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आदर्श गैस समीकरण: PV = nRT

बॉयल (P ∝ 1/V), चार्ल्स (V ∝ T) और आवोगाद्रो (V ∝ n) मिलकर एक नियम बनाते हैं: PV = nRT, जहाँ R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹। ताप हमेशा केल्विन में। इससे मोलर द्रव्यमान M = dRT/P भी निकलता है। कम दाब और ऊँचे ताप पर वास्तविक गैसें इस नियम को मानती हैं; ऊँचे दाब या कम ताप पर विचलन होता है, जिसे Z = PV/nRT से नापते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. जार में गैस के कण दौड़ते हैं और दीवारों से टकराते हैं। हर टक्कर एक छोटा धक्का है। सारे धक्के मिलकर दाब बनाते हैं।
  2. बॉयल का नियम: ताप और गैस की मात्रा वही रखें। पिस्टन दबाकर आयतन आधा करें। कण दीवारों से दोगुनी बार टकराते हैं, इसलिए दाब दोगुना।
  3. चार्ल्स का नियम: दाब वही रखें। गैस गरम करें। कण तेज़ होकर पिस्टन को ऊपर धकेलते हैं। केल्विन ताप दोगुना, आयतन दोगुना।
  4. आवोगाद्रो का नियम: ज़्यादा कण (ज़्यादा मोल) डालें, आयतन उसी अनुपात में बढ़ता है। तीनों नियम मिलाएँ तो PV = nRT।
  5. वास्तविक गैसें: बहुत ऊँचे दाब पर कण पास-पास दब जाते हैं। उनका अपना आकार और आपसी खिंचाव मायने रखने लगता है। Z = PV/nRT अब 1 से दूर जाता है।
  6. अब आप खेलें: स्लाइडर से n, T, V बदलें। "वास्तविक गैस" चुनकर Z देखें। हर बार दाब पढ़ें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

गैस का दाब असल में क्या है?

दीवार से टकराते कणों का प्रति वर्ग मीटर कुल धक्का। ज़्यादा या ज़ोरदार टक्कर = ज़्यादा दाब।

दबाने पर दाब क्यों बढ़ता है?

छोटी जगह में हर कण जल्दी दीवार तक पहुँचता है, इसलिए हर सेकंड टक्करें ज़्यादा।

°C की जगह केल्विन क्यों?

गैस का आयतन परम शून्य से नापे गए ताप के अनुपात में है। 0 °C पर भी गैस का आयतन होता है; 0 K पर आदर्श गैस का नहीं।

क्या हर गैस का R अलग है?

नहीं। हर आदर्श गैस के लिए R एक ही है; सिर्फ मात्रक बदलने पर संख्या बदलती है।

Z कभी 1 से कम और कभी ज़्यादा क्यों?

आकर्षण कणों को पास खींचता है (Z < 1)। बहुत ऊँचे दाब पर कणों का अपना आकार उल्टा धकेलता है (Z > 1)।

n और T दोनों दोगुने करूँ तो स्थिर V पर P?

P ∝ nT, इसलिए चार गुना। स्लाइडर से जाँचें।

गैस किससे बनी है?

गैस बहुत छोटे कणों (परमाणु या अणु) से बनी है, जिनके बीच खूब खाली जगह होती है। कण तेज़ी से सीधी रेखा में चलते हैं और दीवारों से टकराकर लौटते हैं। हर टक्कर दीवार को थोड़ा धकेलती है। दीवार के हर वर्ग मीटर पर कुल धक्का ही दाब है। SI मात्रक पास्कल (Pa); 1 atm = 101.325 kPa = 1.01325 bar।

गैस को चार राशियाँ बताती हैं: दाब P, आयतन V, ताप T (केल्विन में) और मात्रा n (मोल में)।

तीन सरल गैस नियम

बॉयल का नियम (T और n स्थिर)

P ∝ 1/V, यानी P₁V₁ = P₂V₂। गैस को आधे आयतन में दबाओ तो दाब दोगुना।

चार्ल्स का नियम (P और n स्थिर)

V ∝ T, यानी V₁/T₁ = V₂/T₂। T केल्विन में: T(K) = t(°C) + 273.15। 0 K पर आदर्श गैस का आयतन शून्य हो जाता, इसलिए 0 K को परम शून्य कहते हैं।

गे-लुसाक (दाब) नियम (V और n स्थिर)

P ∝ T। बंद डिब्बा आग में गरम हो तो फट सकता है।

आवोगाद्रो का नियम (P और T स्थिर)

