हैलोऐरीन क्या हैं?
हैलोऐरीन (ऐरिल हैलाइड) में हैलोजन सीधे ऐरोमैटिक वलय के कार्बन से जुड़ा होता है: C₆H₅Cl (क्लोरोबेंज़ीन), C₆H₅Br (ब्रोमोबेंज़ीन)। अगर X पार्श्व शृंखला पर हो (C₆H₅CH₂Cl) तो वह बेंज़िलिक हैलाइड है, जो हैलोऐल्केन जैसा व्यवहार करता है। डाइहैलोबेंज़ीन के तीन समावयवी: 1,2 (ऑर्थो), 1,3 (मेटा), 1,4 (पैरा)।
हैलोऐरीन बनाने की विधियाँ
- इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन: बेंज़ीन + Cl₂ (या Br₂), लूइस अम्ल FeCl₃ या निर्जल FeBr₃ के साथ, अंधेरे और ठंड में। लूइस अम्ल Cl⁺ बनाता है जो वलय पर हमला करता है। आयोडीनन के लिए ऑक्सीकारक (HNO₃ या HIO₄) चाहिए क्योंकि बनने वाला HI अभिक्रिया उलट देता है; फ़्लुओरीनन बहुत तीव्र है।
- सैंडमेयर अभिक्रिया: ऐनिलीन + NaNO₂ + HCl, 273–278 K पर → बेंज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड। फिर CuCl/HCl से क्लोरोबेंज़ीन, CuBr/HBr से ब्रोमोबेंज़ीन। N₂ गैस निकलती है।
- गाटरमान अभिक्रिया: वही बदलाव कॉपर चूर्ण और HCl या HBr से।
- आयोडोबेंज़ीन: डाइऐज़ोनियम लवण + KI (कॉपर नहीं चाहिए)।
नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन क्यों
- अनुनाद: Cl का एकाकी युग्म वलय से साझा होता है, C–Cl में आंशिक द्वि-आबंध गुण (169 pm, जबकि CH₃Cl में 177 pm)।
- sp² कार्बन: यह आबंध इलेक्ट्रॉनों को पास रखता है, आबंध छोटा और मज़बूत।
- फ़ेनिल धनायन अस्थिर, इसलिए SN1 नहीं होती।
- प्रतिकर्षण: इलेक्ट्रॉन-समृद्ध वलय आते हुए नाभिकस्नेही को धकेलता है, और वलय पीछे का रास्ता (SN2) रोकता है।
डाउ प्रक्रम: क्लोरोबेंज़ीन + NaOH, 623 K और 300 atm → सोडियम फ़ीनॉक्साइड → (अम्ल से) फ़ीनॉल।
–NO₂ मदद करता है: ऑर्थो या पैरा पर इलेक्ट्रॉन खींचने वाला समूह ऋणावेशित मध्यवर्ती को स्थिर करता है। 4-नाइट्रो: 443 K; 2,4-डाइनाइट्रो: 368 K; 2,4,6-ट्राइनाइट्रो: गुनगुना पानी (323 K)। मेटा पर –NO₂ से खास फ़र्क नहीं।
इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन और निर्देशी प्रभाव
हैलोजन वलय पर दो काम करता है:
- −I प्रभाव (आबंध से इलेक्ट्रॉन खींचना) → पूरा वलय बेंज़ीन से थोड़ा कम क्रियाशील (निष्क्रियक)।
- +R प्रभाव (अनुनाद से एकाकी युग्म देना) → अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व केवल ऑर्थो और पैरा पर। इसलिए नए समूह ऑर्थो और पैरा पर जाते हैं।
पैरा उत्पाद प्रायः मुख्य होता है, क्योंकि ऑर्थो Cl के पास भीड़ वाला है।
- हैलोजनन: Cl₂/FeCl₃ → o- और p-डाइक्लोरोबेंज़ीन।
- नाइट्रीकरण: सांद्र HNO₃ + सांद्र H₂SO₄ → o- और p-क्लोरोनाइट्रोबेंज़ीन।
- सल्फ़ोनीकरण: सांद्र H₂SO₄ → o- और p-क्लोरोबेंज़ीनसल्फ़ोनिक अम्ल।
- फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स: CH₃Cl/AlCl₃ → o- और p-क्लोरोटॉलूईन; CH₃COCl/AlCl₃ → o- और p-क्लोरोऐसीटोफ़ीनोन।
धातुओं के साथ अभिक्रियाएँ
- वुर्ट्ज़–फ़िटिग: Ar–X + R–X + 2Na (शुष्क ईथर) → Ar–R + 2NaX। उदाहरण: क्लोरोबेंज़ीन + CH₃Cl → टॉलूईन।
