कार्बोक्सिल समूह
कार्बोक्सिल समूह (−COOH) = एक ही कार्बन पर कार्बोनिल (C=O) और हाइड्रॉक्सिल (O−H)।
- कार्बोक्सिल कार्बन sp² है; समूह समतल है, कोण लगभग 120°।
- O−H वाला ऑक्सीजन अपना एकाकी युग्म अनुनाद से C=O के साथ बाँटता है। इसलिए यहाँ C=O, ऐल्डिहाइड-कीटोन की तुलना में नाभिकस्नेही के प्रति कम क्रियाशील है। इसी कारण कार्बोक्सिलिक अम्ल टॉलेन्स या 2,4-DNP परीक्षण नहीं देते।
- नाम: ऐल्केन के 'e' की जगह -ओइक अम्ल: मेथेनोइक अम्ल (HCOOH, फ़ॉर्मिक), एथेनोइक अम्ल (CH₃COOH, ऐसीटिक), बेन्ज़ोइक अम्ल (C₆H₅COOH)।
भौतिक गुण
- बहुत ऊँचे क्वथनांक: दो अम्ल अणु दो H-बंधों से जुड़कर द्वितय (डाइमर) बनाते हैं, वाष्प में भी।
- छोटे अम्ल (4 कार्बन तक) पानी में घुलते हैं (H-बंध)। लंबे अम्ल लगभग नहीं घुलते। बेन्ज़ोइक अम्ल ठंडे पानी में लगभग अघुलनशील है।
कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाने की विधियाँ
- प्राथमिक ऐल्कोहॉल और ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण: KMnO₄ (उदासीन, अम्लीय या क्षारीय) या K₂Cr₂O₇/H₂SO₄। RCH₂OH → RCHO → RCOOH।
- ऐल्किलबेंज़ीन का ऑक्सीकरण: गरम क्षारीय KMnO₄ पूरी पार्श्व-श्रृंखला (किसी भी लंबाई की, अगर वलय से जुड़े कार्बन पर H हो) को −COOH बना देता है: टॉलूईन → बेन्ज़ोइक अम्ल।
- नाइट्राइल और ऐमाइड का जल-अपघटन: R−C≡N + H₂O (H⁺ या OH⁻) → R−CONH₂ → R−COOH।
- ग्रिन्यार अभिकर्मक से: RMgX + CO₂ (शुष्क बर्फ़) → RCOOMgX → (H₃O⁺) → RCOOH। अम्ल में ऐल्किल हैलाइड से एक कार्बन ज़्यादा होता है।
- ऐसिल हैलाइड, ऐनहाइड्राइड और एस्टर का जल-अपघटन: पानी (या क्षार फिर अम्ल) से → अम्ल।
कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लता
RCOOH + H₂O ⇌ RCOO⁻ + H₃O⁺। अम्ल वियोजन स्थिरांक Ka बताता है कि अम्ल कितना H⁺ देता है। आमतौर पर pKa = −log Ka लेते हैं: छोटा pKa = प्रबल अम्ल।
फ़ीनॉल और ऐल्कोहॉल से ज़्यादा अम्लीय क्यों?
- कार्बोक्सिलेट आयन में ऋण आवेश दो ऑक्सीजन परमाणुओं में बराबर बँटा है (दो बराबर अनुनाद रूप, दोनों C−O बंध एक जैसे लंबे)।
- फ़ीनॉक्साइड में आवेश वलय में भी फैलता है, पर कार्बन परमाणुओं पर, जो ऋण आवेश ठीक से नहीं सँभालते। ऐल्कोहॉल में आवेश फैल ही नहीं सकता।
- सामान्य pKa: HCl ≈ −7, CH₃COOH 4.76, C₆H₅COOH 4.19, HCOOH 3.75, फ़ीनॉल 10, एथेनॉल ≈ 16।
प्रतिस्थापियों का प्रभाव
- इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (−NO₂, −CN, −F, −Cl, −Br, C₆H₅) ऋण आवेश और फैलाते हैं → प्रबल अम्ल। ऐसे समूह जितने ज़्यादा, उतना प्रबल (Cl₃CCOOH, CH₃COOH से बहुत प्रबल)।
- जितना तेज़ खिंचाव, उतना प्रबल: FCH₂COOH > ClCH₂COOH > BrCH₂COOH।
- दूरी बढ़ने पर असर घटता है: 2-क्लोरोब्यूटेनोइक > 3-क्लोरो > 4-क्लोरो।
- इलेक्ट्रॉन देने वाले समूह (ऐल्किल) आयन को कम स्थिर करते हैं → दुर्बल अम्ल: HCOOH, CH₃COOH से प्रबल है।
