Romania Clasa a XII-a Chemistry (real profile)
अध्याय: 3
1. Classification of chemical reactions
Reaction types · Acid–base equilibria · Electrolysis and cells · Complex compounds · Reaction mechanisms
- उपचयन और अपचयन: संक्षारण और विकृतगंधिता – ऑक्सीजन पाना (या हाइड्रोजन खोना) उपचयन है; ऑक्सीजन खोना (या हाइड्रोजन पाना) अपचयन है। दोनों साथ-साथ होते हैं, इसलिए इन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं। ऑक्सीजन देने वाला उपचायक, लेने वाला अपचायक। रोज़मर्रा में उपचयन से संक्षारण (जैसे लोहे पर जंग) और विकृतगंधिता (तेल-घी वाले खाने का बासी होना) होते हैं।
- आयनिक साम्य: अम्ल, क्षारक, आयनन और pH – अम्ल और क्षारक की तीन परिभाषाएँ हैं: आरेनियस (पानी में H⁺ या OH⁻ देना), ब्रॉन्स्टेड–लोरी (प्रोटॉन दाता या ग्राही) और लुइस (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही या दाता)। प्रबल अम्ल-क्षारक पूरे आयनित होते हैं; दुर्बल थोड़े, और उनका साम्य Ka या Kb से लिखा जाता है। पानी भी थोड़ा आयनित होता है: 25 °C पर Kw = [H⁺][OH⁻] = 1.0 × 10⁻¹⁴। pH = −log[H⁺], pH + pOH = 14। दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के लिए α ≈ √(K/C), यानी तनु करने पर α बढ़ता है (ओस्टवाल्ड तनुता नियम)। संयुग्मी युग्म के लिए Ka × Kb = Kw। दुर्बल अम्ल या क्षारक से बने लवण पानी से क्रिया करते हैं (जल-अपघटन)।
- वैद्युत अपघटन, बैटरी, ईंधन सेल और संक्षारण – वैद्युत-अपघटनी सेल में बाहर का बिजली स्रोत ऐसी अभिक्रिया करवाता है जो अपने-आप नहीं होती: धनायन कैथोड (−) पर अपचयित और ऋणायन ऐनोड (+) पर ऑक्सीकृत होते हैं। फैराडे के नियम द्रव्यमान को आवेश से जोड़ते हैं: m = (M/nF) × I × t। कौन-सा उत्पाद बनेगा यह इलेक्ट्रोड विभव और अधिविभव पर निर्भर है। बैटरियाँ गैल्वेनी सेल हैं: प्राथमिक (शुष्क सेल, मर्करी सेल) दोबारा चार्ज नहीं होतीं; द्वितीयक (लेड संचायक, Ni–Cd) होती हैं। ईंधन सेल H₂ और O₂ से सीधे बिजली बनाता है। संक्षारण (जंग) धातु की सतह पर बना एक अनचाहा गैल्वेनी सेल है।
- उपसहसंयोजन यौगिक: वर्नर का सिद्धांत, मुख्य पद और IUPAC नाम – उपसहसंयोजन यौगिक में बीच में एक धातु परमाणु या आयन होता है, जिससे कुछ तय संख्या में आयन या अणु जुड़े रहते हैं। इन्हें लिगैंड कहते हैं। हर लिगैंड धातु को एक इलेक्ट्रॉन-युग्म देता है। धातु और उसके लिगैंड मिलकर बड़े कोष्ठक [ ] में रहते हैं — यही उपसहसंयोजन क्षेत्र है। धातु से सीधे जुड़े दाता परमाणुओं की गिनती उपसहसंयोजन संख्या है। वर्नर ने बताया कि धातु की दो संयोजकताएँ होती हैं: प्राथमिक (आयनित होने वाली, कोष्ठक के बाहर) और द्वितीयक (स्थिर, कोष्ठक के अंदर)।
- कार्बनिक अभिक्रियाओं के प्रकार और उनकी क्रियाविधि – कार्बनिक अभिक्रियाओं को इस आधार पर बाँटते हैं कि अणु के साथ क्या होता है: प्रतिस्थापन (एक परमाणु की जगह दूसरा), योगात्मक (द्वि-बंध पर परमाणु जुड़ते हैं), विलोपन (छोटा अणु निकलता और द्वि-बंध बनता है), संघनन (दो अणु जुड़ते और पानी निकलता है) और जल-अपघटन (पानी अणु को तोड़ता है)। क्रियाविधि बताती है कि इलेक्ट्रॉन कैसे चलते हैं: बंध समांश (मुक्त मूलक) या विषमांश (आयन) टूटते हैं, और नाभिकस्नेही (इलेक्ट्रॉन-धनी) इलेक्ट्रॉनस्नेही (इलेक्ट्रॉन-कमी) पर हमला करते हैं। एस्टर अम्ल और ऐल्कोहॉल से उत्क्रमणीय, अम्ल-उत्प्रेरित संघनन में बनते और जल-अपघटन से टूटते हैं।
2. Chemical kinetics
Reaction rate
- रासायनिक अभिक्रिया का वेग – अभिक्रिया वेग बताता है कि प्रति इकाई समय में अभिकारक कितना ख़र्च होता है या उत्पाद कितना बनता है। वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt (इकाई mol L⁻¹ s⁻¹)। वेग नियम, वेग = k[A]^x[B]^y, प्रयोग से मिलता है; x + y कोटि है। आण्विकता = एक प्राथमिक चरण में टकराने वाले कणों की संख्या।
3. Thermochemistry
Reaction enthalpy
- एन्थैल्पी, कैलोरीमिति और हेस का नियम – एन्थैल्पी H = U + pV। स्थिर दाब पर ली या दी गई ऊष्मा ΔH के बराबर होती है; स्थिर आयतन पर ΔU के बराबर। ΔU को बंद बम कैलोरीमीटर में और ΔH को खुले कप कैलोरीमीटर में मापते हैं: q = CΔT या q = mcΔT। गैसों के लिए ΔH = ΔU + Δn_g RT। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ΔrH ऋणात्मक, ऊष्माशोषी में धनात्मक; ΔrH° = ΣΔfH°(उत्पाद) − ΣΔfH°(अभिकारक)। हेस का नियम: अभिक्रिया एक चरण में हो या कई में, कुल एन्थैल्पी परिवर्तन एक ही रहता है, इसलिए ऊष्मारासायनिक समीकरणों को बीजगणित की तरह जोड़ सकते हैं।