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कार्बनिक अभिक्रिया क्रियाविधि की मूल बातें

अभिक्रिया क्रियाविधि एक-एक चरण की कहानी है: कौन-से आबंध टूटते हैं, कौन-से बनते हैं और इलेक्ट्रॉन कहाँ जाते हैं। सहसंयोजी आबंध दो तरह से टूटता है। समांश विखंडन में हर परमाणु एक इलेक्ट्रॉन लेता है और मुक्त मूलक बनते हैं। विषमांश विखंडन में एक परमाणु दोनों इलेक्ट्रॉन ले लेता है, जिससे कार्बधनायन (C पर + आवेश) और कार्बऋणायन या ऋणायन बनते हैं। इलेक्ट्रॉन की कमी वाले, इलेक्ट्रॉन ढूँढने वाले कण इलेक्ट्रॉनस्नेही हैं; इलेक्ट्रॉन देने वाले कण नाभिकस्नेही हैं। अणु के अंदर इलेक्ट्रॉनों की चाल चार प्रभाव तय करते हैं: प्रेरणिक प्रभाव (σ आबंधों पर खिंचाव), अनुनाद प्रभाव (π इलेक्ट्रॉनों का फैलना), इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव (अभिकर्मक के हमले पर अस्थायी पूरा खिसकना) और अतिसंयुग्मन (C–H के σ इलेक्ट्रॉनों का पास के खाली p कक्षक या π आबंध में फैलना)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. C–C आबंध में 2 इलेक्ट्रॉन हैं। बराबर बाँटो: हर कार्बन एक इलेक्ट्रॉन रखता है। दो मुक्त मूलक बने। यह समांश विखंडन है।
  2. अब बराबर मत बाँटो: क्लोरीन दोनों इलेक्ट्रॉन ले गया। कार्बन कार्बधनायन (+) बना, क्लोरीन Cl⁻ बना। यह विषमांश विखंडन है।
  3. कार्बधनायन: मेथिल, 1°, 2°, 3°। हर ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन अंदर धकेलता है (हरे तीर) और + आवेश को शांत करता है। 3° सबसे स्थायी।
  4. इलेक्ट्रॉनस्नेही (E⁺, इलेक्ट्रॉन की कमी) इलेक्ट्रॉन ढूँढता है। नाभिकस्नेही (Nu⁻, इलेक्ट्रॉन से भरपूर) इलेक्ट्रॉन लाता है। वक्र तीर हमेशा इलेक्ट्रॉनों से शुरू होता है।
  5. क्लोरीन शृंखला पर σ इलेक्ट्रॉन खींचता है। खिंचाव (δ+) C1 पर तेज़, C2 पर कम और C3 तक लगभग खत्म। यह प्रेरणिक प्रभाव है।
  6. खेलो: प्रभाव चुनो (प्रेरणिक, अनुनाद, इलेक्ट्रोमेरी, अतिसंयुग्मन) और देखो इलेक्ट्रॉन कहाँ जाते हैं।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

विषमांश की जगह समांश कब होता है?

अध्रुवीय आबंधों (C–C, Cl–Cl) में, गैस अवस्था या अध्रुवीय विलायक में, और ऊष्मा, प्रकाश या परॉक्साइड की उपस्थिति में।

कैसे पता चले कि दोनों इलेक्ट्रॉन किसे मिलेंगे?

अधिक विद्युतऋणी परमाणु युग्म लेता है। C–Cl, C–Br, C–O में कार्बन अक्सर युग्म खोकर C⁺ बनता है।

3° कार्बधनायन 1° से अधिक स्थायी क्यों?

तीन ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं (+I) और अतिसंयुग्मन के लिए 9 α-H देते हैं। धन आवेश फैल जाता है, जो अधिक स्थायी है।

क्या उदासीन अणु नाभिकस्नेही हो सकता है?

हाँ। एकाकी युग्म वाला कोई भी अणु, जैसे H₂O, NH₃, ROH, इलेक्ट्रॉन दे सकता है।

प्रेरणिक प्रभाव कम क्यों होता जाता है?

