एस्टर क्या है और एस्टर बंध कैसा दिखता है?
एस्टर एक कार्बनिक यौगिक है जिसके बीच में –COO– समूह होता है। एक ओर अम्ल से आया भाग होता है, दूसरी ओर ऐल्कोहॉल से आया भाग। सामान्य सूत्र R–COO–R′ है। R अम्ल से आता है, R′ ऐल्कोहॉल से।
C(=O)–O–C वाला जोड़ एस्टर बंध कहलाता है। इसमें एक कार्बन होता है जिससे एक ऑक्सीजन द्विबंध से जुड़ी है और दूसरी ऑक्सीजन ऐल्कोहॉल वाले भाग से पुल बनाती है।
छोटे एस्टर रंगहीन द्रव होते हैं। इनकी गंध फल जैसी होती है, इनका क्वथनांक अपने अम्ल से कम होता है (ये आपस में हाइड्रोजन बंध नहीं बनाते) और ये पानी में कम घुलते हैं।
एस्टरीकरण: एस्टर बनाना
कार्बोक्सिलिक अम्ल + ऐल्कोहॉल ⇌ एस्टर + पानी
उदाहरण: CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O (एथेनोइक अम्ल + एथेनॉल → एथिल एथेनोएट + पानी)।
भारी ऑक्सीजन वाले प्रयोग बताते हैं कि पानी की ऑक्सीजन अम्ल से आती है। यानी अम्ल –OH खोता है और ऐल्कोहॉल सिर्फ़ H।
सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की भूमिका
- यह उत्प्रेरक है: अभिक्रिया तेज़ करता है पर खुद खर्च नहीं होता।
- यह निर्जलीकारक है: पानी सोख लेता है।
साम्य खिसकाना
एस्टरीकरण उत्क्रमणीय (दोनों ओर चलने वाली) और धीमी अभिक्रिया है। यह साम्य पर पहुँचती है, जहाँ दोनों दिशाएँ बराबर गति से चलती हैं। ज़्यादा एस्टर पाने के लिए: पानी हटाएँ (H₂SO₄), ज़्यादा ऐल्कोहॉल या अम्ल डालें, या बनते ही एस्टर को आसवित करके निकाल लें। यह ले-शातेलिए का नियम है: जो हटाओ, साम्य उसे फिर बनाने की ओर खिसकता है।
अकार्बनिक अम्ल भी एस्टर बनाते हैं। नाइट्रिक अम्ल + ग्लिसरॉल से ग्लिसरिल ट्राइनाइट्रेट (नाइट्रोग्लिसरीन) बनता है, जो दिल की दवा और विस्फोटक है। फॉस्फोरिक अम्ल के एस्टर DNA और ATP में होते हैं।
करके देखें (सिर्फ़ शिक्षक द्वारा): थोड़ा एथेनॉल और एथेनोइक अम्ल, एक बूँद सांद्र H₂SO₄ के साथ जल-ऊष्मक में गरम करें, फिर ठंडे पानी के बीकर में डालकर हाथ से हवा करके सूँघें। मीठी, गोंद जैसी गंध बताती है कि एस्टर बना।
एस्टर का नामकरण
दो शब्द: ऐल्कोहॉल भाग + अम्ल भाग।
- ऐल्कोहॉल: -एनॉल को -इल करें (एथेनॉल → एथिल; मेथेनॉल → मेथिल)।
- अम्ल: -ओइक अम्ल को -ओएट करें (एथेनोइक अम्ल → एथेनोएट)।
तो मेथेनॉल + ब्यूटेनोइक अम्ल → मेथिल ब्यूटेनोएट (सेब की गंध)। पेंटेनॉल + एथेनोइक अम्ल → पेंटिल एथेनोएट (केला/नाशपाती)। एथेनॉल + ब्यूटेनोइक अम्ल → एथिल ब्यूटेनोएट (अनानास)।
सूत्र में C=O वाली ओर से अम्ल भाग पढ़ें: CH₃COOCH₃ में अम्ल भाग CH₃COO– (एथेनोएट) और ऐल्कोहॉल भाग –CH₃ (मेथिल) है, यानी मेथिल एथेनोएट।
जल-अपघटन, वसा और साबुन
जल-अपघटन
जल-अपघटन यानी पानी से तोड़ना। अम्लीय जल-अपघटन (पानी + तनु अम्ल, गर्मी) से फिर अम्ल + ऐल्कोहॉल मिलते हैं, पर यह उत्क्रमणीय है, इसलिए पूरा नहीं होता। क्षारीय जल-अपघटन (NaOH, गर्मी) से अम्ल का लवण + ऐल्कोहॉल बनते हैं। यह पूरा होता है, क्योंकि लवण वापस अभिक्रिया नहीं करता। उदाहरण: CH₃COOC₂H₅ + NaOH → CH₃COONa + C₂H₅OH।
वसा और तेल
