक (3D मोड़)
हल किए गए उदाहरण
1. CFC अणु का कौन-सा भाग ओज़ोन को नुक़सान पहुँचाता है, और उसे मुक्त क्या करता है?
क्लोरीन परमाणु। समताप मंडल में UV प्रकाश C–Cl बंध तोड़कर मुक्त Cl परमाणु छोड़ता है, जो फिर ओज़ोन पर हमला करता है।
2. एक क्लोरीन परमाणु लगभग 1,00,000 ओज़ोन अणु नष्ट करता है। 3 x 10^6 मुक्त Cl परमाणु कितने अणु नष्ट करेंगे?
3 x 10^6 x 10^5 = 3 x 10^11 ओज़ोन अणु।
3. 0.5 mol ग्लूकोज़ के पूर्ण ऑक्सीकरण से कितने मोल और कितने ग्राम CO2 बनेगी? कितनी ऊर्जा मिलेगी (2,800 kJ प्रति मोल)?
1 mol ग्लूकोज़ से 6 mol CO2 बनती है, इसलिए 0.5 mol से 3 mol। द्रव्यमान = 3 x 44 = 132 g। ऊर्जा = 0.5 x 2,800 = 1,400 kJ।
4. स्टार्च के पाचन में क्या होता है, और अभिक्रिया का प्रकार लिखिए।
स्टार्च + पानी → ग्लूकोज़। यह जल-अपघटन है, जिसमें एंज़ाइम एमाइलेज़ मदद करता है।
5. समझाइए कि उबला अंडा दोबारा कच्चा क्यों नहीं हो सकता।
गर्मी अंडे की सफ़ेदी के प्रोटीनों के मुड़े आकार को पकड़ने वाले कमज़ोर बंध तोड़ देती है, इसलिए वे खुलकर आपस में चिपक जाते हैं। यह विकृतीकरण है, और मूल आकार वापस नहीं आता।
6. एंज़ाइम केवल एक क्रियाधार पर ही क्यों काम करता है?
उसके सक्रिय स्थल का विशेष 3D आकार केवल एक क्रियाधार में बैठता है, जैसे एक ताले में एक चाबी।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि ओज़ोन तोड़ने में CFC ख़र्च हो जाते हैं। क्लोरीन परमाणु हर बार बिना बदले निकलता है, इसीलिए एक परमाणु इतना नुक़सान करता है।
- जल-अपघटन (पानी डालकर तोड़ना) और संघनन (जोड़ना और पानी निकलना) को मिला देना। ये उल्टे हैं।
- सोचना कि ओज़ोन परत ज़मीन के पास है। अच्छी ओज़ोन समताप मंडल में ऊपर है; ज़मीन के पास की ओज़ोन प्रदूषक है।
- प्रोटीन के स्तर मिलाना: प्राथमिक क्रम है, द्वितीयक कुंडली या शीट, तृतीयक पूरा मोड़।