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फ़ीनॉल

फ़ीनॉल में –OH सीधे बेंज़ीन वलय के कार्बन पर लगा होता है। इसे क्लोरोबेंज़ीन (NaOH, 623 K, 300 atm), बेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल, डाइऐज़ोनियम लवण या क्यूमीन से बनाते हैं। फ़ीनॉल, ऐल्कोहॉल और पानी से ज़्यादा अम्लीय है क्योंकि फ़ीनॉक्साइड आयन का ऋण आवेश वलय पर फैल जाता है; –NO₂ जैसे इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (ऑर्थो/पैरा पर) अम्लता बढ़ाते हैं, –CH₃ जैसे इलेक्ट्रॉन देने वाले घटाते हैं। –OH वलय की ऑर्थो और पैरा स्थितियों को सक्रिय करता है: ब्रोमीन जल → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल, तनु HNO₃ → o- और p-नाइट्रोफ़ीनॉल, NaOH + CO₂ → सैलिसिलिक अम्ल (कोल्बे), CHCl₃ + NaOH → सैलिसिलैल्डिहाइड (राइमर–टीमान)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह है फ़ीनॉल। –OH सीधे बेंज़ीन वलय के एक कार्बन पर लगा है। ऐल्कोहॉल में यह साधारण कार्बन पर था। यही एक बदलाव फ़ीनॉल को अम्लीय बनाता है।
  2. फ़ीनॉल बनाना: क्लोरोबेंज़ीन को NaOH के साथ ऊँचे दाब पर गर्म करो। Cl निकलता है, O⁻Na⁺ जुड़ता है; फिर तनु अम्ल से फ़ीनॉल बनता है।
  3. अम्लता: –OH का H, H⁺ बनकर निकलता है। बचा ऋण आवेश O पर नहीं रुकता – ऑर्थो और पैरा कार्बनों (पीले) पर फैल जाता है। फैला आवेश = स्थायी आयन।
  4. अम्लों की तुलना: ऊँचा स्तंभ = ज़्यादा अम्लीय। एथेनॉल < पानी < फ़ीनॉल < नाइट्रोफ़ीनॉल < पिक्रिक अम्ल। –NO₂ आवेश को और खींचकर मदद करता है।
  5. –OH वलय में इलेक्ट्रॉन धकेलता है, इसलिए ऑर्थो और पैरा स्थितियाँ बहुत सक्रिय हैं। ब्रोमीन जल तीनों H को Br से बदल देता है: 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल।
  6. अब खुद खेलो: अभिकर्मक चुनो, पहले अनुमान लगाओ कौन-सी स्थिति बदलेगी, फिर 'दिखाओ' दबाकर जाँचो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

फ़ीनॉल में –OH है, तो उसे ऐल्कोहॉल क्यों नहीं कहते?

ऐल्कोहॉल में –OH, sp³ कार्बन पर होता है। फ़ीनॉल में वह वलय के sp² कार्बन पर है और उसका एकाकी युग्म वलय से मिल जाता है, इसलिए गुण अलग हैं – जैसे यह NaOH से अभिक्रिया करता है।

क्लोरोबेंज़ीन को हैलोऐल्केन की तरह NaOH के साथ उबाल क्यों नहीं सकते?

वलय पर C–Cl बंध में आंशिक द्विबंध गुण है और वह बहुत मज़बूत है, इसलिए उसे तोड़ने को 623 K और 300 atm चाहिए।

फ़ीनॉक्साइड में भी आवेश O पर है – फिर वह एथॉक्साइड से स्थायी क्यों?

फ़ीनॉक्साइड में आवेश वलय के तीन कार्बनों (ऑर्थो, ऑर्थो, पैरा) पर जा सकता है। बँटा हुआ आवेश ऊर्जा घटाता है। एथॉक्साइड में वह एक ही O पर अटका है।

मेटा पर –NO₂ पैरा से कम मदद क्यों करता है?

ऑर्थो या पैरा पर –NO₂ अनुनाद से वलय का ऋण आवेश ले सकता है। मेटा पर वह केवल बंधों के ज़रिए थोड़ा खींचता है, इसलिए असर कम है।

पानी में ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल, पर CS₂ में केवल एक Br क्यों?

पानी में कुछ फ़ीनॉक्साइड आयन बनता है जो और भी इलेक्ट्रॉन-समृद्ध है, और पानी Br₂ को तोड़ने में मदद करता है। अध्रुवीय CS₂ में कम ताप पर वलय कम सक्रिय रहता है, इसलिए एक ही Br जुड़ता है।

कोल्बे अभिक्रिया में –COOH ऑर्थो पर क्यों आता है?

