लैंथेनॉयड और ऐक्टिनॉयड क्या हैं?
ये f-ब्लॉक बनाते हैं: आखिरी इलेक्ट्रॉन बाहरी कोश से दो अंदर वाले (n−2)f कक्षक में जाता है।
- लैंथेनॉयड: लैंथेनम के बाद के 14 तत्व, सीरियम (Ce, 58) से ल्यूटीशियम (Lu, 71)। La को भी इनके साथ पढ़ते हैं।
- ऐक्टिनॉयड: ऐक्टिनियम के बाद के 14 तत्व, थोरियम (Th, 90) से लॉरेंसियम (Lr, 103)।
सारणी बहुत चौड़ी न हो, इसलिए इन्हें नीचे दो पंक्तियों में रखते हैं। इन्हें आंतरिक संक्रमण तत्व भी कहते हैं।
लैंथेनॉयड और ऐक्टिनॉयड का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
सामान्य रूप: (n−2)f¹⁻¹⁴ (n−1)d⁰⁻¹ ns²।
- लैंथेनॉयड: [Xe] 4f¹⁻¹⁴ 5d⁰⁻¹ 6s²। जैसे Nd = [Xe] 4f⁴ 6s²; Gd = [Xe] 4f⁷ 5d¹ 6s² (आधा भरा 4f⁷ स्थायी); Lu = [Xe] 4f¹⁴ 5d¹ 6s²।
- ऐक्टिनॉयड: [Rn] 5f¹⁻¹⁴ 6d⁰⁻¹ 7s²। जैसे U = [Rn] 5f³ 6d¹ 7s²; Th = [Rn] 6d² 7s²।
पूरी पंक्ति का बाहरी कोश (6s² या 7s²) एक जैसा है, इसलिए ये बहुत मिलते-जुलते हैं और अलग करना कठिन है।
ऐक्टिनॉयड में 5f और 6d की ऊर्जा बहुत पास है, इसलिए इनके विन्यास कम नियमित हैं।
ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
लैंथेनॉयड: सबकी मुख्य अवस्था +3 है (6s² और एक 4f/5d इलेक्ट्रॉन खोकर)।
- जहाँ खाली, आधा या पूरा 4f बनता है, वहाँ +2 या +4 भी: Ce⁴⁺ (4f⁰), Tb⁴⁺ (4f⁷), Eu²⁺ (4f⁷), Yb²⁺ (4f¹⁴)।
- Ce⁴⁺ अच्छा ऑक्सीकारक है (वापस +3 होना चाहता है)। Eu²⁺, Yb²⁺ अपचायक हैं।
ऐक्टिनॉयड: बहुत ज़्यादा अवस्थाएँ, क्योंकि 5f, 6d, 7s की ऊर्जा पास-पास है। U +3 से +6; Np और Pu +7 तक। शुरुआती ऐक्टिनॉयड ऊँची अवस्था पसंद करते हैं (Th +4, Pa +5, U +6)।
लैंथेनॉयड संकुचन: कारण
La से Lu तक परमाणु और M³⁺ आयन की त्रिज्या लगातार घटती है। इसे लैंथेनॉयड संकुचन कहते हैं।
क्यों? हर कदम पर नाभिक में एक प्रोटॉन और 4f में एक इलेक्ट्रॉन जुड़ता है। f-कक्षक फैले और अजीब आकार के हैं, इसलिए परिरक्षण बहुत कमज़ोर करते हैं। बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर हर बार थोड़ा ज़्यादा खिंचाव पड़ता है। 14 छोटे खिंचाव मिलकर बड़ा संकुचन बनाते हैं।
कहानी का चरण 4 M³⁺ गेंदों को 103 pm से 86 pm तक छोटा होते दिखाता है।
लैंथेनॉयड संकुचन के परिणाम
- 4d और 5d का आकार बराबर: Zr (160 pm) ≈ Hf (159 pm), Nb ≈ Ta, Mo ≈ W। इन जोड़ियों के गुण बहुत मिलते हैं, ये प्रकृति में साथ मिलते हैं और अलग करना कठिन है।
- लैंथेनॉयड को अलग करना कठिन: आकार में बहुत कम अंतर।
