उपसहसंयोजन यौगिक क्या है?
कुछ धातु आयन उन अणुओं या आयनों को पकड़ लेते हैं जिनके पास फालतू इलेक्ट्रॉन-युग्म होता है। इस समूह को संकुल (complex) कहते हैं। जिस यौगिक में संकुल हो, वह उपसहसंयोजन यौगिक है।
- केंद्रीय परमाणु/आयन: बीच की धातु, जैसे [Co(NH₃)₆]³⁺ में Co³⁺। यह इलेक्ट्रॉन-युग्म लेता है, इसलिए लुइस अम्ल है।
- लिगैंड: धातु से जुड़ा आयन या अणु। यह युग्म देता है, इसलिए लुइस क्षारक है।
- दाता परमाणु: लिगैंड का वह परमाणु जो असल में धातु को छूता है (NH₃ में N, CN⁻ में C)।
द्विक लवण (जैसे मोर लवण) पानी में पूरा सरल आयनों में टूट जाता है। संकुल जैसे [Fe(CN)₆]⁴⁻ नहीं टूटता, एक इकाई बना रहता है। यही दोनों में पहचान का आसान तरीका है।
वर्नर का सिद्धांत
अल्फ्रेड वर्नर (1893) ने कोबाल्ट क्लोराइड और अमोनिया के यौगिकों में सिल्वर नाइट्रेट डालकर देखा कि कितना AgCl बनता है। इससे उन्होंने कहा:
- धातु की दो संयोजकताएँ होती हैं। प्राथमिक संयोजकता आयनित होती है, कोष्ठक के बाहर वाले ऋण आयनों से पूरी होती है और ऑक्सीकरण अवस्था के बराबर है। द्वितीयक संयोजकता आयनित नहीं होती, हर धातु के लिए तय है और उपसहसंयोजन संख्या के बराबर है।
- द्वितीयक संयोजकता वाले लिगैंड अंतरिक्ष में तय दिशाओं में रहते हैं, इसलिए संकुलों के आकार होते हैं: 6 के लिए अष्टफलकीय, 4 के लिए चतुष्फलकीय या वर्ग समतली।
उदाहरण: CoCl₃·6NH₃ से 3 AgCl बनते हैं, तो यह [Co(NH₃)₆]Cl₃ है। CoCl₃·5NH₃ से 2 AgCl, तो एक Cl अंदर है: [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂। CoCl₃·4NH₃ से 1 AgCl: [Co(NH₃)₄Cl₂]Cl।
कमियाँ: वर्नर यह नहीं बता सके कि कुछ ही धातुएँ संकुल क्यों बनाती हैं, बंध तय दिशा में क्यों होते हैं, और संकुल रंगीन व चुंबकीय क्यों होते हैं। ये बातें बाद में VBT और CFT ने समझाईं।
लिगैंड और उनके प्रकार
लिगैंड को उनके दाता परमाणुओं की संख्या से बाँटते हैं — इसे दंतुकता (denticity, यानी 'कितने दाँत') कहते हैं:
- एकदंतुर (एक दाता): Cl⁻, H₂O, NH₃, CN⁻, CO।
- द्विदंतुर (दो दाता): एथेन-1,2-डाइऐमीन (en), ऑक्सैलेट (C₂O₄²⁻)।
- बहुदंतुर: EDTA⁴⁻ षट्दंतुर है — 6 परमाणुओं से पकड़ता है।
जो द्वि- या बहुदंतुर लिगैंड धातु के साथ छल्ला (वलय) बनाए, उसे कीलेटी लिगैंड कहते हैं। कीलेट संकुल ज़्यादा स्थायी होते हैं।
उभयदंती लिगैंड के पास दो अलग दाता परमाणु होते हैं पर एक बार में एक ही जुड़ता है: NO₂⁻ (N या O से), SCN⁻ (S या N से)।
होमोलेप्टिक: एक ही तरह के लिगैंड, जैसे [Co(NH₃)₆]³⁺। हेटरोलेप्टिक: एक से ज़्यादा तरह के, जैसे [Co(NH₃)₄Cl₂]⁺।
