ऐमीन की संरचना
ऐमीन अमोनिया (NH₃) के व्युत्पन्न हैं। एक या ज़्यादा H की जगह ऐल्किल या ऐरिल समूह लगा दो, ऐमीन बन जाता है, जैसे CH₃NH₂।
N तीन बंध बनाता है और एक एकाकी युग्म (दो इलेक्ट्रॉन जो किसी बंध में नहीं) रखता है। इसलिए N के चारों ओर आकृति पिरामिडी होती है। कोण लगभग 108° होता है, 109.5° से थोड़ा कम, क्योंकि एकाकी युग्म बंधों को पास धकेलता है।
ऐनिलीन (C₆H₅NH₂) में N बेंज़ीन वलय से जुड़ा है। इसका एकाकी युग्म कुछ हद तक वलय में फैल जाता है। यही बात आगे क्षारकता में काम आएगी।
वर्गीकरण: प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक
N से जुड़े कार्बन समूह गिनो:
- प्राथमिक (1°): एक समूह, R–NH₂ (जैसे एथेनऐमीन)।
- द्वितीयक (2°): दो समूह, R₂NH (जैसे N-मेथिलमेथेनऐमीन)।
- तृतीयक (3°): तीन समूह, R₃N। N पर कोई H नहीं।
सभी समूह एक जैसे हों तो सरल, अलग-अलग हों तो मिश्रित ऐमीन। N सीधे बेंज़ीन वलय से जुड़ा हो तो ऐरिल ऐमीन (ऐनिलीन)। बेंज़िलऐमीन C₆H₅CH₂NH₂ ऐल्किल ऐमीन है, क्योंकि N, CH₂ पर है, वलय पर नहीं।
ध्यान: एल्कोहॉल में OH वाले कार्बन पर C गिनते हैं, ऐमीन में सीधे N पर। इसलिए (CH₃)₃C–NH₂ प्राथमिक ऐमीन है।
नामकरण
साधारण नाम: ऐल्किल समूहों के नाम वर्णक्रम में लिखकर 'ऐमीन' जोड़ दो: मेथिलऐमीन, एथिलमेथिलऐमीन, ट्राइमेथिलऐमीन।
IUPAC नाम:
- N वाली सबसे लंबी शृंखला लो। ऐल्केन का आख़िरी 'e' हटाओ, 'amine' जोड़ो: ethane → ethanamine (एथेनऐमीन)।
- NH₂ के पास वाले सिरे से गिनो: CH₃CH₂CH₂NH₂ = प्रोपेन-1-ऐमीन; CH₃CH(NH₂)CH₃ = प्रोपेन-2-ऐमीन।
- N पर लगे दूसरे समूहों के आगे N- लगाओ: CH₃NHC₂H₅ = N-मेथिलएथेनऐमीन; (CH₃)₂NC₂H₅ = N,N-डाइमेथिलएथेनऐमीन।
- दो NH₂ हों तो 'e' रहता है: H₂N–CH₂CH₂–NH₂ = एथेन-1,2-डाइऐमीन।
- ऐरोमैटिक: C₆H₅NH₂ = ऐनिलीन, IUPAC में बेंज़ीनऐमीन।
ऐमीन बनाने की विधियाँ
- नाइट्रो यौगिकों का अपचयन: H₂/Pd, या Sn + HCl, या लोहे का चूरा + HCl (उद्योग में यही पसंद, क्योंकि बना FeCl₂ जल-अपघटित होकर HCl वापस देता है, थोड़ा अम्ल काफ़ी)। नाइट्रोबेंज़ीन → ऐनिलीन।
- ऐल्किल हैलाइड का अमोनीअपघटन: R–X + NH₃ → R–NH₂। बना ऐमीन फिर से अभिक्रिया करता है → 1°, 2°, 3° और चतुष्क लवण R₄N⁺X⁻ का मिश्रण। NH₃ बहुत ज़्यादा लो तो 1° ज़्यादा बनता है।
- नाइट्राइल का अपचयन: R–C≡N + LiAlH₄ या H₂/Ni → R–CH₂–NH₂। शृंखला में एक C बढ़ता है।
- एमाइड का अपचयन: R–CONH₂ + LiAlH₄ → R–CH₂–NH₂ (C उतने ही)।
- गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण: थैलिमाइड + KOH → पोटैशियम थैलिमाइड; + R–X → N-ऐल्किलथैलिमाइड; क्षारीय जल-अपघटन → R–NH₂। केवल शुद्ध 1° ऐमीन। ऐनिलीन नहीं बनता, क्योंकि ऐरिल हैलाइड यह प्रतिस्थापन नहीं करते।
- हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण: R–CONH₂ + Br₂ + 4NaOH → R–NH₂ + Na₂CO₃ + 2NaBr + 2H₂O। ऐमीन में एमाइड से एक C कम।
भौतिक गुण
छोटे ऐलिफैटिक ऐमीन गैस या द्रव होते हैं, गंध मछली जैसी। ऐनिलीन द्रव है जो हवा में रखने पर भूरा हो जाता है (ऑक्सीकरण)।
हाइड्रोजन बंध: 1° और 2° में N–H है, इसलिए अणु आपस में H-बंध बनाते हैं। 3° में N–H नहीं। इसलिए लगभग समान द्रव्यमान पर क्वथनांक: 1° > 2° > 3°।
N, O से कम विद्युत-ऋणात्मक है, इसलिए ऐमीन के H-बंध एल्कोहॉल से कमज़ोर। क्रम: ऐल्केन < ऐमीन < एल्कोहॉल < कार्बोक्सिलिक अम्ल।
छोटे ऐमीन पानी में घुलते हैं; कार्बन भाग बड़ा होने पर घुलनशीलता घटती है।
ऐमीन की क्षारकता
क्षार H⁺ लेता है। N का एकाकी युग्म यही करता है: R–NH₂ + H₂O ⇌ R–NH₃⁺ + OH⁻। ताकत Kb या pKb से मापते हैं। pKb जितना कम, क्षार उतना तेज़।
- ऐल्किल ऐमीन NH₃ से तेज़ क्षार: ऐल्किल समूह N की ओर इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं (+I प्रभाव)।
- गैस अवस्था में: 3° > 2° > 1° > NH₃।
- पानी में धनायन का पानी से H-बंध (जितने N–H, उतना स्थायी) और भीड़ (त्रिविम बाधा) भी असर डालते हैं। मेथिल श्रेणी: 2° > 1° > 3° > NH₃; एथिल श्रेणी: 2° > 3° > 1° > NH₃।
- ऐरिल ऐमीन NH₃ से कमज़ोर: ऐनिलीन में युग्म अनुनाद से वलय में फैला है। pKb: ऐनिलीन ≈ 9.4, NH₃ ≈ 4.75।
- वलय पर इलेक्ट्रॉन देने वाले समूह (–CH₃, –OCH₃) क्षारकता बढ़ाते हैं; खींचने वाले (–NO₂, –Cl) घटाते हैं।
ऐमीन की रासायनिक अभिक्रियाएँ
- अम्ल से लवण: C₆H₅NH₂ + HCl → C₆H₅NH₃⁺Cl⁻। NaOH से ऐमीन वापस।
- ऐल्किलन: R–X से 1° → 2° → 3° → चतुष्क अमोनियम लवण।
- ऐसीटिलन: 1° और 2° (N–H वाले) ऐसिड क्लोराइड/ऐनहाइड्राइड से एमाइड देते हैं; पिरिडीन HCl हटाता है। ऐनिलीन → ऐसीटेनिलाइड। 3° नहीं करता।
- कार्बिलऐमीन अभिक्रिया (1° की पहचान): R–NH₂ + CHCl₃ + 3KOH (गरम) → R–NC (आइसोसायनाइड, बहुत बदबू) + 3KCl + 3H₂O।
- नाइट्रस अम्ल (NaNO₂ + HCl): 1° ऐलिफैटिक → N₂ गैस + एल्कोहॉल; ऐनिलीन 273–278 K पर → बेंज़ीनडाइऐज़ोनियम लवण (अगला पाठ)।
- हिन्सबर्ग परीक्षण (C₆H₅SO₂Cl): 1° का सल्फोनामाइड KOH में घुलता है (N–H अम्लीय); 2° का नहीं घुलता; 3° अभिक्रिया नहीं करता।
