ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन: नामकरण और समावयवी
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (ऐरीन) में एक या अधिक बेंज़ीन वलय होते हैं। कुछ की सुखद गंध से यह नाम पड़ा। एक वलय वाले बेंज़ेनॉइड (बेंज़ीन, टॉलूईन); संगलित वलय वाले जैसे नैफ़्थेलीन और ऐन्थ्रासीन।
- टॉलूईन = मेथिलबेंज़ीन C₆H₅CH₃। ज़ाइलीन = डाइमेथिलबेंज़ीन।
- वलय पर दो समूहों के स्थान: ऑर्थो (o) = 1,2; मेटा (m) = 1,3; पैरा (p) = 1,4। इसलिए तीन डाइमेथिलबेंज़ीन: o-, m- और p-ज़ाइलीन।
- C₆H₅– को फ़ेनिल कहते हैं।
बेंज़ीन की संरचना
बेंज़ीन C₆H₆ है। काग़ज़ पर यह बहुत असंतृप्त दिखती है, फिर भी ब्रोमीन जल या बेयर अभिकर्मक को आसानी से रंगहीन नहीं करती। क्यों?
केकुले संरचना (1865)
छह कार्बनों का वलय, एकांतर एकल और द्वि-आबंध। समस्या: इससे दो अलग 1,2-डाइब्रोमोबेंज़ीन होने चाहिए (Br एकल या द्वि-आबंध के आर-पार), पर एक ही मिलती है। केकुले ने कहा कि द्वि-आबंध जगह बदलते रहते हैं।
अनुनाद
आज हम कहते हैं कि दोनों केकुले रूप अनुनाद संरचनाएँ हैं। असली बेंज़ीन संकर है: यह बदलती नहीं, हमेशा बीच में रहती है। इसे षट्भुज के अंदर वृत्त से दिखाते हैं।
कक्षक चित्र
- छहों कार्बन sp² हैं। वलय चपटा है; सभी आबंध कोण 120°।
- हर कार्बन पर एक असंकरित p कक्षक वलय से समकोण पर खड़ा है।
- छहों p कक्षक चारों ओर बगल से अतिव्यापन करके वलय के ऊपर और नीचे लगातार π बादल बनाते हैं। छह π इलेक्ट्रॉन विस्थानित हैं।
- सभी C–C आबंध 139 pm, C–C (154 pm) और C=C (134 pm) के बीच।
- विस्थानन से ऊर्जा घटती है: बेंज़ीन, तीन स्थिर द्वि-आबंध वाले वलय से लगभग 150 kJ/mol ज़्यादा स्थायी है। यह इसकी अनुनाद ऊर्जा है।
ऐरोमैटिकता (हकेल नियम)
कोई यौगिक ऐरोमैटिक है यदि वह:
- चक्रीय (वलय) हो,
- समतलीय (चपटा) हो,
- पूर्ण संयुग्मित हो: हर वलय परमाणु पर p कक्षक, ताकि π बादल पूरा घूमे,
- उसमें (4n + 2) π इलेक्ट्रॉन हों, जहाँ n = 0, 1, 2, … यानी 2, 6, 10, 14 π इलेक्ट्रॉन।
उदाहरण: बेंज़ीन (6 π, n = 1) ✓; नैफ़्थेलीन (10 π, n = 2) ✓; साइक्लोपेन्टाडाइएनिल ऋणायन (6 π) ✓; साइक्लोप्रोपेनिल धनायन (2 π, n = 0) ✓। साइक्लोऑक्टाटेट्राईन (8 π) ऐरोमैटिक नहीं; यह टब आकार में मुड़ जाता है। साइक्लोपेन्टाडाईन ऐरोमैटिक नहीं, क्योंकि एक कार्बन sp³ है और p कक्षकों का वलय तोड़ता है।
बेंज़ीन बनाने की विधियाँ
- एथाइन का चक्रीय बहुलकीकरण: 3HC≡CH → C₆H₆ (लाल-तप्त लोहे की नली, 873 K)।