हर σ आबंध खिंचाव का केवल कुछ भाग आगे देता है। लगभग 3 आबंध बाद यह बहुत छोटा रह जाता है।

अनुनाद और इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव में क्या अंतर है?

अनुनाद अणु में π इलेक्ट्रॉनों का स्थायी फैलाव है। इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव अभिकर्मक के हमले के समय π युग्म का अस्थायी पूरा खिसकना है।

अभिक्रिया क्रियाविधि क्या है?

कार्बनिक अभिक्रिया में मुख्य अणु क्रियाधार (substrate) और हमला करने वाला अभिकर्मक (reagent) कहलाता है। क्रियाविधि हर चरण दिखाती है: आबंध टूटना, कम समय जीने वाले अभिक्रियाशील मध्यवर्ती, और नए आबंध बनना। इलेक्ट्रॉन की चाल वक्र तीरों से: पूरा तीर एक इलेक्ट्रॉन-युग्म खिसकाता है; आधे सिर वाला 'मछली-काँटा' तीर एक इलेक्ट्रॉन।

क्रियाधार + अभिकर्मक → [मध्यवर्ती] → उत्पाद

सहसंयोजी आबंध का विखंडन

समांश विखंडन

आबंध युग्म बराबर बँटता है: हर परमाणु एक इलेक्ट्रॉन लेता है। मुक्त मूलक (अयुग्मित इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु/समूह) बनते हैं। इसके लिए ऊष्मा या प्रकाश चाहिए; अध्रुवीय आबंध और गैस अवस्था में होता है। उदाहरण: UV में Cl–Cl → 2 Cl•।

विषमांश विखंडन

आबंध युग्म अधिक विद्युतऋणी परमाणु के पास जाता है। आयन बनते हैं। कार्बन युग्म खोए तो कार्बधनायन; कार्बन युग्म रखे तो कार्बऋणायन। ध्रुवीय आबंध और ध्रुवीय विलायक इसे बढ़ाते हैं। उदाहरण: (CH₃)₃C–Br → (CH₃)₃C⁺ + Br⁻।

अभिक्रियाशील मध्यवर्ती: कार्बधनायन, कार्बऋणायन, मुक्त मूलक

मध्यवर्तीआवेश / इलेक्ट्रॉनसंकरण, आकृतिस्थायित्व क्रम
कार्बधनायन C⁺+, C के चारों ओर 6 इलेक्ट्रॉनsp², त्रिकोणीय समतल (खाली p कक्षक)3° > 2° > 1° > CH₃⁺
कार्बऋणायन C⁻−, 8 इलेक्ट्रॉन (एक एकाकी युग्म)sp³, पिरामिडीCH₃⁻ > 1° > 2° > 3°
मुक्त मूलक C•उदासीन, 7 इलेक्ट्रॉनsp², लगभग समतल3° > 2° > 1° > CH₃•

3° कार्बधनायन सबसे स्थायी क्यों: ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं (+I) और अतिसंयुग्मन से σ इलेक्ट्रॉन बाँटते हैं, जिससे धन आवेश फैल जाता है। कार्बऋणायन में यही धकेलना ऋण आवेश और बढ़ाता है, इसलिए क्रम उलट जाता है। C=C या बेंज़ीन के पास वाले कार्बधनायन (ऐलिल, बेंज़िल) अनुनाद से और भी स्थायी हैं।

इलेक्ट्रॉनस्नेही और नाभिकस्नेही

नाभिकस्नेही (Nu:) इलेक्ट्रॉन से भरपूर, युग्म देता है: OH⁻, CN⁻, Cl⁻, RO⁻, और एकाकी युग्म वाले उदासीन अणु जैसे H₂O, NH₃, R–NH₂।

इलेक्ट्रॉनस्नेही (E⁺) इलेक्ट्रॉन की कमी वाला, युग्म लेता है: H⁺, NO₂⁺, Br⁺, कार्बधनायन, और उदासीन BF₃, AlCl₃, C=O का कार्बन।

