ओज़ोन परत क्या है और कैसे बनती है?
ओज़ोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं (O₃) से बना अणु है। जो ऑक्सीजन हम साँस में लेते हैं, उसमें दो ही परमाणु होते हैं (O₂)। ज़मीन के पास ओज़ोन एक हानिकारक गैस है, लेकिन ऊपर समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में, लगभग 15–35 km ऊँचाई पर, यह एक पतली ओज़ोन परत बनाती है जो पूरी धरती के लिए छतरी का काम करती है।
यह दो चरणों में बनती है:
- तेज़ ऊर्जा वाली पराबैंगनी (UV) किरणें O₂ को दो मुक्त परमाणुओं में तोड़ती हैं: O₂ → O + O
- एक मुक्त परमाणु दूसरे O₂ से जुड़ता है: O + O₂ → O₃ (ओज़ोन)
ओज़ोन परत सूरज की ज़्यादातर पराबैंगनी विकिरण को सोख लेती है। इसके बिना बहुत ज़्यादा UV किरणें जीवों तक पहुँचतीं।
ओज़ोन परत का क्षय: CFC और UV किरणों के नुकसान
1980 के दशक में वैज्ञानिकों ने देखा कि ओज़ोन की मात्रा घट रही है, खासकर हर वसंत में दक्षिणी ध्रुव के ऊपर ('ओज़ोन छिद्र')। इसका मुख्य कारण मनुष्य द्वारा बनाई गई गैसें थीं: क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), जो पुराने फ्रिज, एसी, फोम और एयरोसॉल स्प्रे में इस्तेमाल होती थीं।
CFC बहुत स्थायी होते हैं, इसलिए धीरे-धीरे समताप मंडल तक पहुँच जाते हैं। वहाँ UV किरणें इन्हें तोड़कर क्लोरीन परमाणु मुक्त करती हैं। एक क्लोरीन परमाणु एक के बाद एक हज़ारों ओज़ोन अणु तोड़ सकता है।
ज़्यादा UV किरणों से नुकसान
- त्वचा का कैंसर और धूप से जलन
- आँखों में मोतियाबिंद
- रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होना
- फसलों और समुद्री खाद्य शृंखला की शुरुआत वाले सूक्ष्म प्लवकों को नुकसान
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987)
1987 में मॉन्ट्रियल में देशों ने CFC और ऐसी गैसों को घटाकर धीरे-धीरे बंद करने का समझौता किया। यह 1989 से लागू हुआ। नए फ्रिज में सुरक्षित गैसें आती हैं। अब ओज़ोन परत धीरे-धीरे ठीक हो रही है, यानी मिलकर काम करने से फ़र्क पड़ता है।
हमारी गतिविधियाँ और कचरा: जैव निम्नीकरणीय बनाम अजैव निम्नीकरणीय
हर घर से सब्ज़ी के छिलके, कागज़, प्लास्टिक के रैपर, बोतलें निकलती हैं। आगे क्या होगा, यह पदार्थ पर निर्भर है।
- जैव निम्नीकरणीय पदार्थ वे हैं जिन्हें जीवाणु और कवक (अपघटक) तोड़कर सरल, हानिरहित पदार्थों में बदल देते हैं। जैसे: फल-सब्ज़ी के छिलके, बचा खाना, कागज़, सूखी पत्तियाँ, सूती कपड़ा, लकड़ी, गोबर।
- अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपघटकों से नहीं टूटते। ये बहुत लंबे समय तक पड़े रहते हैं। जैसे: प्लास्टिक, पॉलीथीन, काँच, धातु के डिब्बे, DDT जैसे कई कीटनाशक।
कारण आसान है: अपघटक एंज़ाइम की मदद से पदार्थ तोड़ते हैं, और ये एंज़ाइम सिर्फ़ प्राकृतिक पदार्थों पर काम करते हैं। प्लास्टिक पर ये काम नहीं करते।
अजैव निम्नीकरणीय कचरा लैंडफ़िल भरता है, नालियाँ जाम करता है, प्लास्टिक निगलने से जानवर मरते हैं, और कुछ रसायन खाद्य शृंखला में ऊपर जाते-जाते बढ़ते जाते हैं (जैव आवर्धन)।
कचरा प्रबंधन: डिस्पोज़ेबल कप, 3R, अलगाव और खाद बनाना
कुल्हड़, कागज़ या प्लास्टिक का कप?
