शर्कराएँ: ग्लूकोज़, सुक्रोज़, स्टार्च और सेल्युलोज़
शर्कराएँ (कार्बोहाइड्रेट) कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनी हैं। सबसे छोटी इकाई एकशर्करा है, जैसे ग्लूकोज़ (C₆H₁₂O₆), जिसे हमारी कोशिकाएँ ऊर्जा के लिए जलाती हैं।
- ग्लूकोज़: एक वलय, मीठा, फलों और रक्त में।
- सुक्रोज़: चीनी, ग्लूकोज़ + फ्रक्टोज़ जुड़कर (दो वलय)। यह द्विशर्करा है।
- स्टार्च: बहुत सारी ग्लूकोज़ इकाइयों की लंबी लड़ी। पौधे भोजन स्टार्च के रूप में जमा करते हैं (चावल, गेहूँ, आलू)। यह बहुशर्करा है।
- सेल्युलोज़: यह भी ग्लूकोज़ की लंबी लड़ी है पर जोड़ अलग हैं। यह पौधे की कोशिका-भित्ति और कपास बनाता है। मनुष्य इसे पचा नहीं सकता, पर यह रेशा आँतों के लिए अच्छा है।
वसा और प्रोटीन
वसा ग्लिसरॉल और तीन वसा अम्लों के एस्टर हैं। प्रति ग्राम वे शर्करा से दोगुनी से ज़्यादा ऊर्जा जमा करती हैं, अंगों की रक्षा करती हैं और कुछ विटामिन सोखने में मदद करती हैं। तेल द्रव वसा हैं। ज़्यादा वसा हृदय के लिए हानिकारक हो सकती है।
प्रोटीन अमीनो अम्लों की लंबी लड़ियाँ हैं। लगभग 20 प्रकार के अमीनो अम्ल हैं और क्रम बदलने से अलग प्रोटीन बनते हैं। लड़ी मुड़कर विशेष आकार लेती है। प्रोटीन माँसपेशी, त्वचा और बाल बनाते हैं, और एंज़ाइम (जो अभिक्रियाएँ तेज़ करते हैं) तथा प्रतिरक्षी भी प्रोटीन हैं। गर्मी या अम्ल प्रोटीन को खोल देते हैं, जैसे उबालने पर अंडे की सफ़ेदी ठोस हो जाती है।
दवाएँ और वे कैसे काम करती हैं
दवा वह रसायन है जो शरीर पर असर करके रोग का इलाज, उपचार या रोकथाम करता है। ज़्यादातर दवाएँ ताले में चाबी की तरह काम करती हैं: दवा का अणु शरीर के किसी ग्राही या एंज़ाइम में बैठकर उसका काम बदल देता है।
- पीड़ाहारी: दर्द कम करती हैं (पैरासिटामॉल, एस्पिरिन)।
- ज्वरनाशी: बुख़ार घटाती हैं।
- प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक): बैक्टीरिया को मारती या रोकती हैं (वायरस को नहीं)।
- अम्लरोधी: पेट का अतिरिक्त अम्ल घटाती हैं।
- प्रतिरोधी और कीटाणुनाशी: त्वचा या सतह के कीटाणु मारते हैं।
सुरक्षा: दवा केवल डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट की सलाह से लें। ग़लत दवा या मात्रा हानि कर सकती है।
विटामिन और कमी के रोग
विटामिन कार्बनिक यौगिक हैं जो हमें बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिए। शरीर अधिकतर विटामिन खुद नहीं बना पाता, इसलिए भोजन से मिलने चाहिए। किसी विटामिन की कमी से अभावजन्य रोग होता है।
| विटामिन | अच्छे स्रोत | कमी से रोग |
|---|---|---|
| A | गाजर, दूध, हरी पत्तियाँ | रतौंधी |
| B1 | साबुत अनाज, दालें | बेरी-बेरी |
| C | खट्टे फल, आँवला | स्कर्वी |
| D | धूप, मछली, अंडे | रिकेट्स |
विटामिन A और D वसा में घुलते हैं; B और C पानी में। संतुलित आहार से आम तौर पर काफ़ी मिल जाते हैं।
खुद करके देखिए
1. 3D में शर्करा का चरण देखिए। स्टार्च और सुक्रोज़ में कितने वलय हैं?
2. घर पर: सादे चावल या रोटी का टुकड़ा दो मिनट चबाइए। वह मीठा लगने लगता है, क्योंकि लार के एंज़ाइम स्टार्च को छोटी शर्कराओं में तोड़ते हैं। जो महसूस हुआ वह लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ग्लूकोज़ C₆H₁₂O₆; सुक्रोज़ = ग्लूकोज़ + फ्रक्टोज़
- स्टार्च और सेल्युलोज़ = बहुत सारी ग्लूकोज़ इकाइयाँ जुड़ी हुई
- वसा = ग्लिसरॉल + 3 वसा अम्ल
- प्रोटीन = अमीनो अम्लों की लड़ी
- विटामिन की कमी → रोग (A: रतौंधी, B1: बेरी-बेरी, C: स्कर्वी, D: रिकेट्स)
हल किए गए उदाहरण
1. मसूड़ों से खून किस विटामिन की कमी से आता है और कौन-सा भोजन मदद करेगा?
विटामिन C की कमी से स्कर्वी होता है। खट्टे फल या आँवला मदद करते हैं।
2. स्टार्च में 1000 ग्लूकोज़ इकाइयाँ हैं और हर जोड़ पर एक पानी का अणु निकलता है। कितने जोड़ और कितने पानी के अणु?
1000 इकाइयों की एक लड़ी में 999 जोड़ होते हैं, इसलिए 999 पानी के अणु निकलते हैं।
3. एक बच्चे की हड्डियाँ कमज़ोर और टेढ़ी हैं। कौन-सा विटामिन और क्या सरल उपाय?
विटामिन D की कमी (रिकेट्स)। धूप, अंडे, मछली और दूध मदद करते हैं, और डॉक्टर को दिखाइए।
आम गलतियाँ
- सभी शर्कराओं को एक जैसा मानना। ग्लूकोज़, सुक्रोज़, स्टार्च और सेल्युलोज़ आकार और काम में अलग हैं।
- सोचना कि मनुष्य सेल्युलोज़ पचा लेता है। नहीं पचा सकता, पर यह उपयोगी रेशा है।
- मानना कि एंटीबायोटिक फ्लू जैसे वायरस पर काम करती है। यह केवल बैक्टीरिया पर काम करती है।
- बिना सलाह के ज़्यादा मात्रा में विटामिन या दवा लेना।