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पोटैशियम डाइक्रोमेट और पोटैशियम परमैंगनेट

K₂Cr₂O₇ (नारंगी, Cr +6) क्रोमाइट अयस्क से बनता है; पानी में अम्ल में डाइक्रोमेट और क्षार में पीला क्रोमेट रहता है। KMnO₄ (बैंगनी, Mn +7) पायरोलुसाइट (MnO₂) से बनता है। दोनों प्रबल ऑक्सीकारक हैं: अम्लीय डाइक्रोमेट 6 इलेक्ट्रॉन लेकर हरा Cr³⁺ बनता है; परमैंगनेट अम्ल में 5 (Mn²⁺), उदासीन में 3 (MnO₂) और प्रबल क्षार में 1 (MnO₄²⁻) इलेक्ट्रॉन लेता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह क्रोमेट आयन CrO₄²⁻ है। बीच में एक क्रोमियम, चारों ओर चार ऑक्सीजन, चार कोनों वाले पिरामिड जैसा। इसका घोल पीला है।
  2. अब अम्ल डालिए। दो क्रोमेट पिरामिड पास आकर एक कोने का ऑक्सीजन बाँट लेते हैं। बना एक डाइक्रोमेट आयन Cr₂O₇²⁻। रंग नारंगी हो गया।
  3. डाइक्रोमेट प्रबल ऑक्सीकारक है: यह इलेक्ट्रॉन छीनता है। हर डाइक्रोमेट 6 इलेक्ट्रॉन लेता है (नीले बिंदु गिनिए)। क्रोमियम +6 से +3 हो जाता है और घोल हरा।
  4. अब परमैंगनेट MnO₄⁻ से मिलिए। मैंगनीज़ (+7) चार ऑक्सीजन के बीच है। कुछ ही क्रिस्टल पानी को गहरा बैंगनी कर देते हैं।
  5. अम्ल में अनुमापन: Fe²⁺ बूँद-बूँद डालिए। हर MnO₄⁻ 5 इलेक्ट्रॉन लेकर लगभग रंगहीन Mn²⁺ बनता है। बैंगनी रंग गायब होता रहता है। पहला टिकने वाला गुलाबी रंग अंत बिंदु है।
  6. अब आप खेलें: pH स्लाइडर से क्रोमेट-डाइक्रोमेट बदलें। KMnO₄ का माध्यम बदलें और देखें कितने इलेक्ट्रॉन लेता है और क्या बनता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्रोमेट चतुष्फलकीय क्यों है?

Cr (+6) चार O से चार बंध बनाता है। चार समूह जितना हो सके दूर फैलते हैं, इसलिए चतुष्फलक (त्रिभुज आधार वाला पिरामिड) बनता है।

क्रोमेट से डाइक्रोमेट बनने पर क्या Cr की अवस्था बदलती है?

नहीं, +6 ही रहती है। दो क्रोमेट एक O बाँटकर और पानी छोड़कर जुड़ते हैं। इसलिए यह रेडॉक्स नहीं।

नारंगी डाइक्रोमेट हरा क्यों हो जाता है?

यह 6 इलेक्ट्रॉन लेता है, हर Cr +6 से +3 हो जाता है। पानी में Cr³⁺ हरे होते हैं।

Mn⁷⁺ में d-इलेक्ट्रॉन नहीं, फिर KMnO₄ इतना रंगीन क्यों?

प्रकाश से इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन से मैंगनीज़ पर कूदता है (आवेश स्थानांतरण)। यह पीला-हरा प्रकाश सोखता है, इसलिए गहरा बैंगनी दिखता है।

KMnO₄ अनुमापन में अंत बिंदु कैसे पता चलता है?

जब तक Fe²⁺ है, हर बूँद का बैंगनी रंग उड़ता है। Fe²⁺ खत्म होते ही अगली बूँद हल्की गुलाबी रह जाती है। वही अंत बिंदु है।

KMnO₄ कभी 5, कभी 3, कभी 1 इलेक्ट्रॉन क्यों लेता है?

माध्यम पर निर्भर है। खूब H⁺ हो तो Mn²⁺ तक (5 e⁻)। उदासीन में MnO₂ पर रुकता है (3 e⁻)। प्रबल क्षार में केवल MnO₄²⁻ तक (1 e⁻)।

पोटैशियम डाइक्रोमेट (K₂Cr₂O₇) बनाने की विधि

यह क्रोमाइट अयस्क FeCr₂O₄ से तीन चरणों में बनता है।

  1. सोडा के साथ हवा में संगलन: पीला सोडियम क्रोमेट बनता है।
    4FeCr₂O₄ + 8Na₂CO₃ + 7O₂ → 8Na₂CrO₄ + 2Fe₂O₃ + 8CO₂
  2. सल्फ्यूरिक अम्ल डालें: क्रोमेट नारंगी डाइक्रोमेट बनता है।
    2Na₂CrO₄ + 2H⁺ → Na₂Cr₂O₇ + 2Na⁺ + H₂O
  3. KCl डालें: पोटैशियम डाइक्रोमेट कम घुलनशील है, इसलिए क्रिस्टल बनकर निकलता है।
    Na₂Cr₂O₇ + 2KCl → K₂Cr₂O₇ + 2NaCl

