शोधन क्यों, और शुद्धता कैसे जाँचें?
यौगिक का अध्ययन करने से पहले उसे शुद्ध करना ज़रूरी है। हर शोधन विधि यौगिक और अशुद्धि के किसी गुण के अंतर पर चलती है। शुद्ध ठोस का गलनांक तीक्ष्ण होता है; शुद्ध द्रव का क्वथनांक तय होता है। अशुद्धि गलनांक घटाती और उसकी सीमा फैलाती है।
ऊर्ध्वपातन और क्रिस्टलन
ऊर्ध्वपातन
कुछ ठोस गरम करने पर बिना पिघले सीधे भाप बनते हैं (कपूर, नैफ्थलीन, आयोडीन, बेंज़ोइक अम्ल)। भाप को ठंडा करके फिर ठोस बनाते हैं; अवाष्पशील अशुद्धि पीछे रह जाती है।
क्रिस्टलन
विलेयता के अंतर पर आधारित। यौगिक को ऐसे विलायक की कम से कम मात्रा में गरम करके घोलते हैं जिसमें वह गरम में बहुत और ठंडे में कम घुलता हो। गरम विलयन छानकर धीरे-धीरे ठंडा करते हैं; शुद्ध क्रिस्टल बनते हैं। रंगीन अशुद्धि सक्रियित चारकोल से हटती है। विलेयता लगभग बराबर हो तो बार-बार क्रिस्टलन (प्रभाजी क्रिस्टलन) करते हैं।
आसवन और उसके प्रकार
- सामान्य आसवन: क्वथनांकों में बड़ा अंतर हो, या अवाष्पशील अशुद्धि से द्रव अलग करना हो। उदाहरण: क्लोरोफ़ॉर्म (334 K) और ऐनिलीन (457 K)।
- प्रभाजी आसवन: क्वथनांक पास-पास हों। प्रभाजी स्तंभ में बार-बार उबलना-संघनन होता है, ऊपर की भाप में अधिक वाष्पशील द्रव ज़्यादा होता है। कच्चे तेल के प्रभाज ऐसे अलग होते हैं।
- कम दाब पर आसवन: जो द्रव अपने क्वथनांक पर या उससे पहले टूट जाते हैं। कम दाब = कम क्वथनांक। साबुन उद्योग में ग्लिसरॉल ऐसे मिलता है।
- भाप आसवन: जो पदार्थ भाप-वाष्पशील हों और पानी में न मिलें (ऐनिलीन, सुगंधित तेल)। मिश्रण तब उबलता है जब p(पानी) + p(पदार्थ) = वायुमंडलीय दाब, इसलिए 373 K से नीचे उबलता है और यौगिक नहीं टूटता।
विभेदी निष्कर्षण
पानी में घुले कार्बनिक यौगिक को ऐसे कार्बनिक विलायक (जैसे ईथर) के साथ हिलाते हैं जो पानी में नहीं मिलता और जिसमें यौगिक ज़्यादा घुलता है। पृथक्कारी कीप में दो परतें अलग होती हैं; कार्बनिक परत निकालकर विलायक उड़ा देते हैं। कम घुलने वाले यौगिकों के लिए सतत निष्कर्षण करते हैं।
वर्णलेखन (क्रोमैटोग्राफी)
वर्णलेखन में दो प्रावस्थाएँ होती हैं: स्थिर प्रावस्था (ठोस, या ठोस पर टिका द्रव) और उस पर चलने वाली गतिशील प्रावस्था (द्रव या गैस)। जो घटक स्थिर प्रावस्था से ज़्यादा चिपकता है, वह धीरे चलता है।
अधिशोषण वर्णलेखन
- स्तंभ वर्णलेखन: ऐलुमिना या सिलिका जेल से भरा काँच का स्तंभ। ऊपर मिश्रण डालकर निक्षालक (विलायक) बहाते हैं। सबसे कम अधिशोषित भाग पहले निकलता है।
- पतली परत वर्णलेखन (TLC): काँच की प्लेट पर सिलिका जेल की पतली परत। धब्बे UV प्रकाश, आयोडीन वाष्प या निनहाइड्रिन (ऐमीनो अम्लों के लिए) से दिखते हैं।
वितरण वर्णलेखन
कागज़ वर्णलेखन: कागज़ के रेशों में रुका पानी स्थिर प्रावस्था; ऊपर चढ़ता विलायक गतिशील प्रावस्था। घटक दोनों द्रवों में बँट जाते हैं।
मंदन गुणांक
Rf = पदार्थ द्वारा तय दूरी ÷ विलायक अग्र द्वारा तय दूरी (दोनों आधार रेखा से)। Rf हमेशा 1 से कम होता है।
