बंध ऊर्जा: अभिक्रिया में गर्मी क्यों बदलती है
अणु में परमाणु बंधों से जुड़े होते हैं। जुड़े दो परमाणुओं को अलग करने में ऊर्जा लगानी पड़ती है। परमाणु जुड़ते हैं तो ऊर्जा निकलती है। एक मोल बंध की ऊर्जा बंध ऊर्जा (kJ/mol) कहलाती है।
अभिक्रिया दोनों करती है: अभिकारकों के बंध तोड़ना (ऊर्जा अंदर), फिर उत्पादों के बंध बनाना (ऊर्जा बाहर)।
ΔH = बंध तोड़ने की ऊर्जा − बंध बनने पर निकली ऊर्जा
उदाहरण, H₂ + Cl₂ → 2HCl। H–H (436) और Cl–Cl (243) तोड़ना = 679 kJ अंदर। 2 H–Cl (2 × 431) बनना = 862 kJ बाहर। ΔH = 679 − 862 = −183 kJ प्रति मोल अभिक्रिया। ऋण चिह्न का मतलब है ऊर्जा निकली।
ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ
| ऊष्माक्षेपी | ऊष्माशोषी | |
|---|---|---|
| गर्मी | आसपास को निकलती है | आसपास से ली जाती है |
| थर्मामीटर | चढ़ता है | उतरता है |
| उत्पाद बनाम अभिकारक | उत्पादों में ऊर्जा कम | उत्पादों में ऊर्जा ज़्यादा |
| ΔH | ऋणात्मक | धनात्मक |
| उदाहरण | ईंधन जलना, ज़ंग लगना, अम्ल + क्षार | NH₄NO₃ पानी में, खाने का सोडा + सिट्रिक अम्ल, प्रकाश-संश्लेषण |
कुल ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती: वह पदार्थों और आसपास के बीच सिर्फ़ चलती रहती है।
सीधी अभिक्रिया से गर्मी: कॉपर सल्फ़ेट में ज़िंक
Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu। ज़िंक परमाणु दो इलेक्ट्रॉन सीधे कॉपर आयनों को दे देते हैं। ज़िंक पर लाल-भूरा ताँबा जमता है और बीकर गरम हो जाता है। यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है: इलेक्ट्रॉन एक पदार्थ से दूसरे में जाते हैं।
इलेक्ट्रॉन बहुत छोटी दूरी पर कूदते हैं, इसलिए सारी ऊर्जा गर्मी बनकर दिखती है। इस ऊर्जा से हम बल्ब नहीं जला सकते।
अभिक्रिया से बिजली: गैल्वेनिक सेल
अगर दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं को अलग रखें और इलेक्ट्रॉनों को तार से गुज़रना पड़े, तो ऊर्जा विद्युत धारा बनकर निकलती है। यही गैल्वेनिक (वोल्टीय) सेल है।
- ऐनोड (−), ज़िंक: Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ (उपचयन: ज़िंक इलेक्ट्रॉन खोता है)।
- कैथोड (+), ताँबा: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu (अपचयन: कॉपर आयन इलेक्ट्रॉन पाते हैं)।
- तार: इलेक्ट्रॉन Zn से Cu की ओर बहते हैं, इसलिए धारा Cu से Zn की ओर मानी जाती है।
- लवण सेतु: आयनों को चलने देता है ताकि हर बीकर उदासीन रहे। इसके बिना प्रवाह रुक जाता है।
वोल्टेज दोनों धातुओं की सक्रियता के अंतर से बढ़ता है: Zn–Cu लगभग 1.1 V, Mg–Cu लगभग 2.7 V, Fe–Cu लगभग 0.8 V। एक ही धातु की दो पट्टियाँ 0 V देती हैं।
बैटरियाँ
बैटरी श्रेणी में (एक के बाद एक) जुड़े सेलों का समूह है। उनके वोल्टेज जुड़ते हैं। तीन 1.1 V के सेल 3.3 V देते हैं।
- प्राथमिक सेल (टॉर्च का शुष्क सेल): अभिक्रिया उलटी नहीं हो सकती, एक बार इस्तेमाल।
