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हैलोऐरीन

हैलोऐरीन में हैलोजन सीधे बेंज़ीन वलय से जुड़ा होता है (Ar–X), जैसे क्लोरोबेंज़ीन C₆H₅Cl। अनुनाद के कारण C–X आबंध में आंशिक द्वि-आबंध गुण आता है, इसलिए नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन है, जब तक ऑर्थो/पैरा पर –NO₂ न हो। इलेक्ट्रॉनस्नेही अभिक्रियाओं में हैलोजन वलय को थोड़ा धीमा करता है पर नए समूह को ऑर्थो और पैरा पर भेजता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह क्लोरोबेंज़ीन है: बेंज़ीन वलय जिसमें एक H की जगह Cl है। Cl का एकाकी युग्म वलय में फैलता है, इसलिए C–Cl आबंध आंशिक द्वि-आबंध है और CH₃Cl से छोटा है।
  2. इसे बनाने के लिए बेंज़ीन को अंधेरे में FeCl₃ के साथ Cl₂ से मिलाते हैं। एक H की जगह Cl आता है और H, HCl बनकर निकलता है।
  3. अब OH⁻, Cl को हटाने आता है। वलय इलेक्ट्रॉनों से भरा है और आबंध मज़बूत है, इसलिए OH⁻ लौट जाता है। केवल 623 K और 300 atm पर ही होता है।
  4. इलेक्ट्रॉनस्नेही वलय पर हमला करते हैं। हरे स्थान (ऑर्थो और पैरा) पर नए समूह जाते हैं; लाल स्थान (मेटा) ज़्यादातर छूट जाते हैं।
  5. शुष्क ईथर में सोडियम के साथ दो ऐरिल वलय Cl छोड़कर जुड़ जाते हैं: यह फ़िटिग अभिक्रिया है, बाइफ़ेनिल बनता है।
  6. अब खेलो: –NO₂ समूह जोड़ो और देखो Cl की जगह OH लगाना कैसे आसान होता है। मेनू से हर अभिक्रिया चलाकर देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्लोरोबेंज़ीन का C–Cl आबंध तोड़ना कठिन क्यों?

Cl का एकाकी युग्म वलय से साझा होता है, आबंध आंशिक द्वि-आबंध बनता है। 3D में आबंध को एकल और द्वि के बीच झिलमिलाते देखो।

बेंज़ीन के क्लोरीनन में FeCl₃ क्यों?

अकेला Cl₂ स्थिर वलय पर हमला नहीं कर पाता। FeCl₃, Cl⁻ खींचकर Cl⁺ बनाता है, जो प्रबल इलेक्ट्रॉनस्नेही है।

OH⁻ क्लोरोबेंज़ीन से लौट क्यों जाता है?

वलय π इलेक्ट्रॉनों से भरा है जो ऋण आयन को धकेलते हैं, और वलय कार्बन के पीछे का रास्ता रोकता है।

Cl इलेक्ट्रॉन खींचता है, तो o और p पर समूह कैसे भेजता है?

इसका एकाकी युग्म अनुनाद से वलय में इलेक्ट्रॉन देता है, पर केवल ऑर्थो और पैरा पर। वे स्थान हरे चमकते हैं।

मुख्य उत्पाद पैरा क्यों, ऑर्थो क्यों नहीं?

ऑर्थो बड़े Cl के ठीक पास है, भीड़ ज़्यादा। पैरा दूर और खाली है।

–NO₂ समूह Cl हटाना आसान कैसे करते हैं?

ये वलय से इलेक्ट्रॉन खींचकर मध्यवर्ती के अतिरिक्त ऋणावेश को सँभालते हैं, पर केवल ऑर्थो/पैरा से।

हैलोऐरीन क्या हैं?

हैलोऐरीन (ऐरिल हैलाइड) में हैलोजन सीधे ऐरोमैटिक वलय के कार्बन से जुड़ा होता है: C₆H₅Cl (क्लोरोबेंज़ीन), C₆H₅Br (ब्रोमोबेंज़ीन)। अगर X पार्श्व शृंखला पर हो (C₆H₅CH₂Cl) तो वह बेंज़िलिक हैलाइड है, जो हैलोऐल्केन जैसा व्यवहार करता है। डाइहैलोबेंज़ीन के तीन समावयवी: 1,2 (ऑर्थो), 1,3 (मेटा), 1,4 (पैरा)।

हैलोऐरीन बनाने की विधियाँ

नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन क्यों

  1. अनुनाद: Cl का एकाकी युग्म वलय से साझा होता है, C–Cl में आंशिक द्वि-आबंध गुण (169 pm, जबकि CH₃Cl में 177 pm)।
  2. sp² कार्बन: यह आबंध इलेक्ट्रॉनों को पास रखता है, आबंध छोटा और मज़बूत।
  3. फ़ेनिल धनायन अस्थिर, इसलिए SN1 नहीं होती।
  4. प्रतिकर्षण: इलेक्ट्रॉन-समृद्ध वलय आते हुए नाभिकस्नेही को धकेलता है, और वलय पीछे का रास्ता (SN2) रोकता है।