गुणात्मक विश्लेषण: तत्वों की पहचान
कार्बन और हाइड्रोजन
यौगिक को कॉपर(II) ऑक्साइड के साथ गरम करो। C → CO₂ (चूने का पानी दूधिया); H → H₂O (सफ़ेद निर्जल कॉपर सल्फ़ेट नीला)।
लैसें परीक्षण (सोडियम संगलन निष्कर्ष)
यौगिक को सोडियम धातु के साथ संगलित करते हैं ताकि सहसंयोजी N, S, X आयनिक लवण बनें: Na + C + N → NaCN; 2Na + S → Na₂S; Na + X → NaX। गरम नली को पानी में तोड़कर, उबालकर, छानकर सोडियम संगलन निष्कर्ष मिलता है।
- नाइट्रोजन: FeSO₄ के साथ उबालो, फिर सांद्र H₂SO₄ से अम्लीय करो → प्रशियन नीला रंग।
- सल्फर: (a) ऐसीटिक अम्ल और लेड ऐसीटेट → काला PbS; (b) सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड → बैंगनी रंग।
- N और S दोनों: NaSCN बनता है → Fe³⁺ के साथ रक्त-लाल रंग।
- हैलोजन: HNO₃ से अम्लीय करके AgNO₃ डालो: सफ़ेद अवक्षेप, NH₃ में घुलनशील = Cl; हल्का पीला, थोड़ा घुलनशील = Br; पीला, अघुलनशील = I। पहले HNO₃ के साथ उबालने से CN⁻ और S²⁻ निकल जाते हैं, जो गलत अवक्षेप देते।
- फ़ॉस्फ़ोरस: Na₂O₂ से फ़ॉस्फ़ेट बनाओ; HNO₃ और अमोनियम मॉलिब्डेट के साथ गरम करो → पीला अवक्षेप।
मात्रात्मक विश्लेषण: हर तत्व कितना
कार्बन और हाइड्रोजन (लीबिग विधि)
तौला हुआ नमूना (m) CuO पर शुष्क O₂ में जलाते हैं। पानी निर्जल CaCl₂ की U-नली में, CO₂ सांद्र KOH की नली में सोखा जाता है।
%C = (12/44) × m(CO₂)/m × 100; %H = (2/18) × m(H₂O)/m × 100
नाइट्रोजन: ड्यूमा विधि
यौगिक को CO₂ में CuO के साथ गरम करते हैं; N, N₂ गैस बनता है जिसे KOH विलयन के ऊपर इकट्ठा करते हैं। आयतन को STP पर बदलते हैं (शुष्क दाब = p − जलीय तनाव)।
%N = (28/22400) × V(N₂, STP, mL)/m × 100
नाइट्रोजन: कैल्डाल विधि
यौगिक को सांद्र H₂SO₄ के साथ गरम करते हैं, N → (NH₄)₂SO₄। NaOH से NH₃ निकलती है जिसे मानक अम्ल की ज्ञात मात्रा में भेजते हैं। बचा अम्ल अनुमापन से निकालते हैं।
NH₃ के मोल = उपयोग हुए H⁺ के मोल; %N = 1.4 × M × अम्लता × V(उपयोग हुआ अम्ल, mL)/m। नाइट्रो, ऐज़ो यौगिकों और वलय वाले N (पिरिडीन) पर यह विधि काम नहीं करती।
हैलोजन: कैरिअस विधि
बंद कैरिअस नली में धूमायमान HNO₃ और AgNO₃ के साथ गरम करते हैं; हैलोजन AgX बनता है जिसे तौलते हैं।
%X = (X का परमाणु द्रव्यमान / AgX का मोलर द्रव्यमान) × m(AgX)/m × 100 (AgCl 143.5, AgBr 188, AgI 235)
सल्फर
S → H₂SO₄, फिर BaSO₄ के रूप में अवक्षेपित। %S = (32/233) × m(BaSO₄)/m × 100
फ़ॉस्फ़ोरस
P → फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल → Mg₂P₂O₇। %P = (62/222) × m(Mg₂P₂O₇)/m × 100
ऑक्सीजन
अंतर से: %O = 100 − (बाकी सब % का योग)।
करके देखो
स्केच-पेन स्याही का कागज़ वर्णलेखन करके Rf निकालो। 3D के खेल चरण में उत्पाद का द्रव्यमान खुद बदलो और रीडआउट से पहले प्रतिशत का अनुमान लगाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Rf = पदार्थ द्वारा तय दूरी / विलायक अग्र द्वारा तय दूरी
