विटामिन क्या हैं
विटामिन वे कार्बनिक यौगिक हैं जो सामान्य वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए भोजन में बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिए। ज़्यादातर शरीर खुद नहीं बना पाता (विटामिन D धूप में त्वचा में बनता है; कुछ B विटामिन और K आँत के बैक्टीरिया बनाते हैं)। इनके नाम अक्षरों से हैं: A, B, C, D, E, K; B एक समूह है (B1, B2, B6, B12 आदि)।
विटामिन के प्रकार
- वसा में घुलनशील: A, D, E, K। ये वसा और तेल में घुलते हैं और यकृत व वसा ऊतक में जमा रहते हैं। जमा होने के कारण बहुत ज़्यादा लेने पर ये जमा होकर नुकसान कर सकते हैं।
- जल में घुलनशील: B समूह और C। ये पानी में घुलते हैं, अतिरिक्त मात्रा पेशाब में निकल जाती है, अच्छे से जमा नहीं होते। इन्हें नियमित भोजन से लेना होता है। (B12 अपवाद है: यकृत कुछ जमा रखता है।)
स्रोत और कमी से होने वाले रोग
| विटामिन | अच्छे स्रोत | कमी से |
|---|---|---|
| A | गाजर, हरी पत्तियाँ, दूध, मछली के यकृत का तेल | रतौंधी, आँखों का सूखापन (ज़ीरोफ़्थैल्मिया), खुरदुरी त्वचा |
| B1 (थायमिन) | साबुत अनाज, यीस्ट, दालें, दूध | बेरीबेरी (कमज़ोर नसें और पेशियाँ) |
| B2 (राइबोफ़्लेविन) | दूध, अंडे की सफ़ेदी, यकृत | मुँह के कोनों पर दरारें, जीभ में जलन |
| B6 (पाइरिडॉक्सिन) | यीस्ट, अनाज, अंडे की ज़र्दी, दूध | ऐंठन (दौरे) |
| B12 (सायनोकोबालामिन) | मांस, मछली, अंडा, दही | प्रणाशी रक्ताल्पता (कम और कमज़ोर लाल कोशिकाएँ) |
| C (ऐस्कॉर्बिक अम्ल) | खट्टे फल, आँवला, टमाटर, हरी पत्तियाँ | स्कर्वी (मसूड़ों से खून) |
| D | त्वचा पर धूप, मछली, अंडे की ज़र्दी | बच्चों में रिकेट्स, बड़ों में ऑस्टियोमलेशिया (नरम हड्डियाँ) |
| E | वनस्पति तेल, मेवे, हरी पत्तियाँ | कमज़ोर लाल कोशिकाएँ, पेशियों में कमज़ोरी |
| K | हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ | खून देर से जमता है |
तेज़ आँच पर पकाने से विटामिन C बहुत नष्ट होता है, और कटी सब्ज़ी धोने से जल-घुलनशील विटामिन बह जाते हैं।
न्यूक्लिक अम्ल: न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड
न्यूक्लिक अम्ल हर कोशिका के केंद्रक (और दूसरे भागों) में मिलने वाले लंबे बहुलक हैं। ये प्रोटीन बनाने की जानकारी रखते हैं और उसे माता-पिता से बच्चों तक पहुँचाते हैं। दो प्रकार: DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) और RNA (राइबोन्यूक्लिक अम्ल)।
न्यूक्लिक अम्ल के पूरे जल-अपघटन से तीन चीज़ें मिलती हैं: पेंटोज़ शर्करा, फॉस्फोरिक अम्ल और नाइट्रोजनी क्षार।
- शर्करा: DNA में β-D-2-डीऑक्सीराइबोज़ (कार्बन 2′ पर O नहीं), RNA में β-D-राइबोज़।
- क्षार: प्यूरीन (दो छल्ले): ऐडेनीन (A), ग्वानीन (G); पिरिमिडीन (एक छल्ला): साइटोसीन (C), थायमीन (T), यूरेसिल (U)। DNA में A, G, C, T; RNA में A, G, C, U।
न्यूक्लियोसाइड = क्षार + शर्करा (क्षार शर्करा के कार्बन 1′ पर)। न्यूक्लियोटाइड = न्यूक्लियोसाइड + फॉस्फेट (फॉस्फेट कार्बन 5′ पर)। एक शर्करा के 5′ और अगली के 3′ कार्बन के बीच फॉस्फोडाइएस्टर जोड़ से न्यूक्लियोटाइड जुड़कर पॉलीन्यूक्लियोटाइड लड़ी बनाते हैं।
DNA की संरचना: द्विकुंडली