फ़ीनॉक्साइड आयन ऑर्थो और पैरा पर बहुत इलेक्ट्रॉन-समृद्ध है। दुर्बल इलेक्ट्रॉनरागी CO₂ मुख्यतः ऑर्थो कार्बन पर जुड़ता है, जिससे सैलिसिलिक अम्ल बनता है।

फ़ीनॉल क्या है? संरचना और नाम

फ़ीनॉल में –OH सीधे बेंज़ीन वलय के कार्बन (sp² कार्बन) पर लगा होता है। सबसे सरल C₆H₅OH का नाम ही फ़ीनॉल है (IUPAC: बेंज़ीनॉल)। मेथिल फ़ीनॉल को क्रीसॉल कहते हैं; डाइहाइड्रॉक्सी बेंज़ीन हैं कैटिकॉल (1,2), रिसॉर्सिनॉल (1,3) और हाइड्रोक्विनोन (1,4)।

वलय का कार्बन sp² है और O का एकाकी युग्म वलय से साझा होता है, इसलिए फ़ीनॉल का C–O बंध मेथेनॉल से थोड़ा छोटा और मज़बूत है।

फ़ीनॉल बनाने की विधियाँ

1. हैलोऐरीन से (डाउ प्रक्रम)

क्लोरोबेंज़ीन + NaOH, 623 K और 300 atm पर → सोडियम फ़ीनॉक्साइड; फिर तनु HCl → फ़ीनॉल। वलय पर C–Cl बंध बहुत मज़बूत है, इसलिए ऊँचा ताप और दाब चाहिए।

2. बेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल से

बेंज़ीन + ओलियम → बेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल; पिघले NaOH के साथ गलाओ → सोडियम फ़ीनॉक्साइड; अम्ल डालो → फ़ीनॉल।

3. डाइऐज़ोनियम लवण से

ऐनिलीन + NaNO₂ + HCl, 273–278 K पर → बेंज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड। पानी के साथ गर्म करो: N₂ गैस निकलती है और फ़ीनॉल बनता है।

4. क्यूमीन से (उद्योग)

क्यूमीन (आइसोप्रोपिलबेंज़ीन) + हवा → क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड; तनु अम्ल से टूटकर फ़ीनॉल + प्रोपेनोन (ऐसीटोन)। एक प्रक्रम से दो उपयोगी उत्पाद – इसलिए ज़्यादातर फ़ीनॉल ऐसे ही बनता है।

भौतिक गुण

फ़ीनॉल रंगहीन ठोस है (हवा में रखने पर गुलाबी हो जाता है)। हाइड्रोजन बंध के कारण इसका क्वथनांक समान द्रव्यमान के ऐरीन और हैलोऐरीन से ज़्यादा है। यह पानी में थोड़ा घुलता है और त्वचा को जला देता है, इसलिए सावधानी से छूना चाहिए।

फ़ीनॉल की अम्लता

फ़ीनॉल NaOH से अभिक्रिया करके सोडियम फ़ीनॉक्साइड बनाता है – ऐल्कोहॉल ऐसा नहीं करते। पर यह NaHCO₃ से अभिक्रिया नहीं करता (कार्बोक्सिलिक अम्ल करते हैं)। इसलिए अम्ल की ताकत: ऐल्कोहॉल < पानी < फ़ीनॉल < कार्बोक्सिलिक अम्ल।

फ़ीनॉल एथेनॉल से ज़्यादा अम्लीय क्यों?

  1. वलय (sp² कार्बन) O से इलेक्ट्रॉन खींचता है, इसलिए O–H टूटना आसान है।
  2. H⁺ निकलने के बाद फ़ीनॉक्साइड आयन का ऋण आवेश अनुनाद से ऑर्थो और पैरा कार्बनों पर फैल जाता है। कई परमाणुओं पर बँटा आवेश ज़्यादा स्थायी होता है। एथॉक्साइड में आवेश O पर ही अटका रहता है, और एथिल समूह उस पर और इलेक्ट्रॉन धकेलता है।

वलय पर लगे समूहों का प्रभाव

pKa कम = अम्ल ज़्यादा ताकतवर। फ़ीनॉल pKa ≈ 10, एथेनॉल ≈ 15.9।

फ़ीनॉल की अभिक्रियाएँ

A. O–H की अभिक्रियाएँ

Na के साथ: 2C₆H₅OH + 2Na → 2C₆H₅ONa + H₂। NaOH के साथ: सोडियम फ़ीनॉक्साइड + पानी। एस्टरीकरण: फ़ीनॉल + अम्ल क्लोराइड/ऐनहाइड्राइड → एस्टर; जैसे सैलिसिलिक अम्ल + एथेनॉइक ऐनहाइड्राइड → ऐस्पिरिन।

B. वलय पर इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन (ऑर्थो/पैरा)

C. अन्य

ज़िंक धूल के साथ गर्म करने पर O हट जाता है → बेंज़ीन। Na₂Cr₂O₇/H₂SO₄ से ऑक्सीकरण → बेंज़ोक्विनोन।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. फ़ीनॉल NaOH में घुलता है, पर NaHCO₃ में क्यों नहीं?