- द्वितीयक सेल (गाड़ी की लेड-अम्ल बैटरी, फ़ोन की लिथियम-आयन बैटरी): बाहरी धारा से अभिक्रिया उलटी चलाई जा सकती है, इसलिए रीचार्ज होती है।
- ईंधन सेल: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन लगातार दी जाती हैं और पानी व बिजली बनती हैं (2H₂ + O₂ → 2H₂O)। ईंधन मिलता रहे तो वह ख़त्म नहीं होता।
पुरानी बैटरियों में ऐसी धातुएँ होती हैं जो मिट्टी को नुक़सान पहुँचाती हैं। उन्हें संग्रह-पेटी में डालो, आग में कभी नहीं।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
चरण 6 से पहले अनुमान लगाओ कि श्रेणी में 4 Zn–Cu सेलों का वोल्टेज कितना होगा (उत्तर: 4.4 V), फिर स्लाइडर से जाँचो। घर पर बड़े के साथ: एक नींबू में ताँबे का सिक्का और जस्ता चढ़ी (गैल्वेनाइज़्ड) कील 2 cm दूरी पर गाड़ो और दोनों को जीभ से छुओ। हल्की झनझनाहट सेल दिखाती है। ऊष्माशोषी महसूस करने के लिए: थोड़े सिरके में एक चम्मच खाने का सोडा घोलो और गिलास पकड़ो। वह ठंडा हो जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ΔH = (बंध तोड़ने की ऊर्जा) − (बंध बनने पर निकली ऊर्जा)
- ऊष्माक्षेपी: ΔH < 0 (गर्मी बाहर)। ऊष्माशोषी: ΔH > 0 (गर्मी अंदर)
- Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ (ऐनोड, उपचयन); Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu (कैथोड, अपचयन)
- श्रेणी में सेल: कुल V = एक सेल का V × सेलों की संख्या
- ईंधन सेल: 2H₂ + O₂ → 2H₂O + बिजली
हल किए गए उदाहरण
1. बंध ऊर्जाएँ: H–H 436, Cl–Cl 243, H–Cl 431 kJ/mol। H₂ + Cl₂ → 2HCl के लिए ΔH निकालो।
अंदर: 436 + 243 = 679 kJ। बाहर: 2 × 431 = 862 kJ। ΔH = 679 − 862 = −183 kJ। ऊष्माक्षेपी।
2. N≡N 945, H–H 436 और N–H 391 kJ/mol हैं। N₂ + 3H₂ → 2NH₃ के लिए ΔH निकालो।
अंदर: 945 + 3 × 436 = 2253 kJ। बाहर: 6 × 391 = 2346 kJ। ΔH = 2253 − 2346 = −93 kJ। ऊष्माक्षेपी।
3. पहली अभिक्रिया की उलटी, 2HCl → H₂ + Cl₂, के लिए ΔH क्या होगा?
चिह्न पलट जाता है: ΔH = +183 kJ। ऊर्जा देनी पड़ती है, इसलिए यह ऊष्माशोषी है।
4. एक बैटरी में 4 Zn–Cu सेल श्रेणी में हैं (हर एक 1.1 V)। उसका वोल्टेज क्या है?
V = 4 × 1.1 = 4.4 V।
5. Zn–Cu सेल में तार में इलेक्ट्रॉन किस ओर बहते हैं, और किस इलेक्ट्रोड का द्रव्यमान घटता है?
इलेक्ट्रॉन ज़िंक से कॉपर की ओर बहते हैं। ज़िंक (ऐनोड) का द्रव्यमान घटता है क्योंकि वह Zn²⁺ आयन बन जाता है, और कॉपर का बढ़ता है क्योंकि उस पर Cu जमता है।
आम गलतियाँ
- चिह्न उलटना: ऊर्जा निकलने पर ΔH ऋणात्मक होता है, धनात्मक नहीं।
- बंध ऊर्जा से हल करते समय उत्पाद − अभिकारक की ऊर्जा लेना। बंध ऊर्जा में टूटा − बना होता है।
- यह कहना कि इलेक्ट्रॉन लवण सेतु से बहते हैं। इलेक्ट्रॉन तार से और आयन लवण सेतु से चलते हैं।
- समांतर में जुड़े सेलों के वोल्टेज जोड़ देना। सिर्फ़ श्रेणी वाले सेल जुड़ते हैं।