- सोडियम बेन्ज़ोएट का विकार्बोक्सिलन: C₆H₅COONa + NaOH → C₆H₆ + Na₂CO₃ (सोडा लाइम, ताप)।
- फ़ीनॉल का अपचयन: फ़ीनॉल वाष्प को ज़िंक चूर्ण के साथ गर्म करो: C₆H₅OH + Zn → C₆H₆ + ZnO।
बेंज़ीन विशेष गंध वाला रंगहीन द्रव है, पानी से हल्का, पानी में अघुलनशील, और धुएँदार ज्वाला से जलता है (ज़्यादा कार्बन)।
इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ
π बादल इलेक्ट्रॉनों से भरपूर है, इसलिए बेंज़ीन इलेक्ट्रॉनस्नेही (E⁺) को आकर्षित करती है। पर आबंध पर योग स्थायी ऐरोमैटिक वलय को नष्ट कर देगा। इसलिए बेंज़ीन प्रतिस्थापन करती है: E एक H की जगह लेता है और वलय ऐरोमैटिक रहता है।
तीन चरणों में क्रियाविधि
- E⁺ बनना: अभिकर्मक और उत्प्रेरक से इलेक्ट्रॉनस्नेही बनता है। जैसे: HNO₃ + 2H₂SO₄ → NO₂⁺ + H₃O⁺ + 2HSO₄⁻।
- आक्रमण (धीमा): E⁺ दो π इलेक्ट्रॉन लेकर एक वलय कार्बन से जुड़ता है। वह कार्बन sp³ हो जाता है। धन आवेश बाकी पाँच कार्बनों पर फैलता है। यह σ-संकुल (ऐरीनियम आयन) है; यह ऐरोमैटिक नहीं।
- H⁺ का निकलना (तेज़): क्षारक (HSO₄⁻, AlCl₄⁻) sp³ कार्बन से H⁺ ले लेता है। π वलय फिर बंद होता है और ऐरोमैटिकता लौटती है।
पाँच मुख्य अभिक्रियाएँ
- नाइट्रीकरण: सांद्र HNO₃ + सांद्र H₂SO₄ (नाइट्रीकारक मिश्रण), लगभग 323–333 K → नाइट्रोबेंज़ीन C₆H₅NO₂। E⁺ = NO₂⁺ (नाइट्रोनियम आयन)।
- हैलोजनीकरण: अँधेरे में Cl₂ और लूइस अम्ल (निर्जल FeCl₃, FeBr₃ या AlCl₃) → क्लोरोबेंज़ीन। लूइस अम्ल Cl⁺ बनाता है।
- सल्फ़ोनीकरण: धूमायमान H₂SO₄ (ओलियम) → बेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल C₆H₅SO₃H। E = SO₃।
- फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स ऐल्किलीकरण: CH₃Cl + निर्जल AlCl₃ → टॉलूईन C₆H₅CH₃। E⁺ = CH₃⁺ (R⁺)।
- फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स ऐसिलीकरण: CH₃COCl + निर्जल AlCl₃ → ऐसीटोफ़ीनोन C₆H₅COCH₃। E⁺ = CH₃CO⁺ (ऐसिलियम आयन)।
योग और दहन (केवल कठोर परिस्थिति में)
- उच्च ताप और दाब पर Ni के साथ H₂ → साइक्लोहेक्सेन C₆H₁₂।
- UV प्रकाश में Cl₂ (बिना उत्प्रेरक) तीन बार जुड़ता है → बेंज़ीन हेक्साक्लोराइड C₆H₆Cl₆ (BHC)।
- दहन: 2C₆H₆ + 15O₂ → 12CO₂ + 6H₂O, धुएँदार ज्वाला।
समूह का निर्देशात्मक प्रभाव
जब बेंज़ीन पर पहले से एक समूह हो, तो दूसरा समूह कहीं भी नहीं जाता। पहला समूह स्थान तय करता है।
ऑर्थो और पैरा निर्देशक