- फ़िटिग: 2Ar–X + 2Na (शुष्क ईथर) → Ar–Ar + 2NaX। क्लोरोबेंज़ीन → बाइफ़ेनिल।
- शुष्क ईथर/THF में Mg के साथ: ऐरिल ग्रिन्यार अभिकर्मक ArMgX।
भौतिक गुण और बोर्ड पर ध्यान
हैलोऐरीन रंगहीन द्रव या ठोस, पानी में अघुलनशील और पानी से भारी होते हैं। p-डाइक्लोरोबेंज़ीन का गलनांक o- और m- से बहुत ज़्यादा है, क्योंकि सममित आकार क्रिस्टल में अच्छी तरह जमता है। बोर्ड प्रश्न: "क्लोरोबेंज़ीन CH₃Cl से कम क्रियाशील क्यों?", "Cl निष्क्रियक होकर भी o/p निर्देशी क्यों?", अभिक्रिया का नाम (सैंडमेयर, वुर्ट्ज़–फ़िटिग, फ़िटिग, डाउ), रूपांतरण (बेंज़ीन → क्लोरोबेंज़ीन → फ़ीनॉल)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- C₆H₆ + Cl₂ → C₆H₅Cl + HCl (FeCl₃, dark)
- C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + CuCl → C₆H₅Cl + N₂ (Sandmeyer)
- C₆H₅Cl + NaOH → C₆H₅ONa (623 K, 300 atm) → C₆H₅OH (with H⁺) (Dow)
- C₆H₅Cl + CH₃Cl + 2Na → C₆H₅CH₃ + 2NaCl (Wurtz–Fittig)
- 2C₆H₅Cl + 2Na → C₆H₅–C₆H₅ + 2NaCl (Fittig)
- X का निर्देशी प्रभाव: −I (निष्क्रियक) + +R (o/p निर्देशी)
हल किए गए उदाहरण
1. बेंज़ीन को क्लोरोबेंज़ीन में कैसे बदलोगे?
अंधेरे में निर्जल FeCl₃ के साथ बेंज़ीन में Cl₂ प्रवाहित करो: C₆H₆ + Cl₂ → C₆H₅Cl + HCl। FeCl₃, Cl⁺ इलेक्ट्रॉनस्नेही बनाता है।
2. ऐनिलीन को ब्रोमोबेंज़ीन में कैसे बदलोगे?
चरण 1: ऐनिलीन + NaNO₂ + HCl, 273–278 K → C₆H₅N₂⁺Cl⁻। चरण 2: CuBr/HBr मिलाओ → C₆H₅Br + N₂ (सैंडमेयर)।
3. क्लोरोबेंज़ीन में C–Cl आबंध क्लोरोमेथेन से छोटा क्यों?
Cl अपना एकाकी युग्म वलय से साझा करता है (अनुनाद), आबंध में कुछ द्वि-आबंध गुण आता है। साथ ही कार्बन sp² है (ज़्यादा s-गुण)। दोनों से आबंध छोटा (≈169 pm बनाम 177 pm)।
4. जलीय NaOH से अभिक्रिया की आसानी के क्रम में लगाओ: क्लोरोबेंज़ीन, 2,4-डाइनाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन, 4-नाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन, 2,4,6-ट्राइनाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन।
o/p पर जितने ज़्यादा –NO₂, उतना आसान: क्लोरोबेंज़ीन < 4-नाइट्रो < 2,4-डाइनाइट्रो < 2,4,6-ट्राइनाइट्रो।
5. क्लोरोबेंज़ीन का नाइट्रीकरण करने पर उत्पाद कौन-से, मुख्य कौन?
o-क्लोरोनाइट्रोबेंज़ीन और p-क्लोरोनाइट्रोबेंज़ीन। पैरा मुख्य, क्योंकि ऑर्थो स्थान Cl के पास भीड़ वाला है।
6. क्लोरोबेंज़ीन में क्लोरीन का प्रतिशत निकालो (C = 12, H = 1, Cl = 35.5)।
M = 6×12 + 5×1 + 35.5 = 112.5 g/mol। %Cl = 35.5 ÷ 112.5 × 100 = 31.6%।
आम गलतियाँ
- कमरे के ताप पर NaOH से क्लोरोबेंज़ीन की SN2 लिख देना: यह नहीं होती; वलय पीछे का रास्ता रोकता है।
- Cl को सक्रियक कहना क्योंकि वह o/p निर्देशी है: वह निष्क्रियक है (−I) पर o/p निर्देशी (+R)।
- वुर्ट्ज़–फ़िटिग (ऐरिल + ऐल्किल हैलाइड) और फ़िटिग (दो ऐरिल हैलाइड) को मिला देना।
- मेटा पर –NO₂ से तेज़ प्रतिस्थापन मानना: केवल ऑर्थो/पैरा –NO₂ मदद करता है।