विद्युत-चुंबकीय विकिरण की तरंग प्रकृति
प्रकाश, रेडियो तरंगें, X-किरणें और माइक्रोवेव सब विद्युत-चुंबकीय (EM) तरंगें हैं: विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के और चलने की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। इन्हें माध्यम नहीं चाहिए और निर्वात में सब c = 3.0 × 108 m s−1 से चलती हैं।
- तरंगदैर्ध्य λ: दो शिखरों के बीच की दूरी (m, nm)।
- आवृत्ति ν: एक सेकंड में एक बिंदु से गुज़रती तरंगें (Hz = s−1)।
- तरंग संख्या ν̄ = 1/λ: प्रति मीटर तरंगें (m−1 या cm−1)।
- संबंध: c = νλ।
बढ़ते तरंगदैर्ध्य का क्रम: गामा, X-किरणें, UV, दृश्य (लगभग 400 nm बैंगनी से 750 nm लाल), IR, माइक्रोवेव, रेडियो। तरंग रूप व्यतिकरण और विवर्तन समझाता है।
कण प्रकृति: प्लांक का क्वांटम सिद्धांत
कुछ बातें तरंग से नहीं समझ आईं: कृष्णिका विकिरण (गरम लोहे की छड़ पहले लाल, फिर पीली, फिर सफ़ेद), प्रकाश-विद्युत प्रभाव और रेखा स्पेक्ट्रम।
प्लांक (1900): ऊर्जा लगातार नहीं, छोटे-छोटे पैकेटों में दी या ली जाती है, जिन्हें क्वांटम कहते हैं। प्रकाश का क्वांटम फोटॉन है। एक क्वांटम की ऊर्जा: E = hν = hc/λ, h = 6.626 × 10−34 J s (प्लांक नियतांक)। ऊर्जा hν, 2hν, 3hν … ही हो सकती है, 1.5hν नहीं।
यानी प्रकाश का द्वैत व्यवहार है: चलते समय तरंग जैसा, पदार्थ से मिलते समय कण जैसा।
प्रकाश-विद्युत प्रभाव
जब सही आवृत्ति का प्रकाश साफ़ धातु (जैसे पोटैशियम, रूबिडियम, सीज़ियम) पर पड़ता है, तो इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकलते हैं। मुख्य बातें:
- इलेक्ट्रॉन तुरंत निकलते हैं, कोई देर नहीं।
- एक देहली आवृत्ति ν₀ से नीचे कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता, प्रकाश कितना भी तेज़ हो।
- इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर है।
- इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा आवृत्ति पर निर्भर है, तीव्रता पर नहीं।
आइंस्टीन की व्याख्या: एक फोटॉन एक इलेक्ट्रॉन से टकराता है। फोटॉन की ऊर्जा का एक भाग (कार्य फलन W₀ = hν₀) इलेक्ट्रॉन को छुड़ाने में लगता है, बाकी उसकी गतिज ऊर्जा बनता है:
hν = hν₀ + ½ mev²
तेज़ प्रकाश = ज़्यादा फोटॉन = ज़्यादा इलेक्ट्रॉन, पर हर फोटॉन की ऊर्जा वही रहती है। तरंग सिद्धांत देहली आवृत्ति नहीं समझा सका।
परमाणु स्पेक्ट्रम: उत्सर्जन और अवशोषण
स्पेक्ट्रम यानी प्रकाश को तरंगदैर्ध्य के अनुसार फैलाना। सफ़ेद प्रकाश सतत स्पेक्ट्रम देता है (सारे रंग मिले हुए)। उत्तेजित परमाणु (गरम या विद्युत ऊर्जा देकर) सिर्फ़ कुछ तरंगदैर्ध्य पर प्रकाश देते हैं: उत्सर्जन रेखा स्पेक्ट्रम (काली पृष्ठभूमि पर चमकीली रेखाएँ)। सफ़ेद प्रकाश ठंडे परमाणुओं से गुज़रे तो वही तरंगदैर्ध्य गायब हो जाते हैं: अवशोषण स्पेक्ट्रम (चमकीली पृष्ठभूमि पर काली रेखाएँ)।
हर तत्व का रेखा-पैटर्न अलग है, जैसे अंगुली की छाप। रूबिडियम, सीज़ियम, थैलियम, इंडियम, गैलियम, स्कैंडियम ऐसे ही खोजे गए, और हीलियम पहले सूर्य के स्पेक्ट्रम में दिखा।