- क्षारीयता घटती है La(OH)₃ से Lu(OH)₃ तक: छोटा आयन OH⁻ को कसकर पकड़ता है (ज़्यादा सहसंयोजी)।
- 5d धातुएँ ज़्यादा घनी होती हैं और आयनन एन्थैल्पी अपेक्षा से ज़्यादा।
ऐक्टिनॉयड में ऐसा ही पर ज़्यादा संकुचन होता है, ऐक्टिनॉयड संकुचन, क्योंकि 5f और भी कमज़ोर परिरक्षण करता है।
लैंथेनॉयड के सामान्य गुण
- चाँदी जैसी सफ़ेद, मुलायम धातुएँ जो हवा में जल्दी धूमिल होती हैं।
- कैल्शियम जैसी क्रियाशील: जलकर Ln₂O₃, पानी से H₂ और Ln(OH)₃, अम्ल से H₂।
- कई Ln³⁺ आयन रंगीन (f–f कूद से); La³⁺, Lu³⁺ (4f⁰, 4f¹⁴) रंगहीन।
- f⁰ और f¹⁴ को छोड़कर अधिकतर अनुचुंबकीय।
लैंथेनॉयड और ऐक्टिनॉयड की तुलना
| गुण | लैंथेनॉयड | ऐक्टिनॉयड |
|---|---|---|
| भरने वाला कक्षक | 4f | 5f |
| ऑक्सीकरण अवस्थाएँ | मुख्यतः +3 (कुछ +2, +4) | कई: +3 से +7 |
| रेडियोधर्मिता | केवल Pm | सभी |
| संकुल बनाना | कम प्रवृत्ति | अधिक प्रवृत्ति |
| ऑक्सो आयन | नहीं बनाते | बनाते हैं, जैसे UO₂²⁺, PuO₂²⁺ |
| परिरक्षण व संकुचन | 4f कमज़ोर: लैंथेनॉयड संकुचन | 5f और कमज़ोर: बड़ा ऐक्टिनॉयड संकुचन |
| हाइड्रॉक्साइड की क्षारीयता | कम | अधिक |
| प्राप्ति | प्रकृति में मिलते हैं | U के बाद वाले अधिकतर रिएक्टर में बनाए जाते हैं |
समानताएँ: दोनों मुख्यतः +3, दोनों में संकुचन, दोनों क्रियाशील विद्युत-धनी धातुएँ, दोनों रंगीन आयन देते हैं।
d- और f-ब्लॉक तत्वों के उपयोग
- लोहा और स्टील: इमारतें, पुल, औज़ार। स्टेनलेस स्टील में Cr और Ni।
- ताँबा: बिजली के तार; पीतल, काँसा जैसी मिश्रधातुएँ। सिक्कों में Cu–Ni।
- टाइटेनियम: हल्के-मज़बूत विमान पुर्ज़े और शरीर के इम्प्लांट। TiO₂: सफ़ेद पेंट और सनस्क्रीन।
- उत्प्रेरक: V₂O₅ (सल्फ्यूरिक अम्ल), Fe (अमोनिया), Ni (हाइड्रोजनीकरण), TiCl₄ + Al(CH₃)₃ (ज़ीगलर उत्प्रेरक, पॉलीथीन), PdCl₂ (वैकर प्रक्रम)।
- सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr): फ़ोटोग्राफ़ी, क्योंकि यह प्रकाश-संवेदी है।
- ज़िंक, निकेल, कैडमियम: बैटरी और सेल।
- मिश धातु (लगभग 95% लैंथेनॉयड + 5% लोहा, थोड़ा S, C, Ca, Al): लाइटर फ़्लिंट, गोलियाँ, खोल; 3% मिश धातु वाली Mg मिश्रधातु जेट इंजन पुर्ज़ों में।
- लैंथेनॉयड ऑक्साइड: काँच चमकाना; पेट्रोलियम भंजन में उत्प्रेरक; स्क्रीन के फ़ॉस्फ़र।
- ऐक्टिनॉयड: U और Pu परमाणु ईंधन; Th परमाणु ईंधन।
करके देखें: संकुचन खुद देखें
