सामान्य कोशिका विभाजन और उसका नियंत्रण
शरीर में लगभग 30 लाख करोड़ (30 ट्रिलियन) कोशिकाएँ हैं। नई कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन (mitosis) से बनती हैं: एक कोशिका अपना DNA दोहराकर दो एक जैसी कोशिकाओं में बँटती है। यह सिर्फ़ ज़रूरत पर होता है: बढ़ने, घाव भरने या पुरानी कोशिकाएँ बदलने (जैसे त्वचा और रक्त कोशिकाएँ) के लिए।
कोशिका चक्र में ट्रैफ़िक लाइट जैसे जाँच बिंदु (checkpoints) होते हैं। कोशिका देखती है: क्या DNA ठीक है? जगह है? शरीर ने 'बढ़ो' का संकेत दिया? सामान्य कोशिकाएँ पड़ोसियों को छूते ही रुक जाती हैं (संपर्क संदमन) और गिनती की बार ही बँट सकती हैं।
नियंत्रण करने वाले जीन:
- आद्य-ऑन्कोजीन (proto-oncogenes): एक्सीलरेटर, ज़रूरत पर बँटने को कहते हैं।
- अर्बुद-दमनकारी जीन (tumour-suppressor), जैसे p53: ब्रेक, गड़बड़ी हो तो विभाजन रोकते हैं।
- DNA-मरम्मत जीन: मिस्त्री, नकल की गलतियाँ ठीक करते हैं।
- नुकसान ठीक न हो तो कोशिका खुद को सलीके से खत्म करती है: एपोप्टोसिस (नियोजित कोशिका मृत्यु)।
कैंसर कैसे शुरू होता है: उत्परिवर्तन और अनियंत्रित विभाजन
उत्परिवर्तन (mutation) DNA कोड में बदलाव है। ज़्यादातर ठीक हो जाते हैं या हानिरहित होते हैं। कैंसर तब शुरू होता है जब एक ही कोशिका में कई उत्परिवर्तन नियंत्रण जीनों पर चोट करते हैं:
- आद्य-ऑन्कोजीन ऑन्कोजीन बन जाता है: एक्सीलरेटर हमेशा ON;
- अर्बुद-दमनकारी जीन काम बंद कर देता है: ब्रेक टूटा;
- मरम्मत और एपोप्टोसिस फ़ेल, तो खराब कोशिका बच जाती है।
अब कोशिका बिना रोक-टोक बँटती है। हर बार संख्या दोगुनी: 1 → 2 → 4 → 8 … 10 बार दोगुना होने पर 1024 कोशिकाएँ; 30 बार पर लगभग 1 अरब, यानी करीब 1 cm की गाँठ। यही अर्बुद / ट्यूमर है। क्योंकि कई उत्परिवर्तन चाहिए, ज़्यादातर कैंसर बड़ी उम्र में होते हैं।
कैंसर कोशिकाएँ अलग होती हैं: संपर्क संदमन नहीं मानतीं, अनगिनत बार बँटती हैं, आकार अजीब और केंद्रक बड़ा होता है, और ट्यूमर को भोजन देने के लिए नई रक्त वाहिकाएँ बनवाती हैं (एंजियोजेनेसिस)।
सुदम्य और घातक अर्बुद, और मेटास्टेसिस
| सुदम्य (benign) | घातक (malignant) = कैंसर | |
|---|---|---|
| बढ़त | धीमी | अक्सर तेज़ |
| किनारा | झिल्ली (कैप्सूल) में, साफ़ सीमा | झिल्ली नहीं, आसपास घुसता है |
| फैलाव | नहीं फैलता | फैल सकता है (मेटास्टेसिस) |
| खतरा | आमतौर पर जानलेवा नहीं, जब तक मस्तिष्क जैसे अंग पर दबाव न डाले | इलाज न हो तो जानलेवा |
| उदाहरण | मस्सा, लाइपोमा (चर्बी की गाँठ) | फेफड़े, स्तन, त्वचा का मेलानोमा, ल्यूकेमिया |