हाइड्रोजन का रेखा स्पेक्ट्रम और रिडबर्ग सूत्र
हाइड्रोजन की रेखाएँ श्रेणियों में आती हैं। सब एक ही सूत्र (रिडबर्ग) से मिलती हैं:
ν̄ = 1/λ = RH (1/n₁² − 1/n₂²), RH = 109,677 cm−1 (≈ 1.097 × 107 m−1), n₂ > n₁।
| श्रेणी | n₁ | n₂ | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| लाइमन | 1 | 2, 3, 4 … | पराबैंगनी |
| बामर | 2 | 3, 4, 5 … | दृश्य |
| पाशन | 3 | 4, 5 … | अवरक्त |
| ब्रैकेट | 4 | 5, 6 … | अवरक्त |
| फुंड | 5 | 6, 7 … | अवरक्त |
स्तर n से मूल अवस्था तक (सभी रास्तों से) गिरने पर रेखाओं की संख्या: n(n − 1)/2।
हाइड्रोजन परमाणु का बोर मॉडल: अभिधारणाएँ
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर तय त्रिज्या और तय ऊर्जा वाले गोल रास्तों में घूमता है, जिन्हें कक्षा, स्थिर अवस्था या ऊर्जा स्तर कहते हैं (n = 1, 2, 3 …, या K, L, M …)।
- कक्षा में उसकी ऊर्जा नहीं बदलती, इसलिए वह विकिरण नहीं छोड़ता। इससे स्थायित्व की समस्या हल हुई।
- ऊर्जा तभी ली या दी जाती है जब इलेक्ट्रॉन कक्षा बदलता है: ΔE = E₂ − E₁ = hν।
- सिर्फ़ वे कक्षाएँ मान्य हैं जिनमें कोणीय संवेग h/2π का पूर्ण गुणज हो: mevr = nh/2π।
n वीं कक्षा की त्रिज्या और ऊर्जा
हाइड्रोजन और हाइड्रोजन जैसे आयनों (He+, Li2+, Be3+; परमाणु क्रमांक Z) के लिए:
- त्रिज्या: rₙ = 52.9 × n²/Z pm (a₀ = 52.9 pm बोर त्रिज्या)।
- ऊर्जा: Eₙ = −2.18 × 10−18 Z²/n² J = −13.6 Z²/n² eV।
- चाल: vₙ = 2.18 × 106 × Z/n m s−1।
ऊर्जा ऋणात्मक क्यों? नाभिक से बहुत दूर (n = ∞) रुके हुए मुक्त इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा शून्य मानी गई। बँधे इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा उससे कम है, इसलिए ऋणात्मक। ज़्यादा ऋणात्मक = ज़्यादा कसकर बँधा। n = 1 मूल अवस्था है; ऊँचे n उत्तेजित अवस्थाएँ। H की आयनन ऊर्जा = +13.6 eV = 2.18 × 10−18 J।
कूदने पर: ΔE = 2.18 × 10−18(1/n₁² − 1/n₂²) J। इसे hc से भाग दो तो ठीक रिडबर्ग सूत्र मिलता है: यही बोर की सफलता थी।
बोर मॉडल की सीमाएँ
- सिर्फ़ एक-इलेक्ट्रॉन वाले कणों (H, He+, Li2+) पर चलता है; बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं पर विफल।
- सूक्ष्म संरचना (एक रेखा असल में दो पास-पास रेखाएँ), चुंबकीय क्षेत्र में रेखाओं का बँटना (ज़ीमान प्रभाव) और विद्युत क्षेत्र में (स्टार्क प्रभाव) नहीं समझाता।
- इलेक्ट्रॉन को एक पक्का रास्ता देता है जिसमें स्थिति और वेग दोनों एक साथ ठीक-ठीक पता हों, जो अनिश्चितता सिद्धांत नहीं मानता; इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति छोड़ देता है।
- परमाणु मिलकर अणु कैसे बनाते हैं (रासायनिक बंध), यह नहीं समझाता।
करके देखें: पहले अनुमान, फिर जाँच
आखिरी स्टेप में पहले अनुमान लगाइए: किस छलांग से लंबा तरंगदैर्ध्य मिलेगा, 3 → 2 या 4 → 2? (संकेत: ऊर्जा का अंतर छोटा = तरंगदैर्ध्य लंबा।) फिर दोनों पर "कूदो" दबाकर जाँचिए। घर पर: ट्यूबलाइट के नीचे पुरानी CD पकड़कर देखिए। कुछ चमकीली रंगीन पट्टियाँ दिखेंगी; यह पारे का रेखा स्पेक्ट्रम है।
