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उपसहसंयोजन यौगिक: वर्नर का सिद्धांत, मुख्य पद और IUPAC नाम

उपसहसंयोजन यौगिक में बीच में एक धातु परमाणु या आयन होता है, जिससे कुछ तय संख्या में आयन या अणु जुड़े रहते हैं। इन्हें लिगैंड कहते हैं। हर लिगैंड धातु को एक इलेक्ट्रॉन-युग्म देता है। धातु और उसके लिगैंड मिलकर बड़े कोष्ठक [ ] में रहते हैं — यही उपसहसंयोजन क्षेत्र है। धातु से सीधे जुड़े दाता परमाणुओं की गिनती उपसहसंयोजन संख्या है। वर्नर ने बताया कि धातु की दो संयोजकताएँ होती हैं: प्राथमिक (आयनित होने वाली, कोष्ठक के बाहर) और द्वितीयक (स्थिर, कोष्ठक के अंदर)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह है बीच का धातु आयन Co³⁺। इसने 3 इलेक्ट्रॉन खो दिए हैं, इसलिए इसके पास खाली जगह (कक्षक) है जो इलेक्ट्रॉन-युग्म ले सकती है।
  2. छह अमोनिया (NH₃) अणु पास आते हैं। हर एक अपना फालतू इलेक्ट्रॉन-युग्म (एकाकी युग्म) कोबाल्ट को देता है। जब दोनों इलेक्ट्रॉन एक ही तरफ़ से आएँ तो बंध को उपसहसंयोजक बंध कहते हैं। देने वाले अणु लिगैंड कहलाते हैं।
  3. अब धातु को छूने वाले परमाणु गिनो: 1, 2, 3, 4, 5, 6। यही उपसहसंयोजन संख्या है। यहाँ 6 है, और 6 लिगैंड मिलकर अष्टफलक (octahedron) आकार बनाते हैं।
  4. धातु और लिगैंड एक इकाई बनकर बड़े कोष्ठक में रहते हैं — यह उपसहसंयोजन क्षेत्र है। तीन Cl⁻ बाहर हैं; ये काउंटर आयन हैं और पानी में अलग हो जाते हैं। अंदर = द्वितीयक संयोजकता (6), बाहर = प्राथमिक संयोजकता (3)।
  5. अब नाम बनाते हैं, टुकड़ा-टुकड़ा: पहले लिगैंड संख्या के साथ (हेक्सा + ऐम्मीन), फिर धातु (कोबाल्ट), फिर रोमन अंकों में ऑक्सीकरण अवस्था (III), फिर बाहर का आयन (क्लोराइड)।
  6. अब तुम्हारी बारी। कोई संकुल चुनो। लिगैंड गिनो, देखो कौन-से आयन बाहर हैं, और पूरा IUPAC नाम पढ़ो। 'en' वाला ज़रूर देखो — उसमें एक लिगैंड दो हाथों से धातु को पकड़ता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

धातु आयन इलेक्ट्रॉन लेता ही क्यों है?

धनावेशित धातु आयन के पास कम ऊर्जा वाले खाली कक्षक होते हैं। एकाकी युग्म उनमें जाकर उपसहसंयोजक बंध बनाता है। चरण 1 में खाली Co³⁺ देखो।

क्या उपसहसंयोजक बंध सामान्य सहसंयोजक बंध से कमज़ोर होता है?

ज़रूरी नहीं। बनने के बाद यह भी साझा युग्म ही है। फ़र्क बस इतना है कि दोनों इलेक्ट्रॉन लिगैंड से आए।

[Co(en)₃]³⁺ की संख्या 3 नहीं, 6 क्यों?

हर en धातु को दो N परमाणुओं से छूता है। संख्या दाता परमाणुओं की होती है। मुक्त खेल में [Co(en)₃]³⁺ चुनकर गेंदें गिनो।

क्या काउंटर आयन धातु को छूते हैं?

नहीं। वे उपसहसंयोजन क्षेत्र के बाहर हैं और सिर्फ़ पूरे संकुल आयन से आयनिक आकर्षण से जुड़े हैं। पानी में दूर चले जाते हैं।

K₄[Fe(CN)₆] में 'आयरन' की जगह 'फेरेट' क्यों?

