Germany Jahrgangsstufe 9 Biology
अध्याय: 6
1. Gaining, communicating and evaluating knowledge
Scientific inquiry in biology
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
2. Microorganisms in biotechnology
Microorganisms in biotechnology
- सूक्ष्मजीव: हमारे चारों ओर के नन्हे जीव – सूक्ष्मजीव (माइक्रोब) वे जीव हैं जो इतने छोटे हैं कि बिना सूक्ष्मदर्शी के नहीं दिखते। मुख्य समूह हैं जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ और शैवाल; वायरस भी इनके साथ पढ़े जाते हैं पर वे कोशिका नहीं हैं। जीवाणु में केंद्रक नहीं होता (प्रोकैरियोट), बाकी में होता है (यूकैरियोट)। जीवाणु दो में बँटकर बढ़ते हैं, इसलिए उनकी संख्या बार-बार दोगुनी होती है। ज़्यादातर सूक्ष्मजीव हानिरहित या उपयोगी हैं: आँत के जीवाणु पाचन में मदद करते हैं, सूक्ष्मजीव दही और ब्रेड बनाते हैं, मरी चीज़ें सड़ाते हैं और नाइट्रोजन स्थिर करते हैं। कुछ रोगाणु रोग फैलाते हैं। एंटीबायोटिक जीवाणुओं को मारते हैं, वायरस को नहीं, और इनका गलत इस्तेमाल प्रतिरोधी जीवाणु पैदा करता है।
3. Genetics and genetic engineering
From gene to trait · Chromosomes, DNA replication and mitosis · Meiosis, recombination and gene technology
- प्रोटीन संश्लेषण: जीन से प्रोटीन तक – जीन DNA का एक हिस्सा है जिसमें एक प्रोटीन बनाने की विधि लिखी होती है। अनुलेखन (transcription) में केंद्रक के अंदर जीन की नकल mRNA में बनती है; T की जगह U आता है। mRNA कोशिकाद्रव्य में राइबोसोम तक जाता है। स्थानांतरण (translation) में राइबोसोम mRNA को 3-3 क्षार (कोडॉन) करके पढ़ता है। हर कोडॉन एक अमीनो अम्ल से मेल खाता है जिसे tRNA लाता है। अमीनो अम्ल जुड़कर श्रृंखला बनाते हैं, जो मुड़कर प्रोटीन बनती है। DNA में बदलाव (उत्परिवर्तन) से प्रोटीन बदल सकता है।
- कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन – कोशिका एक तय क्रम में बढ़ती है, DNA दोहराती है और बँटती है – इसे कोशिका चक्र कहते हैं: अंतरावस्था (G1, S, G2) और M प्रावस्था। S प्रावस्था में DNA दोगुना (2C → 4C) होता है, पर गुणसूत्र संख्या वही रहती है। समसूत्री विभाजन (पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था) और कोशिकाद्रव्य विभाजन से जनक जैसी दो कोशिकाएँ बनती हैं – यह समीकरणीय विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन में दो विभाजन होते हैं; अर्धसूत्री I में समजात गुणसूत्र जोड़ा बनाते हैं, जीन विनिमय करते हैं और अलग होते हैं, जिससे गुणसूत्र संख्या आधी (2n → n) होती है। इससे युग्मकों के लिए चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं और विविधता आती है।
4. Evolution
Evolution and origin of species
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
5. Invertebrate biodiversity and adaptation
Movement in invertebrates · Invertebrate breathing, circulation and feeding · Invertebrate reproduction and metamorphosis · Invertebrate senses and communication
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।
- जंतुओं में जनन – जंतु दो तरह से बच्चे पैदा करते हैं। अलैंगिक जनन में एक ही जनक अपनी प्रति बनाता है (हाइड्रा में मुकुलन, टूटकर बढ़ना, या बिना निषेचन वाले अंडे)। लैंगिक जनन में नर युग्मक (शुक्राणु) मादा युग्मक (अंडाणु) से मिलकर युग्मनज बनाता है; इससे जीन मिलते हैं और विविधता आती है। निषेचन शरीर के बाहर पानी में (मेंढक, मछली) या शरीर के अंदर (कीट, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी) होता है। ज़मीन के जंतु खोल वाले अंडे देते हैं या बच्चे को अंदर रखते हैं। कई जंतुओं में कायांतरण होता है: पूर्ण (अंडा, लार्वा, प्यूपा, वयस्क) या अपूर्ण (अंडा, निम्फ, वयस्क)।
- जंतु व्यवहार: जानवर जो करते हैं, वह क्यों करते हैं – व्यवहार वह सब है जो जानवर किसी उद्दीपन के जवाब में करता है: बाहर का उद्दीपन (शिकारी, रोशनी, आवाज़) या अंदर का (भूख, हॉर्मोन)। कुछ व्यवहार जन्मजात होता है (सहज प्रवृत्ति); कुछ सीखा जाता है (अभ्यस्तता, अनुबंधन, छापन, अंतर्दृष्टि)। व्यवहार का एक काम होता है: ज़िंदा रहने और प्रजनन में मदद, अक्सर समूह में रहकर। कई जानवर संवेदनशील (सचेतन) होते हैं: वे दर्द, डर और ख़ुशी महसूस करते हैं।
6. Soil ecosystem
Soil as an ecosystem
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।