ऊर्जा का स्थानांतरण: ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी
अभिक्रिया में ऊर्जा न बनती है, न नष्ट होती है। वह रसायनों और परिवेश (पानी, बीकर, हवा) के बीच आती-जाती है।
- ऊष्माक्षेपी: ऊर्जा परिवेश में बाहर जाती है, तापमान बढ़ता है। उदाहरण: ईंधन का जलना (दहन), ज़्यादातर ऑक्सीकरण, अम्ल-क्षार उदासीनीकरण, श्वसन।
- ऊष्माशोषी: ऊर्जा परिवेश से अंदर आती है, तापमान घटता है। उदाहरण: ऊष्मीय वियोजन (कैल्शियम कार्बोनेट को गरम करना), सिट्रिक अम्ल + सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट, प्रकाश-संश्लेषण, अमोनियम नाइट्रेट का घुलना।
उपयोग: हैंड वॉर्मर और खुद गरम होने वाले डिब्बे (ऊष्माक्षेपी); खेल के कोल्ड पैक (ऊष्माशोषी)।
जाँच कैसे करें: रसायनों को ढक्कन वाले पॉलीस्टाइरीन कप में मिलाइए, शुरुआती और सबसे ऊँचा (या नीचा) तापमान नापिए। मात्रा हर बार बराबर रखें।
अवस्था बदलने में ऊर्जा
अवस्था-परिवर्तन भौतिक बदलाव हैं, पर इनमें भी ऊर्जा ली या दी जाती है:
- ऊर्जा लेते हैं (ऊष्माशोषी): पिघलना, उबलना/वाष्पन, ऊर्ध्वपातन। पसीना सूखने से त्वचा ठंडी होती है।
- ऊर्जा देते हैं (ऊष्माक्षेपी): जमना, संघनन। भाप से ज़्यादा जलन होती है क्योंकि त्वचा पर संघनित होते समय वह अतिरिक्त ऊर्जा देती है।
अवस्था बदलते समय तापमान स्थिर रहता है; ऊर्जा कणों को अलग करने में लगती है (या पास आने पर निकलती है)।
अभिक्रिया प्रोफ़ाइल और सक्रियण ऊर्जा
अभिक्रिया प्रोफ़ाइल एक ग्राफ़ है: ऊपर की ओर ऊर्जा, आड़े में अभिक्रिया की प्रगति।
- बाईं ओर अभिकारक, दाईं ओर उत्पाद।
- ऊष्माक्षेपी: उत्पाद अभिकारकों से नीचे। अंतर = बाहर गई ऊर्जा।
- ऊष्माशोषी: उत्पाद ऊपर। अंतर = ली गई ऊर्जा।
- कूबड़ सक्रियण ऊर्जा है: टकराते कणों को अभिक्रिया शुरू करने के लिए कम-से-कम इतनी ऊर्जा चाहिए। जलना ऊष्माक्षेपी है, फिर भी माचिस की चिंगारी (सक्रियण ऊर्जा) चाहिए।
उत्प्रेरक कूबड़ को नीचा करता है, पर शुरू और अंत के स्तर नहीं बदलता।
बंध ऊर्जा से ऊर्जा बदलाव की गणना
अभिक्रिया में पुराने बंध टूटते हैं और नए बनते हैं।
- बंध तोड़ना ऊर्जा लेता है।
- बंध बनाना ऊर्जा देता है।
ΔH = (अभिकारकों के बंध तोड़ने की कुल ऊर्जा) − (उत्पादों के बंध बनने में निकली कुल ऊर्जा)
बनाने में ज़्यादा ऊर्जा निकले तो ΔH ऋणात्मक: ऊष्माक्षेपी। उल्टा हो तो ΔH धनात्मक: ऊष्माशोषी।
तरीका: (1) हर अणु के सभी बंध बनाइए, (2) हर प्रकार गिनिए, (3) बंध ऊर्जा से गुणा कीजिए, (4) तोड़ने और बनाने वाली ओर अलग-अलग जोड़िए, (5) घटाइए। इकाई: kJ/mol।