डाउ प्रक्रम: क्लोरोबेंज़ीन + NaOH, 623 K और 300 atm → सोडियम फ़ीनॉक्साइड → (अम्ल से) फ़ीनॉल।

–NO₂ मदद करता है: ऑर्थो या पैरा पर इलेक्ट्रॉन खींचने वाला समूह ऋणावेशित मध्यवर्ती को स्थिर करता है। 4-नाइट्रो: 443 K; 2,4-डाइनाइट्रो: 368 K; 2,4,6-ट्राइनाइट्रो: गुनगुना पानी (323 K)। मेटा पर –NO₂ से खास फ़र्क नहीं।

इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन और निर्देशी प्रभाव

हैलोजन वलय पर दो काम करता है:

पैरा उत्पाद प्रायः मुख्य होता है, क्योंकि ऑर्थो Cl के पास भीड़ वाला है।

धातुओं के साथ अभिक्रियाएँ

भौतिक गुण और बोर्ड पर ध्यान

हैलोऐरीन रंगहीन द्रव या ठोस, पानी में अघुलनशील और पानी से भारी होते हैं। p-डाइक्लोरोबेंज़ीन का गलनांक o- और m- से बहुत ज़्यादा है, क्योंकि सममित आकार क्रिस्टल में अच्छी तरह जमता है। बोर्ड प्रश्न: "क्लोरोबेंज़ीन CH₃Cl से कम क्रियाशील क्यों?", "Cl निष्क्रियक होकर भी o/p निर्देशी क्यों?", अभिक्रिया का नाम (सैंडमेयर, वुर्ट्ज़–फ़िटिग, फ़िटिग, डाउ), रूपांतरण (बेंज़ीन → क्लोरोबेंज़ीन → फ़ीनॉल)।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. बेंज़ीन को क्लोरोबेंज़ीन में कैसे बदलोगे?

अंधेरे में निर्जल FeCl₃ के साथ बेंज़ीन में Cl₂ प्रवाहित करो: C₆H₆ + Cl₂ → C₆H₅Cl + HCl। FeCl₃, Cl⁺ इलेक्ट्रॉनस्नेही बनाता है।

2. ऐनिलीन को ब्रोमोबेंज़ीन में कैसे बदलोगे?

चरण 1: ऐनिलीन + NaNO₂ + HCl, 273–278 K → C₆H₅N₂⁺Cl⁻। चरण 2: CuBr/HBr मिलाओ → C₆H₅Br + N₂ (सैंडमेयर)।

3. क्लोरोबेंज़ीन में C–Cl आबंध क्लोरोमेथेन से छोटा क्यों?

Cl अपना एकाकी युग्म वलय से साझा करता है (अनुनाद), आबंध में कुछ द्वि-आबंध गुण आता है। साथ ही कार्बन sp² है (ज़्यादा s-गुण)। दोनों से आबंध छोटा (≈169 pm बनाम 177 pm)।

4. जलीय NaOH से अभिक्रिया की आसानी के क्रम में लगाओ: क्लोरोबेंज़ीन, 2,4-डाइनाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन, 4-नाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन, 2,4,6-ट्राइनाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन।

o/p पर जितने ज़्यादा –NO₂, उतना आसान: क्लोरोबेंज़ीन < 4-नाइट्रो < 2,4-डाइनाइट्रो < 2,4,6-ट्राइनाइट्रो।

5. क्लोरोबेंज़ीन का नाइट्रीकरण करने पर उत्पाद कौन-से, मुख्य कौन?

o-क्लोरोनाइट्रोबेंज़ीन और p-क्लोरोनाइट्रोबेंज़ीन। पैरा मुख्य, क्योंकि ऑर्थो स्थान Cl के पास भीड़ वाला है।

6. क्लोरोबेंज़ीन में क्लोरीन का प्रतिशत निकालो (C = 12, H = 1, Cl = 35.5)।

M = 6×12 + 5×1 + 35.5 = 112.5 g/mol। %Cl = 35.5 ÷ 112.5 × 100 = 31.6%।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. बेंज़ीन के क्लोरीनन का उत्प्रेरक:
2. बेंज़ीन वलय पर क्लोरीन है:
3. ऐनिलीन → क्लोरोबेंज़ीन में प्रयुक्त:
4. क्लोरोबेंज़ीन + शुष्क ईथर में Na से बनता है:
5. नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन सबसे आसानी से कौन देगा?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैलोऐरीन, हैलोऐल्केन से नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन में कम क्रियाशील क्यों?

अनुनाद से C–X में आंशिक द्वि-आबंध गुण, sp² कार्बन, अस्थिर फ़ेनिल धनायन और इलेक्ट्रॉन-समृद्ध वलय द्वारा नाभिकस्नेही का प्रतिकर्षण।

सैंडमेयर अभिक्रिया क्या है?

ठंडे में ऐनिलीन, NaNO₂ और HCl से बने डाइऐज़ोनियम लवण को CuCl या CuBr से उपचारित कर –N₂⁺ की जगह Cl या Br लगाना; N₂ गैस निकलती है।

क्लोरीन ऑर्थो-पैरा निर्देशी है या मेटा?

ऑर्थो-पैरा निर्देशी, हालाँकि वलय को थोड़ा निष्क्रिय करता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

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