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ऐल्काइन

ऐल्काइन में C≡C त्रि-आबंध होता है; सूत्र CₙH₂ₙ₋₂। त्रि-आबंध के दोनों कार्बन sp संकरित हैं, इसलिए अणु सीधी रेखा है। त्रि-आबंध वाले कार्बन पर लगा H हल्का अम्लीय है, क्योंकि sp कार्बन इलेक्ट्रॉनों को कसकर पकड़ता है: NaNH₂ जैसे प्रबल क्षारक उसे हटा देते हैं। त्रि-आबंध दो बार खुल सकता है, इसलिए ऐल्काइन H₂, X₂ या HX के दो अणु जोड़ते हैं। पानी (Hg²⁺ उत्प्रेरक) से ऐल्डिहाइड या कीटोन बनते हैं, और तीन एथाइन जुड़कर बेंज़ीन बनाते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एथाइन एक सीधी रेखा है। हर कार्बन sp है। त्रि-आबंध = एक σ + दो π, जो C–C रेखा को नली की तरह लपेटते हैं।
  2. कैल्सियम कार्बाइड को पानी में डालो। पानी कार्बाइड को दो H⁺ देता है। एथाइन गैस बुलबुले बनकर निकलती है।
  3. तीन हाइड्रोकार्बनों की तुलना करो। जितना ज़्यादा s-गुण, उतना कसकर कार्बन इलेक्ट्रॉन पकड़ता है। इसलिए एथाइन (50% s) का H सबसे आसानी से निकलता है।
  4. सोडियम ऐमाइड (NaNH₂) प्रबल क्षारक है। यह एथाइन से H⁺ खींच लेता है। सोडियम ऐसीटिलाइड बनता है। एथीन और एथेन ऐसा नहीं कर सकते।
  5. त्रि-आबंध दो चरणों में खुलता है। पहला Br₂ C=C बनाता है, दूसरा Br₂ C–C। लाल-भूरा रंग गायब हो जाता है।
  6. अब तुम्हारी बारी: Hg²⁺ के साथ पानी जोड़ो और ईनॉल को एथेनैल बनते देखो। या तीन एथाइन जोड़कर बेंज़ीन बनाओ।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

एथाइन सीधी क्यों है?

sp कार्बन के केवल दो संकर कक्षक हैं, और दो चीज़ें ठीक उल्टी दिशा (180°) में होकर सबसे कम प्रतिकर्षण करती हैं।

एथाइन के दो H कहाँ से आते हैं?

पानी से। कार्बाइड आयन C₂²⁻ प्रबल क्षारक है; यह दो पानी अणुओं से एक-एक H⁺ ले लेता है।

"ज़्यादा s-गुण" से असल में क्या बदलता है?

आबंधी इलेक्ट्रॉन कार्बन नाभिक के पास खिंच जाते हैं। C–H आबंध आसानी से टूटता है और H, H⁺ बनकर निकलता है।

NaOH एथाइन का H क्यों नहीं हटा सकता?

एथाइन पानी से भी दुर्बल अम्ल है। OH⁻ पर्याप्त प्रबल नहीं; NH₂⁻ जैसा बहुत प्रबल क्षारक चाहिए।

ऐल्काइन को दो Br₂ क्यों चाहिए?

त्रि-आबंध में दो π आबंध हैं। हर Br₂ एक π आबंध खर्च करता है: C≡C → C=C → C–C।

ईनॉल क्या है?

"ईन" (C=C) + "ऑल" (OH): द्वि-आबंध वाले कार्बन पर OH वाला अणु। यह जल्दी C=O यौगिक में बदल जाता है।

ऐल्काइन की संरचना और नामकरण

ऐल्काइन में C≡C त्रि-आबंध होता है। सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₋₂। पहला सदस्य: एथाइन (ऐसीटिलीन) HC≡CH।

एथाइन बनाने की विधियाँ

  1. कैल्सियम कार्बाइड से: CaC₂ + 2H₂O → HC≡CH + Ca(OH)₂। कैल्सियम कार्बाइड बिना बुझे चूने को कोक के साथ गर्म करके बनता है: CaO + 3C → CaC₂ + CO।
  2. निकटस्थ डाइहैलाइड से: दो बार HX हटाओ। ऐल्कोहॉली KOH पहला HX हटाकर वाइनिलिक हैलाइड देता है; दूसरे, कठिन चरण के लिए सोडियम ऐमाइड (NaNH₂) चाहिए: BrCH₂–CH₂Br → CH₂=CHBr → HC≡CH।