मेटास्टेसिस: घातक कोशिकाएँ टूटकर रक्त या लसीका वाहिकाओं में घुसती हैं, सफ़र करती हैं और फेफड़े, यकृत, हड्डी या मस्तिष्क जैसे अंगों में नए (द्वितीयक) ट्यूमर बनाती हैं। यही कैंसर को सबसे खतरनाक बनाता है।
कैंसर का नाम शुरुआत की जगह से: कार्सिनोमा (त्वचा, अंदरूनी परतें), सार्कोमा (हड्डी, पेशी), ल्यूकेमिया (रक्त बनाने वाली कोशिकाएँ), लिंफ़ोमा (लसीका तंत्र)।
जोखिम कारक: आनुवंशिक और पर्यावरणीय
जो चीज़ कैंसर करे वह कैंसरजन (carcinogen) है। जोखिम कारक कैंसर की संभावना बढ़ाता है; पक्का नहीं करता।
- तंबाकू का धुआँ (और चबाने वाला तंबाकू): 60 से ज़्यादा कैंसरजन; फेफड़े, मुँह, गला, मूत्राशय आदि के कैंसर। दुनिया में सबसे बड़ा रोका जा सकने वाला कारण।
- UV विकिरण (धूप, टैनिंग बेड): त्वचा कोशिकाओं के DNA को नुकसान; मेलानोमा समेत त्वचा कैंसर।
- X-किरणें, गामा किरणें, रेडॉन गैस (आयनकारी विकिरण): DNA तोड़ती हैं। चिकित्सा X-रे में बहुत कम, नियंत्रित मात्रा होती है।
- वायरस: HPV (गर्भाशय-ग्रीवा, गला), हेपेटाइटिस B और C (यकृत)। बैक्टीरिया: H. pylori (आमाशय)।
- रसायन और प्रदूषण: एस्बेस्टस, बेंज़ीन, प्रदूषित हवा के बारीक कण, पानी में आर्सेनिक।
- भोजन और जीवनशैली: शराब, मोटापा, ज़्यादा प्रोसेस्ड/लाल मांस, कम रेशा, कम व्यायाम।
- आनुवंशिक कारक: कुछ लोगों को एक खराब जीन विरासत में मिलता है (जैसे स्तन व अंडाशय कैंसर के लिए BRCA1/BRCA2), इसलिए कम अतिरिक्त उत्परिवर्तन काफ़ी होते हैं। उम्र भी: नकल की गलतियाँ समय के साथ जुड़ती जाती हैं।
कैंसर छूत की बीमारी नहीं है। यह किसी से छूकर नहीं लगता (सिर्फ़ कुछ कैंसर करने वाले वायरस फैल सकते हैं)।
बचाव, पहचान और इलाज
डॉक्टरों का अनुमान है कि 30–50% कैंसर रोके जा सकते हैं:
- किसी भी रूप में तंबाकू नहीं, शराब कम या बिल्कुल नहीं;
- धूप से बचाव: छाया, कपड़े, सनस्क्रीन; टैनिंग बेड नहीं;
- टीके: HPV और हेपेटाइटिस B;
- सही वज़न, फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, रोज़ व्यायाम;
- काम पर सुरक्षा (मास्क, सुरक्षा उपकरण), साफ़ हवा।
चेतावनी के संकेत: गाँठ, न भरने वाला घाव, बदलता तिल, असामान्य खून आना, लंबी खाँसी, बिना कारण वज़न घटना। तब डॉक्टर को दिखाओ।
स्क्रीनिंग लक्षण से पहले कैंसर पकड़ती है: पैप/HPV टेस्ट, मैमोग्राम, कोलोनोस्कोपी, त्वचा जाँच। बायोप्सी (ऊतक का छोटा टुकड़ा सूक्ष्मदर्शी से) पक्का करती है।
इलाज: सर्जरी (ट्यूमर निकालना), रेडियोथेरेपी (ट्यूमर पर विकिरण), कीमोथेरेपी (तेज़ बँटती कोशिकाओं को मारने वाली दवाएँ; बाल और आँत की कोशिकाएँ भी प्रभावित, इसलिए दुष्प्रभाव), टार्गेटेड थेरेपी (कैंसर के खास उत्परिवर्तन को रोकने वाली दवाएँ) और इम्यूनोथेरेपी (प्रतिरक्षा तंत्र को कैंसर से लड़ने में मदद)।