–OH, –OCH₃, –NH₂, –NHR, –CH₃ (ऐल्किल), –Cl, –Br, –I। ज़्यादातर के वलय के पास एकाकी युग्म है (या CH₃ की तरह इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं)। अनुनाद से ऑर्थो और पैरा कार्बनों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है, इसलिए E⁺ वहीं जाता है। जैसे: टॉलूईन का नाइट्रीकरण → o-नाइट्रोटॉलूईन + p-नाइट्रोटॉलूईन।
- –OH, –NH₂, –CH₃ वलय को बेंज़ीन से तेज़ बनाते हैं: ये सक्रियक हैं।
- हैलोजन विशेष हैं: ये σ आबंध से इलेक्ट्रॉन खींचते हैं (−I प्रभाव), इसलिए वलय धीमा (निष्क्रियक), पर इनके एकाकी युग्म फिर भी ऑर्थो/पैरा निर्देशित करते हैं।
मेटा निर्देशक
–NO₂, –CN, –CHO, –COR, –COOH, –SO₃H। ये वलय से इलेक्ट्रॉन खींचते हैं (वलय से जुड़े परमाणु का किसी विद्युत-ऋणात्मक परमाणु से बहु-आबंध है)। अनुनाद से ऑर्थो और पैरा सबसे धनात्मक होते हैं, इसलिए E⁺ मेटा पर जाता है, जो कम ग़रीब है। ये सभी निष्क्रियक हैं। जैसे: नाइट्रोबेंज़ीन का नाइट्रीकरण (कठोर परिस्थिति) → m-डाइनाइट्रोबेंज़ीन।
कैंसरजनता और विषाक्तता
बेंज़ीन और बहुनाभिकीय हाइड्रोकार्बन (दो से ज़्यादा संगलित बेंज़ीन वलय) विषैले हैं और कई कैंसरजन (कैंसर करने वाले) हैं।
- ये कोयला, लकड़ी, पेट्रोल या तंबाकू जैसे कार्बनिक पदार्थों के अधूरे जलने से बनते हैं। ये कालिख, कोलतार, वाहनों के धुएँ और सिगरेट के धुएँ में होते हैं।
- उदाहरण: 1,2-बेंज़ऐन्थ्रासीन, 3-मेथिलकोलैन्थ्रीन, 1,2,5,6-डाइबेंज़ऐन्थ्रासीन और बेंज़ो[a]पाइरीन।
- शरीर में एंज़ाइम इन्हें क्रियाशील अणुओं में बदलते हैं जो DNA से जुड़ जाते हैं। इससे जीन को नुकसान होता है और कैंसर शुरू हो सकता है।
- बेंज़ीन वाष्प के लंबे संपर्क से अस्थि-मज्जा को नुकसान और ल्यूकीमिया (रक्त कैंसर) हो सकता है।
सुरक्षित रहो: धूम्रपान और दूसरों के धुएँ से बचो, लकड़ी या कोयले वाली रसोई हवादार रखो, पेट्रोल वाष्प में साँस मत लो, और प्रयोगशाला में बेंज़ीन केवल धूम-कक्ष में लो (टॉलूईन सुरक्षित विलायक है)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- हकेल नियम: चक्रीय, समतलीय, संयुग्मित और π इलेक्ट्रॉन = 4n + 2 हों तो ऐरोमैटिक
- बेंज़ीन C–C = 139 pm (C–C 154, C=C 134)
- C₆H₆ + HNO₃ → C₆H₅NO₂ + H₂O (सांद्र H₂SO₄)
- C₆H₆ + Cl₂ → C₆H₅Cl + HCl (निर्जल FeCl₃)
- C₆H₆ + H₂SO₄(धूमायमान) → C₆H₅SO₃H + H₂O
- C₆H₆ + CH₃Cl → C₆H₅CH₃ + HCl (निर्जल AlCl₃)
- C₆H₆ + CH₃COCl → C₆H₅COCH₃ + HCl (निर्जल AlCl₃)
- o/p: –OH, –NH₂, –OCH₃, –CH₃, –X | m: –NO₂, –CN, –CHO, –COOH, –SO₃H
हल किए गए उदाहरण
1. क्या साइक्लोपेन्टाडाइएनिल ऋणायन (C₅H₅⁻) ऐरोमैटिक है?
