ईथर क्या है? नामकरण और संरचना
ईथर में एक ऑक्सीजन दो कार्बन समूहों से जुड़ा होता है: R–O–R′। दोनों समूह एक जैसे हों तो सममित (C₂H₅OC₂H₅), अलग हों तो असममित या मिश्रित (CH₃OC₂H₅)।
साधारण नाम: दोनों समूह वर्णक्रम में + 'ईथर' – एथिल मेथिल ईथर। IUPAC नाम: छोटा समूह O के साथ ऐल्कॉक्सी उपसर्ग बनता है, बड़ा ऐल्केन मूल नाम – मेथॉक्सीएथेन, एथॉक्सीएथेन, मेथॉक्सीबेंज़ीन (ऐनिसोल)।
संरचना: O पर दो बंध और दो एकाकी युग्म। C–O–C कोण 109°28′ से थोड़ा ज़्यादा (मेथॉक्सीमेथेन में लगभग 111.7°), क्योंकि दोनों कार्बन समूह एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं।
ईथर बनाने की विधियाँ
1. ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण
2 C₂H₅OH → (सांद्र H₂SO₄, 413 K) C₂H₅OC₂H₅ + H₂O। चरण: (i) एक ऐल्कोहॉल H⁺ लेकर R–OH₂⁺ बनता है, (ii) दूसरे ऐल्कोहॉल का O उस कार्बन पर हमला करता है और पानी निकलता है (SN2), (iii) H⁺ निकल जाता है। ताप ज़रूरी है: 443 K पर एथीन बनती है। यह प्राथमिक ऐल्कोहॉल और सममित ईथर के लिए ठीक है; 2° और 3° ऐल्कोहॉल ज़्यादातर ऐल्कीन देते हैं।
2. विलियमसन संश्लेषण
R–X + R′–O⁻Na⁺ → R–O–R′ + NaX। ऐल्कॉक्साइड आयन हैलोजन वाले कार्बन पर पीछे से हमला करता है (SN2)। सममित, असममित और ऐरिल ईथर (फ़ीनॉक्साइड + ऐल्किल हैलाइड → ऐनिसोल जैसे) – सब बनते हैं।
जोड़ी सोचकर चुनो: ऐल्किल हैलाइड प्राथमिक हो। तृतीयक हैलाइड के साथ प्रबल क्षार H खींच लेता है और ऐल्कीन बनती है। इसलिए (CH₃)₃C–O–CH₃ के लिए (CH₃)₃CO⁻Na⁺ + CH₃Br लो, (CH₃)₃CBr + CH₃O⁻Na⁺ नहीं। ऐरिल हैलाइड, हैलाइड वाले भाग में नहीं चलते।
ईथर के भौतिक गुण
C–O बंध ध्रुवीय हैं और मुड़ी आकृति से ईथर में छोटा द्विध्रुव आघूर्ण है। पर ईथर के O पर H नहीं, इसलिए अणु आपस में हाइड्रोजन बंध नहीं बनाते। इसलिए क्वथनांक कम – समान द्रव्यमान के ऐल्केन के पास और ऐल्कोहॉल से बहुत नीचे (एथॉक्सीएथेन 308 K, ब्यूटेन-1-ऑल 391 K)।
घुलनशीलता: ईथर का O पानी से H-बंध ले सकता है, इसलिए छोटे ईथर लगभग उतने ही घुलते हैं जितने समान द्रव्यमान के ऐल्कोहॉल (एथॉक्सीएथेन लगभग 7.5 g प्रति 100 g पानी)। बड़े ईथर लगभग अघुलनशील हैं।
ईथर के रासायनिक गुण
A. HX से C–O बंध का विदलन
ईथर कम क्रियाशील हैं, पर गर्म सांद्र HI (या HBr) उन्हें तोड़ देता है: R–O–R + HX → R–X + R–OH; ज़्यादा HX हो तो ऐल्कोहॉल भी R–X बन जाता है।
- चरण 1: H⁺ ईथर के O पर जुड़ता है (प्रोटॉनन)।
- चरण 2: I⁻ हमला करता है। दोनों समूह प्राथमिक/मेथिल हों तो कम भीड़ वाले कार्बन पर (SN2): CH₃–O–C₂H₅ + HI → CH₃I + C₂H₅OH।
- एक समूह तृतीयक हो तो वही C–O बंध SN1 से टूटता है और तृतीयक समूह आयोडाइड बनता है: (CH₃)₃C–O–CH₃ + HI → (CH₃)₃C–I + CH₃OH।
- ऐनिसोल + HI → फ़ीनॉल + CH₃I। वलय–O बंध में आंशिक द्विबंध गुण है, वह नहीं टूटता।
HX की क्रियाशीलता: HI > HBr > HCl।
B. ऐरोमैटिक ईथर में इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन
