जीन क्या है?
जीन DNA का एक हिस्सा है जिसमें एक काम का उत्पाद बनाने की सूचना होती है। ज़्यादातर जीन प्रोटीन के लिए कोड करते हैं; कुछ सिर्फ़ RNA (जैसे tRNA, rRNA) के लिए।
जीन गुणसूत्रों पर तय जगहों पर होते हैं, जिन्हें लोकस (बहुवचन लोसाई) कहते हैं। एक ही जीन के अलग रूप युग्मविकल्पी (एलील) हैं।
DNA के दो रज्जुक हैं। जीन इस्तेमाल होते समय RNA पॉलिमरेज़ एक रज्जुक, टेम्पलेट रज्जुक, को 3′ से 5′ पढ़ता है और RNA को 5′ से 3′ बनाता है। दूसरे, कोडिंग रज्जुक, का क्रम RNA जैसा ही होता है (DNA का T, RNA में U बनता है)। जीन की शुरुआत से पहले वाला DNA अपस्ट्रीम और बाद वाला डाउनस्ट्रीम कहलाता है।
जीन के भाग: प्रमोटर, कोडिंग भाग, टर्मिनेटर
- प्रमोटर: जीन से ठीक पहले का DNA क्रम जहाँ RNA पॉलिमरेज़ (सहायक प्रोटीनों के साथ) जुड़ता है। यह तय करता है कि अनुलेखन कहाँ से शुरू हो और कौन-सा रज्जुक पढ़ा जाए। कई यूकैरियोटिक प्रमोटरों में TATA बॉक्स होता है; बैक्टीरिया के प्रमोटर में लगभग 10 और 35 क्षार पहले छोटे क्रम होते हैं।
- कोडिंग भाग: संदेश वाला हिस्सा। mRNA में यह आरंभन कोडॉन (AUG) से शुरू होकर समापन कोडॉन (UAA, UAG या UGA) पर खत्म होता है। हर तीन क्षारों का कोडॉन एक अमीनो अम्ल बताता है।
- अनुवादित न होने वाले भाग (UTR): आरंभन कोडॉन से पहले (5′ UTR) और समापन कोडॉन के बाद (3′ UTR) के छोटे हिस्से। ये mRNA में रहते हैं पर प्रोटीन नहीं बनते; राइबोसोम के जुड़ने और mRNA कितनी देर टिके, इसे नियंत्रित करते हैं।
- टर्मिनेटर: जीन के अंत का क्रम जो RNA पॉलिमरेज़ को रोककर छुड़वा देता है।
- नियामक क्रम: ऑपरेटर (बैक्टीरिया), एन्हांसर और साइलेंसर (यूकैरियोट) जैसे स्विच जो तय करते हैं कि जीन कितना चले। एन्हांसर हज़ारों क्षार दूर भी हो सकते हैं।
प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक जीन
| प्रोकैरियोट (बैक्टीरिया) | यूकैरियोट (जंतु, पौधे, कवक) | |
|---|---|---|
| इंट्रॉन | लगभग कभी नहीं; जीन लगातार | आम; जीन एक्सॉन और इंट्रॉन में विभक्त |
| समूह | जुड़े जीन अक्सर एक ऑपेरॉन में, एक प्रमोटर और ऑपरेटर के साथ | हर जीन का आमतौर पर अपना प्रमोटर |
| mRNA | बहुसिस्ट्रॉनी: एक mRNA, कई प्रोटीन | एकसिस्ट्रॉनी: एक mRNA, आमतौर पर एक प्रोटीन |
| संसाधन | नहीं; अनुलेखन चलते-चलते अनुवाद शुरू हो सकता है | केंद्रक में प्री-mRNA पर कैप, स्प्लाइसिंग और पॉली-A पूँछ |
| कहाँ | कोशिकाद्रव्य (केंद्रक नहीं) | अनुलेखन केंद्रक में, अनुवाद कोशिकाद्रव्य में |