K₂Cr₂O₇ नारंगी-लाल क्रिस्टल है। क्रोमियम +6 अवस्था में है।

pH के साथ क्रोमेट और डाइक्रोमेट का बदलना

पानी में क्रोमेट और डाइक्रोमेट एक-दूसरे में बदलते हैं, pH के अनुसार।

दोनों में क्रोमियम +6 ही रहता है, केवल आकार बदलता है। इसलिए यह अपचयोपचय (रेडॉक्स) अभिक्रिया नहीं है।

क्रोमेट और डाइक्रोमेट आयन की संरचना

क्रोमेट CrO₄²⁻: चतुष्फलकीय। बीच में Cr, चारों कोनों पर O।

डाइक्रोमेट Cr₂O₇²⁻: दो चतुष्फलक एक कोने पर जुड़े। बाँटा गया ऑक्सीजन मुड़ा हुआ Cr–O–Cr पुल बनाता है (कोण लगभग 126°)। छह सिरे वाले Cr–O बंध बराबर लंबाई के, और दो पुल वाले बंध लंबे होते हैं।

कहानी के चरण 1 और 2 यह जुड़ना 3D में दिखाते हैं।

ऑक्सीकारक के रूप में डाइक्रोमेट

अम्ल में डाइक्रोमेट प्रबल ऑक्सीकारक है (दूसरों से इलेक्ट्रॉन लेता है):

Cr₂O₇²⁻ + 14H⁺ + 6e⁻ → 2Cr³⁺ + 7H₂O

नारंगी से हरा। हर Cr +6 → +3, दो Cr मिलकर 6 इलेक्ट्रॉन लेते हैं।

उपयोग: आयतनमितीय विश्लेषण में प्राथमिक मानक (शुद्ध और नमी नहीं सोखता), चमड़ा उद्योग, क्रोम प्लेटिंग, कार्बनिक रसायन में ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण।

पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) बनाने की विधि

यह पायरोलुसाइट MnO₂ से बनता है।

  1. KOH के साथ हवा में संगलन (या KNO₃ के साथ): हरा पोटैशियम मैंगनेट बनता है।
    2MnO₂ + 4KOH + O₂ → 2K₂MnO₄ + 2H₂O
  2. उदासीन/अम्लीय घोल में मैंगनेट का असमानुपातन (एक Mn ऊपर, दो नीचे):
    3MnO₄²⁻ + 4H⁺ → 2MnO₄⁻ + MnO₂ + 2H₂O

औद्योगिक विधि: क्षारीय घोल में मैंगनेट का विद्युत-अपघटनी ऑक्सीकरण: MnO₄²⁻ → MnO₄⁻ + e⁻ (हरा → बैंगनी)।

प्रयोगशाला में Mn²⁺ को पेरॉक्सोडाइसल्फ़ेट से बैंगनी MnO₄⁻ में बदला जा सकता है।

KMnO₄ के गुण और संरचना

KMnO₄ गहरा बैंगनी (लगभग काला) क्रिस्टलीय ठोस है। पानी में घुलकर गहरा बैंगनी घोल देता है। Mn +7 (d⁰) है।

लगभग 513 K पर गर्म करने पर ऑक्सीजन देता है: 2KMnO₄ → K₂MnO₄ + MnO₂ + O₂

मैंगनेट (MnO₄²⁻, हरा) और परमैंगनेट (MnO₄⁻, बैंगनी) दोनों चतुष्फलकीय हैं। मैंगनेट में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (अनुचुंबकीय), परमैंगनेट में कोई नहीं (प्रतिचुंबकीय)।

इसका रंग d–d कूद से नहीं, बल्कि आवेश स्थानांतरण से है: प्रकाश पड़ने पर इलेक्ट्रॉन O से Mn पर कूदता है।

अलग-अलग माध्यम में ऑक्सीकारक परमैंगनेट

MnO₄⁻ कितने इलेक्ट्रॉन लेगा, यह माध्यम पर निर्भर है:

अम्लीय माध्यम के उदाहरण

उदासीन / दुर्बल क्षारीय उदाहरण

KMnO₄ को HCl से अम्लीय क्यों नहीं करते? परमैंगनेट Cl⁻ को क्लोरीन गैस में बदल देगा और KMnO₄ बेकार खर्च होगा। इसलिए तनु H₂SO₄ लेते हैं।

स्वसूचक: अनुमापन में जब तक अपचायक बचा है, बैंगनी रंग गायब होता रहता है। एक बूँद ज़्यादा पर हल्का गुलाबी रंग टिक जाता है, यही अंत बिंदु है। अलग सूचक नहीं चाहिए।

उपयोग: आयतनमितीय विश्लेषण, रोगाणुनाशक, ऊन-सूती-रेशम का विरंजन, तेलों का रंग हटाना, कार्बनिक रसायन में ऑक्सीकारक।

