निकाय, परिवेश और परिसीमा
ऊष्मागतिकी ऊर्जा के बदलाव, खासकर ऊष्मा और कार्य, का अध्ययन है। जिस भाग को हम पढ़ना चाहते हैं उसे निकाय (system) कहते हैं। बाकी सब परिवेश (surroundings) है। दोनों को अलग करने वाली असली या काल्पनिक दीवार परिसीमा (boundary) है। निकाय + परिवेश = ब्रह्मांड।
निकाय के तीन प्रकार
- खुला निकाय: पदार्थ और ऊर्जा दोनों आ-जा सकते हैं। जैसे खुले कप में गरम चाय (भाप भी निकलती है, ऊष्मा भी)।
- बंद निकाय: केवल ऊर्जा आ-जा सकती है, पदार्थ नहीं। जैसे बंद स्टील डिब्बे में दाल। वह ठंडी हो सकती है, पर कुछ बाहर नहीं निकलता।
- विलगित निकाय: न पदार्थ, न ऊर्जा। जैसे आदर्श थर्मस में चाय।
कुछ खास प्रक्रम
- समतापी (isothermal): ताप स्थिर (ΔT = 0)।
- रुद्धोष्म (adiabatic): कोई ऊष्मा परिसीमा पार नहीं करती (q = 0)।
- समदाबी: दाब स्थिर। समआयतनी: आयतन स्थिर।
- उत्क्रमणीय (reversible): बहुत छोटे, धीमे कदमों में, निकाय हर पल लगभग संतुलन में। अनुत्क्रमणीय: एक झटके में (सभी असली प्रक्रम)।
निकाय की अवस्था और अवस्था फलन
निकाय को कुछ मापने लायक राशियों से बताते हैं: दाब p, आयतन V, ताप T और मात्रा n। ये अवस्था चर हैं। इन्हें तय कर दो तो निकाय की एक निश्चित अवस्था बन जाती है।
अवस्था फलन केवल शुरुआती और अंतिम अवस्था पर निर्भर करता है, रास्ते पर नहीं। जैसे U, H, S, G, p, V, T। पथ फलन रास्ते पर निर्भर करता है। ऊष्मा q और कार्य w पथ फलन हैं।
पहाड़ का उदाहरण: नीचे से चोटी तक ऊँचाई का बढ़ना तय है (अवस्था फलन)। पर आप कितना चले, यह चुनी गई सड़क पर निर्भर है (पथ फलन)।
इसलिए हम ΔU लिखते हैं (दो अवस्थाओं के बीच बदलाव), पर q और w सीधे लिखते हैं; Δq या Δw कभी नहीं।
आंतरिक ऊर्जा, ऊष्मा और कार्य
आंतरिक ऊर्जा (U) निकाय के अंदर भरी कुल ऊर्जा है: कणों की गति, रासायनिक बंधों की ऊर्जा, कणों के बीच आकर्षण आदि। U को सीधे नहीं माप सकते, केवल ΔU = U₂ − U₁ माप सकते हैं।
U बदलने के दो तरीके
- ऊष्मा (q): ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा। ऊष्मा अंदर: q धनात्मक। बाहर: q ऋणात्मक।
- कार्य (w): बल से किसी चीज़ को खिसकाकर भेजी गई ऊर्जा, जैसे पिस्टन। निकाय पर कार्य: w धनात्मक। निकाय द्वारा कार्य: w ऋणात्मक।
दाब–आयतन कार्य
स्थिर बाहरी दाब p_ext के विरुद्ध गैस फैले तो: w = −p_ext (V₂ − V₁) = −p_ext ΔV। प्रसार (ΔV > 0) में w ऋणात्मक, संपीडन में धनात्मक।
- मुक्त प्रसार (निर्वात में, p_ext = 0): w = 0।
- आदर्श गैस का उत्क्रमणीय समतापी प्रसार: w_rev = −2.303 nRT log(V₂/V₁) = −2.303 nRT log(p₁/p₂)। उन्हीं दो अवस्थाओं के बीच गैस इससे ज़्यादा कार्य नहीं कर सकती।
- मात्रक: 1 L bar = 100 J; 1 L atm = 101.3 J; R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹।
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम: ΔU = q + w
प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का नियम है: विलगित निकाय की ऊर्जा स्थिर रहती है; ऊर्जा रूप बदल सकती है पर न बनती है, न नष्ट होती है। किसी भी बंद निकाय के लिए: ΔU = q + w।
खास स्थितियाँ
- विलगित निकाय: q = 0, w = 0 → ΔU = 0।
- रुद्धोष्म प्रक्रम: q = 0 → ΔU = w। रुद्धोष्म संपीडन से गैस गरम होती है।
- स्थिर आयतन (कोई p–V कार्य नहीं): ΔU = q_V। बम कैलोरीमीटर इसी से ΔU मापता है।
- आदर्श गैस का समतापी प्रक्रम: ΔU = 0 → q = −w।
- आदर्श गैस का मुक्त समतापी प्रसार: q = 0, w = 0, ΔU = 0।
परीक्षा में
