Romania Clasa a X-a Chemistry
अध्याय: 4
1. Introduction to organic chemistry
Organic compounds and formulas
- कार्बनिक यौगिक: संरचना, सूत्र और वर्गीकरण – कार्बनिक रसायन कार्बन के यौगिकों का रसायन है। कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह हमेशा 4 आबंध बनाता है। इसे चतुःसंयोजकता कहते हैं। चार एकल आबंध हों तो कार्बन sp³ होता है और आकृति चतुष्फलकीय (109.5°) होती है। एक द्विआबंध हो तो sp², समतल (120°)। त्रिआबंध हो तो sp, सीधी रेखा (180°)। एक ही अणु को पूर्ण, संघनित, आबंध-रेखा और 3D वेज-डैश सूत्र से लिख सकते हैं। फिर हम यौगिकों को खुली शृंखला और वलय वाले यौगिकों में, और क्रियात्मक समूह के आधार पर परिवारों में बाँटते हैं। एक परिवार के सदस्य सजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर अगला सदस्य एक CH₂ से अलग होता है।
2. Hydrocarbons
Fuels and petroleum · Alkanes · Alkenes and dienes · Alkynes · Arenes
- ऐल्केन – ऐल्केन ऐसे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें केवल एकल C–C आबंध होते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH2n+2 है। इन्हें ऐल्कीन में हाइड्रोजन जोड़कर, वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से, ऐल्किल हैलाइड के अपचयन से और विकार्बोक्सिलन से बनाते हैं। ये अध्रुवीय होते हैं, जलने पर बहुत ऊष्मा देते हैं और प्रकाश में H की जगह Cl ले लेते हैं। C–C आबंध के चारों ओर घूमने से सांतरित और ग्रहणित आकार बनते हैं, जिन्हें संरूपण कहते हैं।
- ऐल्कीन – ऐल्कीन वे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें एक C=C द्वि-आबंध होता है; सूत्र CₙH₂ₙ। द्वि-आबंध = एक σ + एक π आबंध, इसलिए उसके आसपास अणु चपटा है और घूम नहीं सकता। इसी से समपक्ष (cis) और विपक्ष (trans) समावयवी बनते हैं। ऐल्कीन छोटे अणु (H₂O, HX, X₂) हटाकर या ऐल्काइन में आंशिक H₂ जोड़कर बनते हैं। ये मुख्य रूप से योगज अभिक्रियाएँ करते हैं: H₂, X₂, HX (मारकोनीकॉफ़ नियम, या परॉक्साइड के साथ उल्टा), पानी, ओज़ोन, KMnO₄ और बहुलकीकरण।
- ऐल्काइन – ऐल्काइन में C≡C त्रि-आबंध होता है; सूत्र CₙH₂ₙ₋₂। त्रि-आबंध के दोनों कार्बन sp संकरित हैं, इसलिए अणु सीधी रेखा है। त्रि-आबंध वाले कार्बन पर लगा H हल्का अम्लीय है, क्योंकि sp कार्बन इलेक्ट्रॉनों को कसकर पकड़ता है: NaNH₂ जैसे प्रबल क्षारक उसे हटा देते हैं। त्रि-आबंध दो बार खुल सकता है, इसलिए ऐल्काइन H₂, X₂ या HX के दो अणु जोड़ते हैं। पानी (Hg²⁺ उत्प्रेरक) से ऐल्डिहाइड या कीटोन बनते हैं, और तीन एथाइन जुड़कर बेंज़ीन बनाते हैं।