- %C = (12/44) × m(CO₂)/m × 100; %H = (2/18) × m(H₂O)/m × 100
- ड्यूमा: %N = (28/22400) × V(N₂, STP mL)/m × 100; V_STP = V × (p/760) × (273/T)
- कैल्डाल: N के मोल = NH₃ के मोल = उपयोग हुए H⁺ के मोल; %N = 1.4 × M × अम्लता × V(mL)/m
- कैरिअस: %Cl = (35.5/143.5) × m(AgCl)/m × 100; %Br में 80/188
- %S = (32/233) × m(BaSO₄)/m × 100; %P = (62/222) × m(Mg₂P₂O₇)/m × 100; %O = 100 − बाकी का योग
हल किए गए उदाहरण
1. कागज़ वर्णलेख में विलायक अग्र 7.5 cm और एक रंग 3.0 cm चला। Rf निकालो।
पंक्ति 1: Rf = रंग की दूरी ÷ विलायक की दूरी। पंक्ति 2: Rf = 3.0 ÷ 7.5। पंक्ति 3: Rf = 0.40।
2. 0.246 g कार्बनिक यौगिक जलाने पर 0.198 g CO₂ और 0.1014 g H₂O मिले। %C और %H निकालो।
पंक्ति 1: %C = (12/44) × (0.198/0.246) × 100। पंक्ति 2: = 0.2727 × 0.8049 × 100 = 21.95%। पंक्ति 3: %H = (2/18) × (0.1014/0.246) × 100 = 4.58%।
3. ड्यूमा विधि: 0.20 g यौगिक से 300 K और 750 mm Hg पर 30 mL शुष्क N₂ मिली। %N निकालो।
पंक्ति 1: STP पर: V = 30 × (750/760) × (273/300) = 26.94 mL। पंक्ति 2: N₂ का द्रव्यमान = 28 × 26.94/22400 = 0.03368 g। पंक्ति 3: %N = 0.03368/0.20 × 100 = 16.84%।
4. कैल्डाल विधि: 0.50 g यौगिक की NH₃ ने 0.5 M H₂SO₄ के 8.0 mL उदासीन किए। %N निकालो।
पंक्ति 1: उपयोग हुए H⁺ के मोल = 2 × 0.5 × 0.008 = 0.008 mol। पंक्ति 2: NH₃ के मोल = N के मोल = 0.008 → N का द्रव्यमान = 0.112 g। पंक्ति 3: %N = 0.112/0.50 × 100 = 22.4%।
5. कैरिअस विधि: 0.15 g यौगिक से 0.287 g AgCl मिला। %Cl निकालो।
पंक्ति 1: Cl का द्रव्यमान = (35.5/143.5) × 0.287 = 0.0710 g। पंक्ति 2: %Cl = 0.0710/0.15 × 100। पंक्ति 3: %Cl = 47.3%।
6. सल्फर आकलन में 0.16 g यौगिक से 0.466 g BaSO₄ मिला। %S निकालो।
पंक्ति 1: S का द्रव्यमान = (32/233) × 0.466 = 0.064 g। पंक्ति 2: %S = 0.064/0.16 × 100। पंक्ति 3: %S = 40%।
7. 0.20 g यौगिक से 0.111 g Mg₂P₂O₇ मिला। %P निकालो।
पंक्ति 1: P का द्रव्यमान = (62/222) × 0.111 = 0.031 g। पंक्ति 2: %P = 0.031/0.20 × 100। पंक्ति 3: %P = 15.5%।
8. किसी यौगिक में C 40.0% और H 6.67% है; बाकी ऑक्सीजन। %O और मूलानुपाती सूत्र निकालो।
पंक्ति 1: %O = 100 − (40.0 + 6.67) = 53.33%। पंक्ति 2: मोल: C 40/12 = 3.33, H 6.67/1 = 6.67, O 53.33/16 = 3.33। पंक्ति 3: 3.33 से भाग: C 1 : H 2 : O 1 → CH₂O।
आम गलतियाँ
- ड्यूमा विधि में गीली गैस का आयतन लेना। पानी के ऊपर इकट्ठा हो तो जलीय तनाव घटाओ, फिर STP पर बदलो।
- कैल्डाल गणना में भूलना कि H₂SO₄ का एक अणु 2 H⁺ देता है।
- नाइट्रो यौगिकों या पिरिडीन पर कैल्डाल लगाना। उनका N अमोनियम सल्फ़ेट नहीं बनता।
- Rf कागज़ के निचले किनारे से नापना, जबकि दूरी आधार रेखा (जहाँ धब्बा लगाया) से नापनी है।