करके देखो: दोगुना होने का खेल
एक कागज़ लो। आधा मोड़ो: 2 परतें। फिर: 4। मोड़ते जाओ और गिनो। 7 बार (128 परतें) के बाद और नहीं मुड़ेगा। दोगुना होना ऐसा ही है: धीमी शुरुआत, फिर विस्फोट। हर 2 महीने में दोगुना होने वाला ट्यूमर 5 साल में 1 कोशिका से लगभग 1 अरब (30 बार दोगुना) हो जाता है, इसलिए जल्दी पहचान ज़रूरी है। 3D में विभाजन स्लाइडर आज़माओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n विभाजन के बाद कोशिकाएँ = 2ⁿ
- नियंत्रण जीनों में उत्परिवर्तन → अनियंत्रित समसूत्री विभाजन → ट्यूमर
- ऑन्कोजीन = अटका एक्सीलरेटर; अर्बुद-दमनकारी जीन = टूटा ब्रेक
- सुदम्य = झिल्ली में ठहरा; घातक = घुसपैठ + मेटास्टेसिस
- कैंसरजन = कैंसर करने वाली चीज़ (धुआँ, UV, X-किरणें, कुछ रसायन व वायरस)
हल किए गए उदाहरण
1. एक खराब कोशिका रोज़ एक बार बँटती है। 10 दिन बाद कितनी कैंसर कोशिकाएँ?
कोशिकाएँ = 2ⁿ = 2¹⁰ = 1024।
2. एक ट्यूमर कोशिका हर 3 महीने में दोगुनी होती है। लगभग 1 अरब (≈ 2³⁰) तक पहुँचने में कितना समय?
30 बार दोगुना होना है। समय = 30 × 3 महीने = 90 महीने = 7.5 साल। कैंसर सालों चुपचाप बढ़ सकता है, इसलिए जाँच मदद करती है।
3. p53 जैसे अर्बुद-दमनकारी जीन में उत्परिवर्तन खतरनाक क्यों है?
p53 ब्रेक है: DNA खराब हो तो चक्र रोकता है और एपोप्टोसिस करवा सकता है। p53 टूटे तो खराब कोशिकाएँ बँटती रहती हैं और और उत्परिवर्तन जुड़ते हैं। लगभग आधे कैंसरों में p53 खराब मिलता है।
4. डॉक्टर को धीमी बढ़ने वाली, साफ़ किनारे वाली, झिल्ली में बंद गाँठ मिली जो फैली नहीं। यह किस प्रकार की है?
सुदम्य: धीमी, झिल्ली में, घुसपैठ या मेटास्टेसिस नहीं। आमतौर पर सर्जरी से निकाल दी जाती है।
5. कीमोथेरेपी से अक्सर बाल झड़ते हैं। कोशिका विभाजन से समझाओ।
कई कीमो दवाएँ तेज़ बँटने वाली कोशिकाओं पर हमला करती हैं। कैंसर कोशिकाएँ तेज़ बँटती हैं, पर बालों की जड़, आँत की परत और अस्थि-मज्जा की कोशिकाएँ भी। वे भी प्रभावित होती हैं, इसलिए बाल झड़ना, मितली और खून की कमी।
आम गलतियाँ
- सोचना कि कैंसर कीटाणुओं से एक-दूसरे में फैलता है। कैंसर छूत का नहीं; यह अपनी ही कोशिकाओं के उत्परिवर्तन से होता है।
- सोचना कि हर ट्यूमर कैंसर है। सुदम्य ट्यूमर न घुसते हैं न फैलते हैं; सिर्फ़ घातक ट्यूमर कैंसर है।
- सोचना कि एक उत्परिवर्तन काफ़ी है। आमतौर पर एक ही कोशिका में नियंत्रण जीनों के कई उत्परिवर्तन जमा होने चाहिए।
- सोचना कि सारे कैंसर विरासत में मिलते हैं। सिर्फ़ 5–10% विरासत के जीनों से गहराई से जुड़े हैं; ज़्यादातर जीवन में हुए उत्परिवर्तन से।