प्लास्टिक का कप सैकड़ों साल रहता है। कागज़ का कप जल्दी टूटता है, पर इसके लिए पेड़ कटते हैं और इसमें अक्सर प्लास्टिक की पतली परत होती है। मिट्टी का कुल्हड़ मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन करोड़ों कुल्हड़ बनाने में उपजाऊ ऊपरी मिट्टी और पकाने का ईंधन बहुत खर्च होता है। इसलिए सबसे अच्छा है अपना कप, जिसे धोकर बार-बार इस्तेमाल करो।
कम करो, दोबारा इस्तेमाल करो, पुनः चक्रण करो (3R)
- कम करो (Reduce): कपड़े का थैला साथ रखो, फालतू पैकिंग मत लो।
- दोबारा इस्तेमाल (Reuse): काँच के जार में सामान रखो, पुराने लिफ़ाफ़ों पर नोट्स लिखो।
- पुनः चक्रण (Recycle): प्लास्टिक, कागज़, काँच, धातु को नई चीज़ें बनाने भेजो।
स्रोत पर ही अलग करना
गीला (जैव निम्नीकरणीय) कचरा हरे डिब्बे में और सूखा (अजैव निम्नीकरणीय, रिसाइकिल होने वाला) कचरा नीले डिब्बे में डालो। मिला हुआ कचरा न रिसाइकिल होता है, न खाद बनता है।
कम्पोस्ट (खाद) बनाना
रसोई और बगीचे का कचरा गड्ढे या गमले में डालो, नमी रखो और कभी-कभी पलटो। सूक्ष्मजीव और केंचुए इसे गहरे रंग की कम्पोस्ट खाद में बदल देते हैं। केंचुओं की मदद से खाद बनाना वर्मीकम्पोस्टिंग कहलाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- O₂ + UV → O + O (UV ऑक्सीजन को तोड़ती है)
- O + O₂ → O₃ (ओज़ोन बनती है)
- ओज़ोन परत: समताप मंडल में, ज़्यादातर UV किरणें सोखती है
- CFC (क्लोरोफ्लोरोकार्बन): ओज़ोन घटाने वाली मुख्य गैसें; मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987
- जैव निम्नीकरणीय: अपघटकों से टूटने वाले (छिलके, कागज़, सूती कपड़ा)
- अजैव निम्नीकरणीय: अपघटकों से न टूटने वाले (प्लास्टिक, काँच, धातु, DDT)
- 3R: कम करो, दोबारा इस्तेमाल करो, पुनः चक्रण करो; हरा डिब्बा = गीला, नीला डिब्बा = सूखा
हल किए गए उदाहरण
1. इन्हें जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय में बाँटो: चायपत्ती, पॉलीथीन थैली, अख़बार, एल्युमिनियम फ़ॉइल, अंडे के छिलके, काँच की चूड़ी।
जैव निम्नीकरणीय: चायपत्ती, अख़बार, अंडे के छिलके (प्राकृतिक, सूक्ष्मजीव तोड़ सकते हैं)। अजैव निम्नीकरणीय: पॉलीथीन थैली, एल्युमिनियम फ़ॉइल, काँच की चूड़ी (सूक्ष्मजीव नहीं तोड़ सकते)।
2. ज़मीन के पास ओज़ोन हानिकारक है, फिर भी ओज़ोन परत उपयोगी है। समझाओ।
चरण 1: साँस में ओज़ोन ज़हरीली है, इसलिए नीचे यह फेफड़ों को नुकसान करती है। चरण 2: समताप मंडल में हम इसे साँस में नहीं लेते। चरण 3: वहाँ यह UV किरणें हम तक पहुँचने से पहले सोख लेती है। यानी एक ही गैस नीचे प्रदूषक है और ऊपर रक्षक।
3. CFC तो ज़मीन पर छोड़े जाते हैं, फिर ऊपर की ओज़ोन परत पतली क्यों हुई?
चरण 1: CFC बहुत स्थायी होते हैं, नीचे की हवा में नहीं टूटते। चरण 2: सालों में ये ऊपर समताप मंडल तक पहुँचते हैं। चरण 3: वहाँ तेज़ UV इन्हें तोड़कर क्लोरीन परमाणु छोड़ती है। चरण 4: हर क्लोरीन परमाणु बहुत सारे ओज़ोन अणु तोड़ता है, इसलिए परत पतली हो जाती है।
4. स्कूल कैंटीन प्लास्टिक के कप में चाय देती है। बेहतर उपाय सुझाओ और कारण दो।
सबसे अच्छा: स्टील या काँच के कप जो धोकर दोबारा इस्तेमाल हों (कम करो + दोबारा इस्तेमाल), ताकि कचरा बने ही नहीं। अगर डिस्पोज़ेबल ज़रूरी हो, तो कागज़ के कप खाद के लिए भेजो या थोड़े कुल्हड़ इस्तेमाल करो, और प्लास्टिक नीले डिब्बे में रिसाइकिल के लिए डालो। कारण: प्लास्टिक का कप अजैव निम्नीकरणीय है और सैकड़ों साल पड़ा रहता है।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि ओज़ोन हमेशा अच्छी है। साँस वाली हवा में ओज़ोन प्रदूषक है; सिर्फ़ ऊपर की परत हमें बचाती है।
- यह लिखना कि ओज़ोन छिद्र से ग्लोबल वार्मिंग होती है। दोनों अलग समस्याएँ हैं: ओज़ोन घटने से ज़्यादा UV आती है; ग्लोबल वार्मिंग ग्रीनहाउस गैसों से होती है।
- कुल्हड़ को पूरा हल मान लेना। वे मिट्टी में मिल जाते हैं, पर करोड़ों कुल्हड़ बनाने में उपजाऊ मिट्टी बर्बाद होती है।
- यह लिखना कि प्लास्टिक खाने की तरह धीरे-धीरे सड़ता है। अपघटक प्लास्टिक को तोड़ते ही नहीं; यह बस छोटे टुकड़ों (माइक्रोप्लास्टिक) में बँटता है।