ऐल्काइन की संरचना और नामकरण
ऐल्काइन में C≡C त्रि-आबंध होता है। सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₋₂। पहला सदस्य: एथाइन (ऐसीटिलीन) HC≡CH।
- त्रि-आबंध का हर कार्बन sp संकरित है। दोनों sp कक्षक उल्टी दिशा में हैं, इसलिए H–C≡C–H रेखीय (180°) है।
- त्रि-आबंध = एक σ + दो π। दोनों π आबंध एक-दूसरे से समकोण पर हैं और मिलकर C–C अक्ष के चारों ओर बेलन जैसा इलेक्ट्रॉन बादल बनाते हैं।
- C≡C 120 pm लंबा (सबसे छोटा C–C आबंध), आबंध ऊर्जा 823 kJ/mol।
- नामकरण: -ऐन को -आइन करो। CH₃–C≡CH = प्रोपाइन। CH₃–C≡C–CH₃ = ब्यूट-2-आइन। ऐल्काइन में स्थिति और शृंखला समावयवता होती है, समपक्ष-विपक्ष नहीं (रेखा सीधी है)।
एथाइन बनाने की विधियाँ
- कैल्सियम कार्बाइड से: CaC₂ + 2H₂O → HC≡CH + Ca(OH)₂। कैल्सियम कार्बाइड बिना बुझे चूने को कोक के साथ गर्म करके बनता है: CaO + 3C → CaC₂ + CO।
- निकटस्थ डाइहैलाइड से: दो बार HX हटाओ। ऐल्कोहॉली KOH पहला HX हटाकर वाइनिलिक हैलाइड देता है; दूसरे, कठिन चरण के लिए सोडियम ऐमाइड (NaNH₂) चाहिए: BrCH₂–CH₂Br → CH₂=CHBr → HC≡CH।
भौतिक गुण
एथाइन, प्रोपाइन और ब्यूटाइन गैसें हैं; अगले आठ द्रव; बड़े ठोस। शुद्ध एथाइन गंधहीन है; कार्बाइड वाली एथाइन की लहसुन जैसी गंध अशुद्धियों (PH₃, H₂S) से आती है। ऐल्काइन हल्के ध्रुवीय, पानी से हल्के और पानी में अघुलनशील हैं। आकार बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है।
ऐल्काइन का अम्लीय गुण
त्रि-आबंध वाले कार्बन पर लगा हाइड्रोजन (≡C–H) हल्का अम्लीय है। प्रबल क्षारक इसे हटा सकता है।
- HC≡CH + Na → HC≡C⁻Na⁺ + ½H₂ (मोनोसोडियम एथाइनाइड)
- HC≡CH + NaNH₂ → HC≡C⁻Na⁺ + NH₃ (सोडियम ऐसीटिलाइड)
- CH₃–C≡C–H + NaNH₂ → CH₃–C≡C⁻Na⁺ + NH₃
क्यों?
s कक्षक p कक्षक से ज़्यादा नाभिक के पास रहता है। संकर कक्षक में जितना ज़्यादा s-गुण, उतना कसकर वह इलेक्ट्रॉन पकड़ता है:
- sp³ (एथेन): 25% s
- sp² (एथीन): 33% s
- sp (एथाइन): 50% s
इसलिए sp कार्बन सबसे ज़्यादा विद्युत-ऋणात्मक है। यह C–H इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचता है और H, H⁺ बनकर निकल सकता है। बचा आयन (ऐसीटिलाइड, HC≡C⁻) अपना एकाकी युग्म नाभिक के पास sp कक्षक में रखता है, इसलिए काफ़ी स्थायी है।
अम्लता का क्रम: HC≡CH > H₂C=CH₂ > CH₃–CH₃। ऐल्काइनों में: HC≡CH > CH₃–C≡CH ≫ CH₃–C≡C–CH₃। ब्यूट-2-आइन में ≡C–H नहीं, इसलिए यह अम्लीय नहीं। फिर भी ऐल्काइन पानी या ऐल्कोहॉल से बहुत दुर्बल अम्ल हैं; एथाइन लिटमस को लाल नहीं करती।
इससे अंतस्थ ऐल्काइन (सिरे पर ≡C–H) को भीतरी ऐल्काइन से पहचानते हैं: केवल अंतस्थ ऐल्काइन NaNH₂ से अभिक्रिया करता है (और अमोनियामय AgNO₃ से सफ़ेद अवक्षेप देता है)।
ऐल्काइन की योगज अभिक्रियाएँ
त्रि-आबंध में दो π आबंध हैं, इसलिए योग दो बार हो सकता है। इलेक्ट्रॉनस्नेही के प्रति ऐल्काइन, ऐल्कीन से कम क्रियाशील हैं, क्योंकि sp कार्बन नली जैसे बादल के π इलेक्ट्रॉनों को कसकर पकड़ते हैं।
1. हाइड्रोजन
HC≡CH + H₂ → H₂C=CH₂ → (+H₂) → CH₃–CH₃ (Pt, Pd या Ni)। लिंडलार उत्प्रेरक (समपक्ष) ऐल्कीन पर रोक देता है।
2. हैलोजन
HC≡CH + Br₂ → BrCH=CHBr (1,2-डाइब्रोमोएथीन); + Br₂ → Br₂CH–CHBr₂ (1,1,2,2-टेट्राब्रोमोएथेन)। ब्रोमीन का लाल-भूरा रंग फीका पड़ता है: असंतृप्तता का परीक्षण।
3. हाइड्रोजन हैलाइड