नाभिकस्नेही इलेक्ट्रॉन-कमी वाले केंद्र पर हमला करता है; इलेक्ट्रॉनस्नेही C=C या बेंज़ीन जैसे इलेक्ट्रॉन-धनी केंद्र पर। वक्र तीर नाभिकस्नेही से इलेक्ट्रॉनस्नेही की ओर जाता है।

कार्बनिक अभिक्रियाओं के प्रकार (झलक)

प्रतिस्थापन (एक समूह दूसरे की जगह), योगज (बहु-आबंध पर परमाणु जुड़ते हैं), विलोपन (छोटा अणु निकलता है, बहु-आबंध बनता है) और पुनर्विन्यास (उसी अणु में परमाणु नए ढंग से सजते हैं)।

प्रेरणिक प्रभाव

जब σ आबंध अलग विद्युतऋणता वाले परमाणुओं को जोड़ता है, तो इलेक्ट्रॉन युग्म अधिक विद्युतऋणी की ओर खिसकता है। यह खिसकाव शृंखला में आगे जाता है पर लगभग 3 कार्बन बाद खत्म हो जाता है। यह स्थायी प्रभाव है।

उपयोग: क्लोरोऐसीटिक अम्ल ऐसीटिक अम्ल से प्रबल है, क्योंकि –Cl इलेक्ट्रॉन खींचकर ऋणायन को स्थायी बनाता है।

अनुनाद प्रभाव (मेसोमेरी प्रभाव)

जब π इलेक्ट्रॉन या एकाकी युग्म π आबंधों के पास हों (संयुग्मन), तो वे कई परमाणुओं पर फैल जाते हैं। एक लुइस संरचना काफ़ी नहीं; असली अणु कई विहित संरचनाओं का अनुनादी संकर है, जो किसी भी एक संरचना से अधिक स्थायी है (अनुनाद ऊर्जा)। बेंज़ीन में छहों C–C आबंध बराबर (139 pm)।

विहित संरचनाओं के नियम: परमाणुओं की जगह वही, अयुग्मित इलेक्ट्रॉन बराबर; ज़्यादा सहसंयोजी आबंध और कम आवेश-पृथक्करण वाली संरचना ज़्यादा योगदान देती है।

इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव

यह अस्थायी प्रभाव है: जब अभिकर्मक बहु-आबंध के पास आता है, तो पूरा π युग्म एक परमाणु पर चला जाता है। अभिकर्मक हटते ही यह खत्म।

प्रेरणिक और इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव उलटे हों तो अभिकर्मक रहते तक इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव जीतता है।

अतिसंयुग्मन

धनावेशित कार्बन (या C=C) के पड़ोसी कार्बन के C–H आबंध के σ इलेक्ट्रॉन खाली p कक्षक या π आबंध में फैल सकते हैं। इसे आबंध-रहित अनुनाद भी कहते हैं। जितने ज़्यादा α-हाइड्रोजन, उतना ज़्यादा अतिसंयुग्मन।

(CH₃)₃C⁺ में 9 α-H, (CH₃)₂CH⁺ में 6, CH₃CH₂⁺ में 3, CH₃⁺ में 0। यह 3° > 2° > 1° > मेथिल क्रम से मेल खाता है, और बताता है कि अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन अधिक स्थायी क्यों हैं।

करके देखो

पेंसिल तोड़ने का खेल (समांश बनाम विषमांश)। फिर कागज़ पर हर कार्बधनायन के α-हाइड्रोजन गिनकर क्रम बनाओ और 3D के तीसरे चरण से मिलाओ।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. UV प्रकाश में CH₃–CH₃ का विखंडन दिखाओ और उत्पादों के नाम बताओ।

पंक्ति 1: C–C अध्रुवीय है, प्रकाश ऊर्जा देता है → समांश। पंक्ति 2: CH₃–CH₃ → CH₃• + CH₃•। पंक्ति 3: दो मेथिल मुक्त मूलक, हर कार्बन के पास 7 इलेक्ट्रॉन।

