Poland Szkoła podstawowa, klasa VIII Biology
अध्याय: 4
1. V. Genetics
DNA, chromosomes and cell division · Cancer as uncontrolled division · Inheritance · Mutations and genetic diseases
- कैंसर: जब कोशिकाएँ बँटना बंद करना भूल जाती हैं – शरीर नई कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन (mitosis) से तभी बनाता है जब ज़रूरत हो: बढ़ने, घाव भरने या पुरानी कोशिकाएँ बदलने के लिए। DNA के जीन इसे नियंत्रित करते हैं: आद्य-ऑन्कोजीन (proto-oncogene) एक्सीलरेटर हैं, अर्बुद-दमनकारी जीन (tumour-suppressor) ब्रेक हैं, और कुछ जीन DNA की मरम्मत करते हैं या खराब कोशिका को खुद नष्ट करवाते हैं (एपोप्टोसिस)। कैंसर तब शुरू होता है जब एक कोशिका में इन जीनों में कई उत्परिवर्तन (mutation) जमा हो जाते हैं। कोशिका रुकने का संकेत नहीं मानती और बार-बार बँटती है (1, 2, 4, 8…), जिससे गाँठ बनती है: अर्बुद या ट्यूमर। सुदम्य (benign) ट्यूमर एक जगह झिल्ली में रहता है; घातक (malignant) ट्यूमर आसपास के ऊतक में घुसता है और रक्त या लसीका से दूसरे अंगों तक फैल सकता है (मेटास्टेसिस)। उत्परिवर्तन कैंसरजनों (तंबाकू का धुआँ, UV, X-किरणें, कुछ रसायन, वायु प्रदूषण), कुछ वायरसों (HPV, हेपेटाइटिस B), जीवनशैली (शराब, मोटापा, खराब भोजन), उम्र और कभी-कभी विरासत में मिले जीनों (जैसे BRCA) से होते हैं। बहुत से कैंसर रोके जा सकते हैं और जल्दी पकड़ें तो इलाज अच्छा होता है।
- आनुवंशिकता और मेंडल के नियम – माता-पिता से बच्चों में लक्षणों का जाना आनुवंशिकता है। हर लक्षण के लिए माँ और पिता दोनों एक-एक जीन देते हैं। प्रभावी जीन अप्रभावी को छुपा देता है, इसलिए एकसंकर में 3:1 और द्विसंकर में 9:3:3:1 अनुपात आता है। जीन DNA का टुकड़ा है जो प्रोटीन बनवाता है, और प्रोटीन से लक्षण बनता है।
- उत्परिवर्तन (Mutation) – उत्परिवर्तन DNA में अचानक होने वाला स्थायी बदलाव है। जीन (बिंदु) उत्परिवर्तन में एक या कुछ क्षार बदलते हैं: प्रतिस्थापन, जोड़ या विलोपन। जोड़ और विलोपन पढ़ने का ढाँचा खिसका देते हैं। गुणसूत्र उत्परिवर्तन में बड़े टुकड़े या गुणसूत्रों की संख्या बदलती है। ये संयोग से या उत्परिवर्तजनों (UV, X-किरणें, कुछ रसायन) से होते हैं। ये हानिकारक, तटस्थ या लाभदायक हो सकते हैं और हर आनुवंशिक विविधता की पहली जड़ हैं।
2. VI. Evolution of life
Evolution and selection
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
3. VII. Ecology and environmental protection
Ecosystems and populations · Interactions between species · Food chains and energy flow · Tolerance, resources and human impact
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
4. VIII. Threats to biodiversity
Protecting biodiversity
जल्द आ रहा है