संकुल भाग ऋणायन है, और ऋणायनी संकुल में '-एट' लगता है। लोहे के लिए लैटिन मूल 'फेर' लिया जाता है।

क्या ऑक्सीकरण अवस्था और उपसहसंयोजन संख्या एक ही हैं?

नहीं। [Co(NH₃)₆]³⁺ में ऑक्सीकरण अवस्था +3 पर संख्या 6 है। वर्नर ने इन्हें प्राथमिक और द्वितीयक संयोजकता कहा।

उपसहसंयोजन यौगिक क्या है?

कुछ धातु आयन उन अणुओं या आयनों को पकड़ लेते हैं जिनके पास फालतू इलेक्ट्रॉन-युग्म होता है। इस समूह को संकुल (complex) कहते हैं। जिस यौगिक में संकुल हो, वह उपसहसंयोजन यौगिक है।

द्विक लवण (जैसे मोर लवण) पानी में पूरा सरल आयनों में टूट जाता है। संकुल जैसे [Fe(CN)₆]⁴⁻ नहीं टूटता, एक इकाई बना रहता है। यही दोनों में पहचान का आसान तरीका है।

वर्नर का सिद्धांत

अल्फ्रेड वर्नर (1893) ने कोबाल्ट क्लोराइड और अमोनिया के यौगिकों में सिल्वर नाइट्रेट डालकर देखा कि कितना AgCl बनता है। इससे उन्होंने कहा:

  1. धातु की दो संयोजकताएँ होती हैं। प्राथमिक संयोजकता आयनित होती है, कोष्ठक के बाहर वाले ऋण आयनों से पूरी होती है और ऑक्सीकरण अवस्था के बराबर है। द्वितीयक संयोजकता आयनित नहीं होती, हर धातु के लिए तय है और उपसहसंयोजन संख्या के बराबर है।
  2. द्वितीयक संयोजकता वाले लिगैंड अंतरिक्ष में तय दिशाओं में रहते हैं, इसलिए संकुलों के आकार होते हैं: 6 के लिए अष्टफलकीय, 4 के लिए चतुष्फलकीय या वर्ग समतली।

उदाहरण: CoCl₃·6NH₃ से 3 AgCl बनते हैं, तो यह [Co(NH₃)₆]Cl₃ है। CoCl₃·5NH₃ से 2 AgCl, तो एक Cl अंदर है: [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂। CoCl₃·4NH₃ से 1 AgCl: [Co(NH₃)₄Cl₂]Cl।

कमियाँ: वर्नर यह नहीं बता सके कि कुछ ही धातुएँ संकुल क्यों बनाती हैं, बंध तय दिशा में क्यों होते हैं, और संकुल रंगीन व चुंबकीय क्यों होते हैं। ये बातें बाद में VBT और CFT ने समझाईं।

लिगैंड और उनके प्रकार

लिगैंड को उनके दाता परमाणुओं की संख्या से बाँटते हैं — इसे दंतुकता (denticity, यानी 'कितने दाँत') कहते हैं:

जो द्वि- या बहुदंतुर लिगैंड धातु के साथ छल्ला (वलय) बनाए, उसे कीलेटी लिगैंड कहते हैं। कीलेट संकुल ज़्यादा स्थायी होते हैं।

उभयदंती लिगैंड के पास दो अलग दाता परमाणु होते हैं पर एक बार में एक ही जुड़ता है: NO₂⁻ (N या O से), SCN⁻ (S या N से)।

होमोलेप्टिक: एक ही तरह के लिगैंड, जैसे [Co(NH₃)₆]³⁺। हेटरोलेप्टिक: एक से ज़्यादा तरह के, जैसे [Co(NH₃)₄Cl₂]⁺।

उपसहसंयोजन संख्या, उपसहसंयोजन क्षेत्र और ऑक्सीकरण अवस्था

उपसहसंयोजन संख्या

धातु से सीधे जुड़े दाता परमाणुओं की संख्या। लिगैंड नहीं, परमाणु गिनो: [Co(en)₃]³⁺ में लिगैंड 3 हैं पर दाता N परमाणु 6, इसलिए संख्या 6।