1953 में जेम्स वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने, रोज़ालिंड फ्रैंकलिन के X-किरण चित्रों की मदद से, बताया कि DNA एक द्विकुंडली (डबल हेलिक्स) है:
- दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड लड़ियाँ एक साझा अक्ष के चारों ओर घूमी हैं, घुमावदार सीढ़ी जैसी।
- शर्करा–फॉस्फेट रीढ़ बाहर; क्षार अंदर की ओर।
- क्षार हाइड्रोजन बंध से जोड़ी बनाते हैं: A–T (दो H-बंध), G–C (तीन H-बंध)। एक प्यूरीन हमेशा एक पिरिमिडीन से जुड़ता है, इसलिए सीढ़ी की चौड़ाई हर जगह बराबर।
- दोनों लड़ियाँ पूरक हैं (एक से दूसरी पता चल जाती है) और प्रतिसमांतर (एक 5′→3′, दूसरी 3′→5′)।
जोड़ियों के कारण किसी भी द्वि-लड़ी DNA में A की मात्रा = T, और G = C (शारगाफ़ का नियम)।
RNA, और DNA व RNA में अंतर
RNA प्रायः एक लड़ी है, जो खुद पर मुड़ सकती है। तीन मुख्य प्रकार: संदेशवाहक RNA (m-RNA) जीन की प्रतिलिपि ले जाता है, राइबोसोमल RNA (r-RNA) राइबोसोम बनाता है, स्थानांतरण RNA (t-RNA) ऐमीनो अम्ल राइबोसोम तक लाता है।
| DNA | RNA | |
|---|---|---|
| शर्करा | 2-डीऑक्सीराइबोज़ | राइबोज़ |
| क्षार | A, G, C, T | A, G, C, U |
| लड़ियाँ | दो (द्विकुंडली) | प्रायः एक |
| काम | आनुवंशिक सूचना रखना; अपनी प्रतिलिपि बनाना (प्रतिकृतियन) | प्रोटीन बनाने में मदद (प्रोटीन संश्लेषण) |
| कहाँ | मुख्यतः केंद्रक | केंद्रक और कोशिकाद्रव्य |
जैविक कार्य
DNA आनुवंशिकता का रासायनिक आधार है: यह पीढ़ियों तक जाति की पहचान बनाए रखता है। कोशिका विभाजन में DNA अपनी ठीक प्रतिलिपि बनाता है (प्रतिकृतियन)। DNA का संदेश m-RNA में उतरता है और फिर ऐमीनो अम्लों को सही क्रम में जोड़कर प्रोटीन बनता है। क्षार-क्रम में बदलाव (उत्परिवर्तन) प्रोटीन को बदल सकता है।
हॉर्मोन: प्रकार और कार्य
हॉर्मोन रासायनिक संदेशवाहक हैं। नलिकाविहीन (अंतःस्रावी) ग्रंथियाँ इन्हें सीधे रक्त में छोड़ती हैं, और रक्त इन्हें लक्ष्य अंगों तक ले जाता है। ये शरीर की दशाएँ स्थिर रखते हैं और वृद्धि व विकास नियंत्रित करते हैं।
रासायनिक प्रकार
- स्टेरॉयड हॉर्मोन: कोलेस्टेरॉल से बने। टेस्टोस्टेरॉन, एस्ट्राडाइऑल, प्रोजेस्टेरॉन, कॉर्टिसॉल, ऐल्डोस्टेरॉन।
- पॉलीपेप्टाइड / प्रोटीन हॉर्मोन: इंसुलिन, ग्लूकैगॉन, वृद्धि हॉर्मोन, एंडॉर्फ़िन।
- ऐमीनो अम्ल व्युत्पन्न: ऐड्रीनलीन (एपिनेफ़्रिन), थायरॉक्सिन।
कार्य
- इंसुलिन और ग्लूकैगॉन रक्त में ग्लूकोज़ को सीमित दायरे में रखते हैं (इंसुलिन घटाता है, ग्लूकैगॉन बढ़ाता है)।
- ऐड्रीनलीन शरीर को अचानक काम के लिए तैयार करता है (लड़ो या भागो)।
- थायरॉक्सिन उपापचय की दर नियंत्रित करता है; कमी से हाइपोथायरॉयडिज़्म, और आयोडीन की कमी से घेंघा हो सकता है।
- कॉर्टिसॉल तनाव से निपटने और कुछ उपापचय में मदद करता है; लिंग हॉर्मोन जनन अंगों और लक्षणों के विकास को नियंत्रित करते हैं।
घर पर करके देखो: केले से DNA निकालो
- आधे पके केले को आधा कप गुनगुने पानी, 1 छोटा चम्मच बर्तन धोने का तरल और चुटकी भर नमक के साथ मसलो। साबुन कोशिका की झिल्ली तोड़ता है; नमक DNA को इकट्ठा होने में मदद करता है।
- चाय की छलनी से एक पारदर्शी गिलास में छानो।
- पहले अनुमान लगाओ: गिलास की दीवार के सहारे धीरे से ठंडा रबिंग ऐल्कोहॉल (या ठंडा सर्जिकल स्पिरिट, किसी बड़े के साथ) डालोगे तो क्या दिखेगा?