कार्बोक्सिलिक अम्लों की अभिक्रियाएँ
O−H बंध टूटना
- धातु (Na) से → लवण + H₂; NaOH से → लवण + पानी।
- NaHCO₃ से → लवण + CO₂ (तेज़ बुदबुदाहट)। फ़ीनॉल ऐसा नहीं करता, इसलिए यह दोनों में अंतर का परीक्षण है।
C−OH बंध टूटना
- एस्टरीकरण: RCOOH + R′OH ⇌ RCOOR′ + H₂O (सांद्र H₂SO₄ या शुष्क HCl)। OH अम्ल से आता है।
- ऐसिल क्लोराइड: PCl₅, PCl₃ या SOCl₂ से (SOCl₂ सबसे अच्छा: SO₂ और HCl गैसें निकल जाती हैं)।
- ऐनहाइड्राइड: P₂O₅ के साथ गरम करने पर (दो अणुओं के बीच से पानी निकलता है)।
- ऐमाइड: NH₃ से → अमोनियम लवण → गरम → RCONH₂।
−COOH समूह की अभिक्रियाएँ
- अपचयन: LiAlH₄ (या B₂H₆) → प्राथमिक ऐल्कोहॉल। NaBH₄, COOH का अपचयन नहीं करता।
- विकार्बोक्सिलन: सोडियम लवण + सोडा-लाइम (NaOH + CaO), गरम → एक कार्बन कम वाला हाइड्रोकार्बन + Na₂CO₃। लवण का कोल्बे विद्युत-अपघटन भी CO₂ हटाता है।
श्रृंखला और वलय में प्रतिस्थापन
- हेल–फ़ोलार्ड–ज़ेलिंस्की (HVZ): α-H वाले अम्ल + Cl₂ या Br₂ और लाल फ़ॉस्फ़ोरस → α-हैलो अम्ल।
- बेन्ज़ोइक अम्ल: −COOH निष्क्रियक और मेटा-निर्देशी है; यह फ्रीडेल–क्राफ़्ट्स अभिक्रिया नहीं देता।
कार्बोक्सिलिक अम्लों के उपयोग
- मेथेनोइक अम्ल: रबर, कपड़ा, रंगाई और चमड़ा उद्योग।
- एथेनोइक अम्ल: भोजन में सिरका; विलायक; एस्टर, सेलुलोस ऐसीटेट और रंजक बनाना।
- हेक्सेनडाइओइक (ऐडिपिक) अम्ल: नायलॉन-6,6 बनाना।
- बेन्ज़ोइक अम्ल और सोडियम बेन्ज़ोएट: खाद्य परिरक्षक। बेन्ज़ोइक अम्ल के एस्टर इत्र में।
- उच्च वसा अम्ल (पामिटिक, स्टियरिक): साबुन और अपमार्जक।
करके देखो: घर पर बुलबुला परीक्षण
एक कप में आधा चम्मच बेकिंग सोडा (NaHCO₃) डालो। पहले अनुमान लगाओ: क्या सिरके से बुलबुले बनेंगे? अब एक चम्मच सिरका डालो। बुलबुले CO₂ हैं: ऐसीटिक अम्ल इतना प्रबल है कि HCO₃⁻ को H⁺ दे सके। 3D के खेल वाले चरण में Cl = 3 करो और अनुमान लगाओ कि ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल और तेज़ बुलबुले देगा या नहीं (हाँ: pKa 0.65, 4.76 से बहुत छोटा है)।
परीक्षा कोना
अपेक्षित प्रश्न: कारण सहित अम्लता का क्रम, 'RCOOH फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय क्यों', फ़ीनॉल और बेन्ज़ोइक अम्ल में अंतर (NaHCO₃ परीक्षण), ग्रिन्यार अभिकर्मक से बनाना, नाम वाली अभिक्रियाएँ (HVZ, विकार्बोक्सिलन, कोल्बे), और 1–3 अंक के pKa/Ka आंकिक प्रश्न।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- pKa = −log₁₀ Ka और Ka = 10^(−pKa)
- c सांद्रता वाले दुर्बल अम्ल HA के लिए: [H⁺] ≈ √(Ka·c), वियोजन की मात्रा α ≈ √(Ka/c)
- pH = −log₁₀ [H⁺]
- RCOOH + NaHCO₃ → RCOONa + H₂O + CO₂↑
- RCOOH + R′OH ⇌ RCOOR′ + H₂O (H⁺)
- RMgX + CO₂ → RCOOMgX → RCOOH (H₃O⁺)
- RCOONa + NaOH (CaO, गरम) → RH + Na₂CO₃
हल किए गए उदाहरण
1. एथेनोइक अम्ल का Ka = 1.8 × 10⁻⁵ है। इसका pKa निकालो।
