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बोर मॉडल की ओर: प्रकाश, फोटॉन, स्पेक्ट्रम और बोर का परमाणु

प्रकाश एक विद्युत-चुंबकीय तरंग है: c = νλ और तरंग संख्या ν̄ = 1/λ। पर कुछ बातों के लिए कण चाहिए: प्लांक ने कहा ऊर्जा पैकेट (क्वांटम) में आती है, E = hν। आइंस्टीन ने फोटॉन से प्रकाश-विद्युत प्रभाव समझाया: इलेक्ट्रॉन तभी निकलता है जब hν, कार्य फलन W₀ = hν₀ से ज़्यादा हो; उसकी गतिज ऊर्जा hν − hν₀। परमाणु रेखा स्पेक्ट्रम देते हैं, यानी इलेक्ट्रॉन की ऊर्जाएँ तय हैं। बोर ने इलेक्ट्रॉन को तय कक्षाओं में रखा जहाँ कोणीय संवेग nh/2π; ऊर्जा Eₙ = −2.18 × 10⁻¹⁸ Z²/n² J, त्रिज्या rₙ = 52.9 n²/Z pm। कक्षा बदलने पर फोटॉन निकलता है, 1/λ = R_H(1/n₁² − 1/n₂²) से लाइमन, बामर, पाशन, ब्रैकेट, फुंड श्रेणियाँ मिलती हैं। बोर मॉडल सिर्फ़ एक-इलेक्ट्रॉन वाले कणों पर चलता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. प्रकाश एक तरंग है। तरंगदैर्ध्य λ छोटा हो तो हर सेकंड ज़्यादा तरंगें गुज़रती हैं: आवृत्ति ν ज़्यादा। दोनों c = νλ से जुड़े हैं।
  2. प्लांक: प्रकाश की ऊर्जा छोटे पैकेटों में आती है, इन्हें क्वांटम (फोटॉन) कहते हैं। हर फोटॉन की ऊर्जा E = hν। नीले फोटॉन में लाल से ज़्यादा ऊर्जा है।
  3. पोटैशियम पर प्रकाश डालो। लाल प्रकाश: कुछ नहीं, चाहे कितना भी तेज़ हो। बैंगनी प्रकाश: इलेक्ट्रॉन तुरंत उछल आते हैं। सिर्फ़ देहली आवृत्ति से ऊपर वाले फोटॉन इलेक्ट्रॉन छुड़ा सकते हैं।
  4. हाइड्रोजन को गरम करके उसका प्रकाश प्रिज़्म से निकालो। पूरा इंद्रधनुष नहीं, बस कुछ तीखी रेखाएँ मिलती हैं। परमाणु सिर्फ़ तय मात्रा में ऊर्जा छोड़ता है।
  5. बोर: इलेक्ट्रॉन सिर्फ़ तय कक्षाओं n = 1, 2, 3 … में घूमता है। n = 3 से n = 2 पर गिरा तो 1.89 eV का एक लाल फोटॉन निकला।
  6. अब आप खेलें: कोई भी ऊपर और नीचे की कक्षा चुनें और "कूदो" दबाएँ। ΔE, तरंगदैर्ध्य और श्रेणी का नाम पढ़ें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

छोटा तरंगदैर्ध्य मतलब ज़्यादा आवृत्ति क्यों?

सारा प्रकाश एक ही चाल c से चलता है। तरंग छोटी हो तो c = νλ बनाए रखने के लिए हर सेकंड ज़्यादा तरंगें गुज़रनी होंगी।

प्रकाश तरंग है तो पैकेट कैसे?

प्रकाश दोनों तरह बर्ताव करता है। चलते समय तरंग जैसा; पदार्थ को ऊर्जा देते समय पूरे पैकेट hν में।

तेज़ लाल प्रकाश इलेक्ट्रॉन क्यों नहीं निकालता?

तेज़ मतलब ज़्यादा फोटॉन, बड़े फोटॉन नहीं। हर लाल फोटॉन कार्य फलन से कम है, इसलिए किसी एक इलेक्ट्रॉन को पूरी ऊर्जा नहीं मिलती।

हाइड्रोजन इंद्रधनुष की जगह रेखाएँ क्यों देता है?

उसके इलेक्ट्रॉन की ऊर्जाएँ तय हैं। कूदने पर ठीक दो स्तरों का अंतर निकलता है, इसलिए कुछ ही तरंगदैर्ध्य दिखते हैं।

इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा ऋणात्मक क्यों है?

