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ईथर

ईथर में एक ऑक्सीजन दो कार्बन समूहों को जोड़ता है: R–O–R′। नाम: ऐल्कॉक्सीऐल्केन (छोटा समूह ऐल्कॉक्सी बनता है)। बनाने के तरीके: प्राथमिक ऐल्कोहॉल का सांद्र H₂SO₄ के साथ 413 K पर निर्जलीकरण (सममित ईथर), या विलियमसन संश्लेषण: सोडियम ऐल्कॉक्साइड + प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड (SN2)। ईथर आपस में H-बंध नहीं बनाते, इसलिए क्वथनांक कम (ऐल्केन जैसा), पर पानी से H-बंध बनाकर छोटे ईथर थोड़ा घुलते हैं। HI, C–O बंध तोड़ता है: छोटा समूह ऐल्किल आयोडाइड बनता है (SN2), तृतीयक समूह SN1 से; ऐनिसोल से फ़ीनॉल + CH₃I। ऐनिसोल का –OCH₃ वलय पर ऑर्थो-पैरा प्रतिस्थापन कराता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह है एथॉक्सीएथेन (डाइएथिल ईथर)। एक O (पीला) के दोनों ओर कार्बन समूह: R–O–R′। C–O–C कोण मुड़ा हुआ, लगभग 110°। O पर कोई H नहीं।
  2. विलियमसन संश्लेषण: सोडियम मेथॉक्साइड (O⁻) ब्रोमोएथेन के Br वाले कार्बन पर हमला करता है। Br⁻ निकलता है। मेथॉक्सीएथेन बनता है, साथ में NaBr।
  3. दूसरा तरीका: दो एथेनॉल अणु। एक का H और दूसरे का OH पानी बनकर निकलते हैं, और दोनों एथिल समूह O से जुड़ जाते हैं। ताप 413 K रखो।
  4. बाएँ: ईथर अणुओं में O–H नहीं, इसलिए वे H-बंध से एक-दूसरे को नहीं पकड़ते – क्वथनांक कम। दाएँ: पानी का H ईथर के O से जुड़ सकता है – छोटे ईथर थोड़ा घुलते हैं।
  5. HI एक C–O बंध तोड़ता है। H⁺ ऑक्सीजन पर जुड़ता है, फिर I⁻ छोटे समूह (CH₃) पर हमला करता है। उत्पाद: CH₃I और एथेनॉल।
  6. अब खुद खेलो: ईथर और अभिकर्मक चुनो। चमकते परमाणु बताते हैं अभिक्रिया कहाँ होती है। ऐनिसोल को ब्रोमीन के साथ आज़माओ।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

ईथर और ऐल्कोहॉल का सूत्र C₂H₆O एक जैसा कैसे?

एथेनॉल (CH₃CH₂OH) और मेथॉक्सीमेथेन (CH₃OCH₃) में वही परमाणु अलग क्रम में जुड़े हैं। ये क्रियात्मक समावयवी हैं।

विलियमसन संश्लेषण में हैलाइड प्राथमिक क्यों हो?

ऐल्कॉक्साइड प्रबल क्षार है। भीड़ वाले (3°) कार्बन तक वह पहुँच नहीं पाता, इसलिए H खींच लेता है और ऐल्कीन बनती है।

एथेनॉल और मेथेनॉल को H₂SO₄ के साथ गर्म करके एथिल मेथिल ईथर क्यों नहीं बनाते?

तीन ईथरों (डाइमेथिल, डाइएथिल, एथिल मेथिल) का मिश्रण बनता है जिसे अलग करना कठिन है। यह तरीका केवल सममित ईथर के लिए अच्छा है।

ईथर H-बंध नहीं बनाते, तो पानी में घुलते क्यों हैं?

ईथर के O पर एकाकी युग्म हैं, इसलिए पानी का H उससे जुड़ सकता है। ईथर ख़ुद से नहीं जुड़ता, पर पानी से H-बंध ले सकता है।

HI विदलन में I⁻ छोटे समूह पर क्यों जाता है?

O के H⁺ लेने के बाद I⁻ कार्बन के पीछे से धक्का देता है (SN2)। छोटा CH₃ आसानी से पहुँच में है; बड़ा समूह रास्ता रोकता है।

ऐनिसोल को Br₂ के साथ उत्प्रेरक क्यों नहीं चाहिए?

