लिपिड क्या हैं?
लिपिड जैव-अणुओं का समूह है जो पानी में नहीं घुलते पर ईथर या ऐल्कोहॉल जैसे कार्बनिक विलायकों में घुलते हैं। इनमें ज़्यादातर कार्बन, हाइड्रोजन और थोड़ी ऑक्सीजन होती है।
लिपिड के कार्य:
- ऊर्जा भंडार: 1 g वसा से लगभग 37 kJ, यानी 1 g शर्करा से लगभग दोगुना।
- ऊष्मारोधन और सुरक्षा: त्वचा के नीचे की वसा गर्मी रोकती है और अंगों को गद्दी देती है।
- कोशिका झिल्ली: फ़ॉस्फ़ोलिपिड से बनी।
- हार्मोन और विटामिन: स्टेरॉयड हार्मोन, विटामिन D।
- जलरोधी परत: पत्तियों और पंखों पर मोम।
वसीय अम्ल: संतृप्त और असंतृप्त
वसीय अम्ल एक लंबी हाइड्रोकार्बन शृंखला है जिसके एक सिरे पर कार्बोक्सिल समूह (–COOH) है। संतृप्त का सामान्य सूत्र: CnH2n+1COOH।
- पामिटिक अम्ल: C15H31COOH, 16 कार्बन, संतृप्त।
- स्टियरिक अम्ल: C17H35COOH, 18 कार्बन, संतृप्त।
- ओलीक अम्ल: C17H33COOH, 18 कार्बन, एक C=C द्विबंध, असंतृप्त।
प्रयोगशाला में पहचान: ब्रोमीन जल (नारंगी) के साथ हिलाइए। ओलीक अम्ल उसे रंगहीन कर देता है, क्योंकि ब्रोमीन C=C बंध पर जुड़ जाती है। पामिटिक और स्टियरिक अम्ल रंग नहीं बदलते।
संक्षेप: 18:1 यानी 18 कार्बन और 1 द्विबंध।
वसा और तेल: ग्लिसरॉल के एस्टर
वसा (ट्राइग्लिसराइड) तब बनती है जब ग्लिसरॉल (प्रोपेन-1,2,3-ट्राइऑल) तीन वसीय अम्लों से क्रिया करता है। ग्लिसरॉल का हर –OH और अम्ल का –COOH जुड़ते हैं और एक पानी का अणु निकलता है। नया जोड़ एस्टर बंध है, इसलिए वसा एस्टर हैं।
ग्लिसरॉल + 3 वसीय अम्ल → ट्राइग्लिसराइड + 3 H2O
वर्गीकरण:
- स्रोत से: जंतु वसा (मक्खन, चर्बी) और वनस्पति तेल (सूरजमुखी, नारियल)।
- अवस्था से: ठोस वसा (ज़्यादातर संतृप्त) और द्रव तेल (ज़्यादातर असंतृप्त)। नारियल और पाम तेल काफ़ी संतृप्त हैं।
गुण: पानी से हल्के, पानी में अघुलनशील, चिकने। असंतृप्त तेल ब्रोमीन जल को रंगहीन करते हैं। हाइड्रोजनीकरण: निकेल उत्प्रेरक से C=C पर हाइड्रोजन जोड़कर तेल को ठोस वसा (वनस्पति घी, मार्जरीन) बनाना। जल-अपघटन: वसा को फिर से ग्लिसरॉल और वसीय अम्ल में तोड़ना; क्षार के साथ इससे साबुन बनता है (साबुनीकरण)।
उपयोग: भोजन और ऊर्जा, खाना पकाना, साबुन, मोमबत्ती और सौंदर्य प्रसाधन, बायोडीज़ल।
अन्य लिपिड: फ़ॉस्फ़ोलिपिड, स्टेरॉयड, मोम
साबुनीकरणीय लिपिड में एस्टर बंध से जुड़े वसीय अम्ल होते हैं, इसलिए क्षार उनसे साबुन बना सकता है: वसा/तेल, फ़ॉस्फ़ोलिपिड, मोम।
- फ़ॉस्फ़ोलिपिड: ग्लिसरॉल + 2 वसीय अम्ल + फ़ॉस्फ़ेट समूह। सिर पानी-प्रेमी, पूँछें पानी से दूर, इसलिए दोहरी परत बनती है: कोशिका झिल्ली।
- मोम: एक लंबा वसीय अम्ल + एक लंबा ऐल्कोहॉल। पत्तियों और कान में जलरोधी परत।
असाबुनीकरणीय लिपिड में वसीय अम्ल नहीं होते, साबुन नहीं बनता:
- स्टेरॉयड: चार जुड़े कार्बन छल्ले। कोलेस्ट्रॉल (झिल्ली में), लिंग हार्मोन, विटामिन D, पित्त लवण।
- टर्पीन: आइसोप्रीन इकाइयों से बने, जैसे विटामिन A और गाजर को रंग देने वाले कैरोटिनॉयड।
करके देखिए: ठोस या द्रव?
दो कप में एक चम्मच घी या मक्खन और एक चम्मच खाने का तेल रखकर एक घंटे फ़्रिज में रखिए। पहले कौन सख़्त होता है? पूँछों के आकार से अनुमान लगाइए, फिर 3D के क़दम 4 और आख़िरी क़दम से मिलाइए। (रसोई इस्तेमाल करने से पहले बड़ों से पूछिए।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. एक ट्राइग्लिसराइड बनने पर कितने पानी के अणु निकलते हैं?
तीन: ग्लिसरॉल और हर वसीय अम्ल के बीच के हर एस्टर बंध के लिए एक।
2. ग्लिसरॉल + 3 स्टियरिक अम्ल से बनी वसा 25 °C पर ठोस होगी या द्रव?
ठोस। स्टियरिक अम्ल संतृप्त है, सीधी पूँछें कसकर सटती हैं।
3. ओलीक अम्ल को स्टियरिक अम्ल से कैसे पहचानें?
ब्रोमीन जल डालिए। ओलीक अम्ल (C=C बंध) उसे रंगहीन कर देता है; स्टियरिक नहीं।
4. क्या कोलेस्ट्रॉल साबुनीकरणीय है? क्यों?
नहीं। वह स्टेरॉयड है, उसमें वसीय अम्ल या एस्टर बंध नहीं, इसलिए क्षार से साबुन नहीं बनता।
आम गलतियाँ
- कहना कि असंतृप्त यानी "हाइड्रोजन नहीं"। इसका अर्थ है C=C द्विबंध के कारण कम H परमाणु।
- वसा को बहुलक कहना। ट्राइग्लिसराइड 4 टुकड़ों से बना एक अणु है, दोहराती लंबी शृंखला नहीं।
- मानना कि सारे वनस्पति तेल असंतृप्त हैं। नारियल और पाम तेल में संतृप्त वसा ज़्यादा है।
- एस्टर अभिक्रिया लिखते समय 3 पानी के अणु भूल जाना।