फ़ीनॉल क्या है? संरचना और नाम
फ़ीनॉल में –OH सीधे बेंज़ीन वलय के कार्बन (sp² कार्बन) पर लगा होता है। सबसे सरल C₆H₅OH का नाम ही फ़ीनॉल है (IUPAC: बेंज़ीनॉल)। मेथिल फ़ीनॉल को क्रीसॉल कहते हैं; डाइहाइड्रॉक्सी बेंज़ीन हैं कैटिकॉल (1,2), रिसॉर्सिनॉल (1,3) और हाइड्रोक्विनोन (1,4)।
वलय का कार्बन sp² है और O का एकाकी युग्म वलय से साझा होता है, इसलिए फ़ीनॉल का C–O बंध मेथेनॉल से थोड़ा छोटा और मज़बूत है।
फ़ीनॉल बनाने की विधियाँ
1. हैलोऐरीन से (डाउ प्रक्रम)
क्लोरोबेंज़ीन + NaOH, 623 K और 300 atm पर → सोडियम फ़ीनॉक्साइड; फिर तनु HCl → फ़ीनॉल। वलय पर C–Cl बंध बहुत मज़बूत है, इसलिए ऊँचा ताप और दाब चाहिए।
2. बेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल से
बेंज़ीन + ओलियम → बेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल; पिघले NaOH के साथ गलाओ → सोडियम फ़ीनॉक्साइड; अम्ल डालो → फ़ीनॉल।
3. डाइऐज़ोनियम लवण से
ऐनिलीन + NaNO₂ + HCl, 273–278 K पर → बेंज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड। पानी के साथ गर्म करो: N₂ गैस निकलती है और फ़ीनॉल बनता है।
4. क्यूमीन से (उद्योग)
क्यूमीन (आइसोप्रोपिलबेंज़ीन) + हवा → क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड; तनु अम्ल से टूटकर फ़ीनॉल + प्रोपेनोन (ऐसीटोन)। एक प्रक्रम से दो उपयोगी उत्पाद – इसलिए ज़्यादातर फ़ीनॉल ऐसे ही बनता है।
भौतिक गुण
फ़ीनॉल रंगहीन ठोस है (हवा में रखने पर गुलाबी हो जाता है)। हाइड्रोजन बंध के कारण इसका क्वथनांक समान द्रव्यमान के ऐरीन और हैलोऐरीन से ज़्यादा है। यह पानी में थोड़ा घुलता है और त्वचा को जला देता है, इसलिए सावधानी से छूना चाहिए।
फ़ीनॉल की अम्लता
फ़ीनॉल NaOH से अभिक्रिया करके सोडियम फ़ीनॉक्साइड बनाता है – ऐल्कोहॉल ऐसा नहीं करते। पर यह NaHCO₃ से अभिक्रिया नहीं करता (कार्बोक्सिलिक अम्ल करते हैं)। इसलिए अम्ल की ताकत: ऐल्कोहॉल < पानी < फ़ीनॉल < कार्बोक्सिलिक अम्ल।
फ़ीनॉल एथेनॉल से ज़्यादा अम्लीय क्यों?
- वलय (sp² कार्बन) O से इलेक्ट्रॉन खींचता है, इसलिए O–H टूटना आसान है।
- H⁺ निकलने के बाद फ़ीनॉक्साइड आयन का ऋण आवेश अनुनाद से ऑर्थो और पैरा कार्बनों पर फैल जाता है। कई परमाणुओं पर बँटा आवेश ज़्यादा स्थायी होता है। एथॉक्साइड में आवेश O पर ही अटका रहता है, और एथिल समूह उस पर और इलेक्ट्रॉन धकेलता है।
वलय पर लगे समूहों का प्रभाव
- इलेक्ट्रॉन खींचने वाले (–NO₂, –Cl, –CN) ऑर्थो/पैरा पर → अम्लता बढ़ती है। p-नाइट्रोफ़ीनॉल pKa ≈ 7.1; पिक्रिक अम्ल pKa ≈ 0.4।
- इलेक्ट्रॉन देने वाले (–CH₃, –OCH₃) → अम्लता घटती है। क्रीसॉल फ़ीनॉल से दुर्बल अम्ल हैं।
pKa कम = अम्ल ज़्यादा ताकतवर। फ़ीनॉल pKa ≈ 10, एथेनॉल ≈ 15.9।
फ़ीनॉल की अभिक्रियाएँ
A. O–H की अभिक्रियाएँ
Na के साथ: 2C₆H₅OH + 2Na → 2C₆H₅ONa + H₂। NaOH के साथ: सोडियम फ़ीनॉक्साइड + पानी। एस्टरीकरण: फ़ीनॉल + अम्ल क्लोराइड/ऐनहाइड्राइड → एस्टर; जैसे सैलिसिलिक अम्ल + एथेनॉइक ऐनहाइड्राइड → ऐस्पिरिन।
B. वलय पर इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन (ऑर्थो/पैरा)
- ब्रोमीनन: पानी में → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल, सफ़ेद अवक्षेप (फ़ीनॉल की पहचान)। CS₂ या CHCl₃ में, कम ताप पर → मुख्यतः p-ब्रोमोफ़ीनॉल।
- नाइट्रीकरण: तनु HNO₃, 298 K → o- और p-नाइट्रोफ़ीनॉल। भाप आसवन से अलग करते हैं: o- में H-बंध अणु के अंदर ही बनता है, इसलिए वह ज़्यादा वाष्पशील है। सांद्र HNO₃ → पिक्रिक अम्ल।
- कोल्बे अभिक्रिया: सोडियम फ़ीनॉक्साइड + CO₂ (फिर अम्ल) → सैलिसिलिक अम्ल।
- राइमर–टीमान अभिक्रिया: फ़ीनॉल + CHCl₃ + NaOH, फिर अम्ल → सैलिसिलैल्डिहाइड (ऑर्थो पर –CHO)।
C. अन्य
ज़िंक धूल के साथ गर्म करने पर O हट जाता है → बेंज़ीन। Na₂Cr₂O₇/H₂SO₄ से ऑक्सीकरण → बेंज़ोक्विनोन।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- C₆H₅Cl + NaOH (623 K, 300 atm) → C₆H₅ONa → (तनु HCl) C₆H₅OH
- क्यूमीन → (O₂) क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड → (H⁺, H₂O) C₆H₅OH + CH₃COCH₃
- C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + H₂O (गर्म) → C₆H₅OH + N₂ + HCl
- C₆H₅OH ⇌ C₆H₅O⁻ + H⁺ (pKa ≈ 10)
- अम्ल की ताकत: एथेनॉल < पानी < फ़ीनॉल < p-नाइट्रोफ़ीनॉल < पिक्रिक अम्ल
- C₆H₅OH + 3Br₂ (जलीय) → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल + 3HBr
- कोल्बे: C₆H₅ONa + CO₂ → (H⁺) सैलिसिलिक अम्ल
- राइमर–टीमान: C₆H₅OH + CHCl₃ + NaOH → (H⁺) सैलिसिलैल्डिहाइड
- pKa = −log Ka; pKa कम = अम्ल ताकतवर
हल किए गए उदाहरण
1. फ़ीनॉल NaOH में घुलता है, पर NaHCO₃ में क्यों नहीं?