V ∝ n। समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। 273.15 K और 1 bar पर एक मोल आदर्श गैस 22.7 L लेती है (1 atm पर 22.4 L)।

आदर्श गैस समीकरण PV = nRT

नियमों को जोड़ें: V ∝ nT/P, इसलिए PV = nRT। R गैस नियतांक है: 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ (= 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹ = 0.0831 L bar mol⁻¹ K⁻¹)।

निश्चित मात्रा के लिए संयुक्त गैस नियम: P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂।

n = m/M रखने पर मोलर द्रव्यमान और घनत्व मिलते हैं: M = mRT/(PV) और d = PM/(RT)।

डाल्टन का आंशिक दाब नियम: न मिलने-जुलने (अभिक्रिया न करने) वाली गैसों के मिश्रण में कुल दाब P = p₁ + p₂ + …, और हर p = (मोल-अंश) × P।

आदर्श व्यवहार से विचलन

आदर्श गैस एक मॉडल है: कणों का कोई आकार नहीं और आपस में कोई खिंचाव नहीं। कम दाब और ऊँचे ताप पर (कण दूर-दूर और तेज़) वास्तविक गैसें इसके पास होती हैं।

संपीड्यता गुणांक Z = PV/(nRT) बताता है कि गैस आदर्श से कितनी दूर है। आदर्श गैस के लिए Z = 1।

वान्डर वाल्स समीकरण मॉडल को सुधारता है: (P + an²/V²)(V − nb) = nRT; a आकर्षण बताता है, b कणों का अपना आयतन। तेज़ आकर्षण वाली गैस को उसके क्रांतिक ताप से नीचे द्रव बनाया जा सकता है (CO₂: 31 °C)।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक गैस 100 kPa पर 6.0 L घेरती है। समान ताप पर इसे 2.0 L तक दबाया। नया दाब?

बॉयल: P₁V₁ = P₂V₂ → 100 × 6.0 = P₂ × 2.0 → P₂ = 300 kPa।

2. गुब्बारे में 27 °C पर 3.0 L हवा है। 127 °C पर (दाब वही) आयतन?

केल्विन में: 300 K और 400 K। V₂ = 3.0 × 400/300 = 4.0 L।

3. 2.0 mol गैस 10.0 L (0.0100 m³) बर्तन में 300 K पर कितना दाब डालेगी?

P = nRT/V = 2.0 × 8.314 × 300 / 0.0100 ≈ 499 kPa।

4. 24.6 L सिलिंडर में 1.00 atm और 300 K पर कितने मोल गैस है?

n = PV/(RT) = 24.6 / (0.0821 × 300) ≈ 1.00 mol।

5. 0.64 g गैस 1.0 atm और 300 K पर 0.50 L भरती है। मोलर द्रव्यमान?

M = mRT/(PV) = 0.64 × 0.0821 × 300 / 0.50 ≈ 32 g/mol (ऑक्सीजन O₂)।

6. 2.0 bar, 5.0 L, 27 °C की गैस को 4.0 bar और 127 °C पर ले गए। नया आयतन?

V₂ = P₁V₁T₂/(T₁P₂) = 2.0 × 5.0 × 400 / (300 × 4.0) ≈ 3.3 L।

7. 300 K और 100 bar पर एक मोल गैस का V = 0.22 L है। यह आदर्श गैस से आसानी से दबेगी या मुश्किल से? (R = 0.0831 L bar mol⁻¹ K⁻¹)

Z = 100 × 0.22 / (0.0831 × 300) ≈ 0.88। Z < 1, आकर्षण हावी: आसानी से दबेगी।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. PV = nRT में T किस मात्रक में होना चाहिए?
2. स्थिर ताप पर आयतन आधा करने से दाब:
3. SI में R का मान:
4. गैस सबसे ज़्यादा आदर्श कब होती है?
5. आदर्श गैस के लिए Z = PV/nRT का मान:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदर्श गैस समीकरण क्या है?

PV = nRT: दाब × आयतन = मोल × गैस नियतांक × केल्विन ताप। यह गैस की चारों राशियों को जोड़ता है।

R का मान कितना है?

SI में 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹; या 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹; या 0.0831 L bar mol⁻¹ K⁻¹।

वास्तविक गैस आदर्श नियम से कब हटती है?

ऊँचे दाब और कम ताप पर, जब कण पास-पास और धीमे हों, तब उनका आकार और खिंचाव मायने रखता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11केवल रचनात्मक आकलन हेतु विषय

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