अवस्था परिवर्तन की एन्थैल्पी: संगलन, वाष्पन, ऊर्ध्वपातन
ठोस पिघले या द्रव उबले, तो पूरा नमूना बदलने तक ताप स्थिर रहता है। ऊष्मा अणुओं को अलग करने में लगती है, उन्हें तेज़ करने में नहीं।
- संगलन एन्थैल्पी ΔfusH: गलनांक पर 1 mol ठोस को पिघलाने की ऊष्मा। बर्फ़: 0 °C पर +6.01 kJ mol⁻¹।
- वाष्पन एन्थैल्पी ΔvapH: क्वथनांक पर 1 mol द्रव को वाष्प बनाने की ऊष्मा। पानी: 100 °C पर +40.79 kJ mol⁻¹।
- ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी ΔsubH: ठोस सीधे वाष्प (जैसे नैफ़्थलीन की गोलियाँ, सूखी बर्फ़)। एक ही ताप पर ΔsubH = ΔfusH + ΔvapH (हेस का नियम)।
तीनों ऊष्माशोषी हैं। उलटे बदलाव (जमना, संघनन) का मान वही पर चिह्न ऋणात्मक। ΔvapH जितना बड़ा, अणुओं के बीच बल उतने मज़बूत।
दहन एन्थैल्पी
मानक दहन एन्थैल्पी ΔcH°: 1 mol पदार्थ के ऑक्सीजन में पूरे जलने पर एन्थैल्पी परिवर्तन, सभी पदार्थ अपनी मानक अवस्था में। यह हमेशा ऋणात्मक (ऊष्माक्षेपी) होती है।
उदाहरण: CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(l), ΔcH° = −890.3 kJ mol⁻¹। H₂(g) + ½O₂(g) → H₂O(l), ΔcH° = −285.8 kJ mol⁻¹।
ईंधन और भोजन की तुलना प्रति ग्राम दी गई ऊष्मा (ऊष्मीय मान) से करते हैं। दहन मान बम कैलोरीमीटर से मापे जाते हैं और हेस के नियम से संभवन एन्थैल्पी निकालने में काम आते हैं।
परमाणुकरण एन्थैल्पी और बंध एन्थैल्पी
परमाणुकरण एन्थैल्पी ΔaH: 1 mol पदार्थ को पूरी तरह गैसीय परमाणुओं में तोड़ने का एन्थैल्पी परिवर्तन। H₂(g) → 2H(g) के लिए ΔaH = +435 kJ mol⁻¹। Na(s) → Na(g) जैसी धातु के लिए यह ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी के बराबर है।
बंध वियोजन एन्थैल्पी: गैसीय अणुओं में किसी खास सहसंयोजी बंध के 1 mol तोड़ने का एन्थैल्पी परिवर्तन। द्विपरमाणुक अणु के लिए यह परमाणुकरण एन्थैल्पी के बराबर है (H–H: 435, Cl–Cl: 242 kJ mol⁻¹)।
औसत बंध एन्थैल्पी
CH₄ के चारों C–H बंध एक-एक करके तोड़ने में थोड़ी अलग ऊर्जा लगती है। इसलिए औसत लेते हैं: CH₄(g) → C(g) + 4H(g), ΔaH = 1665 kJ mol⁻¹, तो औसत C–H बंध एन्थैल्पी = 1665 ÷ 4 = 416 kJ mol⁻¹।
बंध एन्थैल्पी से अभिक्रिया एन्थैल्पी (गैस अवस्था)
ΔrH° = Σ अभिकारकों के बंध (तोड़े) − Σ उत्पादों के बंध (बने)। बंध तोड़ना ऊष्माशोषी, बनाना ऊष्माक्षेपी। औसत मान लेने से उत्तर लगभग सही होता है।
जालक एन्थैल्पी और बॉर्न–हेबर चक्र