चारों नियम जाँचो। चक्रीय ✓। समतलीय ✓। CH⁻ कार्बन का एकाकी युग्म p कक्षक में है, तो हर परमाणु पर p कक्षक: संयुग्मित ✓। π इलेक्ट्रॉन: 2 द्वि-आबंध × 2 = 4, और एकाकी युग्म 2 = 6। 6 = 4(1) + 2 ✓। इसलिए ऐरोमैटिक।
2. नैफ़्थेलीन (C₁₀H₈) में कितने π इलेक्ट्रॉन हैं? क्या यह ऐरोमैटिक है?
सामान्य चित्र में 5 द्वि-आबंध → 10 π इलेक्ट्रॉन। 10 = 4(2) + 2, n = 2। यह चपटा और पूर्ण संयुग्मित है, इसलिए ऐरोमैटिक।
3. एथेनॉयल क्लोराइड से बेंज़ीन के फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स ऐसिलीकरण में इलेक्ट्रॉनस्नेही और उत्पाद लिखो।
CH₃COCl + AlCl₃ → CH₃CO⁺ + AlCl₄⁻। ऐसिलियम आयन CH₃CO⁺ वलय पर आक्रमण करता है; H⁺ निकलता है। उत्पाद: ऐसीटोफ़ीनोन C₆H₅COCH₃ (+ HCl)।
4. टॉलूईन के नाइट्रीकरण के मुख्य उत्पाद बताओ।
–CH₃ o/p निर्देशक है (वलय में इलेक्ट्रॉन धकेलता है)। इसलिए NO₂ ऑर्थो या पैरा पर: o-नाइट्रोटॉलूईन और p-नाइट्रोटॉलूईन।
5. नाइट्रोबेंज़ीन के ब्रोमीनीकरण (Br₂/FeBr₃) का उत्पाद बताओ।
–NO₂ इलेक्ट्रॉन खींचता है, मेटा निर्देशक है। Br मेटा पर: m-ब्रोमोनाइट्रोबेंज़ीन (1-ब्रोमो-3-नाइट्रोबेंज़ीन)।
6. बेंज़ीन से m-क्लोरोनाइट्रोबेंज़ीन बनाने के लिए पहले नाइट्रीकरण या क्लोरीनीकरण?
पहले नाइट्रीकरण। –NO₂ मेटा निर्देशक है, तो Cl फिर मेटा पर जाएगा। पहले क्लोरीनीकरण करते तो –Cl (o/p निर्देशक) NO₂ को ऑर्थो और पैरा पर भेजता।
7. 100% लब्धि पर 39 g बेंज़ीन से कितने ग्राम नाइट्रोबेंज़ीन बनेगी?
C₆H₆ = 78 g/mol, तो 39 g = 0.5 मोल। 1 मोल बेंज़ीन → 1 मोल नाइट्रोबेंज़ीन C₆H₅NO₂ (72 + 5 + 14 + 32 = 123 g/mol)। द्रव्यमान = 0.5 × 123 = 61.5 g।
आम गलतियाँ
- सोचना कि बेंज़ीन दोनों केकुले रूपों के बीच बदलती रहती है। यह हमेशा संकर है; हर पल सभी आबंध बराबर।
- द्वि-आबंध वाले हर वलय को ऐरोमैटिक कहना। चारों नियम जाँचो, ख़ासकर समतलीय और 4n + 2 (8 π वाला साइक्लोऑक्टाटेट्राईन नहीं है)।
- हैलोजन को मेटा निर्देशक मानना क्योंकि वे वलय को धीमा करते हैं। वे निष्क्रियक हैं पर ऑर्थो/पैरा निर्देशित करते हैं।
- FeBr₃ के साथ बेंज़ीन + Br₂ को योग लिखना। लूइस अम्ल के साथ बेंज़ीन प्रतिस्थापन करती है (ब्रोमोबेंज़ीन), वलय बचा रहता है।