उपसहसंयोजन संख्या, उपसहसंयोजन क्षेत्र और ऑक्सीकरण अवस्था
उपसहसंयोजन संख्या
धातु से सीधे जुड़े दाता परमाणुओं की संख्या। लिगैंड नहीं, परमाणु गिनो: [Co(en)₃]³⁺ में लिगैंड 3 हैं पर दाता N परमाणु 6, इसलिए संख्या 6।
उपसहसंयोजन क्षेत्र और काउंटर आयन
धातु + लिगैंड, जो बड़े कोष्ठक में लिखे जाते हैं, उपसहसंयोजन क्षेत्र हैं। कोष्ठक के बाहर के आयन काउंटर आयन हैं। K₄[Fe(CN)₆] में [Fe(CN)₆]⁴⁻ क्षेत्र है और K⁺ काउंटर आयन।
उपसहसंयोजन बहुफलक
धातु के चारों ओर दाता परमाणुओं से बना आकार: अष्टफलकीय, वर्ग समतली या चतुष्फलकीय।
धातु की ऑक्सीकरण संख्या
सभी लिगैंड को उनके युग्म के साथ हटा दें तो धातु पर जो आवेश बचे, वही। सब आवेशों का जोड़ = संकुल का आवेश। उदासीन लिगैंड (NH₃, H₂O, CO, en) का आवेश 0।
उपसहसंयोजन यौगिकों का IUPAC नामकरण
सूत्र लिखना
- पहले धातु, फिर लिगैंड उनके प्रतीकों के वर्णक्रम में, सब [ ] में।
- बहुपरमाणुक लिगैंड ( ) में। संकुल आयन का आवेश कोष्ठक के बाहर ऊपर लिखो।
नाम लिखना
- पहले धनायन, फिर ऋणायन (जैसे 'सोडियम क्लोराइड')।
- संकुल में पहले लिगैंड (अंग्रेज़ी वर्णक्रम में), फिर धातु।
- ऋणात्मक लिगैंड '-ओ' पर खत्म: क्लोरिडो, सायनिडो, हाइड्रॉक्सिडो, ऑक्सैलेटो। उदासीन लिगैंड का नाम वही रहता है, सिवाय ऐक्वा (H₂O), ऐम्मीन (NH₃), कार्बोनिल (CO), नाइट्रोसिल (NO) के।
- संख्या के लिए डाइ, ट्राइ, टेट्रा…। अगर लिगैंड के नाम में पहले से संख्या हो (एथेन-1,2-डाइऐमीन), तो बिस, ट्रिस, टेट्राकिस और कोष्ठक।
- धातु के बाद ( ) में रोमन अंक में ऑक्सीकरण अवस्था।
- संकुल ऋणायन हो तो धातु के नाम के अंत में '-एट': कोबाल्टेट, ज़िंकेट। कुछ में लैटिन नाम: फेरेट (Fe), क्यूप्रेट (Cu), अर्जेंटेट (Ag), प्लम्बेट (Pb), स्टैनेट (Sn), ऑरेट (Au)।
- उदासीन संकुल: एक ही शब्द, जैसे टेट्राकार्बोनिलनिकेल(0)।
वर्णक्रम लगाते समय डाइ, ट्राइ जैसे उपसर्ग नहीं गिने जाते: टेट्राऐम्मीन, डाइक्लोरिडो से पहले आएगा क्योंकि 'a' 'c' से पहले है।
करके देखो: घर पर संकुल बनाओ
मिट्टी का एक बड़ा गोला लो (धातु) और छह टूथपिक जिनके सिरे पर छोटे गोले हों (लिगैंड)। उन्हें ऊपर, नीचे, बाएँ, दाएँ, आगे, पीछे लगाओ। यह अष्टफलक है, संख्या 6। अब दो पास वाले छोटे गोलों को मुड़ी स्ट्रॉ से जोड़ो — यह एक 'en' लिगैंड है जो दो हाथों से पकड़ता है। तीन स्ट्रॉ = [M(en)₃]। ऊपर 3D में [Co(en)₃]³⁺ चुनकर गिनो: 3 लिगैंड, 6 दाता परमाणु।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संकुल का आवेश = धातु की ऑक्सीकरण अवस्था + लिगैंडों के आवेशों का जोड़