–OCH₃ वलय में इलेक्ट्रॉन धकेलता है, जिससे ऑर्थो और पैरा स्थितियाँ इतनी समृद्ध हो जाती हैं कि एथेनॉइक अम्ल में Br₂ से अपने-आप क्रिया कर लेती हैं।

ईथर क्या है? नामकरण और संरचना

ईथर में एक ऑक्सीजन दो कार्बन समूहों से जुड़ा होता है: R–O–R′। दोनों समूह एक जैसे हों तो सममित (C₂H₅OC₂H₅), अलग हों तो असममित या मिश्रित (CH₃OC₂H₅)।

साधारण नाम: दोनों समूह वर्णक्रम में + 'ईथर' – एथिल मेथिल ईथर। IUPAC नाम: छोटा समूह O के साथ ऐल्कॉक्सी उपसर्ग बनता है, बड़ा ऐल्केन मूल नाम – मेथॉक्सीएथेन, एथॉक्सीएथेन, मेथॉक्सीबेंज़ीन (ऐनिसोल)।

संरचना: O पर दो बंध और दो एकाकी युग्म। C–O–C कोण 109°28′ से थोड़ा ज़्यादा (मेथॉक्सीमेथेन में लगभग 111.7°), क्योंकि दोनों कार्बन समूह एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं।

ईथर बनाने की विधियाँ

1. ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण

2 C₂H₅OH → (सांद्र H₂SO₄, 413 K) C₂H₅OC₂H₅ + H₂O। चरण: (i) एक ऐल्कोहॉल H⁺ लेकर R–OH₂⁺ बनता है, (ii) दूसरे ऐल्कोहॉल का O उस कार्बन पर हमला करता है और पानी निकलता है (SN2), (iii) H⁺ निकल जाता है। ताप ज़रूरी है: 443 K पर एथीन बनती है। यह प्राथमिक ऐल्कोहॉल और सममित ईथर के लिए ठीक है; 2° और 3° ऐल्कोहॉल ज़्यादातर ऐल्कीन देते हैं।

2. विलियमसन संश्लेषण

R–X + R′–O⁻Na⁺ → R–O–R′ + NaX। ऐल्कॉक्साइड आयन हैलोजन वाले कार्बन पर पीछे से हमला करता है (SN2)। सममित, असममित और ऐरिल ईथर (फ़ीनॉक्साइड + ऐल्किल हैलाइड → ऐनिसोल जैसे) – सब बनते हैं।

जोड़ी सोचकर चुनो: ऐल्किल हैलाइड प्राथमिक हो। तृतीयक हैलाइड के साथ प्रबल क्षार H खींच लेता है और ऐल्कीन बनती है। इसलिए (CH₃)₃C–O–CH₃ के लिए (CH₃)₃CO⁻Na⁺ + CH₃Br लो, (CH₃)₃CBr + CH₃O⁻Na⁺ नहीं। ऐरिल हैलाइड, हैलाइड वाले भाग में नहीं चलते।

ईथर के भौतिक गुण

C–O बंध ध्रुवीय हैं और मुड़ी आकृति से ईथर में छोटा द्विध्रुव आघूर्ण है। पर ईथर के O पर H नहीं, इसलिए अणु आपस में हाइड्रोजन बंध नहीं बनाते। इसलिए क्वथनांक कम – समान द्रव्यमान के ऐल्केन के पास और ऐल्कोहॉल से बहुत नीचे (एथॉक्सीएथेन 308 K, ब्यूटेन-1-ऑल 391 K)।

घुलनशीलता: ईथर का O पानी से H-बंध ले सकता है, इसलिए छोटे ईथर लगभग उतने ही घुलते हैं जितने समान द्रव्यमान के ऐल्कोहॉल (एथॉक्सीएथेन लगभग 7.5 g प्रति 100 g पानी)। बड़े ईथर लगभग अघुलनशील हैं।

ईथर के रासायनिक गुण

A. HX से C–O बंध का विदलन

ईथर कम क्रियाशील हैं, पर गर्म सांद्र HI (या HBr) उन्हें तोड़ देता है: R–O–R + HX → R–X + R–OH; ज़्यादा HX हो तो ऐल्कोहॉल भी R–X बन जाता है।