परिभाषा और चिह्न नियम पर 1 अंक के प्रश्न, ΔU = q + w और w = −p_ext ΔV पर 2–3 अंक के संख्यात्मक, और उत्क्रमणीय कार्य की व्युत्पत्ति आती है। CBSE कक्षा 11 में ऊष्मागतिकी इकाई लगभग 9 अंक की है।
घर पर करके देखो: साइकिल पंप
साइकिल पंप का मुँह अंगूठे से बंद करो और हैंडल 10 बार जल्दी-जल्दी दबाओ। पंप का निचला हिस्सा छुओ, गरम लगेगा। आपने हवा पर इतनी तेज़ी से कार्य किया (w > 0) कि ऊष्मा बाहर जा ही नहीं पाई (लगभग रुद्धोष्म, q ≈ 0)। इसलिए ΔU = w > 0 और हवा गरम हुई। अब 3D में q = 0 रखकर w को +60 J करो: कण वैसे ही तेज़ हो जाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ΔU = q + w (प्रथम नियम, IUPAC चिह्न)
- q > 0 ऊष्मा अवशोषित; q < 0 ऊष्मा मुक्त
- w > 0 निकाय पर कार्य; w < 0 निकाय द्वारा कार्य
- w = −p_ext ΔV (स्थिर दाब के विरुद्ध प्रसार)
- w_rev = −2.303 nRT log(V₂/V₁) = −2.303 nRT log(p₁/p₂) (समतापी, आदर्श गैस)
- समतापी आदर्श गैस: ΔU = 0, q = −w; रुद्धोष्म: q = 0, ΔU = w
- 1 L bar = 100 J; 1 L atm = 101.3 J; R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹
हल किए गए उदाहरण
1. एक गैस 200 J ऊष्मा लेती है और उस पर 150 J कार्य किया जाता है। ΔU ज्ञात करो।
q = +200 J (ऊष्मा अंदर)। w = +150 J (गैस पर कार्य)। ΔU = q + w = 200 + 150 = +350 J। आंतरिक ऊर्जा 350 J बढ़ी।
2. एक निकाय 60 J ऊष्मा छोड़ता है और परिवेश पर 40 J कार्य करता है। ΔU ज्ञात करो।
ऊष्मा बाहर: q = −60 J। निकाय द्वारा कार्य: w = −40 J। ΔU = −60 + (−40) = −100 J। निकाय ने 100 J खोए।
3. एक गैस 1.5 bar के स्थिर बाहरी दाब के विरुद्ध 2 L से 7 L तक फैलती है। कार्य जूल में ज्ञात करो।
ΔV = 7 − 2 = 5 L। w = −p_ext ΔV = −1.5 × 5 = −7.5 L bar। 1 L bar = 100 J, तो w = −750 J। ऋणात्मक, क्योंकि गैस ने कार्य किया।
4. उसी प्रसार (उदाहरण 3) में गैस 1000 J ऊष्मा लेती है। ΔU ज्ञात करो।
q = +1000 J, w = −750 J। ΔU = 1000 − 750 = +250 J।
5. 2 mol आदर्श गैस 300 K पर 10 L से 100 L तक समतापी और उत्क्रमणीय रूप से फैलती है। w, q और ΔU ज्ञात करो।
w = −2.303 nRT log(V₂/V₁) = −2.303 × 2 × 8.314 × 300 × log 10। log 10 = 1, तो w = −11 488 J ≈ −11.49 kJ। स्थिर ताप पर आदर्श गैस के लिए ΔU = 0, इसलिए q = −w = +11.49 kJ।
6. 1 mol आदर्श गैस 300 K पर 1 L से 5 L तक समतापी रूप से फैलती है: (a) निर्वात में, (b) 2 bar स्थिर दाब के विरुद्ध, (c) उत्क्रमणीय रूप से। कार्य की तुलना करो।
(a) मुक्त प्रसार: p_ext = 0 → w = 0। (b) w = −2 × (5 − 1) = −8 L bar = −800 J। (c) w = −2.303 × 1 × 8.314 × 300 × log 5 = −5744 × 0.699 ≈ −4015 J। उत्क्रमणीय रास्ते में सबसे ज़्यादा कार्य: 4015 J > 800 J > 0। तीनों में T स्थिर है, इसलिए ΔU = 0 और q = −w।
7. एक रुद्धोष्म प्रक्रम में गैस पर 500 J कार्य किया जाता है। q और ΔU ज्ञात करो। गैस गरम होगी या ठंडी?
रुद्धोष्म में q = 0। w = +500 J। ΔU = 0 + 500 = +500 J। U बढ़ी, इसलिए गैस गरम होगी (साइकिल पंप की तरह)।
आम गलतियाँ
- भौतिकी वाला चिह्न (ΔU = q − w) लगाना। CBSE रसायन में IUPAC: ΔU = q + w, और गैस द्वारा किया कार्य ऋणात्मक।
- L bar को जूल में बदलना भूल जाना: 100 से गुणा करो (1 L bar = 100 J)।
- Δq या Δw लिखना। ऊष्मा और कार्य अवस्था फलन नहीं हैं, उनका 'बदलाव' नहीं होता।
- यह सोचना कि ΔU = 0 का मतलब ऊष्मा नहीं बही। आदर्श गैस के समतापी प्रसार में ΔU = 0, पर q = −w शून्य नहीं है।