चरण 1: NaOH प्रबल क्षार है, इसलिए दुर्बल अम्ल फ़ीनॉल (pKa 10) भी उसे H⁺ दे देता है → सोडियम फ़ीनॉक्साइड घुल जाता है। चरण 2: NaHCO₃ दुर्बल क्षार है; उसका संयुग्मी अम्ल H₂CO₃ (pKa ≈ 6.4) फ़ीनॉल से ताकतवर है, इसलिए अभिक्रिया आगे नहीं बढ़ती।

2. बढ़ती अम्लता के क्रम में रखो: फ़ीनॉल, p-नाइट्रोफ़ीनॉल, p-क्रीसॉल, एथेनॉल।

एथेनॉल (वलय नहीं, आवेश O पर अटका) सबसे दुर्बल। p-क्रीसॉल में –CH₃ इलेक्ट्रॉन देता है → फ़ीनॉल से दुर्बल। p-नाइट्रोफ़ीनॉल में –NO₂ आवेश खींचता है → ज़्यादा ताकतवर। क्रम: एथेनॉल < p-क्रीसॉल < फ़ीनॉल < p-नाइट्रोफ़ीनॉल।

3. फ़ीनॉल का pKa = 10 है। Ka निकालो।

pKa = −log Ka, इसलिए Ka = 10^(−pKa) = 10^(−10) = 1 × 10⁻¹⁰।

4. एथेनॉल का pKa 15.9 और फ़ीनॉल का 10.0 है। फ़ीनॉल कितने गुना ताकतवर अम्ल है?

Ka का अनुपात = 10^(15.9 − 10.0) = 10^5.9 ≈ 7.9 × 10⁵। यानी लगभग 8 लाख गुना।

5. 9.4 g फ़ीनॉल (M = 94 g/mol) से अधिक ब्रोमीन जल के साथ कितना 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल (M = 331 g/mol) बनेगा?

फ़ीनॉल के मोल = 9.4 / 94 = 0.1 mol। 1 mol फ़ीनॉल → 1 mol उत्पाद। द्रव्यमान = 0.1 × 331 = 33.1 g।

6. उदाहरण 5 में कितने ग्राम Br₂ (M = 160 g/mol) ख़र्च होगी?

C₆H₅OH + 3Br₂ → C₆H₂Br₃OH + 3HBr। 0.1 mol फ़ीनॉल को 0.3 mol Br₂ = 0.3 × 160 = 48 g चाहिए।

7. क्यूमीन प्रक्रम में 60 kg क्यूमीन (M = 120 g/mol) पूरी तरह अभिक्रिया करे तो कितना फ़ीनॉल (94) और प्रोपेनोन (58) बनेगा?

क्यूमीन के मोल = 60 000 / 120 = 500 mol। हर मोल से 1 mol फ़ीनॉल और 1 mol प्रोपेनोन। फ़ीनॉल = 500 × 94 = 47 kg; प्रोपेनोन = 500 × 58 = 29 kg।

8. o-नाइट्रोफ़ीनॉल का क्वथनांक p-नाइट्रोफ़ीनॉल से कम क्यों है, और इसका क्या उपयोग है?

o- में –OH और –NO₂ पास-पास हैं और एक ही अणु के अंदर H-बंध (अंतराअणुक) बनाते हैं, इसलिए अणु एक-दूसरे को नहीं पकड़ते। p- में H-बंध अलग-अलग अणुओं के बीच (अंतरअणुक) बनते हैं। इसलिए o- ज़्यादा वाष्पशील है और भाप आसवन से अलग हो जाता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. फ़ीनॉल ब्रोमीन जल से देता है:
2. सबसे ताकतवर अम्ल कौन-सा है?
3. कोल्बे अभिक्रिया से बनता है:
4. क्यूमीन प्रक्रम से फ़ीनॉल के साथ बनता है:
5. फ़ीनॉल का –OH आने वाले समूह को भेजता है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ़ीनॉल ऐल्कोहॉल से ज़्यादा अम्लीय क्यों है?

H⁺ निकलने के बाद बने फ़ीनॉक्साइड आयन का ऋण आवेश अनुनाद से वलय पर फैल जाता है, जिससे वह स्थायी होता है। ऐल्कॉक्साइड में आवेश एक O पर रहता है।

फ़ीनॉल की पहचान कैसे करें?

ब्रोमीन जल से सफ़ेद अवक्षेप, और उदासीन FeCl₃ विलयन से बैंगनी रंग।

उद्योग में फ़ीनॉल कैसे बनता है?

ज़्यादातर क्यूमीन प्रक्रम से: क्यूमीन का हवा से ऑक्सीकरण और फिर अम्ल से विदलन, जिससे फ़ीनॉल और ऐसीटोन मिलते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IIAlcohols and phenols
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सीबीएसई (भारत)कक्षा 12ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर
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