HX की क्रियाशीलता: HI > HBr > HCl।

B. ऐरोमैटिक ईथर में इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन

–OCH₃ वलय में इलेक्ट्रॉन धकेलता है और ऑर्थो-पैरा निर्देशक है। एथेनॉइक अम्ल में ब्रोमीनन (FeBr₃ की ज़रूरत नहीं) → मुख्यतः p-ब्रोमोऐनिसोल। फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स (CH₃Cl या CH₃COCl, AlCl₃) → o- और p- उत्पाद। नाइट्रीकरण (सांद्र HNO₃ + H₂SO₄) → 2- और 4-नाइट्रोऐनिसोल।

C. सावधानी

हवा और रोशनी में रखे रहने पर ईथर में धीरे-धीरे परॉक्साइड बनते हैं, जो आसवन पर फट सकते हैं। गहरे रंग की बोतल में रखो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. CH₃–O–CH₂CH₂CH₃ का IUPAC नाम लिखो।

छोटा समूह CH₃–O– 'मेथॉक्सी' बनता है; बड़ी शृंखला 3 C (प्रोपेन) और O, C1 पर। नाम: 1-मेथॉक्सीप्रोपेन।

2. 2-मेथॉक्सी-2-मेथिलप्रोपेन, (CH₃)₃C–O–CH₃ बनाने का सबसे अच्छा विलियमसन रास्ता लिखो।

दो विकल्प: (a) (CH₃)₃C–Br + CH₃ONa, (b) CH₃Br + (CH₃)₃CONa। (a) में तृतीयक हैलाइड और प्रबल क्षार से 2-मेथिलप्रोपीन (विलोपन) बनती है। (b) में हैलाइड मेथिल है, SN2 चलता है। (b) चुनो।

3. C₂H₅–O–CH(CH₃)₂ की एक मोल गर्म HI से अभिक्रिया के उत्पाद बताओ।

कोई ओर तृतीयक नहीं, इसलिए कम भीड़ वाले कार्बन पर SN2। एथिल (1°), आइसोप्रोपिल (2°) से कम भीड़ वाला है। I⁻ एथिल पर: C₂H₅I + (CH₃)₂CHOH।

4. 92 g एथेनॉल (M = 46 g/mol) से कितना एथॉक्सीएथेन (M = 74 g/mol) बन सकता है?

2 C₂H₅OH → C₂H₅OC₂H₅ + H₂O। एथेनॉल के मोल = 92/46 = 2 mol → 1 mol ईथर → 74 g।

5. 10.8 g ऐनिसोल (M = 108 g/mol) को अधिक HI के साथ गर्म किया। कितना फ़ीनॉल (M = 94 g/mol) बनेगा?

C₆H₅OCH₃ + HI → C₆H₅OH + CH₃I। ऐनिसोल के मोल = 10.8/108 = 0.1 mol → 0.1 mol फ़ीनॉल = 9.4 g।

6. एथॉक्सीएथेन (M = 74) 308 K पर, जबकि ब्यूटेन-1-ऑल (M = 74) 391 K पर क्यों उबलता है?

द्रव्यमान बराबर है, इसलिए अंतर अणुओं के बीच के बलों से है। ब्यूटेन-1-ऑल में O–H है और अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध बनते हैं; एथॉक्सीएथेन में O–H नहीं, केवल कमज़ोर बल हैं। ईथर के अणु अलग करने में कम ऊर्जा लगती है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. विलियमसन संश्लेषण में लेते हैं:
2. CH₃OC₂H₅ का IUPAC नाम है:
3. ऐनिसोल को HI के साथ गर्म करने पर मिलता है:
4. ईथर का क्वथनांक समावयवी ऐल्कोहॉल से कम है, क्योंकि:
5. ऐनिसोल का –OCH₃ प्रतिस्थापन कराता है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विलियमसन ईथर संश्लेषण क्या है?

सोडियम ऐल्कॉक्साइड और प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड की SN2 अभिक्रिया, जिससे ईथर और सोडियम हैलाइड बनते हैं। सममित और असममित दोनों ईथर बनते हैं।

ईथर का क्वथनांक कम क्यों होता है?

ऑक्सीजन पर H नहीं, इसलिए ईथर अणु आपस में हाइड्रोजन बंध नहीं बनाते। केवल कमज़ोर बल उन्हें पकड़ते हैं।

डाइएथिल ईथर के उपयोग क्या हैं?

यह तेल, वसा और ग्रीन्यार अभिक्रियाओं का आम विलायक है, और पहले निश्चेतकों में से एक था।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर

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