- ऐनिलीन में वलय प्रतिस्थापन: –NH₂ ऑर्थो और पैरा स्थानों को बहुत सक्रिय करता है। ब्रोमीन जल से तुरंत सफ़ेद अवक्षेप: 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन। एक ही Br चाहिए तो पहले ऐसीटिलन करो।
- नाइट्रीकरण: सीधे करने पर लगभग 47% मेटा उत्पाद, क्योंकि अम्ल में ऐनिलीन ऐनिलीनियम (–NH₃⁺, मेटा-निर्देशक) बन जाता है; साथ में ऑक्सीकरण। ऐसीटेनिलाइड बनाकर करो → मुख्यतः p-नाइट्रोऐनिलीन।
- सल्फोनीकरण: सांद्र H₂SO₄ के साथ 453–473 K पर → सल्फैनिलिक अम्ल (ज़्विटर आयन)।
- ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स नहीं करता: AlCl₃ (लुईस अम्ल) N का युग्म ले लेता है, N धनात्मक होकर वलय को निष्क्रिय कर देता है।
करके देखो: नींबू और मछली
घर पर: कच्ची मछली सूँघो, फिर उस पर नींबू निचोड़कर दोबारा सूँघो। गंध कम हो जाती है, क्योंकि ऐमीन (क्षार) साइट्रिक अम्ल से लवण बन जाते हैं और लवण उड़ते नहीं। यही है 'ऐमीन + अम्ल → लवण'।
3D में: free-play में हर ऐमीन के साथ हिन्सबर्ग अभिकर्मक चुनो। पहले अंदाज़ा लगाओ: KOH में घुलेगा या नहीं? फिर 'दिखाओ' दबाकर जाँचो।
बोर्ड परीक्षा पर ध्यान
इस इकाई के लगभग 6 अंक। आम प्रश्न: क्षारकता या क्वथनांक का क्रम; कारण बताओ (ऐनिलीन कम क्षारीय, गैब्रिएल से ऐनिलीन नहीं, नाइट्रीकरण में मेटा उत्पाद, फ्रीडेल-क्राफ्ट्स नहीं); 1°/2°/3° में अंतर (हिन्सबर्ग, कार्बिलऐमीन); नामित अभिक्रियाएँ; और रूपांतरण शृंखला A → B → C।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1° R–NH₂ · 2° R₂NH · 3° R₃N · चतुष्क R₄N⁺X⁻
- R–NO₂ + 6[H] → R–NH₂ + 2H₂O (Sn/HCl, Fe/HCl या H₂/Pd)
- R–C≡N + 4[H] → R–CH₂NH₂ (एक C ज़्यादा)
- R–CONH₂ + Br₂ + 4NaOH → R–NH₂ + Na₂CO₃ + 2NaBr + 2H₂O (एक C कम)
- R–NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → R–NC + 3KCl + 3H₂O (कार्बिलऐमीन, केवल 1°)
- pKb = −log Kb; कम pKb = तेज़ क्षार
- पानी में क्षारकता: (CH₃)₂NH > CH₃NH₂ > (CH₃)₃N > NH₃ > C₆H₅NH₂
- क्वथनांक (समान द्रव्यमान): 1° > 2° > 3°
हल किए गए उदाहरण
1. (CH₃)₃C–NH₂ और C₆H₅NHCH₃ को 1°, 2° या 3° में बाँटो।
चरण 1: कार्बन नहीं, N देखो। चरण 2: (CH₃)₃C–NH₂ में N पर एक C → प्राथमिक (1°), भले वह C तृतीयक हो। चरण 3: C₆H₅NHCH₃ में N पर दो C (फेनिल और मेथिल) और एक H → द्वितीयक (2°) ऐरोमैटिक ऐमीन।
2. CH₃–CH(NH₂)–CH₂–CH₃ और (C₂H₅)₂N–CH₃ का IUPAC नाम लिखो।
पहला: सबसे लंबी शृंखला 4 C (ब्यूटेन), NH₂ को छोटा नंबर 2 → ब्यूटेन-2-ऐमीन। दूसरा: N पर सबसे बड़ा समूह एथिल → मूल नाम एथेनऐमीन; बाक़ी एथिल और मेथिल N पर → N-एथिल-N-मेथिलएथेनऐमीन।