करके देखें: आँखों से दिखने वाला रंग-बदलाव

1. एक गिलास पानी में KMnO₄ ("लाल दवा") का एक छोटा क्रिस्टल डालिए। बिना हिलाए बैंगनी रंग फैलते देखिए।

2. कुछ बूँद नींबू रस और थोड़ी चीनी या हाइड्रोजन पेरॉक्साइड (बड़ों के साथ) डालिए। बैंगनी रंग धीरे-धीरे फीका होता है: KMnO₄ का अपचयन हो रहा है।

3. 3D के आखिरी चरण में पहले अनुमान लगाइए: pH 3 पर पीला या नारंगी? प्रबल क्षार में MnO₄⁻ कितने इलेक्ट्रॉन लेगा? फिर स्लाइडर हिलाकर जाँचिए।

सावधानी: KMnO₄ त्वचा पर दाग छोड़ता है और निगलना हानिकारक है। डाइक्रोमेट घर पर कभी न छुएँ: क्रोमियम(VI) विषैला है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. K₂Cr₂O₇ में Cr की ऑक्सीकरण अवस्था निकालिए।

K = +1, O = −2। Cr = x। 2(+1) + 2x + 7(−2) = 0 → 2x = 12 → x = +6।

2. KMnO₄ और K₂MnO₄ में Mn की ऑक्सीकरण अवस्था निकालिए।

KMnO₄: +1 + x − 8 = 0 → x = +7। K₂MnO₄: +2 + x − 8 = 0 → x = +6।

3. क्या CrO₄²⁻ → Cr₂O₇²⁻ रेडॉक्स अभिक्रिया है?

CrO₄²⁻ में Cr: x − 8 = −2 → +6। Cr₂O₇²⁻ में: 2x − 14 = −2 → +6। अवस्था नहीं बदली, इसलिए रेडॉक्स नहीं; यह अम्ल–क्षार (संघनन) बदलाव है।

4. अम्ल में 1 mol KMnO₄ कितने mol Fe²⁺ का ऑक्सीकरण करता है?

हर MnO₄⁻ 5 e⁻ लेता है (+7 → +2)। हर Fe²⁺ 1 e⁻ देता है। 5 × 1 = 1 × n → n = 5 mol Fe²⁺।

5. अम्ल में 1 mol K₂Cr₂O₇ कितने mol Fe²⁺ का ऑक्सीकरण करता है?

हर Cr 3 e⁻ लेता है, दो Cr → 6 e⁻। हर Fe²⁺ 1 e⁻ देता है। तो 6 mol Fe²⁺।

6. 0.02 M KMnO₄ का 20.0 mL अम्ल में FeSO₄ घोल से पूरी तरह क्रिया करता है। Fe²⁺ के कितने mol थे?

चरण 1: MnO₄⁻ के mol = 0.02 × 20.0/1000 = 4.0 × 10⁻⁴। चरण 2: अनुपात 1 : 5। चरण 3: Fe²⁺ = 5 × 4.0 × 10⁻⁴ = 2.0 × 10⁻³ mol।

7. अम्ल में संतुलित कीजिए: MnO₄⁻ + C₂O₄²⁻ → Mn²⁺ + CO₂

चरण 1: Mn +7 → +2, 5 e⁻ लेता है। हर C₂O₄²⁻ → 2CO₂, 2 e⁻ देता है। चरण 2: 5 और 2 का LCM 10 → 2MnO₄⁻ और 5C₂O₄²⁻। चरण 3: आवेश: बाएँ −12, दाएँ +4, तो बाएँ 16H⁺। चरण 4: O के लिए पानी: 2MnO₄⁻ + 5C₂O₄²⁻ + 16H⁺ → 2Mn²⁺ + 10CO₂ + 8H₂O।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. नारंगी डाइक्रोमेट घोल में क्षार डालने पर रंग:
2. K₂Cr₂O₇ बनाने का अयस्क:
3. अम्लीय माध्यम में एक MnO₄⁻ आयन लेता है:
4. KMnO₄ अनुमापन में सूचक की ज़रूरत नहीं, क्योंकि:
5. डाइक्रोमेट आयन की संरचना:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

K₂Cr₂O₇ प्राथमिक मानक क्यों है?

यह बहुत शुद्ध मिलता है, हवा से नमी नहीं सोखता और इसके घोल की सांद्रता नहीं बदलती, इसलिए सीधे तौलकर मानक घोल बनाया जा सकता है।

KMnO₄ को गर्म करने पर क्या होता है?

लगभग 513 K पर: 2KMnO₄ → K₂MnO₄ + MnO₂ + O₂, ऑक्सीजन निकलती है।

अम्लीय माध्यम में KMnO₄ का तुल्यांकी भार कितना है?

अम्ल में हर MnO₄⁻ 5 इलेक्ट्रॉन लेता है, तो तुल्यांकी भार = 158 ÷ 5 = 31.6 g।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

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