दो HX जुड़ते हैं, दोनों मारकोनीकॉफ़ नियम से, इसलिए दोनों X एक ही कार्बन पर आते हैं (जेम-डाइहैलाइड): HC≡CH + HBr → CH₂=CHBr; + HBr → CH₃–CHBr₂ (1,1-डाइब्रोमोएथेन)। प्रोपाइन + 2HBr → CH₃–CBr₂–CH₃।
4. पानी (जलयोजन)
40% H₂SO₄ और 1% HgSO₄ के साथ 333 K पर एक H₂O जुड़ता है। पहले ईनॉल बनता है (C=C पर OH)। ईनॉल अस्थायी है: उसका H, O से C पर चला जाता है और C=O बनता है (चलावयवता)।
- HC≡CH + H₂O → [CH₂=CH–OH] → CH₃CHO (एथेनैल)। केवल एथाइन ऐल्डिहाइड देती है।
- CH₃–C≡CH + H₂O → [CH₃–C(OH)=CH₂] → CH₃COCH₃ (प्रोपेनोन)। बाकी ऐल्काइन कीटोन देते हैं (मारकोनीकॉफ़: OH भीतर वाले कार्बन पर)।
5. बहुलकीकरण
- रेखीय: बहुत-से एथाइन जुड़कर पॉलिऐसीटिलीन –(CH=CH)ₙ– बनाते हैं, जो बिजली चला सकने वाला प्लास्टिक है।
- चक्रीय: एथाइन को 873 K पर लाल-तप्त लोहे की नली से गुज़ारो। तीन अणु वलय बनाते हैं: 3HC≡CH → C₆H₆ (बेंज़ीन)। यह ऐलिफ़ैटिक और ऐरोमैटिक रसायन को जोड़ता है।
6. दहन
2C₂H₂ + 5O₂ → 4CO₂ + 2H₂O, बहुत गर्म ज्वाला, वेल्डिंग में उपयोग।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऐल्काइन: CₙH₂ₙ₋₂
- CaC₂ + 2H₂O → C₂H₂ + Ca(OH)₂
- s-गुण: sp 50% > sp² 33% > sp³ 25%
- HC≡CH + NaNH₂ → HC≡C⁻Na⁺ + NH₃
- HC≡CH + 2Br₂ → Br₂CH–CHBr₂
- HC≡CH + 2HBr → CH₃CHBr₂ (मारकोनीकॉफ़, दो बार)
- HC≡CH + H₂O → CH₃CHO (Hg²⁺, H₂SO₄, 333 K)
- 3HC≡CH → C₆H₆ (लाल-तप्त Fe नली, 873 K)
हल किए गए उदाहरण
1. 5 कार्बन वाले ऐल्काइन का सूत्र लिखो।
CₙH₂ₙ₋₂ में n = 5: H = 10 − 2 = 8। पेन्टाइन C₅H₈।
2. एथीन और एथाइन में ज़्यादा अम्लीय कौन? एक पंक्ति में बताओ।
एथाइन। इसका कार्बन sp (50% s) है और C–H इलेक्ट्रॉनों को पास रखता है, इसलिए H, sp² एथीन (33% s) से आसानी से H⁺ बनकर निकलता है।
3. एथाइन, प्रोपाइन, ब्यूट-2-आइन में से कौन सोडियम ऐमाइड से अभिक्रिया करेंगे?
केवल वे ऐल्काइन जिनके त्रि-आबंध वाले कार्बन पर H है। एथाइन (HC≡CH) और प्रोपाइन (CH₃C≡CH) करेंगे; ब्यूट-2-आइन (CH₃C≡CCH₃) में ≡C–H नहीं, इसलिए नहीं।
4. प्रोपाइन और अधिक HBr का अंतिम उत्पाद लिखो।
पहला HBr: मारकोनीकॉफ़ → CH₃–CBr=CH₂। दूसरा HBr: H CH₂ पर, Br उसी कार्बन पर जिस पर पहले से Br है → CH₃–CBr₂–CH₃ (2,2-डाइब्रोमोप्रोपेन)।
5. प्रोपाइन, पानी, HgSO₄ और H₂SO₄ से क्या बनेगा?
OH बीच के कार्बन पर (मारकोनीकॉफ़) → ईनॉल CH₃–C(OH)=CH₂। ईनॉल कीटो रूप में बदलता है → CH₃–CO–CH₃, प्रोपेनोन (ऐसीटोन)।
6. 32 g कैल्सियम कार्बाइड से STP पर कितने लीटर एथाइन मिलेगी?
CaC₂ = 40 + 24 = 64 g/mol। मोल = 32 ÷ 64 = 0.5। 1 मोल CaC₂ से 1 मोल C₂H₂, तो 0.5 × 22.4 = 11.2 L।
7. 2.6 g एथाइन कितने ग्राम Br₂ को रंगहीन कर सकती है?
C₂H₂ = 26 g/mol, तो 2.6 g = 0.1 मोल। हर त्रि-आबंध 2 Br₂ लेता है → 0.2 मोल। Br₂ = 160 g/mol → 0.2 × 160 = 32 g।
आम गलतियाँ
- सभी ऐल्काइन को अम्लीय मानना। केवल अंतस्थ ऐल्काइन (≡C–H वाले) अम्लीय हैं; ब्यूट-2-आइन नहीं।
- एथाइन को प्रबल अम्ल कहना। यह पानी से भी बहुत दुर्बल है; केवल NaNH₂ जैसे बहुत प्रबल क्षारक को H⁺ देती है।
- 2HX जुड़ने पर दोनों X अलग-अलग कार्बनों पर लगाना। मारकोनीकॉफ़ से दोनों एक ही कार्बन पर जाते हैं (जेम-डाइहैलाइड)।
- कहना कि हर ऐल्काइन पानी से ऐल्डिहाइड देता है। केवल एथाइन ऐल्डिहाइड (एथेनैल) देती है; बाकी कीटोन।