जीन, प्रोटीन और केंद्रीय सिद्धांत
प्रोटीन छोटी इकाइयों, अमीनो अम्लों, की लंबी श्रृंखला है। अमीनो अम्ल 20 प्रकार के होते हैं। उनका क्रम प्रोटीन का आकार तय करता है, और आकार उसका काम।
जीन DNA का वह हिस्सा है जिसमें एक प्रोटीन का क्रम लिखा है। जीन से प्रोटीन बनाना जीन अभिव्यक्ति (gene expression) कहलाता है।
सूचना एक दिशा में बहती है: DNA → RNA → प्रोटीन. इसे केंद्रीय सिद्धांत (central dogma) कहते हैं। इसके दो चरण हैं: अनुलेखन और स्थानांतरण।
अनुलेखन: DNA की नकल mRNA में
अनुलेखन केंद्रक में होता है (जीवाणुओं में केंद्रक नहीं, तो कोशिकाद्रव्य में)।
- एंजाइम RNA पॉलिमरेज़ जीन की शुरुआत (प्रमोटर) पर जुड़ता है।
- यह DNA के दोनों रज्जुक ज़िप की तरह खोलता है।
- यह एक रज्जुक (साँचा रज्जुक, template strand) पढ़कर मेल खाता RNA बनाता है: A के सामने U, T के सामने A, G के सामने C, C के सामने G.
- जीन के अंत पर यह अलग हो जाता है। नया mRNA मुक्त होता है।
mRNA का क्रम दूसरे रज्जुक (कूट रज्जुक, coding strand) जैसा होता है, बस T की जगह U. केंद्रक वाली कोशिकाओं में mRNA की काट-छाँट होती है और वह केंद्रक छिद्र से बाहर जाता है।
आनुवंशिक कूट: कोडॉन
mRNA को तीन क्षारों के समूहों में पढ़ा जाता है, जिन्हें कोडॉन कहते हैं। 4 क्षार, 3 के समूह: 4 × 4 × 4 = 64 कोडॉन.
- AUG आरंभ (START) कोडॉन है; यह मेथियोनीन (Met) भी देता है।
- UAA, UAG, UGA समापन (STOP) कोडॉन हैं; कोई अमीनो अम्ल नहीं।
- बाकी 61 कोडॉन 20 अमीनो अम्लों के लिए हैं, इसलिए ज़्यादातर अमीनो अम्लों के एक से अधिक कोडॉन हैं (अपह्रासित कूट)।
- कूट सार्वत्रिक (universal) है: लगभग हर जीव एक ही तालिका इस्तेमाल करता है।
- कूट अनतिव्यापी है: हर क्षार केवल एक कोडॉन का हिस्सा है।
स्थानांतरण: राइबोसोम पर प्रोटीन बनना
स्थानांतरण कोशिकाद्रव्य में राइबोसोम पर होता है। तीन RNA मिलकर काम करते हैं:
- mRNA संदेश (कोडॉन) लाता है।
- tRNA एक अमीनो अम्ल लाता है। इसमें 3 क्षारों का प्रतिकोडॉन (anticodon) होता है जो कोडॉन से जुड़ता है। AUG का प्रतिकोडॉन UAC है।
- rRNA राइबोसोम बनाता है और अमीनो अम्लों को पेप्टाइड बंध से जोड़ता है।
- आरंभ: राइबोसोम AUG ढूँढता है; पहला tRNA Met लाता है।
- वृद्धि: राइबोसोम एक-एक कोडॉन आगे बढ़ता है; हर tRNA अपना अमीनो अम्ल जोड़ता है।
- समापन: STOP कोडॉन पर श्रृंखला छूट जाती है।
यह श्रृंखला (पॉलिपेप्टाइड) मुड़कर 3D आकार लेती है। एक mRNA को कई राइबोसोम साथ पढ़ सकते हैं।