वसा और तेल ट्राइग्लिसराइड हैं: एक ग्लिसरॉल (तीन –OH वाला) तीन वसा अम्लों (लंबी शृंखला वाले अम्ल) से एस्टर बंधों द्वारा जुड़ा। संतृप्त शृंखला (केवल एकल C–C बंध) वाली वसा कसकर जमती है और ठोस होती है (मक्खन, घी)। असंतृप्त शृंखला (C=C से मुड़ी) वाले तेल ढीले रहते हैं और द्रव होते हैं (सूरजमुखी, जैतून का तेल)। तेल में हाइड्रोजन मिलाने (हाइड्रोजनीकरण) से वह सख्त होता है, जैसे वनस्पति घी।
शरीर में वसा ऊर्जा जमा करती है (लगभग 37 kJ प्रति ग्राम, शक्कर से दोगुनी), गर्म रखती है और अंगों की रक्षा करती है। पाचन में लाइपेज़ एंज़ाइम वसा का जल-अपघटन करते हैं।
साबुन (साबुनीकरण)
वसा + NaOH → ग्लिसरॉल + वसा अम्लों के 3 सोडियम लवण। यही लवण साबुन है। साबुन के अणु की लंबी जलविरागी (पानी से दूर भागने वाली) पूँछ तेल में घुलती है, और आयनिक जलरागी (पानी पसंद) सिर पानी में रहता है। पूँछें चिकनाई पकड़ती हैं, सिर पानी की ओर रहते हैं, और चिकनाई छोटी गेंदों (मिसेल) में बँधकर धुल जाती है।
एस्टर के उपयोग
फल जैसे स्वाद और इत्र, विलायक (नेल पॉलिश रिमूवर, गोंद), प्लास्टिक को लचीला बनाने में, पॉलिएस्टर (PET बोतल, कपड़ा), बायोडीज़ल (वनस्पति तेल के मेथिल एस्टर) और एस्पिरिन जैसी दवाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- RCOOH + R′OH ⇌ RCOOR′ + H₂O (सांद्र H₂SO₄, गर्मी)
- एस्टर बंध: –COO– (C=O और C–O–C)
- अम्लीय जल-अपघटन: RCOOR′ + H₂O ⇌ RCOOH + R′OH
- क्षारीय जल-अपघटन: RCOOR′ + NaOH → RCOONa + R′OH
- वसा + 3 NaOH → ग्लिसरॉल + 3 RCOONa (साबुन)
- नाम = ऐल्कोहॉल भाग (-इल) + अम्ल भाग (-ओएट)
हल किए गए उदाहरण
1. मेथेनॉल और एथेनोइक अम्ल से बने एस्टर का नाम और सूत्र लिखें।
मेथेनॉल → मेथिल; एथेनोइक अम्ल → एथेनोएट। एस्टर: मेथिल एथेनोएट, CH₃COOCH₃।
2. प्रोपिल मेथेनोएट, HCOOC₃H₇ किस अम्ल और ऐल्कोहॉल से बनता है?
अम्ल भाग HCOO– मेथेनोएट है, यानी मेथेनोइक अम्ल HCOOH। ऐल्कोहॉल भाग –C₃H₇ प्रोपिल है, यानी प्रोपेनॉल C₃H₇OH।
3. एथिल एथेनोएट को NaOH विलयन के साथ उबालने पर क्या बनता है? यह अभिक्रिया पूरी क्यों होती है?
CH₃COOC₂H₅ + NaOH → CH₃COONa + C₂H₅OH (सोडियम एथेनोएट + एथेनॉल)। लवण एथेनॉल से मिलकर फिर एस्टर नहीं बनाता, इसलिए उल्टी अभिक्रिया नहीं होती।
4. एथिल एथेनोएट CH₃COOC₂H₅ का मोलर द्रव्यमान निकालें। (C = 12, H = 1, O = 16)
C₄H₈O₂: 4×12 + 8×1 + 2×16 = 48 + 8 + 32 = 88 g/mol।
5. एक छात्र 1 mol एथेनोइक अम्ल के साथ 1 की जगह 3 mol एथेनॉल लेता है। साम्य पर एस्टर की मात्रा का क्या होगा?
बढ़ेगी। अतिरिक्त ऐल्कोहॉल साम्य को दाईं ओर धकेलता है, इसलिए ज़्यादा अम्ल एस्टर में बदलता है।
आम गलतियाँ
- नाम उल्टा लिखना: CH₃COOC₂H₅ एथिल एथेनोएट है, एथेनोएट एथिल नहीं।
- यह मानना कि पानी की ऑक्सीजन ऐल्कोहॉल से आती है। वह अम्ल के –OH से आती है।
- भूल जाना कि एस्टरीकरण उत्क्रमणीय है और एक तीर लिख देना।
- यह कहना कि अम्लीय जल-अपघटन में साबुन बनता है। साबुन (लवण) सिर्फ़ क्षारीय जल-अपघटन में बनता है।