2. (CH₃)₃C–Cl के विषमांश विखंडन के उत्पाद बताओ।

पंक्ति 1: Cl अधिक विद्युतऋणी है, वह युग्म लेता है। पंक्ति 2: (CH₃)₃C–Cl → (CH₃)₃C⁺ + Cl⁻। पंक्ति 3: तृतीयक-ब्यूटिल (3°) कार्बधनायन बना; यह काफ़ी स्थायी है।

3. स्थायित्व क्रम लिखो: CH₃⁺, (CH₃)₂CH⁺, (CH₃)₃C⁺, CH₃CH₂⁺।

पंक्ति 1: α-H गिनो: 0, 6, 9, 3। पंक्ति 2: ज़्यादा α-H और ज़्यादा +I ऐल्किल = ज़्यादा स्थायी। पंक्ति 3: (CH₃)₃C⁺ > (CH₃)₂CH⁺ > CH₃CH₂⁺ > CH₃⁺।

4. इलेक्ट्रॉनस्नेही या नाभिकस्नेही बताओ: NH₃, BF₃, CN⁻, NO₂⁺, H₂O, AlCl₃।

पंक्ति 1: एकाकी युग्म / ऋण आवेश → नाभिकस्नेही: NH₃, CN⁻, H₂O। पंक्ति 2: इलेक्ट्रॉन-कमी (अपूर्ण अष्टक या +) → इलेक्ट्रॉनस्नेही: BF₃, NO₂⁺, AlCl₃। पंक्ति 3: सुझाव: केंद्रीय परमाणु के चारों ओर इलेक्ट्रॉन गिनो।

5. प्रबल अम्ल कौन: CH₃COOH या ClCH₂COOH? क्यों?

पंक्ति 1: Cl का −I प्रभाव इलेक्ट्रॉन अपनी ओर खींचता है। पंक्ति 2: ClCH₂COO⁻ में ऋण आवेश फैलकर स्थायी होता है। पंक्ति 3: अधिक स्थायी ऋणायन = प्रबल अम्ल → ClCH₂COOH।

6. (CH₃)₃C⁺ और CH₃CH₂⁺ में कितनी अतिसंयुग्मी संरचनाएँ हैं?

पंक्ति 1: हर α-C–H आबंध एक संरचना देता है। पंक्ति 2: (CH₃)₃C⁺: 3 CH₃ × 3 H = 9। पंक्ति 3: CH₃CH₂⁺: 1 CH₃ × 3 H = 3।

7. प्रोपीन CH₃–CH=CH₂ पर H⁺ के हमले में इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव दिखाओ।

पंक्ति 1: π युग्म उस कार्बन की ओर जाता है जिससे H⁺ जुड़ेगा (+E)। पंक्ति 2: H⁺ सिरे वाले CH₂ से जुड़ता है, CH₃–CH⁺–CH₃ बनता है। पंक्ति 3: यह अधिक स्थायी 2° कार्बधनायन है (1° नहीं)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. समांश विखंडन से बनते हैं:
2. कार्बधनायन में कार्बन का संकरण:
3. नाभिकस्नेही कौन है?
4. सबसे स्थायी कार्बधनायन:
5. अभिकर्मक के हमले से होने वाला अस्थायी प्रभाव:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समांश और विषमांश विखंडन में क्या अंतर है?

समांश में हर परमाणु एक इलेक्ट्रॉन लेता है और मुक्त मूलक बनते हैं। विषमांश में एक परमाणु दोनों इलेक्ट्रॉन लेता है और आयन बनते हैं।

कार्बधनायन का स्थायित्व क्रम क्या है?

3° > 2° > 1° > मेथिल, ऐल्किल समूहों के +I प्रभाव और अतिसंयुग्मन के कारण। ऐलिल और बेंज़िल कार्बधनायन अनुनाद से स्थायी होते हैं।

अतिसंयुग्मन क्या है?

α-C–H आबंध के σ इलेक्ट्रॉनों का पास के खाली p कक्षक या π आबंध में फैलना। इसे आबंध-रहित अनुनाद भी कहते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

रोमानियाClasa a XI-aReactions of organic compounds
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स्पेन2º BachilleratoOrganic chemistry
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