चरण 1: NaOH प्रबल क्षार है, इसलिए दुर्बल अम्ल फ़ीनॉल (pKa 10) भी उसे H⁺ दे देता है → सोडियम फ़ीनॉक्साइड घुल जाता है। चरण 2: NaHCO₃ दुर्बल क्षार है; उसका संयुग्मी अम्ल H₂CO₃ (pKa ≈ 6.4) फ़ीनॉल से ताकतवर है, इसलिए अभिक्रिया आगे नहीं बढ़ती।
2. बढ़ती अम्लता के क्रम में रखो: फ़ीनॉल, p-नाइट्रोफ़ीनॉल, p-क्रीसॉल, एथेनॉल।
एथेनॉल (वलय नहीं, आवेश O पर अटका) सबसे दुर्बल। p-क्रीसॉल में –CH₃ इलेक्ट्रॉन देता है → फ़ीनॉल से दुर्बल। p-नाइट्रोफ़ीनॉल में –NO₂ आवेश खींचता है → ज़्यादा ताकतवर। क्रम: एथेनॉल < p-क्रीसॉल < फ़ीनॉल < p-नाइट्रोफ़ीनॉल।
3. फ़ीनॉल का pKa = 10 है। Ka निकालो।
pKa = −log Ka, इसलिए Ka = 10^(−pKa) = 10^(−10) = 1 × 10⁻¹⁰।
4. एथेनॉल का pKa 15.9 और फ़ीनॉल का 10.0 है। फ़ीनॉल कितने गुना ताकतवर अम्ल है?
Ka का अनुपात = 10^(15.9 − 10.0) = 10^5.9 ≈ 7.9 × 10⁵। यानी लगभग 8 लाख गुना।
5. 9.4 g फ़ीनॉल (M = 94 g/mol) से अधिक ब्रोमीन जल के साथ कितना 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल (M = 331 g/mol) बनेगा?
फ़ीनॉल के मोल = 9.4 / 94 = 0.1 mol। 1 mol फ़ीनॉल → 1 mol उत्पाद। द्रव्यमान = 0.1 × 331 = 33.1 g।
6. उदाहरण 5 में कितने ग्राम Br₂ (M = 160 g/mol) ख़र्च होगी?
C₆H₅OH + 3Br₂ → C₆H₂Br₃OH + 3HBr। 0.1 mol फ़ीनॉल को 0.3 mol Br₂ = 0.3 × 160 = 48 g चाहिए।
7. क्यूमीन प्रक्रम में 60 kg क्यूमीन (M = 120 g/mol) पूरी तरह अभिक्रिया करे तो कितना फ़ीनॉल (94) और प्रोपेनोन (58) बनेगा?
क्यूमीन के मोल = 60 000 / 120 = 500 mol। हर मोल से 1 mol फ़ीनॉल और 1 mol प्रोपेनोन। फ़ीनॉल = 500 × 94 = 47 kg; प्रोपेनोन = 500 × 58 = 29 kg।
8. o-नाइट्रोफ़ीनॉल का क्वथनांक p-नाइट्रोफ़ीनॉल से कम क्यों है, और इसका क्या उपयोग है?
o- में –OH और –NO₂ पास-पास हैं और एक ही अणु के अंदर H-बंध (अंतराअणुक) बनाते हैं, इसलिए अणु एक-दूसरे को नहीं पकड़ते। p- में H-बंध अलग-अलग अणुओं के बीच (अंतरअणुक) बनते हैं। इसलिए o- ज़्यादा वाष्पशील है और भाप आसवन से अलग हो जाता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि –OH मेटा निर्देशक है। यह ऑर्थो और पैरा निर्देशक है और वलय को बहुत सक्रिय करता है।
- सोचना कि फ़ीनॉल NaHCO₃ से CO₂ देता है। नहीं देता; यह परीक्षण कार्बोक्सिलिक अम्ल का है।
- मानना कि pKa ज़्यादा = अम्ल ताकतवर। उल्टा है: pKa कम = अम्ल ताकतवर।
- कोल्बे (CO₂ → –COOH, सैलिसिलिक अम्ल) और राइमर–टीमान (CHCl₃ → –CHO, सैलिसिलैल्डिहाइड) में उलझना।