एक्सॉन वे भाग हैं जो परिपक्व mRNA में बचते हैं (ज़्यादातर कोडिंग)। इंट्रॉन प्री-mRNA में कॉपी होते हैं पर अनुवाद से पहले हटा दिए जाते हैं। कई मानव जीनों में इंट्रॉन एक्सॉन से कहीं लंबे होते हैं।
स्प्लाइसिंग और वैकल्पिक स्प्लाइसिंग
यूकैरियोट में पूरा जीन, एक्सॉन और इंट्रॉन दोनों, पहले प्री-mRNA (प्राथमिक अनुलेख) में बदलता है। फिर उस पर काम होता है:
- आगे की ओर 5′ कैप (एक बदला हुआ G) लगता है। यह RNA की रक्षा करता है और राइबोसोम को जुड़ने में मदद करता है।
- स्प्लाइसिंग: स्प्लाइसोसोम नाम की मशीन इंट्रॉन काटकर निकालती है और एक्सॉन को सिरे से सिरा जोड़ती है।
- 3′ सिरे पर पॉली-A पूँछ (लगभग 200 A क्षारों की कड़ी) लगती है। यह mRNA को बचाती है और केंद्रक से बाहर जाने में मदद करती है।
वैकल्पिक स्प्लाइसिंग: एक ही प्री-mRNA को अलग-अलग तरह से जोड़ा जा सकता है, अलग एक्सॉन रखकर। इससे एक जीन कई मिलते-जुलते प्रोटीन बना सकता है। इसीलिए मनुष्य लगभग 20,000 प्रोटीन-कोडिंग जीनों से कहीं ज़्यादा तरह के प्रोटीन बनाता है।
बैक्टीरिया स्प्लाइसिंग नहीं कर सकते। इसलिए उनमें डाला गया मानव जीन परिपक्व mRNA से बनी कॉपी (cDNA) होना चाहिए, जिसमें इंट्रॉन न हों।
जीन और जीनोम
जीनोम किसी जीव का पूरा आनुवंशिक पदार्थ (या उसका एक सेट) है। मानव जीनोम में 23 गुणसूत्रों के एक सेट में लगभग 3.1 अरब क्षार युग्म हैं, पर प्रोटीन-कोडिंग जीन सिर्फ़ लगभग 20,000।
- मानव DNA का सिर्फ़ लगभग 1–2% प्रोटीन के लिए कोड करता है। बाकी में इंट्रॉन, नियामक स्विच, RNA वाले जीन, दोहराए क्रम और ऐसा DNA है जिसका काम अभी खोजा जा रहा है।
- बैक्टीरिया के जीनोम छोटे और ठसाठस भरे होते हैं: ज़्यादातर DNA कोडिंग होता है (अक्सर 85–90%), जीनों के बीच बहुत कम जगह।
- जीनोम का आकार जीव की जटिलता से मेल नहीं खाता: कुछ पौधों और अमीबा में मनुष्य से कहीं ज़्यादा DNA है।
- माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट के पास भी अपने छोटे गोल जीनोम हैं।
पूरे जीनोम पढ़ने वाली परियोजनाएँ (जैसे 2003 में पूरा हुआ मानव जीनोम परियोजना) रोग वाले जीन खोजने और प्रजातियों की तुलना में मदद करती हैं।
करके देखो: 'जीन वाक्य' संपादित करो
कागज़ पर लिखो: शुरू-राम-क्षत्रज्ञ-ने-ठठठठ-आम-खाया-रुको। असली शब्द एक्सॉन हैं; बेमतलब अक्षर (क्षत्रज्ञ, ठठठठ) इंट्रॉन। इंट्रॉन काटो और बाकी जोड़ो: 'राम ने आम खाया'। अब 'वैकल्पिक स्प्लाइसिंग' करो: कुछ अलग शब्द रखकर नया वाक्य बनाओ। 3D के चरण 6 में इंट्रॉन जोड़ो-घटाओ और देखो mRNA की लंबाई जीन से कितनी कम है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जीन = प्रमोटर + (5′ UTR + कोडिंग भाग + 3′ UTR) + टर्मिनेटर