आयनिक यौगिक की जालक एन्थैल्पी: 1 mol ठोस के गैसीय आयनों में टूटने का एन्थैल्पी परिवर्तन: NaCl(s) → Na⁺(g) + Cl⁻(g), ΔlatticeH° = +788 kJ mol⁻¹।
इसे सीधे नहीं माप सकते, इसलिए बॉर्न–हेबर चक्र (घेरे में हेस का नियम) लगाते हैं: Na का ऊर्ध्वपातन (+108.4), ½Cl₂ का वियोजन (+121), Na का आयनन (+496), Cl पर इलेक्ट्रॉन जुड़ना (इलेक्ट्रॉन लब्धि, −348.6), और NaCl की संभवन एन्थैल्पी (−411.2) से तुलना। जालक एन्थैल्पी वह छूटा हुआ चरण है जो घेरा पूरा करता है।
आयनों पर ज़्यादा आवेश और छोटा आकार हो तो जालक एन्थैल्पी बड़ी (MgO की NaCl से बहुत ज़्यादा)।
विलयन, जलयोजन और तनुकरण एन्थैल्पी
विलयन एन्थैल्पी ΔsolH: 1 mol पदार्थ के बहुत सारे विलायक में घुलने का एन्थैल्पी परिवर्तन। इसे दो चरणों में सोचो: (1) जालक तोड़कर गैसीय आयन बनाओ (जालक एन्थैल्पी, +); (2) पानी के अणु आयनों को घेरें (जलयोजन एन्थैल्पी, −)।
ΔsolH = ΔlatticeH + ΔhydH। NaCl के लिए: 788 + (−784) = +4 kJ mol⁻¹, थोड़ा ऊष्माशोषी। जलयोजन जालक से ज़्यादा ऊर्जा दे तो घुलना ऊष्माक्षेपी (जैसे निर्जल CaCl₂, NaOH); कम दे तो विलयन ठंडा होता है (जैसे NH₄NO₃, ΔsolH ≈ +25.7 kJ mol⁻¹)।
तनुकरण एन्थैल्पी: विलयन में और विलायक मिलाने पर ऊष्मा परिवर्तन; यह मिलाए गए विलायक की मात्रा पर निर्भर है। कुछ किताबें उदासीनीकरण (प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार ≈ −57 kJ प्रति mol पानी) और आयनन एन्थैल्पी भी बताती हैं।
परीक्षा में
परिभाषाएँ (1 अंक), बंध एन्थैल्पी के संख्यात्मक (2–3 अंक) और बॉर्न–हेबर / ΔsolH पर तर्क (3 अंक) अक्सर आते हैं।
घर पर करके देखो: एन्थैल्पी परिवर्तन महसूस करो
(1) एक हाथ के पीछे पानी की बूँद और दूसरे पर सैनिटाइज़र (अल्कोहल) की बूँद रखो। धीरे से फूँको। अल्कोहल वाला हिस्सा ज़्यादा ठंडा लगेगा: वह जल्दी वाष्पित होकर त्वचा से ΔvapH लेता है। (2) एक गिलास पानी में एक चम्मच यूरिया खाद या कोल्ड-पैक का पाउडर घोलकर गिलास छुओ: वह ठंडा होता है, तो ΔsolH > 0। अब फ्री प्ले में 'पानी का वाष्पन' और 'NH₄NO₃ का विलयन' के बार तुलना करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ΔsubH = ΔfusH + ΔvapH (एक ही ताप पर)
- n mol के लिए ऊष्मा: q = n × ΔH (जैसे पिघलना: q = n ΔfusH)
- औसत बंध एन्थैल्पी = ΔaH ÷ ऐसे बंधों की संख्या (जैसे C–H = 1665 ÷ 4)
- ΔrH ≈ Σ(तोड़े गए बंध) − Σ(बने बंध) (गैस अवस्था)
- ΔsolH = ΔlatticeH + ΔhydH
- बॉर्न–हेबर: ΔfH = ΔsubH + ½ΔbondH + IE + ΔegH − ΔlatticeH