बोर्ड परीक्षा कोना
अक्सर आने वाले प्रश्न: फोटॉन की ν, ν̄ या ऊर्जा निकालना; प्रकाश-विद्युत प्रभाव के आंकिक (KE, देहली); रिडबर्ग सूत्र से हाइड्रोजन रेखा का तरंगदैर्ध्य; H या He+ की n वीं कक्षा की ऊर्जा/त्रिज्या; बोर मॉडल की अभिधारणाएँ और सीमाएँ (3–5 अंक)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- c = νλ; ν̄ = 1/λ
- E = hν = hc/λ (h = 6.626 × 10⁻³⁴ J s)
- hν = hν₀ + ½mv² (प्रकाश-विद्युत)
- 1/λ = R_H (1/n₁² − 1/n₂²), R_H = 1.097 × 10⁷ m⁻¹
- rₙ = 52.9 n²/Z pm
- Eₙ = −2.18 × 10⁻¹⁸ Z²/n² J = −13.6 Z²/n² eV
- mvr = nh/2π
- स्तर n से मूल अवस्था तक रेखाएँ = n(n − 1)/2
हल किए गए उदाहरण
1. विविध भारती 1368 kHz पर प्रसारण करता है। तरंगदैर्ध्य निकालिए।
λ = c/ν = 3.0 × 10⁸ ÷ 1.368 × 10⁶ = 219.3 m। यह रेडियो तरंग है।
2. पीले प्रकाश का λ = 580 nm है। ν और ν̄ निकालिए।
ν = c/λ = 3 × 10⁸ ÷ 580 × 10⁻⁹ = 5.17 × 10¹⁴ Hz। ν̄ = 1/λ = 1.72 × 10⁶ m⁻¹।
3. 5 × 10¹⁴ Hz आवृत्ति के एक फोटॉन और एक मोल फोटॉन की ऊर्जा निकालिए।
E = hν = 6.626 × 10⁻³⁴ × 5 × 10¹⁴ = 3.31 × 10⁻¹⁹ J। एक मोल: 3.31 × 10⁻¹⁹ × 6.022 × 10²³ = 1.99 × 10⁵ J = 199 kJ mol⁻¹।
4. 400 nm का प्रकाश 2.13 eV कार्य फलन वाली धातु पर पड़ता है। निकले इलेक्ट्रॉनों की KE?
E = hc/λ = (6.626 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸) ÷ 400 × 10⁻⁹ = 4.97 × 10⁻¹⁹ J = 3.10 eV। KE = 3.10 − 2.13 = 0.97 eV = 1.55 × 10⁻¹⁹ J।
5. धातु की देहली आवृत्ति 7.0 × 10¹⁴ s⁻¹ है। 1.0 × 10¹⁵ s⁻¹ के प्रकाश से निकले इलेक्ट्रॉन की KE?
KE = h(ν − ν₀) = 6.626 × 10⁻³⁴ × 3 × 10¹⁴ = 1.99 × 10⁻¹⁹ J।
6. H में इलेक्ट्रॉन n = 3 से n = 2 पर गिरे तो रेखा का तरंगदैर्ध्य? कौन-सी श्रेणी?
1/λ = 1.097 × 10⁷ (1/4 − 1/9) = 1.097 × 10⁷ × 5/36 = 1.524 × 10⁶ m⁻¹। λ = 656 nm (लाल)। n₁ = 2, इसलिए बामर श्रेणी।
7. He⁺ की दूसरी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा और कक्षा की त्रिज्या निकालिए।
Z = 2, n = 2। E = −2.18 × 10⁻¹⁸ × 4/4 = −2.18 × 10⁻¹⁸ J (H की मूल अवस्था जितनी)। r = 52.9 × 4/2 = 105.8 pm।
8. H की आयनन ऊर्जा kJ mol⁻¹ में और n = 1 से n = 3 तक उत्तेजित करने की ऊर्जा निकालिए।
IE = 2.18 × 10⁻¹⁸ × 6.022 × 10²³ = 1313 kJ mol⁻¹। ΔE(1→3) = 2.18 × 10⁻¹⁸ (1 − 1/9) = 1.94 × 10⁻¹⁸ J।
9. H परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन n = 5 में हैं। n = 1 तक लौटते हुए कितनी रेखाएँ दिख सकती हैं?
रेखाएँ = n(n − 1)/2 = 5 × 4/2 = 10।
आम गलतियाँ
- nm को m में न बदलना: 400 nm = 400 × 10⁻⁹ m।
- यह सोचना कि तेज़ प्रकाश से इलेक्ट्रॉन ज़्यादा तेज़ निकलेंगे। तीव्रता से संख्या बदलती है; आवृत्ति से KE।
- n₁ और n₂ उल्टे रख देना। उत्सर्जन में n₁ नीचे वाली (अंतिम) कक्षा है, n₂ > n₁।
- He, Li या Na परमाणु पर बोर के सूत्र लगाना। ये सिर्फ़ एक-इलेक्ट्रॉन वाले H, He⁺, Li²⁺ पर चलते हैं।