3. C₂H₅CONH₂ को Br₂ और NaOH से गरम किया। कौन-सा ऐमीन बना, उसमें कितने C?
चरण 1: यह हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण है; C=O वाला C कार्बोनेट बनकर निकल जाता है। चरण 2: एमाइड में 3 C → ऐमीन में 3 − 1 = 2 C। चरण 3: उत्पाद C₂H₅NH₂ (एथेनऐमीन)।
4. बेंज़ीन से ऐनिलीन बनाओ।
चरण 1 (नाइट्रीकरण): C₆H₆ + सांद्र HNO₃ / सांद्र H₂SO₄ → C₆H₅NO₂। चरण 2 (अपचयन): C₆H₅NO₂ + Fe/HCl (या Sn/HCl) → C₆H₅NH₂; NaOH डालकर लवण से ऐमीन अलग करो।
5. पानी में बढ़ती क्षारकता के क्रम में लिखो: C₆H₅NH₂, NH₃, CH₃NH₂, (CH₃)₂NH।
चरण 1: ऐनिलीन सबसे कमज़ोर (युग्म वलय में फैला, pKb ≈ 9.4)। चरण 2: फिर NH₃ (pKb ≈ 4.75)। चरण 3: CH₃NH₂ (pKb ≈ 3.4) मेथिल के +I से तेज़। चरण 4: (CH₃)₂NH (pKb ≈ 3.3) सबसे तेज़। क्रम: C₆H₅NH₂ < NH₃ < CH₃NH₂ < (CH₃)₂NH।
6. किसी ऐमीन का pKb = 3.30 है। Kb निकालो और NH₃ (Kb = 1.8 × 10⁻⁵) से तुलना करो।
चरण 1: Kb = 10^(−3.30)। चरण 2: = 10^(0.70) × 10⁻⁴ ≈ 5.0 × 10⁻⁴। चरण 3: 5.0 × 10⁻⁴ ÷ 1.8 × 10⁻⁵ ≈ 28। यह ऐमीन अमोनिया से लगभग 28 गुना तेज़ क्षार है।
7. तीन बोतलों में एथेनऐमीन, N-मेथिलएथेनऐमीन और N,N-डाइमेथिलएथेनऐमीन हैं। हिन्सबर्ग अभिकर्मक से कैसे पहचानोगे?
चरण 1: हर एक को C₆H₅SO₂Cl और KOH के साथ हिलाओ। चरण 2: एथेनऐमीन (1°) → C₆H₅SO₂NHC₂H₅, इसका N–H अम्लीय, KOH में घुल जाता है। चरण 3: N-मेथिलएथेनऐमीन (2°) → N पर H नहीं, ठोस KOH में नहीं घुलता। चरण 4: 3° ऐमीन अभिक्रिया ही नहीं करता।
8. ऐनिलीन के सीधे नाइट्रीकरण में मेटा उत्पाद ज़्यादा क्यों, और p-नाइट्रोऐनिलीन कैसे बनाएँ?
चरण 1: नाइट्रीकरण मिश्रण बहुत अम्लीय। चरण 2: ऐनिलीन H⁺ लेकर C₆H₅NH₃⁺ बनता है। चरण 3: –NH₃⁺ इलेक्ट्रॉन खींचता है, मेटा-निर्देशक → लगभग 47% मेटा। चरण 4: पहले ऐसीटिलन (ऐसीटेनिलाइड), फिर नाइट्रीकरण (मुख्यतः पैरा), फिर जल-अपघटन → p-नाइट्रोऐनिलीन।
आम गलतियाँ
- ऐमीन को एल्कोहॉल की तरह बाँटना। ऐमीन में N पर लगे C गिनो: (CH₃)₃CNH₂ प्राथमिक है।
- यह कहना कि पानी में 3° ऐमीन सबसे तेज़ क्षार है। मेथिल श्रेणी में क्रम 2° > 1° > 3° है (जलयोजन और भीड़ के कारण)।
- गैब्रिएल विधि से ऐनिलीन बनाना। ऐरिल हैलाइड यह प्रतिस्थापन नहीं करते।
- भूल जाना कि हॉफमान ब्रोमेमाइड एक C घटाता है, जबकि नाइट्राइल अपचयन एक C बढ़ाता है।