उपसहसंयोजन क्षेत्र और काउंटर आयन

धातु + लिगैंड, जो बड़े कोष्ठक में लिखे जाते हैं, उपसहसंयोजन क्षेत्र हैं। कोष्ठक के बाहर के आयन काउंटर आयन हैं। K₄[Fe(CN)₆] में [Fe(CN)₆]⁴⁻ क्षेत्र है और K⁺ काउंटर आयन।

उपसहसंयोजन बहुफलक

धातु के चारों ओर दाता परमाणुओं से बना आकार: अष्टफलकीय, वर्ग समतली या चतुष्फलकीय।

धातु की ऑक्सीकरण संख्या

सभी लिगैंड को उनके युग्म के साथ हटा दें तो धातु पर जो आवेश बचे, वही। सब आवेशों का जोड़ = संकुल का आवेश। उदासीन लिगैंड (NH₃, H₂O, CO, en) का आवेश 0।

उपसहसंयोजन यौगिकों का IUPAC नामकरण

सूत्र लिखना

  1. पहले धातु, फिर लिगैंड उनके प्रतीकों के वर्णक्रम में, सब [ ] में।
  2. बहुपरमाणुक लिगैंड ( ) में। संकुल आयन का आवेश कोष्ठक के बाहर ऊपर लिखो।

नाम लिखना

  1. पहले धनायन, फिर ऋणायन (जैसे 'सोडियम क्लोराइड')।
  2. संकुल में पहले लिगैंड (अंग्रेज़ी वर्णक्रम में), फिर धातु।
  3. ऋणात्मक लिगैंड '-ओ' पर खत्म: क्लोरिडो, सायनिडो, हाइड्रॉक्सिडो, ऑक्सैलेटो। उदासीन लिगैंड का नाम वही रहता है, सिवाय ऐक्वा (H₂O), ऐम्मीन (NH₃), कार्बोनिल (CO), नाइट्रोसिल (NO) के।
  4. संख्या के लिए डाइ, ट्राइ, टेट्रा…। अगर लिगैंड के नाम में पहले से संख्या हो (एथेन-1,2-डाइऐमीन), तो बिस, ट्रिस, टेट्राकिस और कोष्ठक।
  5. धातु के बाद ( ) में रोमन अंक में ऑक्सीकरण अवस्था।
  6. संकुल ऋणायन हो तो धातु के नाम के अंत में '-एट': कोबाल्टेट, ज़िंकेट। कुछ में लैटिन नाम: फेरेट (Fe), क्यूप्रेट (Cu), अर्जेंटेट (Ag), प्लम्बेट (Pb), स्टैनेट (Sn), ऑरेट (Au)।
  7. उदासीन संकुल: एक ही शब्द, जैसे टेट्राकार्बोनिलनिकेल(0)।

वर्णक्रम लगाते समय डाइ, ट्राइ जैसे उपसर्ग नहीं गिने जाते: टेट्राऐम्मीन, डाइक्लोरिडो से पहले आएगा क्योंकि 'a' 'c' से पहले है।

करके देखो: घर पर संकुल बनाओ

मिट्टी का एक बड़ा गोला लो (धातु) और छह टूथपिक जिनके सिरे पर छोटे गोले हों (लिगैंड)। उन्हें ऊपर, नीचे, बाएँ, दाएँ, आगे, पीछे लगाओ। यह अष्टफलक है, संख्या 6। अब दो पास वाले छोटे गोलों को मुड़ी स्ट्रॉ से जोड़ो — यह एक 'en' लिगैंड है जो दो हाथों से पकड़ता है। तीन स्ट्रॉ = [M(en)₃]। ऊपर 3D में [Co(en)₃]³⁺ चुनकर गिनो: 3 लिगैंड, 6 दाता परमाणु।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. K₃[Fe(CN)₆] में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करो।

चरण 1: बाहर 3 K⁺ = +3, तो संकुल आयन [Fe(CN)₆]³⁻ है। चरण 2: Fe = x मानो। छह CN⁻ = −6। चरण 3: x − 6 = −3, तो x = +3। उत्तर: Fe की अवस्था +3।

