ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या है?
ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है। इसका मात्रक जूल (J) है।
नियम कहता है: ऊर्जा को न बनाया जा सकता है, न नष्ट किया जा सकता है। वह केवल रूप बदलती है या एक वस्तु से दूसरी में जाती है।
इसलिए बंद तंत्र (जिसमें बाहर से कुछ न आए, न जाए) की कुल ऊर्जा हमेशा वही रहती है। बंद तंत्र को एक सील डिब्बा समझिए: हम अंदर की हर चीज़ गिनते हैं।
ऊर्जा के रूप: स्थितिज (ऊँचाई या खिंचाव से), गतिज (गति), ऊष्मीय (गर्मी), रासायनिक (ईंधन, भोजन), विद्युत, प्रकाश और ध्वनि।
यांत्रिक ऊर्जा: स्थितिज और गतिज
स्थितिज ऊर्जा PE = m g h (द्रव्यमान × 9.8 m/s² × ऊँचाई)।
गतिज ऊर्जा KE = ½ m v² (आधा × द्रव्यमान × वेग²)।
यांत्रिक ऊर्जा = PE + KE।
घर्षण और वायु-प्रतिरोध न हो तो यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है:
m g h₁ + ½ m v₁² = m g h₂ + ½ m v₂²
गिरती गेंद, लोलक (पेंडुलम) और रोलर-कोस्टर, सब PE को KE में और वापस बदलते हैं। द्रव्यमान कट जाता है, इसलिए नीचे वेग v = √(2gh) होता है, चाहे वस्तु भारी हो या हल्की।
यांत्रिक ऊर्जा से ऊष्मा: घर्षण
दोनों हाथ तेज़ी से रगड़िए। वे गर्म हो जाते हैं। यह गर्मी हाथों की गति की ऊर्जा से आई।
घर्षण यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा (ऊष्मा) में बदलता है। यांत्रिक ऊर्जा घटती है, पर ऊर्जा खोती नहीं। वह अब गर्म सतहों और हवा में है।
हिसाब: शुरू की यांत्रिक ऊर्जा = अंत की यांत्रिक ऊर्जा + बनी ऊष्मा।
उदाहरण: साइकिल के ब्रेक गर्म होना; उल्का का हवा में चमकना; ड्रिल-बिट का गर्म होना।
ऊष्मीय प्रक्रमों और ईंधन जलने में ऊर्जा संरक्षण
गर्म और ठंडी वस्तु छूती हैं तो ऊष्मा गर्म से ठंडी की ओर जाती है, जब तक दोनों का ताप बराबर न हो जाए। गर्म वस्तु की दी गई ऊष्मा = ठंडी वस्तु की ली गई ऊष्मा (अगर बाहर न निकले)।
किसी वस्तु को गर्म करने के लिए ऊष्मा: Q = m c ΔT (द्रव्यमान × विशिष्ट ऊष्मा धारिता × ताप में बदलाव)। पानी के लिए c ≈ 4200 J/(kg·°C)।
ईंधन जलने पर रासायनिक ऊर्जा निकलती है: Q = q m, जहाँ q दहन की विशिष्ट ऊष्मा (ऊष्मीय मान) है, यानी प्रति kg ईंधन की ऊर्जा। जैसे LPG लगभग 46 MJ प्रति kg देती है।
असली चूल्हे पर ईंधन की पूरी ऊष्मा पानी तक नहीं पहुँचती। कुछ बर्तन और हवा को गर्म करती है। ऊर्जा फिर भी संरक्षित है; बस वहाँ चली गई जहाँ हम नहीं चाहते थे।
दक्षता और ऊर्जा-प्रवाह आरेख
दक्षता = उपयोगी ऊर्जा निर्गत ÷ कुल ऊर्जा निवेश × 100%।