- यूकैरियोटिक जीन: एक्सॉन – इंट्रॉन – एक्सॉन – इंट्रॉन – एक्सॉन …
- प्री-mRNA → कैप + स्प्लाइसिंग (इंट्रॉन बाहर, एक्सॉन जुड़े) + पॉली-A पूँछ → परिपक्व mRNA
- प्रोकैरियोट ऑपेरॉन: एक प्रमोटर + ऑपरेटर + कई जीन → एक बहुसिस्ट्रॉनी mRNA
- टेम्पलेट रज्जुक 3′→5′ पढ़ा जाता है; RNA 5′→3′ बनती है; कोडिंग रज्जुक = RNA क्रम (T → U)
- जीनोम = जीव का पूरा DNA; जीन = उसके अंदर एक कार्यात्मक इकाई
हल किए गए उदाहरण
1. एक यूकैरियोटिक जीन में 4 एक्सॉन (150, 200, 100, 250 क्षार) और 3 इंट्रॉन (1000, 800, 1200 क्षार) हैं। प्री-mRNA और परिपक्व mRNA का कोडिंग हिस्सा कितना लंबा है?
प्री-mRNA (एक्सॉन + इंट्रॉन) = 150 + 200 + 100 + 250 + 1000 + 800 + 1200 = 3700 क्षार। परिपक्व mRNA (सिर्फ़ एक्सॉन) = 700 क्षार। अनुलेख का ज़्यादातर हिस्सा इंट्रॉन था।
2. कोडिंग रज्जुक 5′-ATG GCT TAA-3′ है। mRNA और टेम्पलेट रज्जुक लिखो।
mRNA का क्रम कोडिंग रज्जुक जैसा, T की जगह U: 5′-AUG GCU UAA-3′। टेम्पलेट रज्जुक पूरक और विपरीत दिशा वाला: 3′-TAC CGA ATT-5′।
3. मानव इंसुलिन जीन सीधे बैक्टीरिया में डाला गया, पर सही इंसुलिन नहीं बना। क्यों?
मानव जीन में इंट्रॉन हैं। बैक्टीरिया में स्प्लाइसोसोम नहीं है, इसलिए वे इंट्रॉन नहीं हटा पाते और गलत प्रोटीन बनता है। वैज्ञानिक इसकी जगह परिपक्व mRNA से बनी cDNA इस्तेमाल करते हैं।
4. एक बैक्टीरिया में एक शर्करा इस्तेमाल करने वाले तीन एंज़ाइम एक ही mRNA से साथ बनते हैं। कैसे?
तीनों जीन एक ऑपेरॉन में पास-पास हैं, एक प्रमोटर के साथ। RNA पॉलिमरेज़ उन्हें एक बहुसिस्ट्रॉनी mRNA में कॉपी करता है, और राइबोसोम हर जीन के अपने आरंभन कोडॉन से अनुवाद शुरू करके तीन प्रोटीन बनाते हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि इंट्रॉन का अनुवाद होता है। इंट्रॉन प्री-mRNA में कॉपी होते हैं पर अनुवाद से पहले कट जाते हैं।
- कहना कि एक्सॉन 'पूरे कोडिंग' होते हैं। एक्सॉन में UTR भी आते हैं, जो mRNA में रहते हैं पर अनुवादित नहीं होते।
- जीन और जीनोम को एक समझना। जीन एक इकाई है; जीनोम पूरा DNA।
- मानना कि बैक्टीरिया में भी इंट्रॉन और स्प्लाइसिंग होती है। प्रोकैरियोटिक जीन लगातार होते हैं, स्प्लाइस नहीं होते।