- जाँचो: सफ़ेद, धुँधले धागे ऐल्कोहॉल की परत में ऊपर आते हैं। यह DNA है (लाखों लड़ियाँ एक साथ)। टूथपिक पर लपेटो।
- फिर 3D का चरण 6 खोलो और "क्रम बदलो" दबाकर देखो कि हर लड़ी में क्षार कैसे जोड़ी बनाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- न्यूक्लियोसाइड = क्षार + शर्करा · न्यूक्लियोटाइड = क्षार + शर्करा + फॉस्फेट
- प्यूरीन: A, G (2 छल्ले) · पिरिमिडीन: C, T (DNA), U (RNA) (1 छल्ला)
- DNA जोड़े: A=T (2 H-बंध), G≡C (3 H-बंध) → %A = %T, %G = %C, %A + %G = 50%
- कुल H-बंध = 2 × (A–T जोड़े) + 3 × (G–C जोड़े)
- द्वि-लड़ी DNA में न्यूक्लियोटाइड = 2 × क्षार-युग्म
- विटामिन: वसा-घुलनशील A, D, E, K · जल-घुलनशील B-समूह, C
हल किए गए उदाहरण
1. एक DNA में 30% ऐडेनीन है। T, G और C का % निकालो।
चरण 1: A की जोड़ी T, तो T = 30%। चरण 2: A + T = 60%, तो G + C = 40%। चरण 3: G = C, तो हर एक 20%। उत्तर: T 30%, G 20%, C 20%।
2. 5′-ATGCCTA-3′ की पूरक लड़ी लिखो।
चरण 1: हर क्षार बदलो: A→T, T→A, G→C, C→G। चरण 2: क्षार: TACGGAT। चरण 3: लड़ियाँ प्रतिसमांतर हैं, तो 3′-TACGGAT-5′ लिखो। उत्तर: 3′-TACGGAT-5′।
3. 10 A–T और 15 G–C जोड़ियों वाले DNA टुकड़े में कितने हाइड्रोजन बंध?
चरण 1: A–T: 10 × 2 = 20। चरण 2: G–C: 15 × 3 = 45। चरण 3: कुल = 65। उत्तर: 65 H-बंध।
4. एक द्वि-लड़ी DNA टुकड़े में 200 न्यूक्लियोटाइड हैं, जिनमें 60 साइटोसीन। ऐडेनीन कितने?
चरण 1: C = G = 60, तो G + C = 120। चरण 2: A + T = 200 − 120 = 80। चरण 3: A = T, तो A = 40। उत्तर: 40 ऐडेनीन।
5. DNA साँचे 3′-TACGGA-5′ से m-RNA बना। m-RNA लिखो।
चरण 1: हर क्षार की जोड़ी लिखो, पर A की जोड़ी RNA में U: T→A, A→U, C→G, G→C। चरण 2: m-RNA: 5′-AUGCCU-3′। उत्तर: 5′-AUGCCU-3′।
6. गर्मी से कौन-सा DNA अलग करना कठिन: 40% G–C वाला या 60% G–C वाला?
चरण 1: G–C में 3 H-बंध, A–T में केवल 2। चरण 2: ज़्यादा G–C = तोड़ने के लिए ज़्यादा H-बंध। उत्तर: 60% G–C वाले DNA को ज़्यादा गर्मी चाहिए।
7. बिना तेल-घी वाले भोजन पर रहने वाले व्यक्ति को रतौंधी हो गई। समझाओ।
चरण 1: रतौंधी विटामिन A की कमी से होती है। चरण 2: विटामिन A वसा में घुलनशील है; भोजन में वसा के साथ ही घुलकर अवशोषित होता है। उत्तर: वसा न होने से विटामिन A कम अवशोषित हुआ, इसलिए कमी दिखी।
आम गलतियाँ
- RNA में T लिखना। RNA में थायमीन की जगह यूरेसिल (U) है।
- भूल जाना कि साथी लड़ी उलटी दिशा में चलती है; 5′ और 3′ सिरे सही लिखो।
- न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड मिला देना। न्यूक्लियोसाइड में फॉस्फेट नहीं; न्यूक्लियोटाइड में है।
- विटामिन C की कमी से रिकेट्स बताना। रिकेट्स = D की कमी; स्कर्वी = C की कमी।