दूर के मुक्त इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा शून्य मानी गई। बँधे इलेक्ट्रॉन को मुक्त होने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है, इसलिए उसकी ऊर्जा शून्य से कम है।

3 → 2 लाल, पर 2 → 1 पराबैंगनी क्यों?

n बढ़ने पर स्तर पास-पास आते हैं। 2 → 1 का अंतर बड़ा (10.2 eV, UV) है, 3 → 2 का छोटा (1.89 eV, लाल)। आखिरी स्टेप में दोनों आज़माइए।

विद्युत-चुंबकीय विकिरण की तरंग प्रकृति

प्रकाश, रेडियो तरंगें, X-किरणें और माइक्रोवेव सब विद्युत-चुंबकीय (EM) तरंगें हैं: विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के और चलने की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। इन्हें माध्यम नहीं चाहिए और निर्वात में सब c = 3.0 × 108 m s−1 से चलती हैं।

बढ़ते तरंगदैर्ध्य का क्रम: गामा, X-किरणें, UV, दृश्य (लगभग 400 nm बैंगनी से 750 nm लाल), IR, माइक्रोवेव, रेडियो। तरंग रूप व्यतिकरण और विवर्तन समझाता है।

कण प्रकृति: प्लांक का क्वांटम सिद्धांत

कुछ बातें तरंग से नहीं समझ आईं: कृष्णिका विकिरण (गरम लोहे की छड़ पहले लाल, फिर पीली, फिर सफ़ेद), प्रकाश-विद्युत प्रभाव और रेखा स्पेक्ट्रम।

प्लांक (1900): ऊर्जा लगातार नहीं, छोटे-छोटे पैकेटों में दी या ली जाती है, जिन्हें क्वांटम कहते हैं। प्रकाश का क्वांटम फोटॉन है। एक क्वांटम की ऊर्जा: E = hν = hc/λ, h = 6.626 × 10−34 J s (प्लांक नियतांक)। ऊर्जा hν, 2hν, 3hν … ही हो सकती है, 1.5hν नहीं।

यानी प्रकाश का द्वैत व्यवहार है: चलते समय तरंग जैसा, पदार्थ से मिलते समय कण जैसा।

प्रकाश-विद्युत प्रभाव

जब सही आवृत्ति का प्रकाश साफ़ धातु (जैसे पोटैशियम, रूबिडियम, सीज़ियम) पर पड़ता है, तो इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकलते हैं। मुख्य बातें:

  1. इलेक्ट्रॉन तुरंत निकलते हैं, कोई देर नहीं।
  2. एक देहली आवृत्ति ν₀ से नीचे कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता, प्रकाश कितना भी तेज़ हो।
  3. इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर है।
  4. इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा आवृत्ति पर निर्भर है, तीव्रता पर नहीं।

आइंस्टीन की व्याख्या: एक फोटॉन एक इलेक्ट्रॉन से टकराता है। फोटॉन की ऊर्जा का एक भाग (कार्य फलन W₀ = hν₀) इलेक्ट्रॉन को छुड़ाने में लगता है, बाकी उसकी गतिज ऊर्जा बनता है:

hν = hν₀ + ½ mev²

तेज़ प्रकाश = ज़्यादा फोटॉन = ज़्यादा इलेक्ट्रॉन, पर हर फोटॉन की ऊर्जा वही रहती है। तरंग सिद्धांत देहली आवृत्ति नहीं समझा सका।

परमाणु स्पेक्ट्रम: उत्सर्जन और अवशोषण

स्पेक्ट्रम यानी प्रकाश को तरंगदैर्ध्य के अनुसार फैलाना। सफ़ेद प्रकाश सतत स्पेक्ट्रम देता है (सारे रंग मिले हुए)। उत्तेजित परमाणु (गरम या विद्युत ऊर्जा देकर) सिर्फ़ कुछ तरंगदैर्ध्य पर प्रकाश देते हैं: उत्सर्जन रेखा स्पेक्ट्रम (काली पृष्ठभूमि पर चमकीली रेखाएँ)। सफ़ेद प्रकाश ठंडे परमाणुओं से गुज़रे तो वही तरंगदैर्ध्य गायब हो जाते हैं: अवशोषण स्पेक्ट्रम (चमकीली पृष्ठभूमि पर काली रेखाएँ)।