- पानी: ΔfusH = 6.01, ΔvapH = 40.79 kJ mol⁻¹; ΔcH(CH₄) = −890.3 kJ mol⁻¹
हल किए गए उदाहरण
1. 0 °C पर 36 g बर्फ़ पिघलाने में कितनी ऊष्मा लगेगी? (ΔfusH = 6.01 kJ mol⁻¹)
मोल = 36 ÷ 18 = 2 mol। q = 2 × 6.01 = 12.02 kJ।
2. 100 °C पर 90 g पानी को पूरी तरह भाप बनाने की ऊष्मा ज्ञात करो (ΔvapH = 40.79 kJ mol⁻¹)।
n = 90 ÷ 18 = 5 mol। q = 5 × 40.79 = 203.95 ≈ 204 kJ।
3. 0 °C पर बर्फ़ का ΔfusH = 6.01 kJ mol⁻¹ और पानी का ΔvapH = 45.07 kJ mol⁻¹ है। 0 °C पर बर्फ़ का ΔsubH ज्ञात करो।
ΔsubH = ΔfusH + ΔvapH = 6.01 + 45.07 = 51.08 kJ mol⁻¹।
4. 8 g मेथेन जलने पर कितनी ऊष्मा निकलेगी? (ΔcH = −890.3 kJ mol⁻¹)
CH₄ के मोल = 8 ÷ 16 = 0.5 mol। निकली ऊष्मा = 0.5 × 890.3 = 445.2 kJ (ΔH = −445.2 kJ)।
5. CH₄ का ΔaH = 1665 kJ mol⁻¹ है। औसत C–H बंध एन्थैल्पी ज्ञात करो।
CH₄ में 4 C–H बंध हैं। औसत C–H = 1665 ÷ 4 = 416.25 ≈ 416 kJ mol⁻¹।
6. बंध एन्थैल्पी (H–H 435, Cl–Cl 242, H–Cl 431 kJ mol⁻¹) से H₂(g) + Cl₂(g) → 2HCl(g) का ΔrH ज्ञात करो।
तोड़े: 435 + 242 = 677 kJ। बने: 2 × 431 = 862 kJ। ΔrH = 677 − 862 = −185 kJ।
7. CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl का ΔrH ज्ञात करो। बंध एन्थैल्पी: C–H 414, Cl–Cl 242, C–Cl 330, H–Cl 431 kJ mol⁻¹।
केवल एक C–H और एक Cl–Cl टूटता है; एक C–Cl और एक H–Cl बनता है। तोड़े = 414 + 242 = 656। बने = 330 + 431 = 761। ΔrH = 656 − 761 = −105 kJ mol⁻¹।
8. NaCl का बॉर्न–हेबर: ΔsubH(Na) = +108.4, ½ΔbondH(Cl₂) = +121, IE(Na) = +496, ΔegH(Cl) = −348.6, ΔfH(NaCl) = −411.2 kJ mol⁻¹। जालक एन्थैल्पी ज्ञात करो।
ΔfH = ΔsubH + ½ΔbondH + IE + ΔegH − ΔlatticeH। तो ΔlatticeH = 108.4 + 121 + 496 − 348.6 + 411.2 = +788 kJ mol⁻¹।
9. NaCl की जालक एन्थैल्पी = +788 kJ mol⁻¹ और जलयोजन एन्थैल्पी = −784 kJ mol⁻¹। ΔsolH ज्ञात करो। पानी गरम होगा या ठंडा?
ΔsolH = 788 + (−784) = +4 kJ mol⁻¹। धनात्मक, तो पानी बहुत थोड़ा ठंडा होगा।
आम गलतियाँ
- 'बने − तोड़े' लिखना। सही क्रम है तोड़े − बने (बंध एन्थैल्पी के लिए अभिकारक − उत्पाद)।
- कितने बंध टूटे यह न गिनना: 2HCl में 2 H–Cl बंध, CH₄ में 4 C–H बंध।
- दहन एन्थैल्पी को धनात्मक लिखना। जलने पर हमेशा ऊष्मा निकलती है: ΔcH < 0।
- अलग-अलग ताप पर मापे ΔfusH और ΔvapH जोड़कर ΔsubH निकालना। दोनों एक ही ताप पर होने चाहिए।