1. आखिरी चरण में लैंथेनॉयड पंक्ति पर रहें। स्लाइड करने से पहले अनुमान लगाइए: Er, Nd से बड़ा या छोटा? फिर त्रिज्या पढ़िए।
2. ऐक्टिनॉयड पंक्ति चुनकर U और Pu के घन गिनिए। Nd और Sm से तुलना कीजिए।
3. कागज़ पर ग्राफ़ बनाइए: x = La से Lu तक तत्व, y = M³⁺ त्रिज्या। आपको लगातार नीचे जाती रेखा मिलेगी।
4. घर पर गैस लाइटर का फ़्लिंट चलाइए। वे चिंगारियाँ मिश धातु के जलते कण हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लैंथेनॉयड: [Xe] 4f¹⁻¹⁴ 5d⁰⁻¹ 6s²
- ऐक्टिनॉयड: [Rn] 5f¹⁻¹⁴ 6d⁰⁻¹ 7s²
- मुख्य ऑक्सीकरण अवस्था: +3 (Ln); +3 से +7 (An)
- त्रिज्या: La³⁺ ≈ 103 pm → Lu³⁺ ≈ 86 pm
- Zr ≈ 160 pm, Hf ≈ 159 pm (लैंथेनॉयड संकुचन का असर)
हल किए गए उदाहरण
1. Gd (Z = 64) और Gd³⁺ का विन्यास लिखिए।
चरण 1: Xe में 54, बचे 10। चरण 2: आधा भरा 4f⁷ स्थायी है, तो Gd = [Xe] 4f⁷ 5d¹ 6s²। चरण 3: +3 के लिए 6s² और 5d¹ हटाएँ → Gd³⁺ = [Xe] 4f⁷।
2. Ce +4 और Eu +2 क्यों दिखाते हैं?
Ce (4f¹ 5d¹ 6s²) 4 इलेक्ट्रॉन खोकर Ce⁴⁺ = 4f⁰ (खाली, स्थायी)। Eu (4f⁷ 6s²) केवल 6s² खोकर Eu²⁺ = 4f⁷ (आधा भरा, स्थायी)। स्थायी f⁰, f⁷, f¹⁴ इन अवस्थाओं को तय करते हैं।
3. Ce³⁺ (Z = 58) में कितने अयुग्मित इलेक्ट्रॉन? केवल-चक्रण आघूर्ण निकालिए।
Ce = [Xe] 4f¹ 5d¹ 6s²। Ce³⁺: 6s² और 5d¹ हटाएँ → 4f¹। n = 1। μ = √3 = 1.73 BM।
4. La(OH)₃, Gd(OH)₃, Lu(OH)₃ को घटती क्षारीयता में लगाइए।
M³⁺ का आकार La > Gd > Lu (संकुचन)। छोटा आयन OH⁻ को कसकर पकड़ता है, बंध ज़्यादा सहसंयोजी, क्षारीयता कम। क्रम: La(OH)₃ > Gd(OH)₃ > Lu(OH)₃।
5. Zr और Hf को अलग करना इतना कठिन क्यों है?
Hf 14 लैंथेनॉयड के बाद आता है। संकुचन नए कोश से होने वाली बढ़त को खत्म कर देता है, तो Hf (159 pm) लगभग Zr (160 pm) जितना। समान आकार और समान बाहरी इलेक्ट्रॉन → लगभग समान रसायन।
6. पानी में Ce⁴⁺ और Ce³⁺ में प्रबल ऑक्सीकारक कौन? समझाइए।
Ce⁴⁺। लैंथेनॉयड की सबसे स्थायी अवस्था +3 है। Ce⁴⁺ एक इलेक्ट्रॉन लेकर Ce³⁺ बनना चाहता है, इसलिए दूसरों का ऑक्सीकरण करता है।
आम गलतियाँ
- संकुचन का कारण नया कोश जुड़ना बताना। कोई नया कोश नहीं जुड़ता; कारण 4f इलेक्ट्रॉनों का कमज़ोर परिरक्षण है।
- सोचना कि लैंथेनॉयड भी ऐक्टिनॉयड जैसी कई अवस्थाएँ दिखाते हैं। मुख्यतः +3; कुछ ही +2 या +4।
- भूलना कि 4d और 5d की त्रिज्या लगभग बराबर है (Zr ≈ Hf)।
- सभी लैंथेनॉयड को रेडियोधर्मी कहना। केवल Pm है; सभी ऐक्टिनॉयड हैं।