भौतिक गुण

एथाइन, प्रोपाइन और ब्यूटाइन गैसें हैं; अगले आठ द्रव; बड़े ठोस। शुद्ध एथाइन गंधहीन है; कार्बाइड वाली एथाइन की लहसुन जैसी गंध अशुद्धियों (PH₃, H₂S) से आती है। ऐल्काइन हल्के ध्रुवीय, पानी से हल्के और पानी में अघुलनशील हैं। आकार बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है।

ऐल्काइन का अम्लीय गुण

त्रि-आबंध वाले कार्बन पर लगा हाइड्रोजन (≡C–H) हल्का अम्लीय है। प्रबल क्षारक इसे हटा सकता है।

क्यों?

s कक्षक p कक्षक से ज़्यादा नाभिक के पास रहता है। संकर कक्षक में जितना ज़्यादा s-गुण, उतना कसकर वह इलेक्ट्रॉन पकड़ता है:

इसलिए sp कार्बन सबसे ज़्यादा विद्युत-ऋणात्मक है। यह C–H इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचता है और H, H⁺ बनकर निकल सकता है। बचा आयन (ऐसीटिलाइड, HC≡C⁻) अपना एकाकी युग्म नाभिक के पास sp कक्षक में रखता है, इसलिए काफ़ी स्थायी है।

अम्लता का क्रम: HC≡CH > H₂C=CH₂ > CH₃–CH₃। ऐल्काइनों में: HC≡CH > CH₃–C≡CH ≫ CH₃–C≡C–CH₃। ब्यूट-2-आइन में ≡C–H नहीं, इसलिए यह अम्लीय नहीं। फिर भी ऐल्काइन पानी या ऐल्कोहॉल से बहुत दुर्बल अम्ल हैं; एथाइन लिटमस को लाल नहीं करती।

इससे अंतस्थ ऐल्काइन (सिरे पर ≡C–H) को भीतरी ऐल्काइन से पहचानते हैं: केवल अंतस्थ ऐल्काइन NaNH₂ से अभिक्रिया करता है (और अमोनियामय AgNO₃ से सफ़ेद अवक्षेप देता है)।

ऐल्काइन की योगज अभिक्रियाएँ

त्रि-आबंध में दो π आबंध हैं, इसलिए योग दो बार हो सकता है। इलेक्ट्रॉनस्नेही के प्रति ऐल्काइन, ऐल्कीन से कम क्रियाशील हैं, क्योंकि sp कार्बन नली जैसे बादल के π इलेक्ट्रॉनों को कसकर पकड़ते हैं।

1. हाइड्रोजन

HC≡CH + H₂ → H₂C=CH₂ → (+H₂) → CH₃–CH₃ (Pt, Pd या Ni)। लिंडलार उत्प्रेरक (समपक्ष) ऐल्कीन पर रोक देता है।

2. हैलोजन

HC≡CH + Br₂ → BrCH=CHBr (1,2-डाइब्रोमोएथीन); + Br₂ → Br₂CH–CHBr₂ (1,1,2,2-टेट्राब्रोमोएथेन)। ब्रोमीन का लाल-भूरा रंग फीका पड़ता है: असंतृप्तता का परीक्षण।

3. हाइड्रोजन हैलाइड

दो HX जुड़ते हैं, दोनों मारकोनीकॉफ़ नियम से, इसलिए दोनों X एक ही कार्बन पर आते हैं (जेम-डाइहैलाइड): HC≡CH + HBr → CH₂=CHBr; + HBr → CH₃–CHBr₂ (1,1-डाइब्रोमोएथेन)। प्रोपाइन + 2HBr → CH₃–CBr₂–CH₃।

4. पानी (जलयोजन)

40% H₂SO₄ और 1% HgSO₄ के साथ 333 K पर एक H₂O जुड़ता है। पहले ईनॉल बनता है (C=C पर OH)। ईनॉल अस्थायी है: उसका H, O से C पर चला जाता है और C=O बनता है (चलावयवता)।