–OCH₃ वलय में इलेक्ट्रॉन धकेलता है और ऑर्थो-पैरा निर्देशक है। एथेनॉइक अम्ल में ब्रोमीनन (FeBr₃ की ज़रूरत नहीं) → मुख्यतः p-ब्रोमोऐनिसोल। फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स (CH₃Cl या CH₃COCl, AlCl₃) → o- और p- उत्पाद। नाइट्रीकरण (सांद्र HNO₃ + H₂SO₄) → 2- और 4-नाइट्रोऐनिसोल।
C. सावधानी
हवा और रोशनी में रखे रहने पर ईथर में धीरे-धीरे परॉक्साइड बनते हैं, जो आसवन पर फट सकते हैं। गहरे रंग की बोतल में रखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सामान्य: R–O–R′; CₙH₂ₙ₊₂O (ऐल्कोहॉल जैसा – क्रियात्मक समावयवी)
- 2 C₂H₅OH (सांद्र H₂SO₄, 413 K) → C₂H₅OC₂H₅ + H₂O
- विलियमसन: R–X + R′ONa → R–O–R′ + NaX (R–X प्राथमिक)
- CH₃OC₂H₅ + HI → CH₃I + C₂H₅OH
- (CH₃)₃COCH₃ + HI → (CH₃)₃CI + CH₃OH
- C₆H₅OCH₃ + HI → C₆H₅OH + CH₃I
- HX की क्रियाशीलता: HI > HBr > HCl
हल किए गए उदाहरण
1. CH₃–O–CH₂CH₂CH₃ का IUPAC नाम लिखो।
छोटा समूह CH₃–O– 'मेथॉक्सी' बनता है; बड़ी शृंखला 3 C (प्रोपेन) और O, C1 पर। नाम: 1-मेथॉक्सीप्रोपेन।
2. 2-मेथॉक्सी-2-मेथिलप्रोपेन, (CH₃)₃C–O–CH₃ बनाने का सबसे अच्छा विलियमसन रास्ता लिखो।
दो विकल्प: (a) (CH₃)₃C–Br + CH₃ONa, (b) CH₃Br + (CH₃)₃CONa। (a) में तृतीयक हैलाइड और प्रबल क्षार से 2-मेथिलप्रोपीन (विलोपन) बनती है। (b) में हैलाइड मेथिल है, SN2 चलता है। (b) चुनो।
3. C₂H₅–O–CH(CH₃)₂ की एक मोल गर्म HI से अभिक्रिया के उत्पाद बताओ।
कोई ओर तृतीयक नहीं, इसलिए कम भीड़ वाले कार्बन पर SN2। एथिल (1°), आइसोप्रोपिल (2°) से कम भीड़ वाला है। I⁻ एथिल पर: C₂H₅I + (CH₃)₂CHOH।
4. 92 g एथेनॉल (M = 46 g/mol) से कितना एथॉक्सीएथेन (M = 74 g/mol) बन सकता है?
2 C₂H₅OH → C₂H₅OC₂H₅ + H₂O। एथेनॉल के मोल = 92/46 = 2 mol → 1 mol ईथर → 74 g।
5. 10.8 g ऐनिसोल (M = 108 g/mol) को अधिक HI के साथ गर्म किया। कितना फ़ीनॉल (M = 94 g/mol) बनेगा?
C₆H₅OCH₃ + HI → C₆H₅OH + CH₃I। ऐनिसोल के मोल = 10.8/108 = 0.1 mol → 0.1 mol फ़ीनॉल = 9.4 g।
6. एथॉक्सीएथेन (M = 74) 308 K पर, जबकि ब्यूटेन-1-ऑल (M = 74) 391 K पर क्यों उबलता है?
द्रव्यमान बराबर है, इसलिए अंतर अणुओं के बीच के बलों से है। ब्यूटेन-1-ऑल में O–H है और अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध बनते हैं; एथॉक्सीएथेन में O–H नहीं, केवल कमज़ोर बल हैं। ईथर के अणु अलग करने में कम ऊर्जा लगती है।
आम गलतियाँ
- विलियमसन संश्लेषण में तृतीयक ऐल्किल हैलाइड लेना – ईथर नहीं, ऐल्कीन बनती है।
- सोचना कि ऐनिसोल + HI से आयोडोबेंज़ीन बनता है। वलय–O बंध नहीं टूटता; उत्पाद फ़ीनॉल और CH₃I हैं।
- कहना कि ईथर का क्वथनांक ऐल्कोहॉल जैसा ऊँचा है। वे आपस में H-बंध नहीं बनाते, इसलिए क्वथनांक कम है।
- एथेनॉल को सांद्र H₂SO₄ के साथ 443 K पर गर्म करके उत्पाद को ईथर कहना – 443 K पर एथीन बनती है; ईथर 413 K पर।