गैस किससे बनी है?
गैस बहुत छोटे कणों (परमाणु या अणु) से बनी है, जिनके बीच खूब खाली जगह होती है। कण तेज़ी से सीधी रेखा में चलते हैं और दीवारों से टकराकर लौटते हैं। हर टक्कर दीवार को थोड़ा धकेलती है। दीवार के हर वर्ग मीटर पर कुल धक्का ही दाब है। SI मात्रक पास्कल (Pa); 1 atm = 101.325 kPa = 1.01325 bar।
गैस को चार राशियाँ बताती हैं: दाब P, आयतन V, ताप T (केल्विन में) और मात्रा n (मोल में)।
तीन सरल गैस नियम
बॉयल का नियम (T और n स्थिर)
P ∝ 1/V, यानी P₁V₁ = P₂V₂। गैस को आधे आयतन में दबाओ तो दाब दोगुना।
चार्ल्स का नियम (P और n स्थिर)
V ∝ T, यानी V₁/T₁ = V₂/T₂। T केल्विन में: T(K) = t(°C) + 273.15। 0 K पर आदर्श गैस का आयतन शून्य हो जाता, इसलिए 0 K को परम शून्य कहते हैं।
गे-लुसाक (दाब) नियम (V और n स्थिर)
P ∝ T। बंद डिब्बा आग में गरम हो तो फट सकता है।
आवोगाद्रो का नियम (P और T स्थिर)
V ∝ n। समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। 273.15 K और 1 bar पर एक मोल आदर्श गैस 22.7 L लेती है (1 atm पर 22.4 L)।
आदर्श गैस समीकरण PV = nRT
नियमों को जोड़ें: V ∝ nT/P, इसलिए PV = nRT। R गैस नियतांक है: 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ (= 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹ = 0.0831 L bar mol⁻¹ K⁻¹)।
निश्चित मात्रा के लिए संयुक्त गैस नियम: P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂।
n = m/M रखने पर मोलर द्रव्यमान और घनत्व मिलते हैं: M = mRT/(PV) और d = PM/(RT)।
डाल्टन का आंशिक दाब नियम: न मिलने-जुलने (अभिक्रिया न करने) वाली गैसों के मिश्रण में कुल दाब P = p₁ + p₂ + …, और हर p = (मोल-अंश) × P।
आदर्श व्यवहार से विचलन
आदर्श गैस एक मॉडल है: कणों का कोई आकार नहीं और आपस में कोई खिंचाव नहीं। कम दाब और ऊँचे ताप पर (कण दूर-दूर और तेज़) वास्तविक गैसें इसके पास होती हैं।
संपीड्यता गुणांक Z = PV/(nRT) बताता है कि गैस आदर्श से कितनी दूर है। आदर्श गैस के लिए Z = 1।
- Z < 1: आकर्षण कणों को पास खींचता है, गैस आसानी से दबती है (जैसे मध्यम दाब पर CO₂, NH₃)।
- Z > 1: बहुत ऊँचे दाब पर कणों का अपना आयतन मायने रखता है, गैस मुश्किल से दबती है (H₂, He ज़्यादातर दाबों पर)।
वान्डर वाल्स समीकरण मॉडल को सुधारता है: (P + an²/V²)(V − nb) = nRT; a आकर्षण बताता है, b कणों का अपना आयतन। तेज़ आकर्षण वाली गैस को उसके क्रांतिक ताप से नीचे द्रव बनाया जा सकता है (CO₂: 31 °C)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- PV = nRT
- R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ = 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹
- P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂
- M = mRT/(PV); d = PM/(RT)
- Z = PV/(nRT)
- (P + an²/V²)(V − nb) = nRT
हल किए गए उदाहरण
1. एक गैस 100 kPa पर 6.0 L घेरती है। समान ताप पर इसे 2.0 L तक दबाया। नया दाब?
बॉयल: P₁V₁ = P₂V₂ → 100 × 6.0 = P₂ × 2.0 → P₂ = 300 kPa।
2. गुब्बारे में 27 °C पर 3.0 L हवा है। 127 °C पर (दाब वही) आयतन?
केल्विन में: 300 K और 400 K। V₂ = 3.0 × 400/300 = 4.0 L।
3. 2.0 mol गैस 10.0 L (0.0100 m³) बर्तन में 300 K पर कितना दाब डालेगी?
P = nRT/V = 2.0 × 8.314 × 300 / 0.0100 ≈ 499 kPa।
4. 24.6 L सिलिंडर में 1.00 atm और 300 K पर कितने मोल गैस है?
n = PV/(RT) = 24.6 / (0.0821 × 300) ≈ 1.00 mol।
5. 0.64 g गैस 1.0 atm और 300 K पर 0.50 L भरती है। मोलर द्रव्यमान?
M = mRT/(PV) = 0.64 × 0.0821 × 300 / 0.50 ≈ 32 g/mol (ऑक्सीजन O₂)।
6. 2.0 bar, 5.0 L, 27 °C की गैस को 4.0 bar और 127 °C पर ले गए। नया आयतन?
V₂ = P₁V₁T₂/(T₁P₂) = 2.0 × 5.0 × 400 / (300 × 4.0) ≈ 3.3 L।
7. 300 K और 100 bar पर एक मोल गैस का V = 0.22 L है। यह आदर्श गैस से आसानी से दबेगी या मुश्किल से? (R = 0.0831 L bar mol⁻¹ K⁻¹)
Z = 100 × 0.22 / (0.0831 × 300) ≈ 0.88। Z < 1, आकर्षण हावी: आसानी से दबेगी।
आम गलतियाँ
- PV = nRT में °C लगाना। हमेशा बदलें: T(K) = t(°C) + 273।
- R के मात्रक मिलाना: atm और L के साथ 0.0821; SI (Pa, m³) के साथ 8.314।
- पास्कल में दाब लेते समय 1 L = 10⁻³ m³ भूल जाना।
- सोचना कि वास्तविक गैस का Z हमेशा 1 से कम होता है। बहुत ऊँचे दाब पर कणों के अपने आयतन से Z > 1 हो जाता है।