5. बहुलकीकरण

6. दहन

2C₂H₂ + 5O₂ → 4CO₂ + 2H₂O, बहुत गर्म ज्वाला, वेल्डिंग में उपयोग।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 5 कार्बन वाले ऐल्काइन का सूत्र लिखो।

CₙH₂ₙ₋₂ में n = 5: H = 10 − 2 = 8। पेन्टाइन C₅H₈।

2. एथीन और एथाइन में ज़्यादा अम्लीय कौन? एक पंक्ति में बताओ।

एथाइन। इसका कार्बन sp (50% s) है और C–H इलेक्ट्रॉनों को पास रखता है, इसलिए H, sp² एथीन (33% s) से आसानी से H⁺ बनकर निकलता है।

3. एथाइन, प्रोपाइन, ब्यूट-2-आइन में से कौन सोडियम ऐमाइड से अभिक्रिया करेंगे?

केवल वे ऐल्काइन जिनके त्रि-आबंध वाले कार्बन पर H है। एथाइन (HC≡CH) और प्रोपाइन (CH₃C≡CH) करेंगे; ब्यूट-2-आइन (CH₃C≡CCH₃) में ≡C–H नहीं, इसलिए नहीं।

4. प्रोपाइन और अधिक HBr का अंतिम उत्पाद लिखो।

पहला HBr: मारकोनीकॉफ़ → CH₃–CBr=CH₂। दूसरा HBr: H CH₂ पर, Br उसी कार्बन पर जिस पर पहले से Br है → CH₃–CBr₂–CH₃ (2,2-डाइब्रोमोप्रोपेन)।

5. प्रोपाइन, पानी, HgSO₄ और H₂SO₄ से क्या बनेगा?

OH बीच के कार्बन पर (मारकोनीकॉफ़) → ईनॉल CH₃–C(OH)=CH₂। ईनॉल कीटो रूप में बदलता है → CH₃–CO–CH₃, प्रोपेनोन (ऐसीटोन)।

6. 32 g कैल्सियम कार्बाइड से STP पर कितने लीटर एथाइन मिलेगी?

CaC₂ = 40 + 24 = 64 g/mol। मोल = 32 ÷ 64 = 0.5। 1 मोल CaC₂ से 1 मोल C₂H₂, तो 0.5 × 22.4 = 11.2 L।

7. 2.6 g एथाइन कितने ग्राम Br₂ को रंगहीन कर सकती है?

C₂H₂ = 26 g/mol, तो 2.6 g = 0.1 मोल। हर त्रि-आबंध 2 Br₂ लेता है → 0.2 मोल। Br₂ = 160 g/mol → 0.2 × 160 = 32 g।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. एथाइन की आकृति है:
2. प्रयोगशाला में एथाइन बनती है:
3. किसका हाइड्रोजन सबसे अम्लीय है?
4. एथाइन + पानी (Hg²⁺, H₂SO₄) देता है:
5. लाल-तप्त लोहे की नली में तीन एथाइन अणु बनाते हैं:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतस्थ ऐल्काइन अम्लीय क्यों होते हैं?

त्रि-आबंध वाला कार्बन sp संकरित है, जिसमें 50% s-गुण है; यह ज़्यादा विद्युत-ऋणात्मक है और C–H इलेक्ट्रॉनों को पास रखता है। NaNH₂ जैसे प्रबल क्षारक से H, H⁺ बनकर निकल जाता है।

एथाइन कैसे बनाते हैं?

प्रयोगशाला में कैल्सियम कार्बाइड और पानी से: CaC₂ + 2H₂O → C₂H₂ + Ca(OH)₂। निकटस्थ डाइहैलाइड से ऐल्कोहॉली KOH और फिर NaNH₂ द्वारा दो HX हटाकर भी बनती है।

एथाइन के जलयोजन का उत्पाद क्या है?

एथेनैल (ऐसीटैल्डिहाइड)। Hg²⁺/H₂SO₄ के साथ पानी जुड़कर ईनॉल बनता है, जो CH₃CHO में बदल जाता है।

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