खुद आज़माइए: रसोई का प्रयोग
गिलास में एक चम्मच खाने का सोडा डालिए, फिर एक चम्मच नींबू का रस या सिरका मिलाइए और गिलास छूकर देखिए: वह थोड़ा ठंडा होता है (ऊष्माशोषी)। फिर हाथ के पिछले हिस्से को गीला करके फूँक मारिए: ठंडक लगती है क्योंकि वाष्पन त्वचा से ऊर्जा लेता है। पहले अंदाज़ा लगाइए, फिर महसूस कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऊष्माक्षेपी: ऊर्जा बाहर, परिवेश का तापमान बढ़ता है, ΔH ऋणात्मक
- ऊष्माशोषी: ऊर्जा अंदर, परिवेश का तापमान घटता है, ΔH धनात्मक
- ΔH = Σ(तोड़े गए बंध) − Σ(बने बंध)
- सक्रियण ऊर्जा = अभिकारक से कूबड़ की चोटी तक की ऊर्जा
- बंध ऊर्जा और ΔH की इकाई: kJ/mol
हल किए गए उदाहरण
1. अम्ल-क्षार मिश्रण का तापमान 21 °C से 29 °C हो गया। अभिक्रिया किस प्रकार की है?
तापमान 8 °C बढ़ा, यानी ऊर्जा परिवेश में गई: ऊष्माक्षेपी।
2. सिट्रिक अम्ल और सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट विलयन 20 °C से 14 °C हो गया। अभिक्रिया का प्रकार और ऊर्जा कहाँ गई?
तापमान 6 °C गिरा, इसलिए ऊष्माशोषी। ऊर्जा पानी (परिवेश) से रसायनों में बंध तोड़ने के लिए गई।
3. H₂ + Cl₂ → 2HCl. बंध ऊर्जा: H–H 436, Cl–Cl 243, H–Cl 432 kJ/mol. ΔH निकालिए।
तोड़े: 436 + 243 = 679 kJ। बने: 2 × 432 = 864 kJ। ΔH = 679 − 864 = −185 kJ/mol। ऋणात्मक, इसलिए ऊष्माक्षेपी।
4. 2H₂ + O₂ → 2H₂O. H–H 436, O=O 498, O–H 464 kJ/mol. ΔH निकालिए।
तोड़े: 2 × 436 + 498 = 1370 kJ। बने: हर H₂O में 2 O–H, इसलिए 4 × 464 = 1856 kJ। ΔH = 1370 − 1856 = −486 kJ/mol (ऊष्माक्षेपी)।
5. CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O. C–H 413, O=O 498, C=O 805, O–H 464 kJ/mol. ΔH निकालिए।
तोड़े: 4 × 413 + 2 × 498 = 1652 + 996 = 2648 kJ। बने: 2 × 805 + 4 × 464 = 1610 + 1856 = 3466 kJ। ΔH = 2648 − 3466 = −818 kJ/mol। मीथेन का जलना बहुत ऊष्माक्षेपी है।
6. 2HBr → H₂ + Br₂. H–Br 366, H–H 436, Br–Br 193 kJ/mol. ΔH और प्रकार बताइए।
तोड़े: 2 × 366 = 732 kJ। बने: 436 + 193 = 629 kJ। ΔH = 732 − 629 = +103 kJ/mol। धनात्मक, इसलिए ऊष्माशोषी।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ऊष्माशोषी अभिक्रिया "ठंडक छोड़ती" है। ठंडक नहीं निकलती; परिवेश से ऊर्जा ली जाती है, इसलिए परिवेश ठंडा होता है।
- यह कहना कि बंध तोड़ने से ऊर्जा निकलती है। बंध तोड़ने में हमेशा ऊर्जा लगती है।
- उल्टा घटाना: ΔH = तोड़े गए बंध − बने बंध।
- अणुओं की संख्या और हर अणु के बंधों से गुणा करना भूलना (जैसे 2H₂O में 4 O–H बंध)।