उत्परिवर्तन और जीन का चालू-बंद होना
उत्परिवर्तन (mutation) DNA के क्षारों में बदलाव है।
- मौन: नया कोडॉन वही अमीनो अम्ल देता है; प्रोटीन नहीं बदलता।
- मिसेंस: एक अमीनो अम्ल बदलता है। सिकल-सेल एनीमिया ऐसे ही एक बदलाव से होता है।
- नॉनसेंस: कोडॉन STOP बन जाता है; प्रोटीन छोटा रह जाता है।
- फ़्रेमशिफ़्ट: एक क्षार जुड़ने या हटने से आगे के सारे कोडॉन खिसक जाते हैं।
शरीर की हर कोशिका में एक जैसा DNA है, पर हर कोशिका कुछ ही जीन इस्तेमाल करती है। यकृत और त्वचा की कोशिका इसलिए अलग हैं क्योंकि उनमें अलग जीन चालू हैं। हॉर्मोन जैसे संकेत जीन चालू-बंद करते हैं।
करके देखो: एक जीन पढ़ो
कागज़ पर कूट रज्जुक ATG-GGC-TTT-AAA-TGG-TAA लिखो। हर T को U करो: यही mRNA है। कोडॉन तालिका से पढ़ो: AUG = Met, GGC = Gly, UUU = Phe, AAA = Lys, UGG = Trp, UAA = STOP. अब 6वाँ क्षार C को A करो (GGA): फिर भी Gly — मौन उत्परिवर्तन! 3D के अंतिम चरण में जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- DNA → (अनुलेखन) → mRNA → (स्थानांतरण) → प्रोटीन
- अनुलेखन में जोड़ी: A→U, T→A, G→C, C→G
- 1 कोडॉन = 3 क्षार = 1 अमीनो अम्ल
- 4³ = 64 कोडॉन: 61 अमीनो अम्ल + 3 STOP
- आरंभ कोडॉन = AUG (Met); समापन = UAA, UAG, UGA
- अमीनो अम्ल संख्या = (STOP से पहले के mRNA क्षार) ÷ 3
हल किए गए उदाहरण
1. साँचा DNA रज्जुक TAC GGA CTT है। mRNA लिखो।
जोड़ी बनाओ: T→A, A→U, C→G, G→C. mRNA = AUG CCU GAA.
2. mRNA: AUG UUU GGC UAA. प्रोटीन में कितने अमीनो अम्ल?
कोडॉन: AUG, UUU, GGC, UAA. UAA STOP है। अतः 3 अमीनो अम्ल: Met–Phe–Gly.
3. कोडॉन GCA है। tRNA का प्रतिकोडॉन क्या होगा?
G–C, C–G, A–U. प्रतिकोडॉन = CGU.
4. आरंभ से STOP तक (STOP सहित) जीन में 900 क्षार हैं। कितने अमीनो अम्ल?
900 ÷ 3 = 300 कोडॉन; एक STOP. अतः 299 अमीनो अम्ल।
5. कूट रज्जुक में AAA बदलकर AAG हो गया। प्रोटीन पर क्या असर?
AAA और AAG दोनों लाइसीन देते हैं। प्रोटीन वही रहता है: मौन उत्परिवर्तन।
6. जीन की शुरुआत के पास एक क्षार हट जाए तो यह एक क्षार बदलने से ज़्यादा नुकसानदायक क्यों है?
हटाने के बाद के सारे कोडॉन ग़लत समूहों में पढ़े जाते हैं (फ़्रेमशिफ़्ट)। कई अमीनो अम्ल बदलते हैं और अक्सर जल्दी STOP आ जाता है।
आम गलतियाँ
- mRNA में T लिखना। RNA में U होता है, T कभी नहीं।
- जगहें उलटना: अनुलेखन केंद्रक में, स्थानांतरण राइबोसोम पर।
- STOP कोडॉन को अमीनो अम्ल गिन लेना।
- कोडॉन (mRNA पर) और प्रतिकोडॉन (tRNA पर) में भ्रम।