2. [Co(en)₂Cl₂]⁺ में Co की उपसहसंयोजन संख्या और ऑक्सीकरण अवस्था बताओ।

चरण 1: हर en के 2 दाता N: 2 × 2 = 4। दो Cl = 2। संख्या = 6। चरण 2: en उदासीन, Cl⁻ = −1। x + 0 − 2 = +1। चरण 3: x = +3। उत्तर: संख्या 6, Co +3।

3. 1 मोल CoCl₃·5NH₃ अधिक AgNO₃ के साथ 2 मोल AgCl देता है। सूत्र और नाम लिखो।

चरण 1: 2 AgCl यानी 2 Cl⁻ बाहर (मुक्त) हैं। चरण 2: तीसरा Cl अंदर 5 NH₃ के साथ, संख्या 6। चरण 3: सूत्र [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂। चरण 4: वर्णक्रम: ऐम्मीन (a) फिर क्लोरिडो (c)। Co = +3। उत्तर: पेंटाऐम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट(III) क्लोराइड।

4. K₂[Zn(OH)₄] का नाम लिखो।

चरण 1: पहले धनायन K⁺: पोटैशियम। चरण 2: संकुल ऋणायन [Zn(OH)₄]²⁻ है, तो ज़िंक → ज़िंकेट। चरण 3: x − 4 = −2, x = +2। उत्तर: पोटैशियम टेट्राहाइड्रॉक्सिडोज़िंकेट(II)।

5. टेट्राऐम्मीनडाइऐक्वाकोबाल्ट(III) क्लोराइड का सूत्र लिखो।

चरण 1: लिगैंड: 4 NH₃, 2 H₂O; धातु Co(III)। चरण 2: संकुल का आवेश = +3 + 0 + 0 = +3। चरण 3: बाहर 3 Cl⁻ चाहिए। उत्तर: [Co(NH₃)₄(H₂O)₂]Cl₃।

6. [Pt(NH₃)₂Cl(NO₂)] का नाम लिखो और बताओ पानी में कितने आयन देगा।

चरण 1: लिगैंड: ऐम्मीन (a), क्लोरिडो (c), नाइट्राइटो-N (n) — पहले से वर्णक्रम में। चरण 2: Pt: x + 0 − 1 − 1 = 0, x = +2। चरण 3: बाहर कोई आयन नहीं, यानी उदासीन: एक शब्द। उत्तर: डाइऐम्मीनक्लोरिडोनाइट्राइटो-N-प्लैटिनम(II)। आयन 0 (अविद्युत-अपघट्य)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. [Fe(C₂O₄)₃]³⁻ में Fe की उपसहसंयोजन संख्या:
2. कौन-सा लिगैंड उभयदंती है?
3. EDTA⁴⁻ एक ____ लिगैंड है।
4. वर्नर के अनुसार द्वितीयक संयोजकता बराबर है:
5. [Ni(CO)₄] का IUPAC नाम:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्विक लवण और संकुल में क्या अंतर है?

द्विक लवण (जैसे फिटकरी) पानी में पूरा सरल आयनों में टूट जाता है। संकुल का कोष्ठक वाला भाग साथ रहता है, इसलिए [Fe(CN)₆]⁴⁻ से Fe²⁺ या CN⁻ का परीक्षण नहीं मिलता।

लिगैंड को लुइस क्षारक क्यों कहते हैं?

क्योंकि वह धातु को इलेक्ट्रॉन-युग्म देता है। धातु उसे लेती है, इसलिए धातु लुइस अम्ल है।

नाम में लिगैंड का क्रम कैसे तय करें?

लिगैंड के अंग्रेज़ी नामों के वर्णक्रम से, डाइ, ट्राइ, बिस जैसे उपसर्ग छोड़कर। इसलिए aqua, chlorido से पहले और ammine, cyanido से पहले।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

रोमानियाClasa a XII-aClassification of chemical reactions
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यूक्रेन11 класGeneral review of chemistry
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12उपसहसंयोजन यौगिक
चीन高二Selective 2 Ch.3 Crystals

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