कोई असली मशीन 100% दक्ष नहीं होती, क्योंकि कुछ ऊर्जा हमेशा ऐसी ऊष्मा या आवाज़ बन जाती है जिसे हम काम में नहीं ले सकते। LED बल्ब लगभग 40% बिजली को प्रकाश बनाता है; पुराना फिलामेंट बल्ब केवल लगभग 5%।
ऊर्जा-प्रवाह (सैंकी) आरेख इसे तीरों से दिखाता है: चौड़ा तीर अंदर, उपयोगी तीर बाहर, बेकार तीर एक ओर मुड़ता हुआ। चौड़ाइयों का जोड़ हमेशा निवेश के बराबर होता है।
घर पर करके देखिए
उछलती गेंद प्रयोग: दीवार के पास 1 m ऊँचाई से गेंद गिराइए। देखिए वह कितना ऊपर उछलती है। पहले अनुमान लगाइए: क्या वह 1 m तक लौटेगी? नहीं लौटेगी। बाकी ऊर्जा कहाँ गई? (टप्पे की आवाज़, गेंद और फ़र्श की गर्मी।) फिर ऊपर 3D में स्लाइडर चलाकर ऊष्मा-बार बढ़ते देखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- PE = m g h
- KE = ½ m v²
- PE₁ + KE₁ = PE₂ + KE₂ (घर्षण नहीं)
- शुरू की यांत्रिक ऊर्जा = अंत की यांत्रिक ऊर्जा + ऊष्मा
- Q = m c ΔT
- Q = q m (ईंधन जलना)
- दक्षता = उपयोगी निर्गत ÷ कुल निवेश × 100%
हल किए गए उदाहरण
1. 2 kg की गेंद ज़मीन से 5 m ऊपर है। उसकी स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए (g = 9.8 m/s²)।
PE = m g h = 2 × 9.8 × 5 = 98 J।
2. उदाहरण 1 की गेंद गिराई जाती है। ज़मीन छूने से ठीक पहले उसका वेग क्या होगा (वायु-प्रतिरोध नहीं)?
पूरी PE, KE बनती है: 98 = ½ × 2 × v²। v² = 98, v ≈ 9.9 m/s। (या v = √(2gh) = √98 ≈ 9.9 m/s।)
3. 50 kg का बच्चा 3 m ऊँची फिसलपट्टी से फिसलकर नीचे 6 m/s से पहुँचता है। कितनी ऊर्जा ऊष्मा बनी?
ऊपर PE = 50 × 9.8 × 3 = 1470 J। नीचे KE = ½ × 50 × 36 = 900 J। ऊष्मा = 1470 − 900 = 570 J।
4. 2 kg पानी को 20 °C से 70 °C तक गर्म करने के लिए कितनी ऊष्मा चाहिए? (c = 4200 J/kg°C)
Q = m c ΔT = 2 × 4200 × 50 = 420 000 J = 420 kJ।
5. 0.02 kg LPG (q = 46 MJ/kg) जलाकर उदाहरण 4 का पानी गर्म किया गया। चूल्हे की दक्षता क्या है?
ईंधन की ऊर्जा = 0.02 × 46 000 000 = 920 000 J। उपयोगी = 420 000 J। दक्षता = 420 000 ÷ 920 000 × 100% ≈ 46%।
6. एक मोटर को 500 J विद्युत ऊर्जा मिलती है और वह 10 kg डिब्बे को 4 m उठाती है। दक्षता ज्ञात कीजिए।
उपयोगी = m g h = 10 × 9.8 × 4 = 392 J। दक्षता = 392 ÷ 500 × 100% = 78.4%।
आम गलतियाँ
- कहना कि ऊर्जा 'खत्म' या 'खर्च' हो गई। वह नष्ट नहीं होती; कम उपयोगी रूप में, अक्सर ऊष्मा में, बदल जाती है।
- KE = ½ m v² में वेग का वर्ग भूल जाना। वेग दुगुना तो KE चार गुना।
- घर्षण होने पर भी यांत्रिक ऊर्जा को स्थिर मान लेना। तब ऊष्मा वाला पद जोड़ना पड़ता है।
- दक्षता 100% से ज़्यादा लिखना। उपयोगी निर्गत कभी निवेश से बड़ा नहीं हो सकता।