- उपसहसंयोजन संख्या = धातु से जुड़े दाता परमाणुओं की संख्या
- प्राथमिक संयोजकता ≈ ऑक्सीकरण अवस्था (आयनित) · द्वितीयक संयोजकता = उपसहसंयोजन संख्या
- नाम का क्रम: [धनायन] फिर [ऋणायन]; अंदर: लिगैंड (वर्णक्रम) → धातु (ऋणायन हो तो -एट) → (ऑक्सीकरण अवस्था)
- AgNO₃ से बने AgCl की संख्या = कोष्ठक के बाहर के Cl⁻ की संख्या
हल किए गए उदाहरण
1. K₃[Fe(CN)₆] में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करो।
चरण 1: बाहर 3 K⁺ = +3, तो संकुल आयन [Fe(CN)₆]³⁻ है। चरण 2: Fe = x मानो। छह CN⁻ = −6। चरण 3: x − 6 = −3, तो x = +3। उत्तर: Fe की अवस्था +3।
2. [Co(en)₂Cl₂]⁺ में Co की उपसहसंयोजन संख्या और ऑक्सीकरण अवस्था बताओ।
चरण 1: हर en के 2 दाता N: 2 × 2 = 4। दो Cl = 2। संख्या = 6। चरण 2: en उदासीन, Cl⁻ = −1। x + 0 − 2 = +1। चरण 3: x = +3। उत्तर: संख्या 6, Co +3।
3. 1 मोल CoCl₃·5NH₃ अधिक AgNO₃ के साथ 2 मोल AgCl देता है। सूत्र और नाम लिखो।
चरण 1: 2 AgCl यानी 2 Cl⁻ बाहर (मुक्त) हैं। चरण 2: तीसरा Cl अंदर 5 NH₃ के साथ, संख्या 6। चरण 3: सूत्र [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂। चरण 4: वर्णक्रम: ऐम्मीन (a) फिर क्लोरिडो (c)। Co = +3। उत्तर: पेंटाऐम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट(III) क्लोराइड।
4. K₂[Zn(OH)₄] का नाम लिखो।
चरण 1: पहले धनायन K⁺: पोटैशियम। चरण 2: संकुल ऋणायन [Zn(OH)₄]²⁻ है, तो ज़िंक → ज़िंकेट। चरण 3: x − 4 = −2, x = +2। उत्तर: पोटैशियम टेट्राहाइड्रॉक्सिडोज़िंकेट(II)।
5. टेट्राऐम्मीनडाइऐक्वाकोबाल्ट(III) क्लोराइड का सूत्र लिखो।
चरण 1: लिगैंड: 4 NH₃, 2 H₂O; धातु Co(III)। चरण 2: संकुल का आवेश = +3 + 0 + 0 = +3। चरण 3: बाहर 3 Cl⁻ चाहिए। उत्तर: [Co(NH₃)₄(H₂O)₂]Cl₃।
6. [Pt(NH₃)₂Cl(NO₂)] का नाम लिखो और बताओ पानी में कितने आयन देगा।
चरण 1: लिगैंड: ऐम्मीन (a), क्लोरिडो (c), नाइट्राइटो-N (n) — पहले से वर्णक्रम में। चरण 2: Pt: x + 0 − 1 − 1 = 0, x = +2। चरण 3: बाहर कोई आयन नहीं, यानी उदासीन: एक शब्द। उत्तर: डाइऐम्मीनक्लोरिडोनाइट्राइटो-N-प्लैटिनम(II)। आयन 0 (अविद्युत-अपघट्य)।
आम गलतियाँ
- उपसहसंयोजन संख्या में लिगैंड गिनना। [Co(en)₃]³⁺ में लिगैंड 3 पर संख्या 6 है।
- वर्णक्रम लगाते समय 'डाइ', 'ट्राइ' गिनना। सिर्फ़ लिगैंड का नाम देखो: ऐम्मीन, क्लोरिडो से पहले।
- ऋणायनी संकुल में '-एट' भूलना: [Fe(CN)₆]⁴⁻ = हेक्सासायनिडोफेरेट(II), हेक्सासायनिडोआयरन(II) नहीं।
- सोचना कि कोष्ठक के अंदर का Cl भी AgNO₃ से AgCl देगा। सिर्फ़ बाहर वाले Cl⁻ देते हैं।