हर तत्व का रेखा-पैटर्न अलग है, जैसे अंगुली की छाप। रूबिडियम, सीज़ियम, थैलियम, इंडियम, गैलियम, स्कैंडियम ऐसे ही खोजे गए, और हीलियम पहले सूर्य के स्पेक्ट्रम में दिखा।

हाइड्रोजन का रेखा स्पेक्ट्रम और रिडबर्ग सूत्र

हाइड्रोजन की रेखाएँ श्रेणियों में आती हैं। सब एक ही सूत्र (रिडबर्ग) से मिलती हैं:

ν̄ = 1/λ = RH (1/n₁² − 1/n₂²), RH = 109,677 cm−1 (≈ 1.097 × 107 m−1), n₂ > n₁।

श्रेणीn₁n₂क्षेत्र
लाइमन12, 3, 4 …पराबैंगनी
बामर23, 4, 5 …दृश्य
पाशन34, 5 …अवरक्त
ब्रैकेट45, 6 …अवरक्त
फुंड56, 7 …अवरक्त

स्तर n से मूल अवस्था तक (सभी रास्तों से) गिरने पर रेखाओं की संख्या: n(n − 1)/2।

हाइड्रोजन परमाणु का बोर मॉडल: अभिधारणाएँ

  1. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर तय त्रिज्या और तय ऊर्जा वाले गोल रास्तों में घूमता है, जिन्हें कक्षा, स्थिर अवस्था या ऊर्जा स्तर कहते हैं (n = 1, 2, 3 …, या K, L, M …)।
  2. कक्षा में उसकी ऊर्जा नहीं बदलती, इसलिए वह विकिरण नहीं छोड़ता। इससे स्थायित्व की समस्या हल हुई।
  3. ऊर्जा तभी ली या दी जाती है जब इलेक्ट्रॉन कक्षा बदलता है: ΔE = E₂ − E₁ = hν।
  4. सिर्फ़ वे कक्षाएँ मान्य हैं जिनमें कोणीय संवेग h/2π का पूर्ण गुणज हो: mevr = nh/2π।

n वीं कक्षा की त्रिज्या और ऊर्जा

हाइड्रोजन और हाइड्रोजन जैसे आयनों (He+, Li2+, Be3+; परमाणु क्रमांक Z) के लिए:

ऊर्जा ऋणात्मक क्यों? नाभिक से बहुत दूर (n = ∞) रुके हुए मुक्त इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा शून्य मानी गई। बँधे इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा उससे कम है, इसलिए ऋणात्मक। ज़्यादा ऋणात्मक = ज़्यादा कसकर बँधा। n = 1 मूल अवस्था है; ऊँचे n उत्तेजित अवस्थाएँ। H की आयनन ऊर्जा = +13.6 eV = 2.18 × 10−18 J।

कूदने पर: ΔE = 2.18 × 10−18(1/n₁² − 1/n₂²) J। इसे hc से भाग दो तो ठीक रिडबर्ग सूत्र मिलता है: यही बोर की सफलता थी।

बोर मॉडल की सीमाएँ

करके देखें: पहले अनुमान, फिर जाँच

आखिरी स्टेप में पहले अनुमान लगाइए: किस छलांग से लंबा तरंगदैर्ध्य मिलेगा, 3 → 2 या 4 → 2? (संकेत: ऊर्जा का अंतर छोटा = तरंगदैर्ध्य लंबा।) फिर दोनों पर "कूदो" दबाकर जाँचिए। घर पर: ट्यूबलाइट के नीचे पुरानी CD पकड़कर देखिए। कुछ चमकीली रंगीन पट्टियाँ दिखेंगी; यह पारे का रेखा स्पेक्ट्रम है।

बोर्ड परीक्षा कोना

अक्सर आने वाले प्रश्न: फोटॉन की ν, ν̄ या ऊर्जा निकालना; प्रकाश-विद्युत प्रभाव के आंकिक (KE, देहली); रिडबर्ग सूत्र से हाइड्रोजन रेखा का तरंगदैर्ध्य; H या He+ की n वीं कक्षा की ऊर्जा/त्रिज्या; बोर मॉडल की अभिधारणाएँ और सीमाएँ (3–5 अंक)।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. विविध भारती 1368 kHz पर प्रसारण करता है। तरंगदैर्ध्य निकालिए।