- बेंज़ीन और ऐरोमैटिकता – बेंज़ीन (C₆H₆) छह sp² कार्बनों का चपटा वलय है। इसके छह π इलेक्ट्रॉन पूरे वलय में फैले हैं, इसलिए सभी C–C आबंध बराबर हैं और वलय बहुत स्थायी है। ऐसा वलय ऐरोमैटिक कहलाता है जब वह चक्रीय, समतलीय, पूर्ण संयुग्मित हो और उसमें 4n + 2 π इलेक्ट्रॉन हों (हकेल नियम)। बेंज़ीन योग की जगह इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन (नाइट्रीकरण, हैलोजनीकरण, सल्फ़ोनीकरण, फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स) पसंद करती है, क्योंकि इससे स्थायी वलय बचा रहता है। वलय पर पहले से लगा समूह तय करता है कि अगला समूह ऑर्थो/पैरा जाएगा या मेटा। बेंज़ीन और संगलित-वलय हाइड्रोकार्बन विषैले हैं और कैंसर कर सकते हैं।
3. Compounds with functional groups
Alcohols · Acetic acid · Soaps and detergents
- ऐल्कोहॉल – ऐल्कोहॉल वह कार्बनिक यौगिक है जिसमें –OH समूह एक sp³ कार्बन पर लगा हो (R–OH)। –OH वाले कार्बन पर जुड़े कार्बन गिनकर इसे प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) या तृतीयक (3°) कहते हैं। नाम: ऐल्केन का 'e' हटाकर 'ऑल' (ol), –OH को सबसे छोटा नंबर। बनाने के तरीके: ऐल्कीन का जलयोजन या हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण, ऐल्डिहाइड/कीटोन/अम्ल का अपचयन, ग्रीन्यार अभिकर्मक। हाइड्रोजन बंध के कारण क्वथनांक ऊँचा और पानी में घुलनशील। अभिक्रियाओं में या तो O–H टूटता है (Na, एस्टरीकरण) या C–O (HX, निर्जलीकरण); 1° और 2° का ऑक्सीकरण होता है। मेथेनॉल और एथेनॉल मुख्य व्यापारिक ऐल्कोहॉल हैं।
- कार्बोक्सिलिक अम्ल: कार्बोक्सिल समूह, अम्लता और अभिक्रियाएँ – कार्बोक्सिलिक अम्ल में कार्बोक्सिल समूह −COOH होता है: एक ही कार्बन पर C=O और O−H। यह H⁺ दे सकता है, और बचा हुआ आयन (कार्बोक्सिलेट, −COO⁻) स्थिर होता है क्योंकि उसका ऋण आवेश दोनों ऑक्सीजन में बराबर बँटा होता है। इसी कारण ये फ़ीनॉल और ऐल्कोहॉल से ज़्यादा अम्लीय हैं (पर HCl जैसे खनिज अम्लों से कमज़ोर)। इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (Cl, F, NO₂) अम्ल को प्रबल बनाते हैं, इलेक्ट्रॉन धकेलने वाले (ऐल्किल) दुर्बल। इन्हें ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड या ऐल्किलबेंज़ीन के ऑक्सीकरण से, नाइट्राइल, एस्टर और ऐमाइड के जल-अपघटन से, या ग्रिन्यार अभिकर्मक और CO₂ से बनाते हैं। मुख्य अभिक्रियाएँ: NaHCO₃ से लवण (CO₂ के बुलबुले), एस्टरीकरण, ऐसिल क्लोराइड और ऐनहाइड्राइड बनना, ऐल्कोहॉल में अपचयन, विकार्बोक्सिलन और HVZ अभिक्रिया।
- साबुन और अपमार्जक: मिसेल तेल वाली गंदगी कैसे हटाता है – साबुन अणु लंबी श्रृंखला वाले वसीय अम्ल का सोडियम या पोटैशियम लवण है। इसका आयनिक सिर पानी पसंद करता है और लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ तेल। पानी में साबुन के अणु अपनी पूँछें तेल में घुसा देते हैं और सिर बाहर रखते हैं, जिससे मिसेल बनता है और धुल जाता है। कठोर जल में Ca²⁺ और Mg²⁺ साबुन को अघुलनशील स्कम बना देते हैं; अपमार्जक स्कम नहीं बनाते, इसलिए कठोर जल में भी काम करते हैं।
4. Organic compounds in everyday life
Rubber, plastics and fibres · Dyes, paints, flavours and perfumes · Biologically active compounds
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।