चरण 1: pKa = −log Ka = −log(1.8 × 10⁻⁵)। चरण 2: log 1.8 = 0.255, तो log Ka = 0.255 − 5 = −4.745। चरण 3: pKa = 4.745 ≈ 4.75। उत्तर: pKa ≈ 4.75।
2. क्लोरोएथेनोइक अम्ल का pKa 2.86 है। Ka निकालो और बताओ यह एथेनोइक अम्ल (pKa 4.76) से कितने गुना प्रबल है।
चरण 1: Ka = 10^(−2.86) = 1.38 × 10⁻³। चरण 2: Ka का अनुपात = 10^(4.76 − 2.86) = 10^1.9 ≈ 79। उत्तर: Ka ≈ 1.4 × 10⁻³; लगभग 80 गुना प्रबल।
3. 0.1 M एथेनोइक अम्ल (Ka = 1.8 × 10⁻⁵) का pH निकालो।
चरण 1: [H⁺] ≈ √(Ka × c) = √(1.8 × 10⁻⁵ × 0.1) = √(1.8 × 10⁻⁶)। चरण 2: √1.8 = 1.34, तो [H⁺] = 1.34 × 10⁻³ M। चरण 3: pH = −log(1.34 × 10⁻³) = 3 − 0.127 = 2.87। उत्तर: pH ≈ 2.87।
4. 0.01 M एथेनोइक अम्ल का कितने प्रतिशत आयनित होता है? (Ka = 1.8 × 10⁻⁵)
चरण 1: α ≈ √(Ka / c) = √(1.8 × 10⁻⁵ / 0.01) = √(1.8 × 10⁻³)। चरण 2: √(18 × 10⁻⁴) = 4.24 × 10⁻²। चरण 3: % = 0.0424 × 100 = 4.2%। उत्तर: लगभग 4.2% (ज़्यादातर अणु CH₃COOH ही रहते हैं)।
5. 6.0 g एथेनोइक अम्ल NaHCO₃ से पूरी तरह अभिक्रिया करे तो कितने ग्राम CO₂ निकलेगी? (C = 12, H = 1, O = 16)
चरण 1: CH₃COOH का मोलर द्रव्यमान = 60 g/mol, मोल = 6.0 / 60 = 0.10 mol। चरण 2: CH₃COOH + NaHCO₃ → CH₃COONa + H₂O + CO₂: 1 mol अम्ल से 1 mol CO₂। चरण 3: CO₂ का द्रव्यमान = 0.10 × 44 = 4.4 g। उत्तर: 4.4 g CO₂।
6. 12 g एथेनोइक अम्ल को अधिक एथेनॉल के साथ गरम करने पर 11 g एथिल एथेनोएट बनता है। % लब्धि निकालो। (CH₃COOC₂H₅ = 88 g/mol)
चरण 1: अम्ल के मोल = 12 / 60 = 0.20 mol। चरण 2: 1 mol अम्ल → 1 mol एस्टर, तो अपेक्षित एस्टर = 0.20 × 88 = 17.6 g। चरण 3: % लब्धि = 11 / 17.6 × 100 = 62.5%। उत्तर: 62.5% (एस्टरीकरण उत्क्रमणीय है, इसलिए लब्धि कभी 100% नहीं होती)।
7. बढ़ती अम्लता के क्रम में लिखो: CH₃COOH, FCH₂COOH, ClCH₂COOH, HCOOH।
चरण 1: CH₃ इलेक्ट्रॉन धकेलता है → सबसे दुर्बल (pKa 4.76)। HCOOH में ऐल्किल नहीं → प्रबल (3.75)। चरण 2: हैलोजन इलेक्ट्रॉन खींचते हैं: Cl (2.86), F ज़्यादा खींचता है (2.59)। उत्तर: CH₃COOH < HCOOH < ClCH₂COOH < FCH₂COOH।
8. प्रोपेनोइक अम्ल बनाने के लिए कौन सा ग्रिन्यार अभिकर्मक और क्या चाहिए? चरण दिखाओ।
चरण 1: प्रोपेनोइक अम्ल CH₃CH₂COOH में 3 C हैं; COOH का कार्बन CO₂ से आता है। चरण 2: तो ग्रिन्यार में 2 C चाहिए: CH₃CH₂MgBr। चरण 3: CH₃CH₂MgBr + CO₂ → CH₃CH₂COOMgBr; फिर H₃O⁺ → CH₃CH₂COOH। उत्तर: एथिलमैग्नीशियम ब्रोमाइड + शुष्क बर्फ़, फिर तनु अम्ल।
आम गलतियाँ
- कहना कि बड़ा pKa = प्रबल अम्ल। उल्टा है: छोटा pKa = बड़ा Ka = प्रबल अम्ल।
- सोचना कि NaBH₄, −COOH का अपचयन करता है। सिर्फ़ तेज़ LiAlH₄ (या डाइबोरेन) करता है।
- एस्टरीकरण में OH ऐल्कोहॉल से लेना। OH अम्ल से निकलता है और H ऐल्कोहॉल से।
- कार्बोक्सिलिक अम्ल से ऐल्डिहाइड की तरह 2,4-DNP या टॉलेन्स परीक्षण की उम्मीद करना। अनुनाद के कारण उनका C=O इनके प्रति निष्क्रिय है।