रेशे के रंजक और खाने के रंग
रंजक (डाई) रंगीन कार्बनिक यौगिक है जो रेशे (कपास, ऊन, रेशम, नायलॉन) पर पक्का चढ़ सकता है या किसी तरल में घुल सकता है। रंजक पक्का होना चाहिए: धोने या धूप में उसका रंग जल्दी न उड़े। रंजक के अणु का एक भाग कुछ रंगों की रोशनी सोखता है और बाकी लौटाता है, और दूसरा भाग रेशे को पकड़ता है।
प्राकृतिक रंजक पौधों और कीटों से आते हैं, जैसे नील, हल्दी और मजीठ। संश्लेषित रंजक कारख़ानों में बनते हैं और अधिक चटकीले और टिकाऊ रंग देते हैं।
खाद्य रंग वे रंजक हैं जो थोड़ी मात्रा में खाने के लिए सुरक्षित हैं। खाद्य क़ानून उन्हें जाँचते हैं और केवल स्वीकृत रंग ही चलते हैं। प्राकृतिक उदाहरण: केसर, चुकंदर, हल्दी, कैरामेल। कपड़े या पेंट के रंग खाने में कभी नहीं डालने चाहिए।
पेंट की संरचना
वर्णक बारीक रंगीन चूर्ण हैं जो घुलते नहीं। पेंट में ये तरल में फैले रहते हैं। पेंट के तीन मुख्य भाग:
- वर्णक: रंग और ढकने की क्षमता देता है (जैसे सफ़ेद के लिए टाइटेनियम डाइऑक्साइड)।
- बाइंडर: चिपचिपा भाग (तेल या रेज़िन) जो वर्णक को दीवार पर पकड़कर सूखने पर चिकनी परत बनाता है।
- विलायक (थिनर): पानी या कार्बनिक तरल जिससे पेंट फैलाना आसान होता है। सूखते समय यह उड़ जाता है।
थोड़े योजक (additives) भी डाले जाते हैं: जल्दी सुखाने वाले, फफूँद-रोधी आदि। पानी वाले पेंट घर के अंदर अच्छे हैं क्योंकि कम महकते हैं; तेल वाले पेंट बाहर ज़्यादा मज़बूत होते हैं।
सुगंध, सार और इत्र
महक वाष्पशील यौगिकों से आती है: छोटे अणु जो आसानी से उड़कर हवा के रास्ते नाक तक जाते हैं। इनमें कई एस्टर हैं जो फल जैसी महक देते हैं (जैसे एथिल ब्यूटेनोएट अनानास जैसा)। अन्य ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड या कीटोन हो सकते हैं।
सार (एसेंस या वाष्पशील तेल) फूल, मसाले या फल से निकाला गाढ़ा सुगंधित तरल है, जैसे भाप आसवन से। स्वाद-द्रव्य (फ्लेवर) महक के साथ स्वाद देता है, जैसे वनीला। इत्र सुगंधित तेलों का ऐल्कोहॉल में मिश्रण है। हल्के अणु पहले पहुँचते हैं (शीर्ष सुगंध), फिर मध्यम (मध्य सुगंध), और भारी अणु सबसे देर तक रहते हैं (आधार सुगंध)।
खुद करके देखिए
1. 3D के आख़िरी चरण में हर रंग के साथ मात्रा स्लाइडर कम से ज़्यादा कीजिए। कौन-से रंग ज़्यादा रंजक पर गहरे दिखते हैं?
2. घर पर: दो गिलास पानी में खाने के रंग की एक-एक बूँद डालिए, एक गरम और एक ठंडे में। किसमें रंग तेज़ी से फैला? (गरम में, क्योंकि कण तेज़ चलते हैं।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पेंट = वर्णक + बाइंडर + विलायक (+ योजक)
- रंजक: घुलता है या रेशे पर चढ़ता है; वर्णक: अघुलनशील रंगीन चूर्ण
- इत्र की महक का क्रम: शीर्ष → मध्य → आधार सुगंध
हल किए गए उदाहरण
1. एक पेंट में 40 g वर्णक, 20 g बाइंडर और 40 g विलायक है। वर्णक कितने प्रतिशत है?
कुल = 100 g। वर्णक = 40 ÷ 100 × 100 = 40%।
2. पानी वाला पेंट एक दिन में कठोर क्यों हो जाता है?
पानी (विलायक) उड़ जाता है। बाइंडर बचता है जो वर्णक को ठोस परत में पकड़े रखता है।
3. इत्र की महक कमरे के दूसरे कोने तक क्यों आती है?
इत्र के अणु हल्के हैं और आसानी से उड़ते हैं, इसलिए हवा में फैलकर नाक तक पहुँचते हैं।
आम गलतियाँ
- रंजक और वर्णक को एक समझना। रंजक घुलता है; वर्णक नहीं।
- सोचना कि सूखे पेंट में विलायक रहता है। वह उड़ जाता है।
- मानना कि कोई भी रंजक खाने में चलेगा। केवल स्वीकृत खाद्य रंग सुरक्षित हैं।
- इत्र को केवल ऐल्कोहॉल समझना। यह सुगंधित यौगिकों का ऐल्कोहॉल में मिश्रण है।