λ = c/ν = 3.0 × 10⁸ ÷ 1.368 × 10⁶ = 219.3 m। यह रेडियो तरंग है।

2. पीले प्रकाश का λ = 580 nm है। ν और ν̄ निकालिए।

ν = c/λ = 3 × 10⁸ ÷ 580 × 10⁻⁹ = 5.17 × 10¹⁴ Hz। ν̄ = 1/λ = 1.72 × 10⁶ m⁻¹।

3. 5 × 10¹⁴ Hz आवृत्ति के एक फोटॉन और एक मोल फोटॉन की ऊर्जा निकालिए।

E = hν = 6.626 × 10⁻³⁴ × 5 × 10¹⁴ = 3.31 × 10⁻¹⁹ J। एक मोल: 3.31 × 10⁻¹⁹ × 6.022 × 10²³ = 1.99 × 10⁵ J = 199 kJ mol⁻¹।

4. 400 nm का प्रकाश 2.13 eV कार्य फलन वाली धातु पर पड़ता है। निकले इलेक्ट्रॉनों की KE?

E = hc/λ = (6.626 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸) ÷ 400 × 10⁻⁹ = 4.97 × 10⁻¹⁹ J = 3.10 eV। KE = 3.10 − 2.13 = 0.97 eV = 1.55 × 10⁻¹⁹ J।

5. धातु की देहली आवृत्ति 7.0 × 10¹⁴ s⁻¹ है। 1.0 × 10¹⁵ s⁻¹ के प्रकाश से निकले इलेक्ट्रॉन की KE?

KE = h(ν − ν₀) = 6.626 × 10⁻³⁴ × 3 × 10¹⁴ = 1.99 × 10⁻¹⁹ J।

6. H में इलेक्ट्रॉन n = 3 से n = 2 पर गिरे तो रेखा का तरंगदैर्ध्य? कौन-सी श्रेणी?

1/λ = 1.097 × 10⁷ (1/4 − 1/9) = 1.097 × 10⁷ × 5/36 = 1.524 × 10⁶ m⁻¹। λ = 656 nm (लाल)। n₁ = 2, इसलिए बामर श्रेणी।

7. He⁺ की दूसरी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा और कक्षा की त्रिज्या निकालिए।

Z = 2, n = 2। E = −2.18 × 10⁻¹⁸ × 4/4 = −2.18 × 10⁻¹⁸ J (H की मूल अवस्था जितनी)। r = 52.9 × 4/2 = 105.8 pm।

8. H की आयनन ऊर्जा kJ mol⁻¹ में और n = 1 से n = 3 तक उत्तेजित करने की ऊर्जा निकालिए।

IE = 2.18 × 10⁻¹⁸ × 6.022 × 10²³ = 1313 kJ mol⁻¹। ΔE(1→3) = 2.18 × 10⁻¹⁸ (1 − 1/9) = 1.94 × 10⁻¹⁸ J।

9. H परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन n = 5 में हैं। n = 1 तक लौटते हुए कितनी रेखाएँ दिख सकती हैं?

रेखाएँ = n(n − 1)/2 = 5 × 4/2 = 10।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सही संबंध कौन-सा है?
2. प्रकाश-विद्युत प्रभाव में इलेक्ट्रॉन की KE निर्भर करती है:
3. हाइड्रोजन की दृश्य रेखाएँ किस श्रेणी की हैं?
4. H की पहली बोर कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा:
5. बोर मॉडल किस पर विफल है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाइड्रोजन परमाणु का बोर मॉडल क्या है?

इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर सिर्फ़ तय कक्षाओं में घूमता है जहाँ कोणीय संवेग nh/2π है। कक्षा में विकिरण नहीं देता; कक्षा बदलने पर ही फोटॉन लेता या देता है (ΔE = hν)।

प्रकाश-विद्युत प्रभाव आसान शब्दों में क्या है?

पर्याप्त ऊँची आवृत्ति का प्रकाश धातु पर पड़े तो इलेक्ट्रॉन तुरंत निकलते हैं। हर फोटॉन एक इलेक्ट्रॉन छुड़ाता है; बची ऊर्जा इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा बनती है।

बोर मॉडल की सीमाएँ क्या हैं?

सिर्फ़ एक-इलेक्ट्रॉन कणों पर चलता है, सूक्ष्म संरचना, ज़ीमान और स्टार्क प्रभाव नहीं समझाता, तरंग प्रकृति और अनिश्चितता सिद्धांत छोड़ता है, और बंधन नहीं समझाता।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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सीबीएसई (भारत)कक्षा 11परमाणु की संरचना
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